स्टूडेंट के ‘किंग मेकर’ अरविंद त्रिपाठी (गुडडू भैया )अब भगवंतनगर, उन्नाव सीट से लड़ेंगे चुनाव
कॉलेज में छात्र नेता बनाने का शौक अब बना निर्दोषों को इंसाफ दिलाने वाला मिशन

दिव्यांश श्री.
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की माटी की बात करें तो यहां पर सियासत के धुरंधर राजनेता पैदा होते रहे हैं। यूपी ने हमारे देश को प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक दिया, जिनकी शानदार कार्यशैली से प्रदेश का नाम देश भर में विख्यात हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय से निकले दर्जनों युवा नेता राष्टï्रीय स्तर की राजनैतिक पार्टियों में अपने प्रभावी नेतृत्व का डंका आज भी बजा रहे हैं। 1978-79 की बात करें तो उन्नाव का नौजवान पढ़ाई करने लखनऊ आया। चारबाग के करीब के.के.सी. कॉलेज में दाखिला लेता है। वो नौजवान पढ़ाई के साथ-साथ कुछ अलग कर गुजरने का ख्वाब देखता था। धीरे-धीरे कॉलेज के सामने चाय की दुकान पर चुस्कियों के साथ-साथ वो नेता बनाने और किसी की नेतागिरी ध्वस्त करने का माद्दा रखने लगा। उसकी पारखी निगाहों ने कॉलेज के जिस छात्र को चुन लिया, समझो वो अध्यक्ष बन गया। एक नहीं, दो नहीं, कुल चार अध्यक्ष बनाने के बाद उस नौजवान के ‘स्टूडेंटिया पॉवर’ की चर्चा लखनऊ विश्वविद्यालय तक होने लगी। यूं कहिये कि उनका हस्तक्षेप लखनऊ विश्वविद्यालय के चुनावों में भी होने लगा। धीरे-धीरे वो नौजवान ‘किंग मेकर’ के नाम से भी जाना जाने लगा और उन्हें भी समझ आ गया कि जनता की सेवा करना है तो ‘सत्ता’ में रहना बेहद जरुरी है। यही वजह है कि नब्बे के दशक से वो नौजवान गरीब,मजलूमों की मदद करता चला आ रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुडडू भईया की…। ‘गुडडू भईया’ के नाम से सूबे में चर्चित अरविंद त्रिपाठी ने 2027 का विधान सभा चुनाव 166 भगवंतनगर, उन्नाव से लडऩे का ऐलान कर दिये हैं।

गुडडू भईया का मानना है कि चुनाव वो जनता के ‘दम’ पर लडेंग़े। जनता की सेवा करना ही उनका ‘धर्म’ है। ‘द संडे व्यूज़’ से खास बातचीत के दौरान अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुडडू भईया ने खुलकर अपने पुराने और नये पन्नों का अध्याय साझा किया। अरविंद त्रिपाठी के आलमबाग स्थित आवास पर सुबह से ही पुलिस, शासन,तहसीलों में सुनवाई ना होने पर दर्जनों की संख्या में फरियादी पहुंचते हैं। सभी इस उम्मीद और भरोसे के साथ आते हैं कि यहां आने के बाद उनकी सुनवाई होगी। फरियादियों की उम्मीदों के साथ-साथ खुद अरविंद त्रिपाठी भी सोचते हैं कि ‘पावरफु ल’ होने के साथ-साथ यदि ‘सत्ता’ में किसी पद पर रहेंगे तो जनता-जनार्दन की और अधिक सेवा कर सकते हैं।
बातों का सिलसिला शुरु होते ही पहला सवाल दागा कि आपकी नजर में ‘पॅालिटिक्स’ क्या है ?
इस पर उन्होंने बताया कि सही मायने में जनता,पीडि़तों की सेवा करना ही राजनीति की परिभाषा है। मेरा मानना है कि जब आपको क्षेत्र की जनता अपना वोट देती है तभी आप सत्ता के ‘नुमाइंदे’ बनते हैं। इसलिये मेरी कोशिश रहती है कि मैं अधिक से अधिक लोगों के काम आ सकूं।
कभी छात्रों को छात्रनेता बनाने वाले अरविंद त्रिपाठी ने अब 2027 के विधान सभा चुनाव में एक बार फिर 166 भगवंतनगर, उन्नाव से चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है, इस पर कुछ कहेंगे ?
2027 का विधान सभा चुनाव मैं अपने क्षेत्र की जनता के ‘दम’ पर लडूंगा…। जनता के लिये लडूंगा…। ‘जनता’ के सहारे लडूंगा…। मेरा एक ही लक्ष्य है अपने क्षेत्र की ‘जनता’ और ‘अपनों’ के लिये पूरा जीवन ‘संघर्ष’ करना…।
कॉलेज के दिनों में आपको छात्र ‘किंग मेकर’ कहते थे,क्यों ?
इस पर गुडडू भैया के चेहरे पर ‘मुस्कान’ बिखर जाती है और छात्रनेताओं वाले तेवर में कहते हैं कि भईया, जब केकेसी में पढ़ता था तो गेट के बाहर चाय की दुकान पर बैठकी लगती थी। वहीं पर चाय की चुस्कियों के साथ मैं नेता बनाता था…। मैंने चार अध्यक्ष बनाये।
सक्रिय राजनीति में कब से हैं ?
देखिये, राजनीति में तो मैं 1978-79 से हूं लेकिन 89 से सक्रिय राजनीति में आया और पहली बार कांग्रेस के टिकट पर हिन्द नगर वार्ड से पार्षदी का चुनाव लड़ा। हालांकि उस चुनाव में मैं जीत नहीं पाया, लेकिन जीत-हार का अंतर बहुत कम मतों से था। मजे की बात तो ये है कि मेरा चुनाव निशान ‘तीर-कमान’ था और उस दौर में मीडिया में सुर्खिया बनती थी कि ‘हथियारों का शौक रखने वाले अरविंद त्रिपाठी का चुनाव निशान भी तीर कमान है…।’
सत्ता में होने पर और ना होने पर आप अपने क्षेत्र की जनता या चाहने वालों की कैसे मदद करते हैं ?
श्री त्रिपाठी ने कहा कि सत्ता में रहूं या ना रहूं… मैं निरंतर जनता की सेवा करता चला आ रहा हूं। मेरे घर का दरवाजा हमेशा ऐसे लोगों के लिये खुला रहता है जो पुलिस, प्रशासन, तहसील या अन्य किसी कारणों से उपेक्षित रहते हैं, जिनकी कहीं सुनवाई नहीं होती। इतना जरुर है कि सत्ता में होने पर फरियादियों की यदि कोई बड़ी समस्या है तो उसका निस्तारण आसानी से करवा पाता हूं नहीं तो संघर्ष जारी रहता है। इतना जरुर है कि मेरी जानकारी में यदि कोई बात आ गयी है तो किसी निर्दोष को पुलिस-प्रशासन फंसा नहीं सकता। ‘सच्चे’ और ‘ईमानदार’ इंसान के लिये मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं।
आप क्या सुनना पसंद करते हैं ‘अरविंद त्रिपाठी’ या ‘गुडडू भैया’?
ठहाका लगाने के साथ वे बताते हैं कि अब आप ही की बात करें तो आप भी मुझे ‘गुडडू भैया’ ही कहते हैं…। मां-बाबूजी ने घर का नाम गुडडू रखा जो शुरु से लेकर आज तक सबकी जुबां पर है। ‘गुडडू भैया’ थोड़ा ‘भौकाली’ नाम लगता है…फिर ठहाका…।