मथुरा कमांडेंट का ‘अत्याचार’: बीओ की पत्नी गंभीर बीमारी की चपेट में, ड्यूटी करने के बाद भी कमांडेंट ने नहीं बनायी ‘सैलरी’


कमांडेेेंट कमांडेेेंट ने लिखा पत्र : 3 साल से बीओ कंपनी गोवर्धन में है तैनात,इसलिये कर रहा हूं ट्रांसफर…

कमांडेंट ने 3 साल के बीओ का तो कर दिया ट्रांसफर, खुद 4 साल से हैं तैनात,आपका कौन करेगा ट्रांसफर ?

क्या कमांडेंट को बीओ का ट्रांसफर करने का है अधिकार ?

डीआईजी, मंडलीय कमांडेंट एक साल तक बीओ का ट्रांसफर यथावत रखने का दिया निर्देश,कमांडेंट नहीं माना निर्देश !

पत्नी और ससुर हॉस्पिटल में भर्ती,पैसे के लिये दर-दर भटक रहा बीओ टेनपाल सिंह


    संजय श्रीवास्तव

लखनऊये वही मथुरा है जहां कंस को मारकर भगवान कृष्ण ने लीला रचा था। कंस के आतंक से मथुरावासियों को मुक्त किया। यूपी में योगी राज है लेकिन होमगार्ड विभाग में काम करने वाले बीओ,रनर जिला कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह के अत्याचार से त्राहिमाम कर रहे हैं। कंपनी गोवर्धन, मथुरा में तैनात बीओ टेनपाल सिंह की पत्नी और ससुर गंभीर बीमारी से पीडि़त है। टेनपाल सिंह ने इस बात की सूचना कमांडेंट, मथुरा को दी। रहम बरतने के बजाये कमांडेंट ने बीओ को तीन वर्ष का कार्यकाल मथुरा में होने पर उसका कंपनी गोवर्धन से ट्रांसफर मांट में कर दिया। फरियाद करने के बाद भी कमांडेंट पर जब कोई असर नहीं पड़ा तो वो मंडलीय कमांडेंट घनश्याम चतुर्वेदी के पास गया। श्री चतुर्वेदी ने कमांडेंट को पत्र लिखा कि गोवर्धन कंपनी में तैनात बीओ ने यहां पर अपनी तैनाती के दौरान शानदार काम किया है इसलिये एक वर्ष के लिये टेनपाल सिंह को यथावत बने रहने दिया जाये। मंडल के निर्देश को कमांडेंट ने ‘बंडल’ में रख दिया और टेनपाल सिंह का तबादला कंपनी मांट में करते हुये निर्देश दिया कि वहां जाकर कंपनी में योगदान करने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करे, वर्ना माह जून की सैलरी नहीं बनेगी। मनबढ़ कमांडेंट द्वारा मंडलीय कमांडेंट के आदेश की धज्जियां उड़ाने पर डीआईजी,आगरा परिक्षेत्र संजीव शुक्ला ने भी 2 जून को कमांडेंट को पत्र लिखा और निर्देशित किया कि बिना मंडलीय कमांडेंट के अनुमोदन लिये टेनपाल सिंह बीओ का ट्रांसफर कर दिया जो कि विधि विरुद्ध होने के कारण विधि शून्य है। इसलिये निर्देश दिया जाता है कि टेनपाल सिंह को कंपनी गोवर्धन में एक साल के लिये यथावत बनाये रखा जाये। कमांडेंट ने इनके निर्देश को भी हवा में उड़ा दिया।

खास बात ये है कि एक तरफ कमांडेेंट ने बीओ टेनपाल सिंह का तबादला कर दिया और दूसरी तरफ मंडलीय कमांडेंट और डीआईजी ने ट्रांसफर रद्द कर गोवर्धन कंपनी में ही काम करने का निर्देश दे दिया। सीनियर अफसरों की बात मानकर बीओ ने कंपनी गोवर्धन में माह जून तक काम किया। प्रभारी निरीक्षक ने पूरी सैलरी बनाकर कमांडेेंट को भेजा लेकिन उसने सैलरी देने से मना कर दिया। बीओ की पत्नी और ससुर हॉस्पिटल में हैं और जेब खाली है…। क्या इस विभाग के अधिकारियों में इंसानियत खत्म हो गयी है ? शर्मनाक…शर्मनाक…बेहद शर्मनाक…। अब बीच में फंसा बेचारा बीओ टेनपाल सिंह पैसे के लिये हर ओर दरवाजा खटखटा रहा है…।

