ओवरटाइम पर दो गुना भुगतान करना होगा
UP Cabinet: उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2026 को मंजूरी दे दी। इसके लागू होने पर न्यूनतम मजदूरी का अधिकार अब केवल अनुसूचित नियोजनों तक सीमित न रहकर सभी पात्र श्रमिकों को मिलेगा। यानी किसी भी नियोजन या स्थान पर कार्यरत श्रमिक को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित करते हुए चार श्रम संहिताएं अधिसूचित की हैं। नई संहिता इसी के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, समान पारिश्रमिक और बोनस से जुड़े चार केंद्रीय श्रम कानूनों का समावेश है। नई व्यवस्था में अनुसूचित नियोजन की व्यवस्था समाप्त कर मजदूरी का निर्धारण कौशल, कार्य की प्रकृति और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर होगा। समान कार्य के लिए समान वेतन का प्रावधान भी लागू रहेगा।
संहिता के अनुसार कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूल वेतन होगा, जिससे भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा संबंधी लाभ बढ़ेंगे। सेवा समाप्त होने पर श्रमिक का बकाया दो दिन के भीतर चुकाना अनिवार्य होगा। ओवरटाइम के लिए सामान्य दर से दोगुनी मजदूरी देनी होगी तथा वैधानिक कटौतियां कुल मजदूरी के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगी। वेतन भुगतान से पहले वेतन पर्ची देना भी अनिवार्य किया गया है।
संविदा श्रमिकों की मजदूरी के लिए मुख्य नियोक्ता जिम्मेदार
संविदा श्रमिकों की मजदूरी और बोनस के भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता पर होगी। वहीं, मृत कर्मचारी के बकाये का भुगतान नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को किया जाएगा। संहिता में नियोक्ताओं के लिए भी कई सुविधाएं दी गई हैं। नियोक्ताओं के अनुपालन भार को कम करते हुए तीन रजिस्टर और 10 प्रपत्रों की व्यवस्था, ऑनलाइन विवरणी तथा पहली बार उल्लंघन पर उपशमन का प्रावधान किया गया है। नो पर्सनल ऑफिस कांटेक्ट के सिद्धांत के तहत व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता कम करने पर जोर दिया गया है। विवादों में अब हाईकोर्ट के बजाय विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील की जा सकेगी।
लेखाकार व सहायक लेखाकार के छह पद एंट्री लेवल में भी
राज्य संपत्ति विभाग में सहायक लेखाकार के सभी पद अब भरे जा सकेंगे। पहले पदोन्नति वाले पदों को भरने में समस्या आती थी। विभाग में कुल 12 लेखाकार व सहायक लेखाकार के पद हैं। इनमें पहले तीन प्रवेश स्तर के और नौ पदोन्नति के थे। केवल प्रवेश स्तर के तीन पद ही भर पाते थे। राज्य सरकार ने अब प्रवेश स्तर और पदोन्नति के पदों की संख्या एकसमान कर दी है। कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य संपत्ति विभाग लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली, 2026 को मंजूरी मिली। इस बदलाव से अब सहायक लेखाकार के छह पद प्रवेश स्तर और छह पद पदोन्नति वाले हो गए हैं। इससे सभी पद भरे जा सकेंगे और कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति भी मिलेगी।
घूमंतु बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट ने उप्र घूमंतू विकास बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। बोर्ड का उद्देश्य इन समुदायों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करना, केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे आवास और आजीविका सहायता का प्रभावी क्रियान्वयन व निगरानी करना है। बोर्ड को नीतिगत सिफारिशें देने, समुदायों की समसयाओं का समाधान करने और सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का दायित्व सौंपा गया है। इसकी संरचना द्वि-स्तरीय है।
राज्य स्तर पर समाज कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए डीएम की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समितियां कार्य करेंगी। बोर्ड को निरीक्षण, जांच और डाटाबेस तैयार करने के अधिकार प्राप्त होंगे। बोर्ड के गैर अधिकारिक सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। बोर्ड की बैठक तीन महीने में कम से कम एक बार आयोजित की जाएगी।
सात स्थानों पर बहुद्देशीय हब के लिए आवास विभाग को दी जाएगी भूमि
कैबिनेट ने प्रदेश के सात स्थानों पर बहुद्देशीय हब विकसित करने के लिए लोक निर्माण विभाग की भूमि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके निर्माण से आम जनता, पर्यटकों, श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया होंगी। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसमें महराजगंज, कुशीनगर, मथुरा, सिद्धार्थनगर, चित्रकूट, चंदौली और बहराइच की नानपारा तहसील के ग्राम गवरखा, कलवारी व भवनियापुर टिकुरी में 71.607 एकड़ भूमि स्थानांतरित की जाएगी।
प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण में अब आठ जिले शामिल
राज्य राजधानी क्षेत्र और काशी-विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के बाद सरकार ने प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। आवास विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई। पहले इसमें छह जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव था, जिसे अब आठ जिलों तक बढ़ाया गया है।
प्राधिकरण क्षेत्र में प्रयागराज और चित्रकूट मंडल के कुल आठ जिले शामिल हैं। इनमें प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ जिले हैं। चित्रकूट मंडल से बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा जिले को जोड़ा गया है। पहले 23053 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले छह जिलों का प्रस्ताव था। संशोधन के बाद अब इसका दायरा 29667 वर्ग किलोमीटर हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।
इस प्राधिकरण के गठन से औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। इन जिलों का त्वरित और समेकित विकास भी सुनिश्चित होगा। राज्य सरकार पर इसके गठन से कोई अतिरिक्त भार नहीं आएगा। प्राधिकरण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाओं में वृद्धि होगी। अवसंरचना सुविधाएं बढ़ने से औद्योगिक इकाइयां तेजी से स्थापित होंगी। यह नया प्राधिकरण एक धार्मिक सर्किट भी बनाएगा। इससे पर्यटन और निवेशक तेजी से आकर्षित होंगे। क्षेत्रीय विकास से स्थानीय युवाओं को रोजगार और नौकरी के अवसर मिलेंगे।