मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, आपके राज में कर्मचारी की ‘सैलरी’ ‘हड़प’ गये अफसर !


डीआईजी ने कमांडेंट को लगायी फटकार: कर्मचारियों को ‘भयाक्रांत’ कर मनमाना कर रहे हो…

लोकभवन खामोश है या एसीएस को बीओ के वेतन रोकने वाले दंभी कमंाडेंट की कारस्तानी का पता नहीं…

डीआईजी, आगरा संजीव शुक्ला का लेटर बम: मथुरा कमांडेंट शैलेन्द्र सिंह को ‘प्रतिशोध’, ‘पूर्वाग्रह’ से कुंठित अधिकारी बताया

डीआईजी का आर्डर: बीओ टेनपाल को पेमेंट करो,नहीं तो शासन तक पहुंचेगा लेटर… !

डीआईजी ने संयुक्त सचिव,डीजी,होमगार्ड,डीआईजी,मुख्यालय,एसएसपी,मथुरा को लेटर लिखा लेकिन नहीं मिला बीओ को वेतन

 संजय श्रीवास्तव

लखनऊ। मुख्यमंत्री जी, आपकी सरकार है और एक सरकारी कर्मचारी की सैलरी को अधिकारी अपनी तानाशाही, प्रतिशोध से कुंठित होकर डकार गया। इस खेल में अब मुख्यालय के अधिकारी भी शामिल हो गये हैं। यदि कर्मचारी ने ड्यूटी किया है तो उसकी सैलरी रोकने का अधिकार किसी को नहीं है,लेकिन आपके राज में ऐसा ही हो रहा है। सारा खेल डीआईजी, मुख्यालय के इशारों पर किया गया। सैल्यूट है आगरा परिक्षेत्र के डीआईजी को, उन्होंने दो पन्ने में जो पत्र लिखा,उसे लेटर बम कहा जाये तो गलत नहीं होगा।

मामला मथुरा का है,जहां तैनात बीओ टेनपाल सिंह को काम करने के बाद भी एक माह की सैलरी मंत्री का दुलारा कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने दबा दिया। मंत्री,डीजी, से लेकर शासन स्तर पर बीओ ने पत्रचारा किया लेकिन अभी तक उसकी सैलरी नहीं मिली। डीआईजी, मुख्यालय की निरंकुशता की वजह से दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बीओ को इंसाफ नहीं मिला। सैल्यूट है आगरा परिक्षेत्र के डीआईजी संजीव शुक्ला को,उन्होंने दो पन्ने में जो पत्र लिखा,उसे लेटर बम कहा जाये तो गलत नहीं होगा। पत्र में उन्होंने दंभी कमांडेंट को फटकार लगाते हुये उन्हें ‘प्रतिशोध’,’ पूर्वाग्रह’ से कुंठित होकर विभाग के ‘कर्मठ’, ‘ईमानदार’ बीओ टेनपाल सिंह को शीघ्र सेलरी देने का निर्देश दिया वर्ना शासन तक पत्र संदर्भित किया जायेगा…। मुख्यमंत्री जी,शर्मनाक बात तो ये है कि इस लेटर बम के बाद भी मुख्यालय पर बैठे डीआईजी आर.के.वर्मा ईमानदार बीओ के बजाये अनुशासन और शासन के नियमावली की धज्जियां उड़ाने वाले मथुरा कमंाडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह का साथ दे रहे हैं।

