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	<title>उत्तराखंड Archives - The Sunday views</title>
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	<description>Daily Hindi News</description>
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	<title>उत्तराखंड Archives - The Sunday views</title>
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		<title>केदारनाथ धाम में बर्फ से ढकी पहाड़ियां, उत्तराखंड में और बढ़ गई ठंड&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 03:51:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Dehradoon news: उत्तराखंड में पिछले दो दिनों से बर्फबारी हो रही है, जिसके चलते ठंड में इजाफा हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल,&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Dehradoon news:</strong> उत्तराखंड में पिछले दो दिनों से बर्फबारी हो रही है, जिसके चलते ठंड में इजाफा हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल, चंपावत, पौड़ी और देहरादून के मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं घना कोहरा छाया रहेगा। हरिद्वार और उधम सिंह नगर में कहीं-कहीं शीत दिवस की स्थिति बनी रह सकती है, जिसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="637" height="404" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/01/dehracool.png" alt="" class="wp-image-24557" style="aspect-ratio:1.5767549796944498;width:776px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/01/dehracool.png 637w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/01/dehracool-300x190.png 300w" sizes="(max-width: 637px) 100vw, 637px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br>उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में नए साल के दूसरे दिन मौसम का मिजाज बदला और ऊंचाई वाले स्थान पर बर्फबारी हुई है।शुक्रवार की सुबह केदारनाथ धाम में मौसम ठीक था, लेकिन दोपहर बाद मौसम ने करवट ली और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी होने लगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उधर, बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब में भी हल्की बर्फबारी हुई है। आसपास की चोटियों पर भी बर्फ नजर आ रही है। पिथौरागढ़ के मुनस्यारी तहसील के नंदा देवी, नंदा कोट, त्रिशूल और पंचाचुली की चोटियों पर भी बर्फबारी होती रही है। मौसम ठीक होने के बाद ऊंची चोटियां बर्फ से ढकी दिखाई दीं। लिपुलेख, नवीढांग, गुंजी, कुटी और आदिकैलाश में भी हल्का हिमपात हुआ है। बागेश्वर जनपद के कपकोट तहसील की ऊंचाई वाले इलाकों में बूंदाबांदी के साथ बर्फबारी हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जहां उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंचाई वाले स्थान पर कहीं-कहीं बर्फबारी हुई है, तो वहीं मैदानी क्षेत्रों में दोपहर के समय तक कोहरा छाया रहा। जिसके कारण दृश्यता प्रभावित हुई और इसका असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। देहरादून हवाई अड्डे पर अहमदाबाद, दिल्ली, बेंगलुरु सहित विभिन्न शहरों से आने वाली साथ उड़ानें देरी से पहुंचीं।<br><br>देहरादून का अधिकतम तापमान 21.3 और न्यूनतम तापमान 7.7 डिग्री सेल्सियस रहा। उधम सिंह नगर का अधिकतम तापमान 13.6 और न्यूनतम तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस रहा। मुक्तेश्वर का अधिकतम तापमान 12.7 और न्यूनतम तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस रहा। नई टिहरी का अधिकतम तापमान 14.6 और न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।<br><br>मौसम विज्ञान केंद्र ने आज से मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। 5 जनवरी को एक बार फिर मौसम बदलने की संभावना है। इसके बाद 6 और 7 जनवरी को प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा। हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, चंपावत, पौड़ी और देहरादून जनपदों के मैदान में इलाकों में कहीं-कहीं घना कोहरा छाया रहेगा, जबकि हरिद्वार और उधम सिंह नगर में कहीं-कहीं शीत दिवस की स्थिति को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। पर्वतीय क्षेत्र में कहीं-कहीं पाला पड़ने के आसार हैं। मैदानी क्षेत्रों में कोहरा और पर्वतीय इलाकों में पाला ठिठुरन बढ़ाएगा।</p>
