
प्रतीक पाठक
देहरादून: रक्षाबंधन के मौके पर उत्तराखंड की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई अहम घोषणाएं कीं। सरकार का फोकस महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और आत्मनिर्भरता पर नजर आया। बुजुर्ग महिलाओं के लिए रोडवेज में मुफ्त सफर से लेकर शहरों में हाईटेक टॉयलेट और महिलाओं के लिए पिंक ई-बस तक कई सुविधाओं का ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, पर्यटन स्थलों और जरूरत वाले स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से लैस हाईटेक टॉयलेट विकसित करने की घोषणा की। इन टॉयलेट्स में सिर्फ स्वच्छता ही नहीं, बल्कि महिलाओं की निजता, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति की गरिमा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

रक्षाबंधन पर बुजुर्ग महिलाओं के लिए भी बड़ी घोषणा की गई। अब 60 वर्ष की आयु से महिलाओं को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की गई है। अभी प्रदेश में 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को यह सुविधा मिलती है। नई घोषणा से बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाओं को सुरक्षित और सुगम आवागमन का लाभ मिलने की उम्मीद है।प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत उत्तराखंड को मिलने वाली 137 इलेक्ट्रिक बसों में से देहरादून में संचालित होने वाली 100 बसों में 10 बसें महिलाओं के लिए पिंक ई-बस के रूप में समर्पित करने की घोषणा की गई है। सरकार के मुताबिक इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जाएगा।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए महिला स्वरोजगार योजना के तहत रियायती बैंक ऋण की सीमा भी बढ़ाई गई है। पहले यह सीमा 2 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास महिलाओं को रोजगार मांगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनाने का है।

रक्षाबंधन के अवसर पर चकरपुर स्टेडियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। समारोह में मौजूद बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने भी सभी बहनों को पर्व की बधाई दी। ‘हाईटेक टॉयलेट’, ‘मुफ्त रोडवेज यात्रा’, ‘पिंक ई-बस’ और बढ़ी हुई ‘स्वरोजगार ऋण सीमा’—इन घोषणाओं के जरिए सरकार ने महिलाओं की सुविधा से लेकर सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता तक पर जोर दिया है। अब इन घोषणाओं को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, यह देखना अहम होगा।