14 अगस्त 2026 को डीआईजी,पश्चिम,आगरा परिक्षेत्र संजीव शुक्ला ने मथुरा के कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह को टेनपाल सिंह,बीओ का जबरियन माह जून का वेतन रोकने के संबंध में पत्र लिखा है। पत्र की कॉपी संयुक्त सचिव, होमगार्ड, डीजी,होमगार्ड, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा, डीआईजी, मुख्यालय, स्टाफ आफिसर टू कमांडेंट जनरल भेजा है। पत्र में उन्होंने मथुरा, कमांडेंट से कई धारदार सवाल किये। लिखा है कि 6 अगस्त 2026 को लिखे अपने पत्र का संदर्भ ग्रहण करें। आपके द्वारा सुनियोजित तरीके से अपने अधीनस्थ कार्मिकों को अपनी निरंकुशता के आतंक से ‘भयाक्रांत’ करते हुये उनसे मनमानेपन की निरंतरता बनाये रखने के कदाचार से टेनपाल सिंह, बीओ के मामले में वास्तविक, तात्विक एवं प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर वेतन रोक रखा है। वास्तविक तथ्य यह है कि आपने अपने नियंत्रक अधिकारी,मंडलीय कमांडेंट,आगरा को टेनपाल सिंह के प्रश्नगत स्थानांतरण का प्रस्ताव अनुमोदन के लिये भेजा,किन्तु आपको अनुमोदन नहीं मिला,तब आपने स्वेच्छा से उसका स्थानांतरण कर दिया। आपका यह कृत्य ‘सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली’ के प्रावधानों के विपरित है। इसके बाद आपके द्वारा किये गये उक्त आदेश को मंडलीय कमांंडेंट से भी उच्चाधिकारी डिप्टी कमांडेंट जनरल, होमगार्ड,पश्चिम जोन, आगरा द्वारा निरस्त कर दिया गया। आपने टेनपाल के प्रकरण को येन-केन-प्रकारेण बदले की भावना से तथ्यों को छिपाते हुये बिना उचित माध्यम की अनुमति, संज्ञान में लाये होमगार्ड मुख्यालय को सीधे संदर्भित कर दिया। इससे स्पष्ट है कि तब तक आपके स्थानांतरण आदेश को स्थगित कर दिया गया था, इसके बावजूद ‘प्रतिशोध’ और ‘पूर्वाग्रह’ के आवेश में आपके द्वारा निरंतर अपने ही आदेश को क्रियान्वित करने के कुत्सित प्रयास किये गये, जो कि आपके अपने उच्चाधिकारियों के प्रति ‘अनास्था’ एवं होमगार्ड मुख्यालय तक पर ‘अविश्वास’ प्रदर्शित करता है।

पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि जब तक होमगार्ड मुख्यालय द्वारा इस प्रकरण पर पत्र संख्या 21 जुलाई 2026 नहीं आया तब तक डीआईजी,पश्चिम जोन,आगरा के कार्यालय ज्ञापन संख्या 217-एक-52-2025,2 जून 2026 ही लागू रहेगा, किन्तु आपने टेनपाल,बीओ के प्रति अपनी ‘प्रतिशोधात्मक भाव’ की परिकाष्ठïा के प्रभाव में इस तथ्य को छिपाकर अपनी आख्या दे रहे हैं। जबकि, होमगार्ड मुख्यालय के प्रश्नगत 21 जुलाई 2026 पर स्वयं आपके द्वारा टेनपाल को अपने पत्र संख्या 837, 22 जुलाई द्वारा यह निर्देश दिये हैं कि होमगार्ड मुख्यालय,लखनऊ के उपरोक्त पत्र के क्रम में टेनपाल सिंह बीओ मथुरा को आदेशित किया जाता है कि वह अपना योगदान कंपनी मॉट में करते हुये योगदान रिपोर्ट इस कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्ति करें, जिससे कि होमगार्ड,मुख्यालय, लखनऊ के निर्देशों का अनुपालन किया जा सके। डीआईजी ने पत्र में खुलासा करते हुये लिखा कि आपके स्वयं द्वारा लिखे इस पत्र से स्पष्ट होता है कि टेनपाल सिंह के स्थानांतरण का अनुपालन इसके अनुक्रम में 22 जुलाई 2026 से ही किये जाने का उल्लेख तो किया किन्तु बदले की भावना से वशीभूत होकर आप टेनपाल सिंह अपूरणीय क्षतिकारित करने की मंशा से जून 2026 का उसके द्वारा किये गये शासकीय कार्यों के वेतन आहरण को रोके जाने की अधिकारित चेष्टा कर रहे हैं। किसी अधिकारी को शासकीय कार्यों में प्रतिशोध और बदले की भावना से प्रेरित होकर किसी कर्मचारी को प्रताडि़त करते हुये आत्मसंतुष्टि के लिये ही कार्य करने से बचना चाहिये। इसीलिये अधिकारी के अपने आदेशों में ‘मनमानेपन’ का बहिष्करण अनिवार्य है।

