नियमों में उलझा काम
ब्यूरो,गाजियाबाद: क्रॉसिंग रिपब्लिक एरिया में अंसल बिल्डर के प्रॉजेक्ट में 12 साल से फंसे 1600 से ज्यादा बायर्स है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और शासन स्तर पर जारी त्वरित कार्रवाई के बाद प्रॉजेक्ट के अधूरे काम जल्द होने के आसार हैं मामला एनसीएलटी पहुंचा, तो ट्रिब्यूनल ने लोन देने वाली संस्था और नए बिल्डर को प्रॉजेक्ट पूरा करने का आदेश दिया। हालांकि, अंसल के नाम पर ही नक्शा पास करने के नियम के चलते तकनीकी रुकावट आ रही थी।

दरअसल, अंसल बिल्डर को शासन से इंटीग्रेटेड टाउनशिप का लाइसेंस मिला था, लेकिन काम बीच में अटक गया। अब सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी के बाद जीडीए वीसी और राज्य सरकार मिलकर बायर्स के हक में समाधान निकालने में जुटे हैं। 2014 में अंसल बिल्डर को इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रॉजेक्ट का नक्शा मिला था। इसमें उस समय 1600 से ज्यादा लोगों ने घर बुक किए थे। 2019 के आसपास काम रुक गया। मामला एनसीएलटी में गया। एनसीएलटी ने देखा कि अंसल काम पूरा नहीं कर सकता है तो लोन देने वाली संस्था को इसे पूरा करने का आदेश दिया।
नंद किशोर कलाल, वीसी, जीडीए ने बताया कि प्रशासनिक नियमों के मूताबिक नक्शा केवल उसी के नाम पास हो सकता है जिसके पास मूल लाइसेंस हो। इस नियम की वजह से जीडीए नया नक्शा मंजूर नहीं कर पा रहा था। जब नक्शा नहीं पास हो रहा था तो नए बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटकाया। अंसल प्रॉजेक्ट में फंसे हुए बायर्स को घर दिलाने की दिशा मे रास्ता निकाला जा रहा है। नक्शा पास करने को लेकर शासन से दिशानिर्देश मांगा गया है। वहां से निर्देश आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट को सख्ती के बाद पिछले दिनों पूरे प्रकरण को समझाने के लिए जीडीए की टीम प्रमुख सचिव आवास के सामने पहुंची थी। शासन अब बायर्स के हित को सर्वोपरि रखते हुए नियमों का व्यावहारिक और कानूनी समाधान तत्काल निकालने को लेकर काम कर रही है।