भाग 2 : सैलरी चोरी प्रकरण-अतुल सिंह जब एक वर्ष तक अवकाश पर थे तो तीनों माह जीडी पर हस्ताक्षर क्यों किया ?


अतुल की जून, जुलाई, अगस्त की सैलरी क्यों नहीं बनी ?

सीएम पोर्टल पर लगे आरोपों की जांच डीजी को मुख्यालय के बजाये किसी dig से करानी चाहिये

होमगार्ड अतुल ने फर्जी ड्यूटी की जो चिंगारी लगायी है, उसकी आंच बहुतों को आग में झोंकेगी ?

अतुल जब अवकाश पर था तो सितम्बर, अक्टूबर, नवंबर में जीडी पर उसने हस्ताक्षर क्यों किया -कमांडेंट अमरेश कुमार

अतुल दूध पीता बच्चा है क्या,फर्जी सैलरी को कैशियर के पास क्यों नहीं जमा कराया ?

संजय श्रीवास्तव

लखनऊ। एक अदने से होमगार्ड अतुल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आईजीआरएम से होमगार्डों की फर्जी ड्यूटी लगाने और बिना ड्यूटी किये सैलरी निकालने का गंभीर आरोप मुख्यालय के अफसरों व कमांडेंट पर लगाकर एक तरह से सिस्टम को चुनौती देने का काम किया है। अतुल सिंह की मानें तो उसने जून माह में अपनी मां के इलाज के लिये एक वर्ष के लिये अवकाश लिया था लेकिन सितंबर, अक्टूबर,नवंबर माह की उसकी सैलरी बनाकर बाबूओं ने निकाल लिया। अतुल भले ही होमगार्ड है लेकिन उसने फर्जी ड्यूटी लगाने की जो चिंगारी सुलगायी है ,उसकी आंच में कई अफसर झुलस सकते हैं ? आरोप गंभीर है। लेकिन, ‘द संडे व्यूज़’ की तहकीकात में कई पेचीदे सवाल उभर कर आ रहे हैं। अतुल सिंह ने एक वर्ष के लिये अवकाश के लिये पत्र किसको दिया था? जब अतुल अवकाश पर था तो तीन माह का वेतन कैसे बन गया ? अवकाश पर था तो तीनों माह उसने जीडी पर हस्ताक्षर क्यों किया ? आखिर अतुल सिंह की जून, जुलाई व अगस्त की सैलरी क्यों नहीं बनी ? सवाल बहुतेरे हैं। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। सच लिखने का दम रखने वाले ‘द संडे व्यूज़’ की तहकीकात में अफसरों से लेकर शिकायतकर्ता होमगार्ड की बातों को सुनने के बाद जो निचोड़ निकल कर सामने आया है, उसे सिलसिलेवार बताने की कोशिश करुंगा। चलिये बताते हैं शिकायतकर्ता अतुल सिंह, कमांडेंट, लखनऊ अमरेश कुमार और एसएसओ आर.के.आजाद ने क्या कहा और सच क्या है ?

अवैतनिक होमगार्ड रे.न. 4027 अतुल सिंह ने 3 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पर एक शिकायत दर्ज करायी। शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि मेरी फर्जी ड्यूटी दिखाकर वेतन भुगतान कराने वाले लोगों की जांच कराकर मुकदमा लिखवाया जाये और न्याय दिलाने की कृपा करें। पत्र में लिखा है कि मेरी मां की तबीयत ठीक नहीं है इसलिये मैंने कमांडेेंट, लखनऊ को जून 2024 को प्रार्थना पत्र देकर आग्रह किया था कि मुझे एक वर्ष तक ड्यूटी पर ना लगाया जाये। माह सितंबर में मेरे पास जिला कार्यालय पर तैनात लक्ष्मी बाबू का फोन आया। उन्होंने कहा कि तुम्हारे खाते में दूसरे लोग का पैसा गलती से चला गया है, उसे कार्यालय आकर मेरे पास जमा कर दो। मैंने जाकर पैसा वापस कर दिया। अक्टूबर में फिर लक्ष्मी बाबू का फोन आया कि इस माह भी गलती से तुम्हारे खाते में किसी का पैसा चला गया है,उसे वापस करो। मैने जाकर पैसा दे दिया। नवंबर में फिर फोन आया की गलती से पैसा तुम्हारे खाते में चला गया है,मैंने जाकर पैसा वापस किया और पूछा कि कहीं मेरे साथ कोई गड़बड़ी तो नहीं की जा रही है ? इस पर उन्होंने मुझे गालियां बकते हुये विभाग से निकलवा देने की धमकी दी। इस बात को जब मैंने कंपनी कमांडर अरूण रावत से से कही तो उसने कहा कि मुख्यालय के सभी अधिकारियों के यहां फर्जी ड्यूटी चल रही है,अपना मुंह बंद रखो नहीं तो विभाग से निकलवा दिया जायेगा…। पत्र को गंभीरता से लेते हुये मुख्यमंत्री के यहां से जांच बिठा दी गयी।  जैसा कि अतुल सिंह ने आरोप लगाया है कि मैंने अवकाश के लिये कमांडेंट अमरेश कुमार को जून 2024 को पत्र दिया था।

कमांडेंट अमरेश कुमार का कहना है कि अतुल ने मुझे अवकाश के लिये कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया है। यदि प्रार्थना पत्र देता तो मेरी उससे कोई दुश्मनी तो है नहीं कि उसका अवकाश स्वीकार ना करता। उन्होंने कहा कि अतुल ने गंभीर आरोप लगाया है। जब उससे सभी दस्तावेज मांगा जा रहा है तो क्यों नहीं कार्यालय आकर जवाब दे रहा है ? होमगार्ड से बैंक स्टेटमेंट मांगा जा रहा है लेकिन नहीं दे रहा है। बैंक स्टेटमेंट से मालूम चलेगा कि उसका पैसा आया और कहां गया ? जून में अवकाश लिया था तो तीन माह तक सब ठीक रहा और उसके तीन माह बाद सैलरी निकलने लगी ? चलिये थोड़ी देर के लिये मान लेते हैं कि उन्होंने अवकाश का पत्र दिया था तो नियमत: उसे एक वर्ष तक कार्यालय आना ही नहीं चाहिये, क्योंकि वो तो अपनी मां की सेवा के लिये अवकाश लिया था ? अतुल ने आरोप लगाया है कि सितंबर, अक्टूबर, नवंबर में ड्यूटी ना करने पर भी उसके खाते से सैलरी निकाली गयी है। वे जवाब दें कि सितंबर, अक्टूबर,नवंबर की एक तारीख को आकर उन्होंने जीडी में डयूटी करने का हस्ताक्षर क्यों किया ? अतुल इस बात का भी जवाब दें कि जून, जुलाई, अगस्तर व सितंबर में उनकी डयूटी कहां लगी थी ? क्या इन तीनों माह उनके साथ ईमानदारी बरती जा रही थी और उसके बाद विभाग बेईमानी पर उतर आया ? क्या वो दूध पीता बच्चा है कि बाबू ने कहा तो अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर में आयी सैलरी अपने एकाउंट से निकाल कर लक्ष्मी बाबू का सौंप दिया ? यदि उसके खाते में फर्जी सैलरी आयी थी तो उसने कमांडेंट कार्यालय में जाकर कैशियर को क्यों नहीं दिया ? उक्त धनराशि जमाकर कैशियर 3.80 रुपये की रसीद काटकर देता,जो सबूत होता और हम मानते कि उसके साथ अन्याय हुआ है।

इस बाबत एसएसओ,मुख्यालय आर.के.आजाद का कहना है कि मुख्यालय पर तैनात अन्य होमगार्डों की तरह अतुल सिंह का भी माह सितंबर,अक्टूबर व नवम्बर के सैलरी का मस्टर रोल बनाकर कमांडेंट को भेज दिया गया था। दिसंबर में अनुपस्थित था इसलिये उसकी सैलरी नहीं बनी है।

बात जो भी हो, जांच जरुर होना चाहिये,क्योंकि उसने आरोप गंभीर लगाया है। सवाल अभी भी बहुत सारे हैं और ‘द संडे व्यूज़’ सिलसिलेवार बताता रहेगा कि अचानक से फर्जी सैलरी का जिन्न कैसे बाहर निकला।

अगले अंक में… आखिर गंभीर मामलों का आरोपी कैसे कर रहा है ड्यूटी ?


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