होमगार्ड भर्ती: आखिर जिलों में ‘फेल’ होमगार्ड मंडलीय कमांडेंट कार्यालय जाते ही कैसे हो गये ‘पास’ ?


होमगार्ड भर्ती: डीजी की ईमानदारी पर भ्रष्ट अफसरों और डॉक्टरों की टीम भारी

डॉक्टर फेल होमगार्डों को भेजे कमांडेंट के पास, वहां से पर्ची मिलते ही फेल हो जाते थे पास

कई मंडलों में कमांडेंट, मंडलीय कमांडेंट ने मेडिकल कराने आये अभ्यर्थियों ने किया खेला

गोरखपुर मंडलीय कमांडेेंट कार्यालय में ही 98 प्रतिशत फेल होमगार्ड कर दिये गये पास ? कैसे ?

आखिर मंडलीय कमांडेंट कार्यालय में बैठे डॉक्टर कौन सा शीलाजीत खिलाते थे कि फेल हो गये पास ?

आखिर मंडलीय कमांडेंट कार्यालय में बैठे डॉक्टर कौन सा शीलाजीत खिलाते थे कि फेल हो गये पास ?

मंत्री जी, कमांडेंट को भ्रष्ट बताकर अपना पल्ला झाडऩे वाले मंडलीय कमांडेंट को क्या बोलेंगे भ्रष्ट या महाभ्रष्ट ?

मेडिकल टीम के साथ मिलकर फेल होमगार्डों को पास करने वालो पर नहीं हुआ एक्शन तो 2027 भाजपा को पड़ेगा भारी ?

संजय श्रीवास्तव

लखनऊ। यूपी में होमगार्ड भर्ती में मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ पर डीजी, होमगार्ड डी. के. ठाकुर ने परवान चढ़ाने की पुरजोर कोशिश की लेकिन भ्रष्टïाचार के आकंठ में डूबे होमगार्ड अफसरों के सामने उनकी एक ना चली। पहली बार मुख्यमंत्री ने इस विभाग से होमगार्डों की भर्ती ना कराकर पुलिस विभाग को सौंप दी। मुख्यमंत्री को भी मालूम चल गया था कि इस विभाग के मंत्री और अधिसंख्य अफसरों की मंशा ठीक नहीं है। भर्ती हांथ से फिसल जाना मतलब करोड़ों की थाली इनलोगों के हांथों से फिसलने के बराबर था। सूबे के 90 प्रतिशत कमांडेंट और मंडलीय कमांडेंट ‘सदमे’ में थे। लेकिन…। चयनित होमगार्डों का मेडिकल शुरु हुआ तो कमांडेंट और मंडलीय कमांडेंट ने भ्रष्टाचार की ‘नई खोज’ निकाली और जमकर ‘बैटिंग’ की। नाम ना छापने की शर्त पर अफसरों ने बताया कि गोरखपुर, वाराणसी, अमेठी, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, मिर्जापुर, कानपुर देहात, बस्ती के कमांडेंट और मंडलीय कमांडेंट ने मेडिकल कराने आये डॉक्टरों की टीम को सेट कर फेल को पास कराने का खेल शुरू कर जमकर वारा-न्यारा किया।

खास बात ये है कि डॉक्टरों की मेडिकल टीम जिन होमगार्डों को पैर सटने सहित पहले माप में फेल होमगार्डों को, कमांडेंट के पास भेज देते थे, समझौता होते ही, कमांडेंट द्वारा पर्ची देने या उनके बिचौलियों द्वारा आंख मारने के बाद डॉक्टर साहेब उस बंदे को ‘पास’ कर देते थे। बड़ा सवाल है कि जितने होमगार्ड जिलों के मेडिकल टीम द्वारा फेल किये गये, आखिर वे मंडलीय कार्यालय में पास कैसे हो गये ? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर की ही पहले बात करें, तो गोरखपुर मंडलीय कार्यालय में जिलों में ही फेल हुये 98 प्रतिशत होमगार्ड अभ्यर्थियों को पास कर दिया गया है ? कैसे ? इसका मतलब, जिलों के 98 प्रतिशत डॉक्टरों की टीम नकारा है या तो उनकी मशीन खराब है ? सवाल ये भी उठ रहा है कि जिला कमांडेंट को ‘भ्रष्ट’ कहकर अपना पल्ला झाडऩे वालेे मंडलीय कमांडेंटों को अब क्या नाम दिया जाये ? ‘भ्रष्ट’ या ‘महाभ्रष्ट’ ? होमगार्ड भर्ती में मेडिकल टीम और अफसरों ने जो ‘भ्रष्टाचार’ किया,उस पर मुख्यमंत्री कार्यालय,प्रमुख सचिव स्तर से जांच करानी चाहिये।

होमगार्ड भर्ती में जब से चयनित होमगार्डों का मेडिकल शुरू हुआ सभी जनपदों में हंगामा मचा हुआ है। शासनादेश है कि पहले राउंड में किसी वजह से मेडिकल में फेल होने वाले होमगार्ड दूसरी बार मंडलीय कमांडेंट कार्यालय में अपील कर सकते हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि कई जनपदों में मेडिकल बोर्ड ने जिन होमगार्डों को बिना पैसा लिये यदि नाप में कमी है तो फेल कर दिये, दूसरे राउंड में वही होमगार्ड मंडलीय कमांडेेेट की मेडिकल टीम में जाता है तो पास हो जाता है ? आखिर मंडलीय कमांडेंट और वहां की मेडिकल टीम फेल होमगार्डों को कौन को बोर्नबीटा या शीलाजीत खिलाते हैं कि सारी शारीरिक कमियां छू-मंतर हो जाती है ? अधिकारियों ने बताया कि सबसे अधिक ‘भ्रष्टाचार’ गोरखपुर मंडल,शाहजहांपुर मंडल, गाजियाबाद, मेरठ मंडल, अमेठी,वाराणसी,बरेली में मेडिकल टीम को मिलाकर होमगार्डों की भर्ती में नियमों की धज्जियां उड़ाने की शिकायतें देखने को मिली।

सीधी बात करें तो ये ‘भ्रष्टाचार’ की कहानी है और इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय या प्रमुख सचिव,होमगार्ड को गंभीरता से लेते हुये कार्रवाई करनी चाहिये। नहीं तो ‘भ्रष्टाचार’ रोकने में नाकाम होमगार्ड मंत्री और ‘भ्रष्टाचार’ में ‘बौराये’ कमांडेंट,मंडलीय कमांडेंट की कार्यशैली का परिणाम ‘2027 के चुनावी बेला’ में साफ तौर पर देखने को मिलेगा।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *