गुरु पूर्णिमा पर दयालबाग में गुरु-प्रेम, सतसंग, सेवा और समर्पण की भावमयी अभिव्यक्ति

प्रीति प्रतीति हिये भई भारी। दास आरती करन बिचारी।। शब्द विवेक थाल लिया हाथा। अमी धार…