
संजय श्रीवास्तव
Up homeguards news : होमगार्ड राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति 9 जुलाई को समीक्षा बैठक करने मुख्यालय आ रहे हैं। इसी परिपेक्ष्य में मुख्यालय पर तैनात जेएसओ अवनीश कुमार सिंह ने अधिकारियों के ठहरने के लिये आफिसर्स मेस व एनेक्सी में कमरा आवंटित किया। गोरखपुर के जिला कमांडेंट मारक ण्डेय सिंह को कमांडेंट वाराणसी दिखाकर कमरा आवंटित कर दिया। ‘द संडे व्यूज़’ ने जब मंत्री के दुलारे अधिकारी की लापरवाही को सबके सामने लाया तो उन्होंने आनन-फानन में सुधार कर मारकण्डेय सिंह जिला कमांडेंट गोरखपुर लिखकर पत्र अधिकारियों को व्हाटसअप किया। मंत्री जी आपसे तो कुछ कहना बेमानी है, फिर भी बोल ही देता हूं कि इस पद पर पांच साल से गैर जिम्मेदार जेएसओ को बिठाना सही है ? आपका जवाब सभी जानते हैं और ठहाका लगाते हुये कहते हैं कि ‘जो मंत्री जी के सिस्टम में फिट वही है हिट…।‘वैसे भी आचार संहिता लागू होने में अधिकतम चार माह शेष है, फिर ?

द संडे व्यूज़ ने आज सुबह शीर्षक मंत्री धर्मवीर के बाद अब उनके ‘लाडले’ अफसर अवनीश सिंह ने एक कमांडेंट का जिला बदल दिया ! से खबर प्रकाशित की। असर ये रहा कि आनन-फानन में जेएसओ अवनीश कुमार सिंह ने दूसरा पत्र जारी कर अपनी गल्ती स्वीकार की और भूल सुधार किया। बता दें कि द संडे व्यूज ने प्रकाशित किया कि उत्तर प्रदेश के होमगार्ड की लीला निराली है। इतिहास के पन्नों पद दर्ज किया जायेगा कि राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने चुन-चुन कर ‘नगीनों’ पर आशीर्वाद का हांथ रखा है। शाहरुख खान का एक डॉयलाग आपलोगों को याद होगा…मैं हूं ना…। ट्रांसफर के मौसम में मंत्री ने 14 कमांडेंट का ट्रांसफर कर अगले दिन आदेश निरस्त करवाकर कुछ को अन्य जनपदों में तैनाती दे दी। जब मंत्री ने मुख्यमंत्री के आदेश की धज्जियां उड़ायी तो ‘लाडले’ अधिकारी भला कैसे पीछे रहते। मुख्यालय पर तैनात जेएसओ ने एक कमांडेंट का जिला बदलकर मंत्री का अपमान कर दिया 9 जुलाई को मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने जेल रोड स्थित होमगार्ड मुख्यालय पर समीक्षा बैठक रखी है,जिसमें प्रदेश के सभी डीआईजी,मंडलीय कमांडेंट और जिला कमांडेंट शामिल होने आ रहे हैं। अधिकारियों के लिये आफिसर्स मेस में रुम एलॉट किया गया है।

लिस्ट में देखा गया तो गोरखपुर के जिला कमांडेंट मारकण्डेय सिंह को वाराणसी का कमांडेंट बना दिया गया है ? ये वही अवनीश कुमार सिंह हैं, जो पिछले 5 वर्ष से जेएसओ की कुर्सी पर फेविकोल की तरह चिपके हुये हैं। इसी तरह शैलजा सिंह,ये भी 5 साल से जेएसओ की कुर्सी पर जमी हैं। एक सवाल तो बनता है गुरु जी, ट्रांसफर पालिसी में यदि संख्या 20 प्रतिशत से अधिक हो जाये और किसी अधिकारी का तबादला नहीं हो पाया तो उसका पटल अवश्य परिवर्तित करना चाहिये। आखिर अवनीश औै शैलजा में ऐसी कौन सी काबिलियत है कि दोनों का ट्रांसफर तो दूर पटल भी परिवर्तित नहीं किया गया ? मंत्री जी, यदि आपके पास जवाब हो तो ‘द संडे व्यूज़’ को दे सकते हैं। वैसे भी चार माह में आचार संहिता लागू होने वाली है फिर…