यहां तक कि कर्मचारी को दंड की अवधारणा में भी मूलभूत तत्व यही है कि कमचारी को ऐसे दंड दिये जाये,जिससे उस कर्मचारी की शासकी कार्य में लगन और निष्ठा में अभिवृद्धि हो। आपके द्वारा टेनपाल सिंह प्रकरण को अपनी प्रतिष्ठा के प्रश्न के रुप में व्यवहृत करते हुये अपनी निरंकुश छवि को ही प्रचारित एवं प्रसारित करते हुये अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को ‘भयाक्रांत’ किये जाने का ‘कुत्सित’ प्रयास प्रमाणित होता है। आपके स्थानांतरण आदेश को आपके उच्चाधिकारी द्वारा स्थगित कर दिये जाने के अनुक्रम में टेनपाल सिंह के शासकीय कार्यों का वेतन रोक कर आप अपने आहरण वितरण के अधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं। अपने उच्चाधिकारी के आदेशों की अवहेलना कर अनुशासनहीनता इस कदाशय से कर रहे हैं ताकि आपकी इस दुस्साहस से भरी निरंकुशता से आपके अन्य सभी अधीनस्थ आतंकित होकर आपकी मनमानेपन की कार्यशैली के आगे मूकदर्शक बन जाये। आपका यह कृत्य एक राजपत्रित व जिम्मेदार अधिकारी के सर्वथा प्रतिकूल है और आपकी ये प्रतिशोधात्मक कार्यशैली, जनपद में शासकीय कार्यों के सूचारी रुप से निर्वहन मे गंभीर गतिरोध बन रही है,जिसकी अनेकानेक शिकायतें एवं तथ्य मेरे संज्ञान में निरंतर लाये जा रहे हैं। आपके द्वारा यदि इस निरंकुश एवं आतंक प्रसारित करने वाली कार्यशैली में सुधार नहीं होता है,तो समेकित तथ्यों सहित समग्र विश्लेषण के साथ प्रकरण आपके नियुक्ति प्राधिकारी के पास भेज दिया जायेगा। इसलिये अपने शासकीय कार्यों में प्रतिशोध और बदले की भावना से ऊ पर उठकर टेनपाल सिंह का वेतन आहरित करें। आपका मालूम होना चाहिये कि किसी कर्मचारी को वेतन रोकना अर्थदण्ड की श्रेणी में आता है,जिसके लिये प्रश्नगत प्रकरण में आप अधिकृत नहीं हैं।

बता दूं कि किसी कर्मचारी के निलंबित किये जाने पर भी उसके जीवन निर्वाह भत्ते की किसी भी स्थिति में नहीं रोका जा सकता। अपने अधीनस्थ कर्मचारी से ऐसा प्रतिशोध आपके पद की गरिमा और मर्यादा के विपरित है। इसलिीये टेनपाल सिंह बीओ के जून माह 2026 माह का वेतन अविलंब आहरित करें ताकि वे अपनी पारिवारिक एवं स्वयं की जिम्मेदारियों का निर्वाह कर सके और शासयकी कार्यों की निष्ठा बनाये रखें।

बता दूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में जीरो टॉलरेंस की रत्ती भर भी धज्जी उड़ाने वाले नौकरशाहों की जब खैर नहीं तो होमगार्ड विभाग में मथुरा के बीओ की सैलरी ना देने की हिमाकत करने वालों पर किसका हांथ है ? आखिर इस विभाग के मंत्री धर्मवीर प्रजापति  भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने,राज्य कर्मचारी की सैलरी रोकने वाले कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहें ? क्या मंत्री सरकारी नियमावली की धज्जियां उड़ाने वाले कमांडेेंटस को संरक्षण दे रहे हैं ? मुख्यालय पर बैठे डीजी ने चुप्पी क्यों साध रखी है ? जब मथुरा परिक्षेत्र के डीआईजी संजीव शुक्ला ने अपने पत्र के माध्यम से खुलासा कर दिया कि फलां पत्रांक,फलां संख्या में कमंाडेंट ने ही मुख्यालय के डीआईजी आरके वर्मा को पत्र लिखा कि 21 जुलाई 2026 में लिखा है कि बीओ,टेनपाल सिंह को आदेशित किया जाता है कि वो कंपनी मॉट में अपना योगदान कर रिपोर्ट इस विभाग को सौंपे ताकि मुख्यालय के निर्देशों का पालन किया जाये। फिर क्या हुआ डीआईजी साहेब,आपको भी क्या हो गया कमांडेंट साहेब कि बीओ टेनपाल सिंह की एक माह की सैलरी न देने का कुचक्र रच दिया ? खैर, ‘द संडे व्यूज़’ तो सिर्फ यही लिखेगा… शर्मनाक…शर्मनाक…बेहद शर्मनाक।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *