UP MLC election news : लखनऊ। शिक्षक एवं स्नातक कोटे की 11 सीटों पर हुए विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को झटका दिया है। पार्टी की पिछली बार जीती हुई लखनऊ खंड स्नातक सीट हाथ से निकल गई। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को समाहित करने वाली शिक्षक और स्नातक सीट भी सपा के खाते में दोबारा जाने से बीजेपी नहीं रोक पाई है। सीटों के साथ ही पढ़े-लिखों के इस चुनाव में जमीन भी खिसकती दिखी है, जहां पार्टी हारी है वहां अंतर भी पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ गया है।

पिछले चुनाव में बीजेपी ने जीती थीं 7 सीटें
जिन 11 सीटों पर चुनाव हुआ उसमें 2020 में बीजेपी के खाते में आधिकारिक तौर पर आगरा की स्नातक, लखनऊ की शिक्षक एवं स्नातक, मेरठ की शिक्षक एवं स्नातक एवं बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट थी। गोरखपुर-फैजाबाद पर भी पार्टी ने उम्मीदवार न उतारकर ध्रुव कुमार त्रिपाठी को समर्थन दिया था और उन्हें जीत भी मिली थी। इस तरह समर्थित मिलकर पार्टी ने सात सीट जीती थी।
नतीजा दावों के अनुरूप नहीं रहा
बीजेपी के रणनीतिकारों ने महीनों पहले से ही सभी सीटें जीतने के दावे के साथ चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थीं। सरकार-संगठन के शीर्ष चेहरों के कार्यक्रम भी हुए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह से सीटवार तैयारियां परखी थीं। लेकिन नतीजा दावों के अनुरूप नहीं रहा। पंकज चौधरी की अगुआई में यह पहला प्रत्यक्ष चुनाव था।
पश्चिम बरकरार, बुंदेलखंड से सेंट्रल तक झटका
पिछले कुछ चुनावों से बीजेपी के लिए उर्वरा साबित हुए पश्चिम ने इस बार भी बीजेपी को निराश नहीं किया है। मेरठ की शिक्षक एवं स्नातक की दोनों सीटों के साथ ही बरेली-मुरादाबाद में पार्टी को एकतरफा जीत मिली है। लखनऊ में शिक्षक कोटे की सीट भी पार्टी आसानी से जीत गई। लेकिन, बाकी जिन तीन सीटों पर जीत भी मिली है वहां उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी है।
चुनाव में हार का अंतर बढ़ा
गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर जीत बहुत नजदीकी रही, जबकि, अन्य सीटों पर हार का अंतर बढ़ गया है। इलाहाबाद-झांसी में पिछली बार हार का अंतर 4333 वोटों का था। इस बार यह अंतर 27,000 से ज्यादा वोटों का है। वाराणसी शिक्षक सीट से बीजेपी को पिछली बार 936 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार यह अंतर करीब 5 हजार का है।
कांति सिंह ने 17127 वोटों से हराया
वाराणसी स्नातक सीट से पिछली बार 3650 वाटों से हार मिली थी। इस बार देर रात तक अंतर 7 हजार से अधिक हो चुका था। लखनऊ सीट से अवनीश सिंह सपा की कांति सिंह से देर रात 17,127 वोटों से हार गए। दोनों ही उम्मीदवार कुर्मी बिरादरी के है। बीजेपी 2024 में मिले झटके के बाद इस बिरादरी पर खास फोकस कर रही है। संगठन के शीर्ष चेहरे के चुनाव का भी इसे आधार बताया गया था।
उल्टा पड़ा प्रत्याशियों का समीकरण
आगरा शिक्षक सीट से आकाश अग्रवाल पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीते थे। इस बार वह बीजेपी से टिकट चाह रहे थे, मशक्कत भी की, लेकिन, पार्टी ने दांव लगाया पिछली बार सपा के समर्थित प्रत्याशी रहे हरिकिशोर तिवारी पर। आकाश अग्रवाल ने धांधली के आरोपों और बहते आंसुओ के साथ बीजेपी की उम्मीदे बहा दी। इस सीट के दायरे में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का भी गृह एवं निर्वाचन क्षेत्र आता है।
वाराणसी सीट पर सफल नहीं हुआ दांव
वाराणसी शिक्षक सीट पर बीजेपी ने इस बार पिछली बार निर्दलीय लड़े प्रमोद कुमार मिश्र को टिकट दिया था, लेकिन यह दांव भी सफल नहीं हुआ। चंदेल गुट के प्रत्याशी चेतनारायण सिंह ने वोटों मे सेंधमारी कर भाजपा की उम्मीदे तोड़ दी।