अब तक क्यों नहीं खोले पत्ते ?
ब्यूरो ,लखनऊ : राज्यसभा चुनाव के लिए सपा ने दो प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, लेकिन तीसरे पर अभी सस्पेंस बनाकर रखा है। वहीं, भाजपा ने नौ पर्चे खरीद लिए हैं, लेकिन अब तक प्रत्याशियों के नामों का ऐलान नहीं किया है। अब सवाल यह है कि आखिर इस सस्पेंस गेम में भाजपा की रणनीति क्या है? प्रत्याशियों को लेकर वह अपने पत्ते क्यों नहीं खोल रही? क्या पार्टी जोड़तोड़ के किसी बड़े गेम को अंजाम देने में जुटी है?

सपा ने तीसरे प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन लगातार यह कहा जा रहा है। भाजपा और सहयोगी दलों के कुछ विधायक साथ में होने की बात भी सपा की ओर से कही जा रही हैं। वहीं, भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कौन और कितने प्रत्याशी होंगे, यह आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है।पार्टी की ओर से नौ पर्चे खरीदे जाने की बात मुकाबले में और रोमांच पैदा कर दिया है। उधर, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सपा के 25 प्रत्याशियों के भाजपा में संपर्क में होने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि सरप्राइज सपा नहीं, भाजपा देगी। हालांकि, इसे दोनों तरफ से दबाव की रणनीति भी माना जा रहा है।
सवाल है कि भाजपा अपने प्रत्याशियों को लेकर आखिर कब तक सस्पेंस बरकरार रखना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा देख रही है कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है या नहीं? यदि नहीं उतारती तो भाजपा के आठवें प्रत्याशी का रास्ता ऐसे ही साफ हो जाएगी। यह चर्चा है कि भाजपा भी चुपचाप जोड़-तोड़ के खेल में लगी है। वह हर हाल में आठवें प्रत्याशी को जिताना चाहेगी। इसके लिए पर्याप्त इंतजाम वह करना चाहती है। यह पुख्ता इंतजाम करने के बाद ही वह अपने पत्ते खोलेगी। यही वजह है कि प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने में इतना विलंब हो रहा है।
राज्यसभा की कुल 10 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से आठ पहले भाजपा के पास थी। एक-एक सपा और बसपा के पास थी। सपा इस समय रेस से पूरी तरह बाहर है। अब असल लड़ाई भाजपा और काग्रेस के भीतर है। संख्या बल के आधार पर भाजपा सात सीटें आसानी से जीत सकती है और दूसरी प्राथमिकता के मत के आधार पर वह आठवी सीट भी मैनेज कर सकती है। वहीं, सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है।