मथुरा: कमांडेंट का खास गुर्गा बीओ राहुल ने बीमार जवान से बोला-पहले कमांडेंट से मिलो तब मिलेगी कंपनी
विभागीय साफ्टवेयर में दो माह से ओमप्रकाश की आमद दिख रही लेकिन पैसा ना मिलने पर बीओ ओमप्रकाश नहीं कर रहा आमद
बीमारी के बाद आये ओमप्रकाश की आर्थिक स्थिति खराब,डीआईजी,आगरा परिक्षेत्र से की लिखित फरियाद
मथुरा के होमगार्डों ने लगाये गंभीर आरोप
1- संवेदनशील, प्रशासनिक ड्यूटी के नाम पर लगभग 3000 प्रतिमाह की होती है वसूली
2 – अवैतनिक अधिकारियों से कंपनी के थाना ड्यूटी के नाम पर तथा ड्यूटी, मानदेय एवं सर्विस प्रमाण पत्र के लिए 3000 से 5000 तक
3- बैक कॉल डिफ ॉल्टर के नाम पर 15000 से 20000 रुपये तक की वसूली की शिकायतें मिल रही हैं

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। मथुरा के होमगार्ड विभाग में तानाशाह की भूमिका निभा रहा जिला कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह के अत्याचार से सभी कर्मचारी बेहाल हैं। बी.ओ. टेनपाल सिंह के बाद एक नया प्रकरण कंपनी नौहझील, मथुरा में तैनात अवैतनिक कंपनी कमांडर ओमप्रकाश का सामने आया है। डीजी,होमगार्ड डी. के.ठाकुर को लिखे पत्र में उसने आरोप लगाया है कि तबीयत खराब होने के कारण 10 दिनों बाद जब वापस आमद कराने पहुंचा तो बी.ओ. राहुल ने उसकी आमद करने से मना कर दिया। बी.ओ. ने कहा कि 5000 हजार रुपये प्रति माह दो तो बहाल करूंगा। पैसा देने में असमर्थता जाहिर करने पर बी.आ.े ने कहा कि कमांडेंट साहेब का आदेश है पहले उनसे जाकर मिलो,उसके बाद ही आमद करूंगा। ओमप्रकाश कई बार कमांडेंट से मिला लेकिन उसकी आमद नहीं करायी गयी। खास बात ये है कि दो माह से विभागीय सॅाफ्टवेयर में ओमप्रकाश की ड्यूटी दर्शायी जा रही है। बड़ा सवाल ये है कि बी.ओ. राहुल ने ओमप्रकाश से आमद के नाम पर 5000 रुपये मांगा। आखिर किसके इशारे पर उसकी इतनी हिम्मत हुयी ? जब ओमप्रकाश कमांडेंट से मिला तो फिर उन्होंने उसकी ड्यूटी बहाल क्यों नहीं की ? इससे साबित होता है कि कमांडेंट के इशारे पर ही मथुरा में अवैध वसूली का तांड़व मचाया जा रहा है। ‘द संडे व्यूज़’ की पड़ताल पर नाम न छापने की शर्त पर होमगार्डों ने कमांडेंट और उनके गुर्गो के रुप में अवैध वसूली करने वाले वैतनिक कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाये हैं। जवानों ने तो यहां तक बताया कि मथुरा में संवेदनशील ड्यूटी,प्रशासनिक ड्यूटी,अवैतनिक अधिकारियों से कंपनी के थाना ड्यूटी के नाम पर तथा ड्यूटी, मानदेय, सर्विस प्रमाण पत्र, बैक-कॉल डिफाल्टर के नाम पर बड़ी वसूली की जा रही है। इसकी जांच यदि किसी बाहरी एजेंसी से करायी जाये तो दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।

‘वसूलीमैन’ बीओ ओमप्रकाश को सम्मान पटका पहनाते कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह
अवैतनिक कंपनी कमांडर ओमप्रकाश ने मथुरा में तैनात बीओ पर आरोप लगाया है कि थाना नौहझील पर ड्यूटी लगाने और आमद कराने के लिये मुझसे 5000 प्रतिमाह की बार-बार मांग की जा रही है । कमांडेंट साहब के लिए अलग से मोटी राशि देने को कहा जाता है। पैसा न देने के कारण लगभग 4 महीने से सॉफ्टवेयर में ड्यूटी आने के बावजूद मेरी थाना ड्यूटी पर आमद नहीं कराई जा रही है। मैंने कमांडेंट साहब से भी शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। यदि कमांडेंट इस घटिया खेल में शामिल नहीं था तो उन्हें साफ्टवेयर में नाम आने के बाद तत्काल ओमप्रकाश को कंपनी नौहझील, मथुरा में आमद करा देना चाहिये था।
चलिये अब मथुरा के दर्जनों जवानों के दर्द को और यहां पर तैनात कमांडेेेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह और उनके वैतनिक गुर्गों के आतंक के बारे में बताते हैं। दरअसल,होमगार्डों ने नाम न छापने की गुजारिश की है क्योंकि वे इस कदर सहमे हैं कि यदि उनका नाम सामने आ गया तो दंभ में चूर कमांडेंट उनका जीना और नौकरी करना दूभर कर देगा। सभी उदाहरण बीओ टेनपाल सिंह का दे रहे हैं। कहते हैं कि एक ईमानदार बीओ पर जिस कदर से अत्याचार कमांडेंट ने किया, उसका जवाब सिर्फ और सिर्फ गिरिराज जी ही देंगे। खैर जवानों ने खुलकर ‘द संडे व्यूज़’ को बताया कि मथुरा में होमगार्ड की ड्यूटी एवं कार्यालयीय कार्यों में अवैध धन वसूली और आर्थिक शोषण की गंभीर शिकायतें हैं। संवेदनशील, प्रशासनिक ड्यूटी के नाम पर लगभग 3000 प्रतिमाह, अवैतनिक अधिकारियों से कंपनी के थाना ड्यूटी के नाम पर तथा ड्यूटी, मानदेय एवं सर्विस प्रमाण पत्र के लिए 3000 से 5000 तक लिए जाने और बैक- कॉल डिफ़ाल्टर के नाम पर 15000 से 20000 रुपये तक की वसूली की शिकायतें मिल रही हैं। इस पूरे मामले की सच्चाई जानने का सबसे सीधा तरीका है कि संवेदनशील एवं प्रशासनिक ड्यूटी करने वाले सभी होमगाड्र्स तथा जिन- जिन होमगाड्र्स के मानदेय, ड्यूटी भत्ता और सर्विस प्रमाण पत्र बनाये गये हैं, उनसे किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा गोपनीय रूप से पूछताछ कराई जाये। उनसे केवल यह पूछा जाये कि ड्यूटी, आमद या प्रमाण पत्र के बदले उनसे पैसा मांगा गया था या नहीं ? यदि होमगार्ड के नाम और बयान पूरी तरह गोपनीय रखकर निष्पक्ष जांच कराई जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। जनपद मथुरा के इस पूरे प्रकरण की जांच स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच एजेंसी से गोपनीय रूप से कराई जाये तथा शिकायतकर्ताओं की पहचान पूर्णत: गोपनीय रखी जाये। बात में तो दम है…।

वैतनिक अधिकारियों की इतनी हिम्मत नहीं कि वे इस कदर अपने ही विभाग के अवैतनिक होमगार्डों से अवैध वसूली कर सके, जब तक कि वहां बैठा अधिकारी इशारा न करे…। ये सच है, लेकिन ‘द संडे व्यूज़’ वैतनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही अवैध वसूली के रकम की पुष्टि नहीं करता। लेकिन यदि ये सच है तो मान लिया जाये कि प्रति माह मथुरा में कई लाख रुपये का अवैध चढ़ावा आ रहा है। अब चढ़ावे की रकम किस-किस की जेब में ठूंसा जा रहा है, इसका पता तो विभागीय मंत्री धर्मवीर प्रजापति ही लगा सकते हैं। मुखिया होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बनती है कि निरीह होमगार्डों का मानसिक,शारीरिक शोषण करने वाले कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह और उनके वैतनिक बीओ पर लगाम लगायें।
इसमें रत्ती भर संदेह नहीं कि मुख्यालय पर बैठे कुछ घाघ अफसरों की चुप्पी ये दर्शाती है कि उनकी जेब गरम की जा रही है तभी बीओ और अवैतनिक होमगार्डों पर हो रहे अत्याचार पर धृतराष्ट की तरह अनदेखा कर रहे हैं। अब देखने की बात ये है कि डीजी और डीआईजी, आगरा परिक्षेत्र को शिकायत करने वाले अवैतनिक कंपनी कमांडर ओमप्रकाश को इंसाफ मिलता है या नहीं ? ये भी देखना है कि सॅाफ्टवेयर भाई साहेब द्वारा बारंबार ओम प्रकाश की ड्यूटी दिखाने के बाद आमद ना कराने वाले कमांडेंट के लल्ला बीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या नहीं ?
शेष अगले अंक में…
क्या शासन से बड़ा मानने की मुगालते पाल लिया है मथुरा कमांडेंट ?
आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने वाले कमांडेंट पर क्यों चुप्पी साध रखे हैं डी.जी.?
डीआईजी,आगरा परिक्षेत्र के आदेश को रद्दी की टोकरी में डालने वाले कमंाडेंट को क्यों बचा रहे हैं मंत्री ?
क्या वैतनिक बीओ की सैलरी रोकने का अधिकार कमांडेंट को है ? यदि नहीं तो अभी तक डीआईजी,मुख्यालय ने क्या किया ?