एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना है तो साहेब चाय-पानी का खर्चा तो दे दो…

नवीन यादव
Lokbandhu Hospital news:राजधानी का लोकबंधु अस्पताल…। देश के नायक,स्वतंत्रता सेनानी के नाम से बनाया गया अस्पताल डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से मरीजों के लिये परेशानियों का सबब बन चुका है। फस्ट फ्लोर पर शौचालय बंद है…। लिफ्ट खराब है…। कई दवाएं नदारद…मिलती है बाहरी मेडिकल स्टोर में…। मरीज को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराना हो तो देयो चाय-पानी खर्चा…। सीएमएस महोदय, काहें क्रान्तिकारी लोकबंधु राजनारायण जी का नाम बदनाम करा रहे हैं। आशियाना स्थित लोकबंधु अस्पताल में मरीजों को सही तरीके से दवाएं,इलाज मिल रहा है या नहीं,इसकी पड़ताल के लिये शनिवार को ‘द संडे व्यूज़’ की टीम पहुंची। वहां मरीजों के परिजनों ने जो बताया उसे सुन-देख आप भी चौंक जायेंगे कि जिस अस्पताल को चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक और विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी सुविधाओं से लाभान्वित किया लेकिन उसके बाद भी अस्पताल में मरीजों को सही ढंग से इलाज नहीं मिल पा रहा है।

राजधानी के लोकबंधु अस्पताल में मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी होती है। वहीं, परिजनों के बैठने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था ना होने की शिकायत सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर चाय-पानी के नाम पर पैसे की मांग की जाती है । हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से उक्त शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जा रही है ,यह भी स्पष्ट नहीं है। मरीजों और परिजनों के बताया कि अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित शौचालय में ताला लगा रहता है,जिसकी वजह से हमलोगों को दूसरे फ्लोर पर जाना पड़ता है।
इसके अलावा अस्पताल की लिफ्ट भी खराब पड़ी है,जिसकी वजह से बुजुर्ग या गंभीर रुप से बीमारी कारण मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। इसी तरह, मरीजों को दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों ने बताया कि क्लोनाज़ेपम 0.5 एमजी, थायरोक्सिन और मिथाइलकोबालामिन जैसी कुछ दवाओं की मांग अधिक है, जबकि अस्पताल में इनकी उपलब्धता पर्याप्त नहीं होने की शिकायत है ।

अस्पताल में दवा ना मिलने की वजह बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के लिये आने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में अस्पताल की फ ार्मेसी में जरूरी दवाएं उपलब्ध न होने पर बाहर से दवाएं खरीदना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। मरीजों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था की जाए, बंद शौचालय को मरीजों के लिए खोला जा, खराब लिफ्ट को जल्द से जल्द चालू कराया जाए और जरूरत के अनुसार आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, यदि मरीजों को शिफ्ट करने के नाम पर किसी कर्मचारी द्वारा पैसे की मांग किए जाने की शिकायत सही पाई जाती है तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाये।