आखिर कमांडेंट राजेश कुमार सिंह में ऐसी क्या खूबी है कि वापसी के बाद ईनाम में दो अतिरिक्त जिले कानपुर देहात , महोबा का चार्ज सौंप दिया गया ?
संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस पर उनके ही सरकार के मंत्री ठहाका लगा रहे हैं। जिस तरह से मंत्री नियम विरुद्ध अधिकारियों का तबादला कर रहे हैं,उसे देखकर हम तो यही कहेंगे। होमगार्ड राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने 30 मई को 13 जिला कमांडेंट का तबादला किया। अगले दिन 31 मई को मंत्री ने 5 कमांडेंट के तबादला में संसोधन कर उन्हें मनचाही जगह तैनाती दे दी। अब सवालों के घेरे में ट्रांसफर पालिसी और मुख्यमंत्री की जीरो टालरेंस आ गयी है। तबादला संशोधन नये डीजी डी के ठाकुर के हस्ताक्षर से हुआ है। चर्चा जोरों पर है कि मंत्री जी ने नये आईपीएस को गुमराह कर बड़ा खेल खेलने में कामयाब हो गये हैं।

30 मई को जारी तबादला सूची में जिन कमांडेंट का नाम आया था उनमें से 5 कमांडेंट का जिला 31 मई को बदल दिया गया। उनके नाम इस प्रकार से हैं। जौनपुर के कमांडेंट ओमप्रकाश सिंह का पहले तबादला चित्रकूट किया गया,अगले दिन बदलकर प्रतापगढ़ कर दिया गया। इसी तरह आजमगढ़ के कमांडेंट मनोज सिंह बघेल का जालौन तबादला किया गया जिसे बदलकर महाराजगंज कर दिया गया। सहारनपुर के कमांडेंट विजय कुमार सिंह का जौनपुर तबादला किया गया जिसे बदलकर सम्भल कर दिया गया। सीतापुर के कमांडेंट दिनेश ढिंगरा का तबादला प्रतापगढ़ किया गया था,जिसे बदलकर जौनपुर का कमांडेंट बना दिया गया। ठीक इसी तरह जालौन के कमांडेंट राजेश कुमार सिंह को सम्भल भेजा गया था, अगले दिन बदलकर जालौन में ही तैनात कर दिया गया। राजेश कुमार सिंह का तबादला बदलने के बाद पहले से उसके पास कानपुर देहात अतिरिक्त चार्ज था और अब इसी के साथ महोबा जिले का भी अतिरिक्त चार्ज सौंप दिया गया है। बता दें कि कानपुर देहात को कमाई के मामले में मिनी दुबई कहा जाता है और आखिर कमांडेंट साहेब में ऐसी क्या खूबी है कि वापसी के बाद ईनाम में दो अतिरिक्त जिले का चार्ज सौंप दिया गया ?
अधिकारियों ने बताया कि डीजी, होमगार्ड डी. के. ठाकुर को कार्यभार ग्रहण किये चार ही दिन हुये और मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने उनसे पांच कमांडेंट का ट्रांसफर कराकर उसमें संशोधन भी करवा लिया। इसमें कोई संदेह नहीं कि डीके ठाकुुर निहायत ही ईमानदार आईपीएस के रुप में जाने जाते हैं लेकिन मंत्री के शातिर चाल को समझ नहीं पाये। खैर ट्रांसफर के पहले मंत्री मुख्यालय पहुंचे और होमगार्डों के साथ बैठकर खाना खाया। दो दिनों तक ट्रेनिंग सेंटर पर तूफानी दौरे की नौटंकी कर तबादला में खेल करने में कामयाब हो गये।

बड़ा सवाल ये है कि आखिर मंत्री धर्मवीर प्रजापति के सामने ऐसी क्या मजबूरी रही कि उन्होंने अगले दिन पांच कमांडेंट का तबादला निरस्त कर उन्हें मनचाही जगह पर तैनाती दे दी।’ द संडे व्यूज़’ की खोजी पत्रकारिता में जो तथ्य निकल कर सामने आ रहे हैं,उनके मुताबिक मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने सोची समझी रणनीति के तहत इस बार ट्रांसफर में खेल किया और पाक साफ भी बने रहे। नियमावली की बात करें तो हर साल तबादला के सीजन में सभी अधिकारियों ने तीन-तीन विकल्प मांगे जाते हैं। इस बार मंत्री ने कमांडेंट से विकल्प क्यों नहीं मांगा ? हम बताते हैं क्यों नहीं विकल्प मांगा गया…मंत्री ने बिना किसी से पूछे जहां मन किया, उसे दूर जिले में फेंक दिया। उन्हें अंदाजा था कि ऐसा करने पर सब भाग कर उनके चौखट पर आयेंगे और यही हुआ। जिसने मंत्री को खुश किया,उसका जिला अगले दिन बदल दिया गया।
चर्चाएं तो बहुत है,आप लोग समझ सकते हैं। मुख्यालय से लेकर उत्तर प्रदेश में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने मुख्यमंत्री के ट्रांसफर पॉलिसी की धज्जियां उड़ाने में कामयाब रहें लेकिन इस बात का विरोध भी हो रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में उनके मंत्री द्वारा नियम विरुद्ध तबादला रद्द करने पर शासन के आला अफसर मूकदर्शक क्यों बने हैं ? क्या शासन के अफसरों की नजर में मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा बड़ी नहीं है ?