ट्रांसफर पॉलिसी में उड़ी धज्जियां : योगी राज में ही चल रहा यादव राज,5 इंस्पेक्टर में 3 यादव, 2 एस.सी.

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और सरकारी विभागों में तबादले के मौसम में अधिकारियों की बल्ले-बल्ले हो गयी। होमगार्ड विभाग में बिरादरी का रंग देख बड़े अधिकारियों ने अपनों को मनचाही जगह की पोस्टिंग रेवड़ी बांट दिया। खैर, अधिकारियों ने बताया कि आईजी,पुलिस धर्मवीर ने पांच में से तीन यादवों को ट्रांसफर किया,जिसमें से दो ने एक नहीं दो और तीन शादी कर रखी है। आखिर आईजी साहेब ने तबादला नीति के तहत कुछ तो पैमाना बनाया होगा ? क्या उन्हें विभागीय अफसरों ने दोनों इंस्पेक्टर के चरित्र के बारे में नहीं बताया ? यदि बताया तो क्या ट्रांसफर का पैमाना भ्रष्टï और चरित्रहीन आंक कर ट्रांसफर किया गया? क्या ये मान लिया जाये कि नाम के आगे यादव जुड़ा है तो उनके लिये 100 खून माफ है ?

बता दें कि 30 मई को होमगार्ड विभाग में 5 इंस्पेक्टर का तबादला किया गया। तबादला होना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन जिन तीन यादव इंस्पेक्टर का ट्रांसफर किया गया उनमें से दो के कारनामों ने विभाग को शर्मसार कर दिया है। इंस्पेक्टर का नाम क्रमश: घनश्याम यादव का मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र आजमगढ़ से गोरखपुर प्रशिक्षण केन्द्र पर, आर. पी.सिंह यादव का सहारनपुर से मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र,बरेली, धीरज कुमार राणा का मं.प्र.केन्द्र,बरेली से सहारनपुर, सुनील कुमार यादव का मं.प्र.केन्द्र बरेली से मं.प्र.केन्द्र,कानपुर और विजय सिंह का मं.प्र.केन्द्र लखनऊ से बरेली में ट्रांसफर किया गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश में संख्या बल कम होने के बावजूद कुल 55 इंस्पेक्टर हैं। क्या मंत्री और आईजी को यही पांच काबिल इंस्पेक्टर मिले ? अब यादव जी लोगों के उस टैलेंट,जांबाजी के बारे में बता दूं जिसके आधार पर मुख्यालय पर बैैठे अफसरों ने नीचे से लेकर ऊपर तक फाईल सरका कर ट्रांसफर कराया और मूंछों पर ताव देते हुये दक्षिणा अंदर कर लिया।
सुनील कुमार यादव पूर्व में प्रयागराज में तैनात थे। इनका ट्रांसफर बरेली जिले में किया गया। मुख्यालय में दबा दी गयी पत्रावलियों की मानें तो सुनील ने दो शादी कर रखी है। दूसरी पत्नी ने इसकी शिकायत मुख्यालय पर की और डीआईजी स्तर पर जांच लंबित है।

इसी तरह धीरज कुमार राणा ने एक नहीं,दो नहीं बल्कि तीन शादी कर इस विभाग के नाम को अंधेरे में रौशन करने का काम किया है। धीरज की पत्नी इंसाफ की गुहार लगाने के लिये मुख्यालय लंबे समय से दौड़ लगा रही हैं। बताया जाता है कि 30 मई को एक पत्नी इंसाफ के लिये डीजी से मिलने आयी थी।

घनश्याम यादव को मं.प्र.केन्द्र आजमगढ़ से मं.प्र.केन्द्र गोरखपुर किया गया है। घनश्याम यादव गत 20 वर्ष से गोरखपुर में ही प्लाटून कमंाडर के पद पर तैनात रहें। बताया जाता है कि 2 वर्ष पूर्व इंस्पेक्टर बनें और फिर गोरखपुर में ही इनकी तैनाती कर दी गयी है। क्या ये सही है ?
आखिर में सवाल यही है कि क्या उत्तर प्रदेश में तैनात 55 होमगार्ड इंस्पेक्टर में मंत्री और आईजी साहेब को कोई ऐसा नहीं दिखा जिसका ट्रांसफर किया जाये ? क्या चरित्र गिराकर काम करने वाले और सिस्टम की धज्जियां उड़ाने वालों को सजा देने के बजाये मनचाही जगह पर तैनाती का अवार्ड दिया जायेगा? ‘द संडे व्यूज़’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों की राह पर चलने का संकल्प लेकर चल रहा है। सरकार की नीतियों की तौहीन करने वाले अफसरों के खिलाफ हल्ला बोल मिशन जारी रहेगा।