‘द संडे व्यूज’ का सवाल ये है कि क्या गोवर्धन में होमगार्ड का कार्यालय बनवाने वाले और वृहद वृक्षारोपण कराने वाले बीओ टेनपाल की ईमानदार, दंभी कमांडेेट का रास नहीं आ रही है ? क्या बीओ की पत्नी और ससुर की गंभीर स्थिति पर पसीजे मंडलीय कमांडेंट और डीआईजी संजीव शुक्ला का आर्डर भी कमांडेंट नहीं मानेगा ? क्या मान लिया जाये कि वर्दी के दंभ में रंगे कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह अपने को शासन,डीजी, डीआईजी और मंडलीय कमांडेंट से भी बड़ा मानकर चल रहा है? इसका सही जवाब तो डीजी डी. के. ठाकुर ही दे सकते हैं क्योंकि राज्य, होमगार्ड मंत्री धरमवीर प्रजापति से सवाल करने से कोई फायदा नहीं क्योंकि उनका हाथ शैलेन्द्र सिंह पर है तभी तो शासन से लेकर सभी अफसरों को हासिये पर रखकर चल रहे हैं ? आखिरी सवाल कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह से है कि आपने बीओ टेनपाल सिंह को 3 साल का कार्यकाल होने पर ट्रांसफर का हुक्म दे दिया, जो कि आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है लेकिन जनाब ये बताइये आप भी तो मथुरा में नियम-विरुद्ध 4 साल से खूंटा गाड़ कर बैठे हैं, आपका ट्रांसफर क्यों नहीं हुआ ?

ये वही बीओ टेनपाल सिंह हैं,जिन्होंने शानदार काम करते हुये जद्दोजहद करके कोतवाली-गोवर्धन के मुख्य द्वार पर होमगार्ड कंपनी का कार्यालय स्थापित कराया है। अधिमास होने के कारण गिरिराज महाराज की भव्य परिक्रमा चल रही है एवं माह जुलाई में गोवर्धन में राजकीय मेला का आयोजन होता है,जिसकी तैयारी जोरों पर चल रही है। बीओ की पत्नी वंदना सिंह कमांडेंट,मथुरा को स्वयं व ससुर की तबीयत खराब होने का प्रार्थना पत्र देकर पति की कंपनी गोवर्धन में ही यथावत बनाने की अनुरोध किया ताकि आस्मिकता में उनके पति शीघ्र आ सकें। इसे देखते हुये टेनपाल सिंह को एक वर्ष के लिये यथावत किया जाना आवश्यक है। वैसे भी मथुरा में बीओ की स्वीकृत 10 है लेकिन 4 बीओ तैनात हैं।

मथुरा में तैनात जवानों ने ‘द संडे व्यूज़’ को बताया कि मथुरा कमांडेंट पर मंत्री धरमवीर प्रजापति का वरदहस्त है,जिसकी वजह से वे शासन और मुख्यालय के अफसरों को कुछ नहीं समझते। यही वजह है कि मथुरा में इनका आतंक है…भ्रष्टïाचार चरम पर है…। चौंकाने वाली बात तो ये है कि टेनपाल सिंह ने डीजी,होमगार्ड को Cghg-up@nic.inपर मेल किया है। कोई कार्रवाई नहीं हुयी। कर्मचारियों ने बताया कि मुख्यालय पर कमांडेंट के जिले का एक अधिकारी तैनात है,संभवत: पत्र उन्होंने दबा दिया हो। बीओ टेनपाल पर हो रहे अत्याचार के बारे में मुख्यालय के अफसरों ने बताया कि, ‘टेनपाल सिंह का आचरण अच्छा है, उसके ट्रांसफर को रोकने के लिये निर्देश दिया गया लेकिन उन्होंने नहीं माना। डीआईजी संजीव शुक्ला ने भी पत्र के माध्यम से निर्देशित किया था लेकिन उनके आदेश को भी नहीं माना गया।’

सवाल ये है कि आखिर मथुरा कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह,जो शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुये बीओ टेनपाल सिंह का ट्रांसफर कर दिया, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी ? मथुरा में चार तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह का ट्रांसफर सीजन में तबादला क्यों नहीं किया गया ? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति और ट्रांसफर पॉलिसी की धज्जियां उड़ाने वाले कमांडेेेंटों को राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने खुली छूट दे रखी है ? मथुरा कमांडेंट के सीयूजी नंबर 8005194011 पर रात्रि नौ बजकर चालीस मिनट पर द संडे व्यूज़ ने कॉल किया लेकिन साहेब ने कॉल उठाना मुनासिब नहीं समझा। 

क्रमश:


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *