यूथ विंग के सहारे विपक्ष को लगायेंगे किनारे


 योगेश श्रीवास्तव

लखनऊ। इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपने नौ साल की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने वाली है। वहीं उसकी तैयारियों में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को साथ लाने की रणनीति है। पार्टी की ओर से युवाओं को साथ लाने की गरज से इस बार की घोषित प्रदेश कार्यकारिणी में युवाओं को खासा प्रतिनिधित्व दिया गया है। युवाओं को पार्टी से जोडऩे की रणनीति के पीछे एक कारण यह भी है विपक्ष द्वारा जिस तरह ‘जेन जी’ को हथियार बनाया जा रहा है उसी का माकूल जवाब देने के लिए ही ‘यूथ ब्रिगेड’ को तैयार किया जा रहा है। पार्टी ने युवाओं को आगे लाने की दिशा में ‘फ़ायरब्रांड’ लोगों को न सिर्फ संगठन से जोड़ा है बल्कि ऐसे लोगों को चुनाव में स्टारक प्रचार के तौर पर आगे करने की रणनीति है।

विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही भाजपा ने जहां निचले स्तर तक पार्टी से युवाओं को जोडऩे की दिशा में बड़ा काम किया है, वहीं संगठन में कम उम्र वाले पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को खासी तवज्जो दी जा रही है। जिला इकाइयों के गठन में भी पदाधिकारी बनाने में 50 साल तक उम्र वालों को ही प्राथमिकता दी गयी है। माना जा रहा है पार्टी उत्साही और तेजतर्रार छवि के युवाओं को चिन्हित कर उन्हें चुनाव के मद्देनजऱ और दायित्व सौंपे जाने की योजना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नितिन नवीन के आने के बाद से पार्टी नेतृत्व का युवाओं पर खासा फ़ोकस है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा इस बार ‘हैट्रिक’ लगाने की गरज से युवाशक्ति पर भरोसा करके उसे आगे किए हुए है। पार्टी ने इसी युवा शक्ति के भरोसे नए जोश के साथ चुनावी रण में उतरने का निर्णय लिया है। युवाओं को तरजीह दिए जाने की वजह यह भी है कि नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपना बॅास कहकर यह संकेत दिया था कि अब पार्टी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं की है। इसी थीम को ध्यान में रखकर युवाओं को अनुसांगिक मोर्चो में भी यथास्थान दिया जा रहा है।

युवा टीम में अकेले युवक ही नहीं बल्कि 50 से कम उम्र की महिलाओं और अन्य वर्गो के लोगों को भी शामिल किया जा रहा है। प्रदेश से लेकर जिला शहर और तहसील ब्लाक तक इकाइयों में युवाओं को स्थान दिया गया है।युवाओं को जोडऩे के पीछे की एक रणनीति यह भी है कि इसके जरिए पार्टी जहां अपने जनाधार में इजाफ़ा करेगी बल्कि इसी के जरिए वह जंतर- मंतर पर हुए जेन जी आंदोलन का माकूल जवाब भी दे पायेगी। समाजवादी पार्टी की लोहिया वाहिनी, यूथ ब्रिगेड और छात्र सभा सहित अन्य दलों के युवा संगठनों की तादात को देखते हुए भाजपा ने अपने युवा मोर्चे के साथ ही मुख्य संगठन में युवाओं को खासी तरजीह दी है।

हाल ही में प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा घोषित प्रदेश कार्यकारिणी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में युवा चेहरों को खासी प्राथमिकता दी गयी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पूर्व सांसद तथा युवा मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष रहे हरीश द्विवेदी को न सिर्फ राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा गया है, बल्कि उन्हें युवा मोर्चे का प्रभारी भी बनाया गया है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हरीश द्विवेदी की राजनीतिक मेधा का इस्तेमाल करके पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा अपना दबदबा बरकरार रखना चाहती है।

इसी तरह युवा मोर्चे मे रहे अभिजात मिश्र को भी प्रदेश संगठन में बड़ा दायित्व सौंपा गया है। उनकी राजनीतिक छवि ‘फ़ायरब्रांड’ युवा नेता की है। वे पार्टी की गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं। उनकी छवि कट्टर हिन्दुवादी नेता की है। पार्टी ने उनकी सांगठनिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में जगह दी है।

प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी ने मोर्चो के गठन में युवा मोर्चे का दायित्च डॅा. रोहित मिश्र को सौंपा है। उनके प्रथम आगमन के दौरान जिस तरह राजधानी की सड़कों पर युवाओं का हुजूम देखने को मिला उसके बाद से पार्टी को लगने लगा है कि आगामी विधानसभा चुनाव अन्य दलों की यूथ ब्रिगेड के आगे भाजपा के युवाओं की टीम के सहारे विपक्ष के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकेगा। जेन जी के आंदोलन के दौरान जिस तरह लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिल्ली की सड़कों पर छात्रों युवाओं के आंदोलन को समर्थन दिया गया उसके बाद से खासकर यूपी में भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करते हुए युवाओं को खासी तरजीह देने का निर्णय लिया है। इसी गरज से राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी दोनों में युवाओं को खासा महत्व दिया गया है। 

विधानसभा क्षेत्रों में युवाओं का जोडऩे को होंगे सम्मेलन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए सम्मेलनों को आयोजित करने की रणनीति पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े अपने आगामी दौर के दौरान इस दिशा में पार्टी के युवा पदाधिकारियों से बैठक कर इस रणनीति को अंतिम रूप देंगे। पार्टी जानकारों की माने तो सभी 403 विधानसभा सीटों पर युवाओं का जोडऩे की गरज से युवा सम्मेलन और गोष्ठिया आयोजित की जा सकती है। सम्मेलनों का आयोजन भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेतृत्व में होगा। युवाओं के बीच भारतीय जनता पार्टी के चुनावी संदेश को पहुंचाने के साथ योगी सरकार की पिछले नौ सालों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ ही विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा युवा वोटरों के वोट पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा ने सम्मेलन करने की रणनीति अपनाई है।

पार्टी सूत्रों की माने तो इस दिशा में युवा मोर्चे की ओर से काम शुरू कर दिया गया है। बता दे कि 18 से 35 वर्ष आयु के वोटरों और खास तौर पर नए जुने वाले वोटरों पर भारतीय जनता पार्टी की निगाहें है। भाजपा उम्मीद कर रही है कि इन वोटरों के जरिए वह एक बार फिर से विधानसभा चुनाव 2027 में जीत दर्ज करेगी। युवा सम्मेलनों के जरिए बताएगी कि भाजपा की जीत का युवाओं को क्या फ़ायदा मिलेगा और अब तक कितना फ़ायदा हुआ है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *