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	<title>राष्ट्रीय Archives - The Sunday views</title>
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	<description>Daily Hindi News</description>
	<lastBuildDate>Mon, 15 Jun 2026 16:44:11 +0000</lastBuildDate>
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	<title>राष्ट्रीय Archives - The Sunday views</title>
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		<title>जेवर के किसान हुए भावुक, बोले- योगी जी ने सपना साकार कर दिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 16:43:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एयरपोर्ट आपकी तकदीर बदल देगा वक्त सबका आता है Jewar Airport news: जेवर एयरपोर्ट 15 जून से शुरू हो गया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के लिए भूमि समर्पित&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%81%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a5%8b/">जेवर के किसान हुए भावुक, बोले- योगी जी ने सपना साकार कर दिया</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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<h3 class="wp-block-heading">एयरपोर्ट आपकी तकदीर बदल देगा</h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>वक्त सबका आता है</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Jewar Airport news: </strong>जेवर एयरपोर्ट 15 जून से शुरू हो गया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के लिए भूमि समर्पित करने वाले किसान सोमवार को लखनऊ पहुंचे। किसानों का मुख्यमंत्री आवास पर भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। किसानों ने मुख्यमंत्री से बातचीत की। मुख्यमंत्री को स्मृति चिह्न प्रदान किया और उनके प्रति आभार भी प्रकट किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि जेवर अब वह क्षेत्र बन गया है, जहां ‘कुबेर’ भी आना चाहते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="686" height="388" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/javer.png" alt="" class="wp-image-25546" style="width:761px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/javer.png 686w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/javer-300x170.png 300w" sizes="(max-width: 686px) 100vw, 686px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हमारी कैबिनेट ने&nbsp;जेवर में एयरपोर्ट निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया, तो मैंने नोएडा के जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों से कहा कि 100 दिन के भीतर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ हो जाए, लेकिन इस अवधि तक कार्रवाई प्रारंभ नहीं हुई। मैंने वहां पहुंचकर समीक्षा बैठक ली, तो पता चला कि कोई प्रगति नहीं हुई है। तब मैंने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में लगभग 100 किसानों के साथ बैठक की। मैंने कहा कि एयरपोर्ट बनाना है, तो किसानों ने जमीन देने से इनकार कर दिया। असमंजस की स्थिति थी। मैंने कहा कि हम यहां विकास करना चाहते हैं, फिर भी लोगों ने मना कर दिया। मैंने अनुरोध किया कि एक घंटे का समय है, सोचिए। यह एयरपोर्ट आपकी तकदीर बदल देगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मैंने बुजुर्गों से अनुरोध किया कि विकास का मॉडल क्या होता है, यह दिखाने का समय है। वक्त सबका आता है, कुछ बन जाते हैं और कुछ बिखर जाते हैं। जो अवसर का लाभ लेता है, इतिहास उसी का बनता है, जो मौके को गंवा देता है, वह अवसर से बिखर जाता है। आपने मुझ पर विश्वास किया, धीरेंद्र सिंह ने सहयोग किया। यीडा और उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग ने कार्रवाई को युद्धस्तर पर बढ़ाया, तो परिणाम यह रहा कि 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण पर कार्य शुरू हुआ। चार फेज में एयरपोर्ट बनेगा, पहले फेज की कार्रवाई संपन्न हुई।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="367" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/88-1-1024x367.jpg" alt="" class="wp-image-25547" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/88-1-1024x367.jpg 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/88-1-300x107.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/88-1-768x275.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/88-1.jpg 1267w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">योगी ने कहा कि आज बड़ी से बड़ी कंपनियां जेवर आना चाहती हैं। वहां अब ‘कुबेर’ भी आना चाहते हैं। जेवर एयरपोर्ट भारत का पहला कार्गो और एमआरओ केंद्र बनने जा रहा है। अन्न, फल, मत्स्य, सब्जी आदि पैदा करने वाला उत्तर प्रदेश का किसान यहां कार्गो से अपने उत्पादों को दुनिया में पहुंचाएगा। स्थानीय बाजार में उसे दाम भले कम मिले, लेकिन दुनिया के बाजार में कई गुना दाम मिलेगा। आम का दाम यहां अधिकतम 50 रुपये पहुंचेगा, लेकिन दुनिया के बाजार में 800 से 1000 रुपये किलो बिकता है। 200 रुपये प्रति किलो कार्गो खर्च जोड़ लें, तब भी किसान को 600 रुपये का लाभ मिलेगा। जिस किसान को यहां 10 रुपये प्रति किलो का लाभ नहीं मिल पा रहा, उसे 600 रुपये का लाभ मिलेगा तो वह समृद्ध बनेगा।</p>
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		<title>video चौंकाने वाला सच : आखिर सरकार की क्या मजबूरी रही कि सुशील कुमार को बनाया कार्यवाहक एमडी, मेट्रो</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:55:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोमवार की रात मूसलाधार बारिश की वजह से आगरा मेट्रो के प्लेटफार्म की छत से झरने की तरह बहने लगा पानी ट्रैक पानी से भर गया,थर्ड रेल में पानी चला&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>सोमवार की रात मूसलाधार बारिश की वजह से आगरा मेट्रो के प्लेटफार्म की छत से झरने की तरह बहने लगा पानी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ट्रैक पानी से भर गया,थर्ड रेल में पानी चला तो हो सकता था बड़ा हादसा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आखिर सरकार की क्या मजबूरी रही कि सुशील कुमार को बनाया कार्यवाहक एमडी, मेट्रो</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;विद्युत&#8217; इंजीनियर सुशील कुमार को सौंपा गया &#8216;सिविल&#8217; इंजीनियरिंग का काम</strong></p>



<figure class="wp-block-image alignnone is-resized wp-image-12011"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/sanjay-main.jpg" alt="" class="wp-image-12011" style="width:100px;height:auto"/><figcaption class="wp-element-caption"><strong style="font-size: 15px; color: #222222;">संजय श्रीवास्तव</strong></figcaption></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong> </strong> बीते सोमवार की रात तेज बारिश की वजह से आगरा में मनकामेश्वर मेट्रो स्टेशन पानी पर पानी भर गया। घटिया निर्माण की वजह से नई प्लेटफार्म की छत से पानी झरने की तरह बहने लगा। प्लेटफार्म से इस तरह मूसलाधार बारिश गिरते देख मेट्रो कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गये। खास बात ये है कि नीचे पानी इतना भर गया कि थर्ड रेल डूब गया था। बता दें कि थर्ड रेल से करंट लेकर ही मेट्रो चलती है। यदि थर्ड रेल में मामूली चूक होती तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। सुरक्षा के मद्देनजर मेट्रो प्रशासन ने बुधवार तक के लिये मेट्रो के संचालन को पूरी तरह से बंद कर दिया है। बता दें कि चारबाग स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर जिस तरह से तेज आंधी से प्लेटर्फा ढह गया ठीक उसी तरह आगरा में मेट्रो के प्लेटर्फा से तेज रफ्तार से पानी बहने लगा। मेट्रो के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मेट्रो के एमडी की जिम्मेदारी सुशील कुमार के कंधों पर सौंपी गयी है जो खुद विद्युत इंजीनियर हैं और सिविल इंजीनियरिंग का काम देख रहे हैं ? सवाल ये है कि आखिर राज्य सरकार के सामने ऐसी क्या मजबूरी रही कि उन्होंने सुशील कुमार को एमडी बनाया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="198" height="153" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/nd-netro.png" alt="" class="wp-image-25454" style="width:781px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मेट्रो के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आगरा के मनकामेश्वर मेट्रो में सोमवार की रात मूसलाधार बारिश ने कमीशनखोर अफसरों की पूरी कलई खोल कर रख दी। तेज बारिश ने प्लेटफार्म की छत को झरना बना दिया। पूरा पानी ट्रैक पर भर गया जिसकी वजह से तीन दिनों के लिये मेट्रो का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि घटिया निर्माण की वजह से प्लेटफार्म का छत पूरी तरह से खराब हो गया और झरने की तरह पानी गिरने लगा। अधिकारियों ने ये भी संभावना जताया कि यदि मेट्रो के संचालन के लिये करंट पास होने वाली थर्ड रेल के अंदर पानी चला जाता तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता है।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-video is-provider-youtube wp-block-embed-youtube wp-embed-aspect-9-16 wp-has-aspect-ratio"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<iframe loading="lazy" title="Agra" width="563" height="1000" src="https://www.youtube.com/embed/o-LLxnSHMNk?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe>
</div></figure>



<p class="wp-block-paragraph">संभावनाओं से इसलिये इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि आगरा,कानपुर और लखनऊ जैसे महानगरों के हजारों यात्रियों को सुगम यात्रा के लिये सुशील कुमार को कार्यवाहक एमडी, मेट्रो बनाया गया है। गत पांच वर्ष से श्री कुमार की देखरेख में ही मेट्रो का संचालन हो रहा है। अधिकारियों ने बताया कि निर्र्माण कार्यों में घटिया सामग्री लगाने की वजह से ही ये सब हो रहा है और इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में बहुत बड़ा हादसा हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;द संडे व्यूज़&#8217; के यू टयूब चैनल पर देखिये आगरा मेट्रो स्टेशन के प्लेटफार्म पर झरने की तरह बहता पानी अगले अंक में दिखायेंगे कि पिछले वर्ष कानपुर में किस तरह से बारिश ने मेट्रो स्टेशन को तरणताल बना दिया था लेकिन शातिर अफसरों ने पूरे मामले को दबा दिया ।</strong></p>
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		<title>&#8216;लहू&#8217; से सींचा है भाजपा कार्यकर्ताओं ने  बंगाल में &#8216;कमल&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 06:24:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;शाश्वत तिवारी लखनऊ। कुछ लोग आज भी इस गलतफहमी में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा को सत्ता चुनाव आयोग ने थाली में परोसकर दे दी। उन्हें लगता है&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/05/shashwatttt-226x300.jpg" alt="" class="wp-image-12096" style="width:143px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;शाश्वत तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong> <strong>कुछ लोग आज भी इस गलतफहमी में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा को सत्ता चुनाव आयोग ने थाली में परोसकर दे दी। उन्हें लगता है कि EVM, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को जिता गया। मगर ये बात कहने वाले न तो बंगाल की जमीन जानते हैं,न यहाँ की लड़ाई। क्योंकि बंगाल का कमल बैलेट से पहले खून से खिला है। 2011 से 2025 तक बंगाल में भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता मारे गए। किसी को बम से उड़ाया गया, किसी को पेड़ से लटकाया गया, किसी की लाश नदी में मिली।हजारों घर फूँक दिए गए। नंदीग्राम हो या बीरभूम, कूचबिहार हो या बशीरहाट, चुनाव के बाद &#8220;बदले&#8221; के नाम पर पूरे-पूरे गाँव खाली करवा दिए गए। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था। महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं तक को नहीं बख्शा गया। बलात्कार को राजनीतिक हथियार बनाया गया, ताकि यहां के लोगों में डर बिठाया जा सके। 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा पर हाईकोर्ट तक को CBI जांच का आदेश देना पड़ा।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="616" height="447" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/nandig6.png" alt="" class="wp-image-25304" style="width:749px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/nandig6.png 616w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/nandig6-300x218.png 300w" sizes="auto, (max-width: 616px) 100vw, 616px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सोचिए, जिस पार्टी के बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ से लटकी मिले, दोपहर को उसका बेटा उसी बूथ पर एजेंट बनकर बैठता है, वो मनोबल सिर्फ, ईवीएम से नहीं आता। जिस महिला का घर जला दिया गया, वो अगले चुनाव में फिर झंडा लेकर गली-गली घूमती है, वो हिम्मत चुनाव आयोग नहीं देता।&nbsp;बंगाल में, 34 साल के वाम शासन और फिर 15 साल के ममता राज के शासन में जो दहशत का माहौल बनाया गया, भाजपा के कार्यकर्ता ने उसे अपनी छाती पर झेला।मुकदमे, जेल, सामाजिक बहिष्कार, रोजगार छिनना- ये सब सहा</strong>। बंगाल में 15 साल की कठोर तपस्या के बाद, अब&nbsp; जाकर फूल खिला हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2011: 1 विधायक&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2016: 3 विधायक&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2019 लोकसभा: 18 सांसद, पूरे देश में हड़कंप&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2021 विधानसभा: 77 विधायक, मुख्य विपक्ष&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2024 लोकसभा: 20+ सीटें&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2026 विधानसभा: 207 सीट के साथ सत्ता हासिल की।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये ग्राफ एक दिन में नहीं बना। ये उन माँओं का इंतजार है जिन्होंने बेटों की तेरहवीं पर कसम खाई थी, कि ये लड़ाई रुकनी नहीं चाहिए। ये उन बस्तियों के हजारों लोगों का सब्र है, जो 10 साल रिलीफ कैंप में रहे, लाखों परेशानियां झेली पर मगर झुके नहीं। जो नासमझ, कहते हैं &#8220;चुनाव आयोग ने बंगाल जिता दिया&#8221;, वो उन कब्रों पर जाएँ जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े कार्यकर्ता सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख छूकर देखें। उन महिलाओं की आँखों में देखें जिन्होंने सबकुछ खोकर भी भाजपा (कमल) नहीं छोड़ी।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बंगाल में सत्ता किसी मशीन से नहीं मिली। </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यहाँ एक-एक वोट के पीछे एक-एक कुर्बानी है।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, लाशें गिनने के बाद, तब जाकर आज बंगाल में कमल खिला है। ये सत्ता दिल्ली से नहीं, बंगाल की गलियों से निकली है, और इसे कोई गलतफहमी में चुनाव आयोग का भाजपा को &#8220;गिफ्ट&#8221; कह दे, तो ये उन शहीदों का अपमान है, जिन्होंने बंगाल में लोकतंत्र की कीमत अपने प्राण देकर चुकाई हैं।</p>
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		<title>पीएम मोदी &#8216;मैजिक&#8217; Hit, ममता बनर्जी का &#8216;काला जादू&#8217; &#8216;Fail&#8217;</title>
		<link>https://thesundayviews.com/pm-modis-magic-hit-mamata-banerjees-black-magic-failed-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 May 2026 07:09:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bengal BJP Win Factor  : पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत का सबसे अहम फैक्टर पीएम मोदी का &#8216;मैजिक&#8217; रहा। पीएम नरेंद्र मोदी की बात बंगाल की जनता&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<h4 class="wp-block-heading">Bengal BJP Win Factor <strong> </strong>: पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत का सबसे अहम फैक्टर पीएम मोदी का &#8216;मैजिक&#8217; रहा। पीएम नरेंद्र मोदी की बात बंगाल की जनता के दिलों में बस गई और भाजपा को इसका फायदा मिला। ऊपर से पश्चिम बंगाल में भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं की लगातार हो रही चुनावी सभाओं ने भी चुनाव का रुख भाजपा का तरफ मोड़ दिया। बंगाल का &#8216;काला जादू&#8217; जो बेहद मशहूर है, जनता उसके हैंगआउट से बाहर आई और &#8216;मोदी मैजिक&#8217; पर ध्यान केंद्रित करने में सफल रही। वोट भाजपा के पक्ष में पड़े और यह चुनाव परिणामों में साफ नजर आया।</h4>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1023" height="889" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/hhh6.png" alt="" class="wp-image-25295" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/hhh6.png 1023w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/hhh6-300x261.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/hhh6-768x667.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1023px) 100vw, 1023px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br>वैसे पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस जीत के लिए जिस तरह से पार्टी के नेताओं ने कमर कसी, उतनी ही शिद्दत से पूरे चुनाव के दौरान पार्टी के पक्ष में हवा का रूख तैयार करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मेहनत की। वैसे भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में राजनीति की उपजाऊ जमीन तैयार करने के काम पार्टी की तरफ से बहुत पहले शुरू कर दिया गया था।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>नरेंद्र कप (फुटबॉल टूर्नामेंट) का आयोजन</strong></h4>



<h4 class="wp-block-heading">नरेंद्र कप (फुटबॉल टूर्नामेंट) का आयोजन यहां किया गया था। इस पुरुष फुटबॉल टूर्नामेंटमें 1200 टीमों ने भाग लिया और लगभग 18,000 खिलाड़ी सम्मिलित हुए। वहीं महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में कुल 253 महिला टीमों ने हिस्सा लिया। दोनों ही आयोजनों में 18 से 25 वर्ष की आयु के युवा सम्मिलित हुए।</h4>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="218" height="211" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/foo-2.png" alt="" class="wp-image-25298" style="aspect-ratio:1.0331778123379989;width:770px;height:auto"/></figure>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>पदयात्रा, पुष्पांजलि, तिरंगा वितरण</strong></h4>



<h4 class="wp-block-heading">इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत के रूप में पहचाने जाने वाले वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान पदयात्रा, पुष्पांजलि, तिरंगा वितरण, सामूहिक गायन तथा दीप प्रज्वलन जैसे आयोजन हुए। इसमें 1 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। यहां राज्य भर में भाजपा की तरफ से 9 परिवर्तन यात्रा आयोजित हुई। जिसमें 294 में से यहां के कुल 217 विधानसभा क्षेत्र कवर हुए। कुल 560 बड़े एवं छोटे कार्यक्रम में लगभग 7 लाख से अधिक लोग इससे जुड़े।</h4>



<h4 class="wp-block-heading"><br>बूथ सशक्तिकरण अभियान</h4>



<h4 class="wp-block-heading">इसके साथ ही भाजपा ने यहां बूथ सशक्तिकरण अभियान चलाया। यहां 70,671 बूथों पर बूथ समितियां बनाई गई एवं अन्य पर बूथ अध्यक्ष बनाए गए। इन बूथ समितियों पर 8,76,765 कार्यकर्ता नियुक्त किए गए। साथ ही वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव एवं वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के विश्लेषण के आधार पर 210 फोकस विधान सभाएं चिह्नित की गई। इसके साथ ही इसमें से सभी बूथों का विश्लेषण कर फोकस बूथ चिह्नित किए गए।</h4>



<h4 class="wp-block-heading"><br>बंगाल में अमित शाह की चार्जशीट</h4>



<h4 class="wp-block-heading">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह&nbsp;ने राज्य सरकार की विफलताओं एवं भ्रष्टाचार के मुद्दों पर राज्य स्तरीय आरोप-पत्र जारी किए। विधानसभा स्तर पर 220 विधानसभा क्षेत्रों में यह चार्जशीट जारी की गई। ताकि जनता इसके बारे में जान सके। पूरे बंगाल में महिला एवं युवा वर्ग के 2 करोड़ से अधिक भरोसा कार्ड भरे गए। महिलाओं के लगभग 1.60 करोड़ एवं युवाओं के 40 लाख फॉर्म भरवाए गए।</h4>



<h4 class="wp-block-heading"><br>रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव</h4>



<h4 class="wp-block-heading">श्रीरामनवमी, श्री हनुमान जन्मोत्सव एवं पोइला बैसाख के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा 6,250 स्थानों पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगठनों के प्रमुखों से संपर्क किया गया। 2 लाख से अधिक लोगों से इस दौरान संपर्क साधा गया। इसके साथ ही 21 प्रदेशों से 9,498 बंगाली प्रवासियों ने पश्चिम बंगाल आकर भाजपा के पक्ष में प्रचार में भाग लिया। प्रदेश भर में 8,315 शक्तिकेंद्र पर नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया।</h4>



<h4 class="wp-block-heading"><br>चाकरी चाई बांग्ला अभियान</h4>



<h4 class="wp-block-heading">इसके साथ ही 220 विधानसभाओं में रोजगार चाहने वाले युवाओं का पंजीकरण करने का अभियान &#8216;चाकरी चाई बांग्ला&#8217; चलाया गया। महिलाओं को भाजपा ने अपने पक्ष में करने के लिए बूथ पर महिलाओं की 1,96,000 ड्रॉइंग रूम बैठकें आयोजित की। साथ ही 19,250 क्लब एवं एनजीओ के सदस्यों से संपर्क किया गया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान 61 राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नेताओं के 288 सीटों पर 600 से अधिक कार्यक्रम हुए। भाजपा की तरफ से यहां &#8216;ब्रिगेड चलो&#8217; विशाल जनसभा कोलकाता में हुई, जिसमें 7.5 लाख लोगों की उपस्थिति रही। सोशल मीडिया पर भी इसको खूब प्रचारित किया गया।</h4>



<h4 class="wp-block-heading">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 9 चुनावी सभाएं हुई एवं 2 रोड शो</h4>



<h4 class="wp-block-heading">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए कुल 19 चुनावी सभाएं हुई एवं 2 रोड शो किए। झारग्राम में झालमुड़ी खाई, इसकी वीडियो को सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म पर 10 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। हुगली नदी में नौका विहार एवं ठनठनीया काली बड़ी मंदिर में दर्शन करके भी वहां की जनता को पीएम मोदी ने संदेश दिया।</h4>



<h4 class="wp-block-heading">अमित शाह ने कीं 40 सभाएं</h4>



<h4 class="wp-block-heading">भाजपा के पक्ष में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कुल 40 सभा, रोड शो कार्यक्रम हुए। इसके साथ उन्होंने 4 संगठनात्मक बैठकों में सभी 294 विधानसभाओं के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। गंगासागर में पूजा अर्चना एवं कपिल मुनि आश्रम में भी उनका इस दौरान जाना हुआ। जो पश्चिम बंगाल की जनता को साफ संदेश था कि वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए पुनः तैयार हो जाएं।<br></h4>







<p class="wp-block-paragraph">00:01&nbsp;/&nbsp;06:00</p>







<p class="wp-block-paragraph">Bengal Election Result 2026: जीत के बाद &#8216;बंगाली बाबू&#8217; बने मोदी, जानिए इस लुक की क्या थी खासियत ?</p>



<h4 class="wp-block-heading">नितिन नबीन भी डटे रहे</h4>



<h4 class="wp-block-heading">भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित केन्द्रीय नेताओं की कुल 128 विधानसभाओं में कार्यक्रम हुए। इसके साथ ही भाजपा के अन्य राज्यों के 9 मुख्यमंत्रियों की यहां कुल 101 सभाएं हुई। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के स्थानीय भाजपा नेताओं जैसे प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, मिथुन चक्रवर्ती, सुकांत मजूमदार एवं दिलीप घोष सहित 25 नेताओं के कुल 232 कार्यक्रम हुए।<br></h4>



<h4 class="wp-block-heading">बूथ स्तर तक नजर</h4>



<h4 class="wp-block-heading">इसके साथ हीं कोलकाता प्रेसीडेंसी में वार्ड स्तर पर वार्ड समितियों का गठन किया गया। साथ ही बूथ पर भाजपा के पक्ष में मतदान बढ़ाने के लिए पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के अलावा चिह्नित लोगों की टीम को लगाया गया। इन सबके साथ भाजपा ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए नैरेटिव भी तैयार किया, जिसमें &#8216;बाचते चाई, बीजेपी ताई&#8217;, &#8216;पलटानों दरकार चाई बीजेपी सोरकार&#8217; के साथ &#8216;भय आउट, भरोसा इन&#8217; जैसे स्लोगनों ने भाजपा के पक्ष में चुनाव का रुख मोड़ दिया।</h4>
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		<title>ममता का छोड़ा साथ, बने बीजेपी के &#8216;खास&#8217;, बंगाल में अब मुख्यमंत्री की &#8216;कुर्सी&#8217; के दावेदार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 May 2026 06:51:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Suvendu Adhikari election news : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत दर्ज की है। राज्य की 294 सीटों में से 206 पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong><strong>Suvendu Adhikari election news :</strong> </strong>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत दर्ज की है। राज्य की 294 सीटों में से 206 पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार को उखाड़ फेंका है। इसमें तृणमूल कांग्रेस के कभी पोस्टर ब्वॉय रहे और नंदीग्राम में ममता बनर्जी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का प्रमुख चेहरा सुवेंदु अधिकारी की अहम भूमिका रही है। सुवेंदु अधिकारी का बीजेपी में शामिल होना और एक दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरना जितना नाटकीय है, उतना ही उल्लेखनीय भी है। वहीं इन सबसे अलग सुवेंदु की बंगाल की दो सीटों पर प्रचंड जीत उनको मुख्यमंत्री की कुर्सी का प्रमुख दावेदार साबित करती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="704" height="610" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/subhandu-2.png" alt="" class="wp-image-25292" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/subhandu-2.png 704w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/subhandu-2-300x260.png 300w" sizes="auto, (max-width: 704px) 100vw, 704px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सुवेंदु की जीत के मायने ?<br></strong>सुवेंदु अधिकारी ने न केवल नंदीग्राम में ममता के खिलाफ फिर से जीत हासिल की, बल्कि उन्हें 2021 के मुकाबले कहीं बड़े अंतर (1956 की तुलना में 9,665 मतों के अंतर से) से भी हराया। यही नहीं उन्होंने तृणमूल सुप्रीमो को उनके गढ़ भवानीपुर में भी 15105 वोट के भारी अंतर से शिकस्त दी। जो एक ऐसे राजनीतिक बदलाव की ओर से इशारा करता है, जिसकी कल्पना कम ही लोगों ने की होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार बने सुवेंदु</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि सुवेंदु अधिकारी की यह दोहरी सफलता और अपने गढ़ पूर्व मेदिनीपुर की सभी 16 सीट पर तृणमूल की करारी हार और बीजेपी की जीत सुनिश्चित करना, उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार बनाता है। हालांकि बीजेपी ने घोषणा की थी कि उसका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार वह व्यक्ति होगा, जो बंगाल में जन्मा और पला-बढ़ा हो और जिसने बांग्ला माध्यम में शिक्षा हासिल की हो, लेकिन पार्टी ने इस पद के लिए अभी तक सुवेंदु या किसी अन्य नेता का नाम आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बीजेपी की कसौटी पर खरे हैं सुवेंदु</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">दिलचस्प बात यह है कि सुवेंदु अधिकारी उन सभी कसौटी पर खरे उतरते हैं, जिनका जिक्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे में वांछित बताई थी। एक समय में ममता के सबसे करीबी सहयोगियों में शुमार सुवेंदु अधिकारी आज उनके लिए संभवत: सबसे दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। इस प्रक्रिया में उन्होंने न केवल अपने सियासी भविष्य को नया आकार दिया, बल्कि शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास भी जीता।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सुवेंदु का राजनीतिक उभार ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में सुवेंदु अधिकारी का उभरना उनकी आक्रामक शैली और कानून-व्यवस्था, घुसपैठ और तृणमूल कांग्रेस के शासन में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर उनके मजबूत रुख पर आधारित है। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन का अधिकांश समय मुख्य रूप से कृषि प्रधान पूर्व मेदिनीपुर जिले के तटीय और औद्योगिक क्षेत्रों में दबदबा कायम करने में बिताया। हालांकि, 2020 में वह तृणमूल कांग्रेस से अलग हो गए।<br><br><strong>बीजेपी में आते ही कैसे बदले सुवेंदु ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सुवेंदु अधिकारी का बीजेपी में शामिल होना बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ और वह जल्द ही राज्य में पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में स्थापित हो गए।<br>सुवेंदु का सबसे बड़ा राजनीतिक दांव 2021 में नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में ममता को चुनौती देना था, जहां उनकी जीत ने उन्हें पूरे राज्य लोकप्रियता दिलाई। उस जीत ने न केवल दशकों से इस क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय सुवेंदु परिवार के प्रभुत्व को मजबूत किया, बल्कि उनके बड़े बेटे को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद तक भी पहुंचा दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>टीएमसी के खिलाफ सख्त रूख</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बीजेपी की विचारधाराओं के अनुरूप ढलने और भविष्य में पार्टी में अहम पद हासिल करने के लिए सुवेंदु अधिकारी ने भूमि अधिग्रहण आंदोलन के एक समावेशी नेता से अपनी छवि को हिंदुत्व ब्रिगेड के प्रतीक के रूप में बदलने का काम किया। उन्होंने दावा किया कि अगर तृणमूल चुनाव जीतती है, तो वह पश्चिम बंगाल को पूर्वी बांग्लादेश बना देगी।<br><br><strong>आरएसएस से जुड़ाव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान आरएसएस की शाखाओं में प्रशिक्षित सुवेंदु ने 1980 के दशक के अंत में कांग्रेस के छात्र संगठन ‘छात्र परिषद’ के सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1995 में पहली बार चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाई और कांथी नगरपालिका के पार्षद चुने गए, जिसका नेतृत्व उनके पिता शिशिर अधिकारी ने 1967 से 2009 तक किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे टीएमसी के शीर्ष नेता बने सुवेंदु?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सुवेंदु अधिकारी 1999 में अपने पिता के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार असफल रहे। 2001 के विधानसभा चुनाव और 2004 के लोकसभा चुनाव में। अंततः सुवेंदु अधिकारी को 2006 में सफलता मिली, जब उन्होंने कोंटाई विधानसभा सीट जीती। साल 2007 में नंदीग्राम में हुए कृषि भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया और सुवेंदु को तृणमूल की अग्रणी पंक्ति में ला खड़ा किया।<br><br><strong>अभिषेक बनर्जी की एंट्री से बदला गणित</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सुवेंदु अधिकारी जल्द ही तृणमूल के ‘कोर ग्रुप’ के सदस्य बन गए और उन्हें पार्टी की युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2009 और 2014 में उन्होंने तामलुक से लोकसभा चुनाव जीता। ममता के 2011 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद ज्यादातर लोगों ने सुवेंदु ने उन्हें उनके उत्तराधिकारी के रूप में देखा। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच अविश्वास का बीजारोपण उसी साल 21 जुलाई को तृणमूल की पहली वार्षिक शहीद दिवस रैली में हुआ, जब ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के राजनीति में प्रवेश की घोषणा की।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सुवेंदु ने क्यों चुनी अलग राह?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">उस समय मात्र 24 साल के अभिषेक को तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया जो टीएमसी युवा कांग्रेस के समानांतर संगठन था। इस फैसले से अधिकारी बेहद नाराज थे क्योंकि पार्टी के संविधान में दो युवा संगठनों के लिए कोई जगह नहीं थी। साल 2014 में सुवेंदु को तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और कुछ महीनों बाद इस संगठन का युवा कांग्रेस में विलय कर दिया गया।</p>
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		<title>नतीजों से पहले &#8216;विजय जश्न&#8217;: भाजपा के जुलूस और अबीर खेल पर बंगाल में मचा सियासी घमासान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 May 2026 07:32:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने में अभी कुछ घंटे बाकी हैं, लेकिन उससे पहले ही राज्य के कई हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%ad/">नतीजों से पहले &#8216;विजय जश्न&#8217;: भाजपा के जुलूस और अबीर खेल पर बंगाल में मचा सियासी घमासान</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्यूरो, कोलकाता</strong>। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने में अभी कुछ घंटे बाकी हैं, लेकिन उससे पहले ही राज्य के कई हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विजय जुलूस निकालना शुरू कर दिया है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है, जहां एक ओर भाजपा खेमे में उत्साह दिख रहा है, वहीं सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इसे लेकर तीखा तंज कसा है।रविवार शाम से ही पुरुलिया समेत कई इलाकों में भाजपा समर्थकों को गेरुआ अबीर खेलते और जश्न मनाते देखा गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="786" height="413" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/bjp-f.png" alt="" class="wp-image-25285" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/bjp-f.png 786w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/bjp-f-300x158.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/bjp-f-768x404.png 768w" sizes="auto, (max-width: 786px) 100vw, 786px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">पुरुलिया शहर में भाजपा प्रत्याशी और निवर्तमान विधायक सुदीप मुखोपाध्याय सिर पर कमल का प्रतीक लेकर ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते नजर आए। यह दृश्य तेजी से इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गया और चुनाव परिणाम से पहले ऐसे जश्न को लेकर सवाल भी उठने लगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुदीप मुखोपाध्याय ने कहा कि जिले में शांतिपूर्ण मतदान हुआ है और बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाला है, जिसके लिए वे जनता का धन्यवाद कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी जीत तय है, इसलिए कार्यकर्ताओं का उत्साह स्वाभाविक है। सिर्फ पुरुलिया ही नहीं, पश्चिम मेदिनीपुर के घाटाल में भी भाजपा प्रत्याशी शीतल कपाट को समर्थकों के साथ जश्न मनाते देखा गया। यहां भी गेरुआ अबीर खेला गया और विजय उत्सव जैसा माहौल बना।</p>



<h4 class="wp-block-heading">परिणाम आने से पहले ही जीत का दावा करना जल्दबाजी : टीएमसी</h4>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि परिणाम आने से पहले ही जीत का दावा करना जल्दबाजी है। घाटाल की तृणमूल प्रत्याशी श्यामली सरदार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हार का अंदेशा होने के कारण विपक्षी उम्मीदवारों का संतुलन बिगड़ गया है, इसलिए वे इस तरह के कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी काम में विश्वास रखती है और असली जवाब जनता परिणाम के दिन देगी।</p>



<h4 class="wp-block-heading">चुनाव आयोग ने भी मुद्दे को गंभीरता से लिया</h4>



<p class="wp-block-paragraph">इधर, चुनाव आयोग ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि मतगणना के दिन विजय जुलूस की अनुमति होगी या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की जाएगी। आयोग को पहले ही विभिन्न जिलों से संभावित अशांति को लेकर अलर्ट किया गया है।अब सबकी नजरें सोमवार सुबह आठ बजे से शुरू होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि राज्य में सत्ता में बदलाव होगा या तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखेगी।</p>
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		<title>पत्रकारों की सुरक्षा से समझौता नहीं, जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन कानून जरूरी: सबीना इंद्रजीत </title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:07:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बैठक देश के सभी राज्यों व नेपाल से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट (I F J) के चुनाव&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>बैठक देश के सभी राज्यों व नेपाल से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट (I F J) के चुनाव पर विमर्श किया गया।</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/03/dhanish-srivastava-273x300.jpg" alt="" class="wp-image-11807" style="aspect-ratio:0.9099479166666666;width:136px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>DHANISH SRIVASTAVA</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>IJU news hindi:</strong> भारतीय पत्रकार संघ के अधिशासी परिषद की बैठक आज केरल के कोझिकोड जिले में संपन्न हुई। जिसमें&nbsp; देश के सभी राज्यों व नेपाल से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के तीन दिवसीय सत्रों में मुख्य रूप से पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने और सोशल मीडिया के दौर में खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260426-WA0011-1024x449.jpg" alt="" class="wp-image-12044"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>केरल के कोझीकोड मेयर व सांसद ने किया उद्घाटन&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कोझीकोड के मेयर ओ. सदाशिवन थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद एमके राघवन उपस्थित रहे। अपने संबोधन में सदाशिवन ने कहा कि पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही पत्रकारों के वेलफेयर के लिए नई योजनाओं को लागू किया जाना चाहिए। बैठक में सांसद राघवन ने सोशल मीडिया के प्रसार पर चर्चा की। कहा कि आज सोशल मीडिया का प्रसार अत्यधिक हो गया है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए। साथ ही वर्किंग जर्नलिस्ट्स के लिए सोशल मीडिया की भ्रामक पोस्ट्स के बीच ऑथेंटिक न्यूज़ आम जनता तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तीन दिवसीय बैठक में पत्रकारिता की दशा और दिशा पर हुआ मंथन&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक के द्वितीय सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष गीतार्थ पाठक ने पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कई घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें पत्रकारों का उत्पीड़न किया गया था। राष्ट्रीय महासचिव व इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स की पदाधिकारी सबीना इंद्रजीत ने संगठन के कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनेक घटनाओं का जिक्र करते हुए पत्रकारों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>I F J पदाधिकारी सबीना इंद्रजीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामले उठाने का दिया आश्वासन&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अपने संबोधन में दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार सबीना इंद्रजीत ने विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों से उनके राज्यों में पत्रकारों की स्थिति पर रिपोर्ट ली। जिसके आधार पर वर्किंग जर्नलिस्ट्स की समस्याओं पर प्रकाश डाला। कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून वर्तमान दौर की पहली जरूरत है। इसके अलावा मीडिया घरानों के कड़े होते मानदंडों के बीच पत्रकारों के हितों की रक्षा करने के लिए भारतीय पत्रकार संघ प्रतिबद्ध है। इन विषयों को इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (international federation of journalists) के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भी उठाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने I F J के आगामी चुनाव पर भी चर्चा की।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260426-WA0010-216x300.jpg" alt="" class="wp-image-12045"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>यूपी से डाॅ. शैलेश कुमार पांडेय ने उजागर की पत्रकारों की स्थिति&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय पत्रकार संघ के राष्ट्रीय सचिव डॉ. शैलेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में चंद्र प्रकाश शुक्ला, आरडी बाजपेई सहित अन्य पदाधिकारियों ने यूपी में पत्रकारों की स्थिति से प्रतिनिधियों को अवगत कराया। अपने संबोधन में राष्ट्रीय सचिव डॉ. शैलेश कुमार पांडेय ने कहा कि वर्तमान दौर में संगठित पत्रकार ही अपने हितों की रक्षा कर सकते हैं। कॉरपोरेट कल्चर ने पत्रकारों की सेवा शर्तों को इतना सख्त कर दिया है कि पत्रकार तनाव में रहता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि यूपी में संगठन को मजबूती से खड़ा करने की दिशा में कार्य चल रहा है। इसी क्रम में द संडे व्यूज डिजिटल के एडिटोरियल कंटेंट हेड, जर्नलिस्ट धनीष श्रीवास्तव को भारतीय पत्रकार संघ में शामिल कराया गया है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सम्मान पत्र व स्मृति चिन्ह के साथ समापन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सत्र के तीसरे दिन अनौपचारिक बैठक हुई, जिसमें सभी पदाधिकारियों ने खुलकर अपनी बातें रखीं। बैठक के उपरांत देशभर से आए पत्रकारों को स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र प्रदान किया गया। बैठक के आयोजन के लिए केरल जर्नलिस्ट्स यूनियन को धन्यवाद ज्ञापित किया। गौरतलब है कि भारतीय पत्रकार संघ देश के सबसे पुराने संगठनों में से एक है तथा इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (I F J) से संबद्ध है।</p>
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		<title>प्रसंगवश : नारी शक्ति वंदन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 06:24:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आधी आबादी को अधिकार देने के विरुद्ध भारत का विपक्ष डॉ अर्चना तिवारी (लेखिका प्रख्यात शिक्षाविद और स्त्री विमर्श की राष्ट्रवादी चिंतक हैं) Women reservation bill news: भारत की संसद&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>आधी आबादी को अधिकार देने के विरुद्ध भारत का विपक्ष</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/dr-archna-tiweri-266x300.jpg" alt="" class="wp-image-11997" style="aspect-ratio:0.8866145833333333;width:140px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"> <strong>डॉ अर्चना तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>(लेखिका प्रख्यात शिक्षाविद और स्त्री विमर्श की राष्ट्रवादी चिंतक हैं)</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Women reservation bill news:</strong> भारत की संसद में कल जो कुछ हुआ,उसे केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के लोगों ने ठीक से देखा। भारत की संसद में उपस्थित दृश्य ने चीख चीख कर संदेश दिया कि भारत की विपक्षी पार्टियों को भारत की महिलाओं का सशक्तिकरण अच्छा नहीं लगता। जिस तरह महिला आरक्षण का विधेयक कल संसद में गिरा है उससे भारत की सभी महिलाओं को बहुत निराशा हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार बार कहते रहे कि इस कानून को पास होने दीजिए। इसके पास न होने से मेरा कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन पास हो जाने से भारत की आधी आबादी को उसका वर्षों से लंबित अधिकार मिल जाएगा। भारत के विपक्ष को भारत के प्रधानमंत्री की यह अपील बिल्कुल पसंद नहीं आई जबकि प्रधानमंत्री ने यहां तक कहा कि यदि कानून पास होता है तो वह इसका क्रेडिट विपक्ष को देने के लिए इश्तहार प्रकाशित कराएंगे। विपक्ष को नहीं मानना था, वह नहीं माना और भारत की नारी शक्ति की आस टूट गई। संसद के तीन दिवसीय विशेष के दौरान महिला आरक्षण 131वें संशोधन बिल को पास नहीं कराया जा सका।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="583" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/vv8-1024x583.jpg" alt="" class="wp-image-25169" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/vv8-1024x583.jpg 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/vv8-300x171.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/vv8-768x437.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/vv8.jpg 1173w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों के ऊपर शुक्रवार की शाम को हुई वोटिंग में पक्ष में सिर्फ 298 वोट ही पड़े। यानी 50 प्रतिशत आबादी की उम्मीद को बड़ा झटका लगा । बिल गिरने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि कुल वोट 528 पड़े, जिनमें से इसके पक्ष में 298 और ना में 230 वोट पड़े। पहले राउंड में कुल 489 वोट पड़े जिनमें पक्ष में 278 और खिला में 211 वोट पड़े. इस बिल को दो तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी, यानी जरूरत से 54 वोट कम पड़े। इससे पहले, महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की, तो वहीं विपक्ष ने इसे लेकर गंभीर आपत्तियां उठाईं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस सदन में 543 सांसद बैठते है। किसी के संसदीय क्षेत्र में मतदाता की संख्या 49 लाख तो किसी के यहां 60 हज़ार है। कई सीटें इतनी बड़ी हो गई हैं कि सांसद उनसे मिल भी नहीं पाता है। मतदाताओं की अपेक्षा होती है, वो सांसद से मिलना चाहता है.उन्होंने कहा कि क्या जो लोग विरोध कर रहे हैं, वो मुझे समझा सकता है कि जिनके यहां 49 लाख मतदाता हो, वो अपने ज़िम्मेदारी का निर्वाहन कैसे करता होगा ? इसी को ध्यान में रखते हुए संविधान में समय समय पर परिसीमन का प्रावधान है। अब भारत के नेता प्रतिपक्ष की दलील सुनिए। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बिल को छलावा करार दिया और कहा कि यह बिल यहीं गिर जाएगा। पता नहीं किस आधार पर उन्होंने दावा किया कि यह वास्तव में महिलाओं के हित में लाया गया विधेयक नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि 2023 में जो महिला आरक्षण बिल पास हुआ था, उसी समय सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने संकेत दिया था कि इसे लागू करने में लंबा समय लग सकता है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने ने महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरीके से इस बिल को लागू करने की कोशिश की जा रही थी, वह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन&nbsp; करके महिला आरक्षण लागू करना गलत है, खासकर तब जब इसमें ओबीसी (obc) वर्ग को शामिल नहीं किया गया. उनके मुताबिक, इस वजह से कांग्रेस इस बिल का समर्थन नहीं कर सकती थी। बहरहाल, भारत की संसद में भारत की नारी शक्ति को सशक्त बनाने का यह बिल पास नहीं हो सका। भारत में महिला आरक्षण का इतिहास लगभग चार दशकों के राजनीतिक संघर्ष का परिणाम है, जो 1996 में शुरू हुआ और सितंबर 2023 में &#8220;नारी शक्ति वंदन अधिनियम&#8221; (106वां संवैधानिक संशोधन) के रूप में पास हुआ। यह ऐतिहासिक कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33&nbsp;प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करता है, जो परिसीमन के बाद लागू होगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph">अब यह जरूरी हो जाता है कि भारत में महिला आरक्षण के इतिहास के प्रमुख घटनाक्रम पर दृष्टि डाली जाय। सबसे पहले 1993 में इसकी नींव पड़ी थी। उस समय 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 1/3 सीटों का आरक्षण अनिवार्य किया गया। वर्ष 1996 में पहली कोशिश की गई। उस साल 12 सितंबर, 1996 को एचडी देवगौड़ा सरकार ने 81वां संविधान संशोधन विधेयक पहली बार पेश किया, लेकिन आम सहमति न बनने के कारण यह पास नहीं हो सका। वर्ष 1998-2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में प्रयास हुए। वाजपेयी सरकार ने चार बार इस बिल को लाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक विरोध के चलते यह हर बार लैप्स&nbsp; हो गया। 2008-2010 में यूपीए सरकार में भी कुछ प्रयास किए गए। वर्ष 2008 में विधेयक फिर पेश किया गया और 2010 में इसे भारी गहमागहमी के बीच राज्यसभा में पारित कराया गया, लेकिन लोकसभा में यह नहीं लाया जा सका। </p>



<p class="wp-block-paragraph">अब आया वर्ष 2023 जब यह बिल ऐतिहासिक रूप से पारित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा 19 सितंबर, 2023 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम ,128वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया। 20 सितंबर, 2023 को यह विधेयक लोकसभा में 454 मतों के समर्थन के साथ पारित हुआ और बाद में राज्यसभा से भी पास हो गया। इस कानून की मुख्य बातें यह हैं कि यह 15 वर्षों के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है। इसमें अनुसूचित जाति (sc) और अनुसूचित जनजाति (st) के लिए आरक्षित सीटों में से भी 1/3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। उसी समय यह तय हुआ था कि यह कानून परिसीमन  और जनगणना के बाद लागू होगा। भारत की महिलाओं के लिए यह वास्तव में एक बड़ा झटका तो है, लेकिन प्रतीक्षा करने में कोई हर्ज नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की भावनाओं और संकल्पशक्ति पर भरोसा रखिए, यह अधिकार बहुत जल्दी मिलेगा। <strong>वंदे मातरम&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई करेगा मानवाधिकार आयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 06:48:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ब्यूरो, लखनऊ।&#160;राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठों पर कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी कराए जाने के 216 मामलों की 16 अप्रैल को ऑनलाइन सुनवाई करेगा।ये शिकायतें प्रदेश&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्यूरो, लखनऊ।</strong>&nbsp;राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठों पर कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी कराए जाने के 216 मामलों की 16 अप्रैल को ऑनलाइन सुनवाई करेगा।ये शिकायतें प्रदेश के विभिन्न जिलों से संबंधित हैं। सुनवाई के राज्य स्तरीय अधिकारियों से लेकर संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों तक को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।</p>


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<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/ss6.jpg" alt="" class="wp-image-11982"/></figure>
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<p class="wp-block-paragraph">एनएचआरसी के चेयरपर्सन जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम इस वर्चुअल सुनवाई की अध्यक्षता करेंगे। सुनवाई में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव या उनके द्वारा नामित अधिकारी, श्रम आयुक्त और सभी संबंधित डीएम को मौजूद रहने के लिए कहा गया है। अधिकारियों से बंधुआ मजदूरों की पहचान, रिहाई, स्किलिंग और रिहैबिलिटेशन के साथ ई-श्रम पोर्टल पर उनके रजिस्ट्रेशन के लिए की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की भी अपेक्षा की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राब्यू, जागरण, लखनऊ: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठों पर कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी कराए जाने के 216 मामलों की 16 अप्रैल को आनलाइन सुनवाई करेगा। ये शिकायतें प्रदेश के विभिन्न जिलों से संबंधित हैं। सुनवाई के राज्य स्तरीय अधिकारियों से लेकर संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों तक को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। एनएचआरसी के चेयरपर्सन जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम इस वर्चुअल सुनवाई की अध्यक्षता करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुनवाई में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव या उनके द्वारा नामित अधिकारी, श्रम आयुक्त और सभी संबंधित डीएम को मौजूद रहने के लिए कहा गया है। अधिकारियों से बंधुआ मजदूरों की पहचान, रिहाई, स्किलिंग और रिहैबिलिटेशन के साथ ई-श्रम पोर्टल पर उनके रजिस्ट्रेशन के लिए की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की भी अपेक्षा की गई है।</p>
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		<title>एक ऐसी कहानी जिसमें दीवारें &#8216;खामोश&#8217; हैं, लेकिन &#8216;स्क्रीन&#8217; बोल रही…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 14:46:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शाश्वत तिवारी लेखक राजनीतिक विश्लेषक West bengal news: पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही अपनी तीव्रता, वैचारिक टकराव और जनभावनाओं के उभार के लिए जानी जाती रही है। कभी&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/¢A-de´dee¢A-212x300.jpg" alt="" class="wp-image-11940" style="aspect-ratio:0.7066145833333334;width:127px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शाश्वत तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेखक राजनीतिक विश्लेषक</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>West bengal news:</strong> पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही अपनी तीव्रता, वैचारिक टकराव और जनभावनाओं के उभार के लिए जानी जाती रही है। कभी यह लड़ाई विचारधाराओं की होती थी, कभी सड़क पर उतरकर नारे और जुलूसों की, और कभी दीवारों पर उकेरे गए चित्रों और पोस्टरों की। लेकिन आज, यह संघर्ष एक नए मंच पर स्थानांतरित हो चुका है, डिजिटल प्लेटफॉर्म, जहां युद्ध का मैदान मतदाताओं के मोबाइल फोन की स्क्रीन बन गया है।यह परिवर्तन केवल माध्यम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह राजनीति के चरित्र, रणनीति और मतदाता व्यवहार में एक गहरा और स्थायी परिवर्तन है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="589" height="388" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/w-bengal.jpg" alt="" class="wp-image-25101" style="aspect-ratio:1.5180620997946115;width:730px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/w-bengal.jpg 589w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/04/w-bengal-300x198.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 589px) 100vw, 589px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">एक समय था जब चुनावी मौसम आते ही कोलकाता की दीवारें रंग-बिरंगे पोस्टरों, नारे और राजनीतिक चित्रों से पट जाती थीं। हर गली, हर चौराहे पर दीवारें बोलती थीं। वे केवल ईंट-पत्थर नहीं थीं, बल्कि वे राजनीतिक संवाद का माध्यम थीं। लेकिन आज वही दीवारें अपेक्षाकृत शांत हैं, क्योंकि प्रचार का केंद्र अब डिजिटल स्पेस में शिफ्ट हो चुका है।अब राजनीतिक दलों को दीवारों पर जगह की कमी नहीं खलती, क्योंकि उन्होंने मतदाताओं की जेब में मौजूद स्मार्टफोन को अपना सबसे प्रभावी माध्यम बना लिया है। फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म अब नए “चुनावी पोस्टर” बन चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और माकपा, सभी दलों ने डिजिटल प्रचार को अपनी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बना लिया है। हर पार्टी ने अपनी “डिजिटल सेना” तैयार की है, जो 24 घंटे सक्रिय रहती है।फेसबुक पर लक्षित विज्ञापन, व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से संदेशों का प्रसार, इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो, यूट्यूब पर भाषण और डॉक्यूमेंट्री ट्विटर पर ट्रेंड और नैरेटिव निर्माण। यह सब मिलकर एक ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम बना रहे हैं, जिसमें मतदाता लगातार राजनीतिक संदेशों से घिरा रहता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा प्रभाव मतदाता के व्यवहार पर पड़ा है। पहले मतदाता केवल सुनने वाला था, सभाओं में जाता था, भाषण सुनता था और फिर अपना निर्णय करता था। लेकिन आज का मतदाता केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि कंटेंट का निर्माता और प्रसारक भी बन चुका है।वह वीडियो शेयर करता है, वह पोस्ट पर टिप्पणी करता है, वह अपने विचार व्यक्त करता है, वह ट्रेंड्स को प्रभावित करता है। इस प्रकार, मतदाता अब राजनीतिक प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बन गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेख की शुरुआत में हमने जिस महत्वपूर्ण बिंदु को उठाया, “अब वह समय बीत गया, जब घर की महिलाएं कहती थीं कि वे राजनीति नहीं समझतीं”, वह इस बदलाव का सबसे सशक्त उदाहरण है।आज महिलाएं, व्हाट्सएप ग्रुप्स में राजनीतिक चर्चा करती हैं, फेसबुक और यूट्यूब पर नेताओं के भाषण देखती हैं, अपने विचार साझा करती हैंऔर कई बार परिवार के वोटिंग निर्णय को भी प्रभावित करती हैं। डिजिटल माध्यम ने उन्हें केवल सूचना ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम बंगाल की आबादी में युवाओं का बड़ा हिस्सा है, और यही वर्ग डिजिटल प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता भी है। औसतन तीन घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताने वाला यह वर्ग अब राजनीतिक दलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण टारगेट बन चुका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजनीतिक दल युवाओं को आकर्षित करने के लिए, मीम्स और वायरल कंटेंट का उपयोग कर रहे हैं, शॉर्ट वीडियो के माध्यम से संदेश दे रहे हैं।इन्फ्लुएंसर्स को जोड़ रहे हैं, और रोजगार, शिक्षा जैसे मुद्दों को डिजिटल भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं यह “डिजिटल पॉलिटिक्स” युवाओं के मानस को सीधे प्रभावित कर रही है।डिजिटल प्रचार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह “वन साइज फिट्स ऑल” नहीं है। अब हर मतदाता को उसकी पसंद, उसकी भाषा, उसकी उम्र और उसके सामाजिक-आर्थिक वर्ग के अनुसार संदेश भेजा जा सकता है। इसे “माइक्रो-टारगेटिंग” कहा जाता है। उदाहरण के लिए, किसानों को कृषि योजनाओं से जुड़े विज्ञापन, युवाओं को रोजगार और स्टार्टअप से जुड़े संदेश, महिलाओं को सुरक्षा और कल्याण योजनाओं की जानकारी। इस प्रकार, हर मतदाता को “पर्सनलाइज्ड” राजनीतिक संदेश मिल रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म ने राजनीति को सरल और व्यापक बनाया है, वहीं यह कई गंभीर चुनौतियां भी लेकर आया है। सबसे बड़ी चुनौती है, फेक न्यूज़ और प्रोपेगेंडा, जिससे झूठी खबरें तेजी से फैलती हैं, वीडियो और तस्वीरों को एडिट कर भ्रम फैलाया जाता है, नेता/पार्टी/ प्रत्याशी को बदनाम करने के लिए अफवाहें चलाई जाती हैं। इसका असर यह होता है कि मतदाता कई बार गलत जानकारी के आधार पर सही/ गलत का निर्णय नहीं कर पाते है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डिजिटल प्रचार ने चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही नैतिकता और जवाबदेही के प्रश्न भी खड़े हो गए हैं। जैसे, क्या डेटा का दुरुपयोग हो रहा है ? क्या मतदाताओं की गोपनीयता सुरक्षित है ? क्या चुनावी खर्च का सही हिसाब रखा जा रहा है ? ये सभी सवाल आज के चुनावी परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं। हालांकि डिजिटल प्रचार तेजी से बढ़ा है, लेकिन यह भी सच है कि अभी भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल पहुंच में अंतर है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शहरों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच अधिक है, गांवों में अभी भी सीमित संसाधन हैंलेकिन यह अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है, और आने वाले समय में यह पूरी तरह समाप्त हो सकता है। डिजिटल प्रचार ने राजनीति को “वर्चुअल” बना दिया है। अब, रैलियां ऑनलाइन हो रही हैं, भाषण लाइव स्ट्रीम हो रहे हैं, नेता सीधे मतदाताओं से जुड़ रहे हैं। इससे राजनीति अधिक सुलभ और त्वरित हो गई है, लेकिन इसके साथ ही “जमीनी संपर्क” की कमी का खतरा भी बढ़ा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल एक राज्य का चुनाव नहीं है, बल्कि यह भारत में भविष्य की राजनीति की दिशा का संकेत भी है। आने वाले समय में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रचार, वर्चुअल रियलिटी रैलियां और अधिक उन्नत डेटा एनालिटिक्स, राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं। इस बदलते समय की राजनीति से पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में प्रचार का यह बदलता स्वरूप हमें यह बताता है कि राजनीति अब केवल सड़कों और सभाओं तक सीमित नहीं रही। यह अब हर व्यक्ति के हाथ में मौजूद एक छोटे से उपकरण, स्मार्टफोन के माध्यम से संचालित हो रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह परिवर्तन अवसर भी है और चुनौती भी। अवसर इसलिए कि यह लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बना सकता है। चुनौती इसलिए कि यह भ्रम, प्रोपेगेंडा और नैतिक संकट को भी जन्म दे सकता है। अंततः यह मतदाता पर निर्भर करता है कि वह इस डिजिटल सूचना के सागर में से सत्य को कैसे पहचानता है और अपने मताधिकार का प्रयोग किस प्रकार करता है।</p>
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