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		<title>श्रृद्धांजलि: क्रांतिकारी सोच, आक्रामक कलमकारी कर दिलों में छा जाने वाले संपादक मनोज तिवारी का निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Nov 2025 17:26:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नवीन जोशी लखनऊ। मनोज तिवारी और मैंने पत्रकारिता की दुनिया में एक साथ ही कदम रखे थे। 1977 का साल था। &#8216;स्वतंत्र भारत&#8217; से एक बड़ी अनुभवी टीम &#8216;अमृत प्रभात&#8217;&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="559" height="641" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/11/naveen-joshi-g.png" alt="" class="wp-image-23953" style="width:151px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/11/naveen-joshi-g.png 559w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/11/naveen-joshi-g-262x300.png 262w" sizes="(max-width: 559px) 100vw, 559px" /></figure>



<pre id="tw-target-text" class="wp-block-preformatted"> <strong>नवीन जोशी</strong></pre>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>लखनऊ। </strong> मनोज तिवारी और मैंने पत्रकारिता की दुनिया में एक साथ ही कदम रखे थे। 1977 का साल था। &#8216;स्वतंत्र भारत&#8217; से एक बड़ी अनुभवी टीम &#8216;अमृत प्रभात&#8217; चली गई थी, जो उसी समय इलाहाबाद से अपनी शुरूआत कर रहा था। उनकी जगह सम्पादक अशोक जी नई टीम बना रहे थे। नए लड़कों को तलाश कर उन्हें सम्पादन-लेखन में तराशने में लगे थे। उसी प्रक्रिया में मनोज और मेरा चंद दिन के फासले से चयन हुआ था। जल्दी ही नए युवकों की एक बड़ी टीम स्वतंत्र भारत में खड़ी हो गई थी। वह बड़े जोश और उत्साह वाले दिन थे। मेहनत से काम और झगड़े के साथ मुहब्बत वाली दोस्तियां !</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="411" height="439" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/11/manoj-tiweri-g.png" alt="" class="wp-image-23954" style="width:840px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/11/manoj-tiweri-g.png 411w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/11/manoj-tiweri-g-281x300.png 281w" sizes="(max-width: 411px) 100vw, 411px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मनोज से मेरा कुछ खास याराना बनता गया। दफ्तर और दफ्तर के बाद हम बहुत देर साथ रहते। अनेक बार रात को लम्बी आवारागर्दी होती और अक्सर मैं उसके घर पर ही रह जाता। उसके बाबू भुवन चंद्र तिवारी &#8216;शूलपाणि&#8217; हिंदी के लेखक थे। उन्होंने कई उपन्यास और नाटक लिखे। उनसे भी खूब बात होती। वे अच्छा मानने लगे थे और अपने उपन्यास पढ़ने को देते थे। हमारी संस्था &#8216;आंखर&#8217; ने उनका एक नाटक भी मंचित किय अथा। मनोज से उनकी कई बातों पर तनातनी रहती।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मनोज स्वभाव में मुझसे ठीक विपरीत था, दबंग और आक्रामक। मैं उतना ही संकोची और दब्बू था। पढ़ाई के दिनों में मनोज अपने उग्र स्वभाव के कारण लखनऊ विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था। फिर उसने अल्मोड़ा डिग्री कॉलेज से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी। भीतर से वह नरम और सबकी मदद करने वाला था। पर्याप्त संवेदनशील भी। साहित्य का अच्छा पाठक था। एम एन रॉय के अनुयायी एस एन मुंशी जी के घर उसका खूब आना-जाना था। मुझे भी वही उनके पास ले गया था। उन्होंने अपने घर में थियोसॉफिकल सोसायटी का दफ्तर बना रखा था , जहां विशाल पुस्तकालय भी था। यदा-कदा मुंशी जी हम लोगों को किताबों और देश-दुनिया के बारे में बताते। मुंशी जी की पत्नी सावित्री निगम हमें बहुत स्नेह देतीं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">1983 में मैं नभाटा में आ गया। मनोज स्वतंत्र भारत में ही बना रहा। उसने वहां तरक्की की सीढ़ियां चढ़ीं।1990 में जब स्वतंत्र भारत का मुरादाबाद संस्करण निकालने का फैसला हुआ तो मनोज को उसका स्थानीय सम्पादक बनाकर भेजा गया। उसने बहुत मेहनत से वह संस्करण निकाला और स्थापित किया। उस दौर में भी वह नियमित फोन से सम्पर्क करता और कई मुद्दों पर सलाह लेता या प्रबंधन की कंजूसी और असहयोग के किस्से बताया करता था। स्वतंत्र भारत के मालिक नए जमाने से तालमेल नहीं बैठा सके। पहले मुरादाबाद संस्करण बंद हुआ, फिर धीरे-धीरे लखनऊ संस्करण भी थापर ग्रुप के हाथ बिक गया।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">1991 में मैं दोबारा स्वतंत्र भारत पहुंचा तो मनोज से फिर दिन-रात का साथ रहने लगा था। 1996 में स्वतंत्र भारत को थापर समूह ने एक फाइनेंस कम्पनी के हाथ बेच दिया और उसके दुर्दिन फिर शुरू हुए। 1997 में मनोज ने अखबार छोड़ दिया और पत्रकारिता भी।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में भी वह कभी अराजक और तनिक उद्दण्ड तक हो जाया करता था। कुछ विचलन और विवाद भी उसके हिस्से आए। ऐसे मौकों पर मेरी उससे बहस होती। हम बीयर या पव्वा लेकर देर रात गोमती किनारे या किसी सुनसान सड़क पर बातें करते। वह मान जाया करता कि वही गलत था लेकिन मूल स्वभाव उसका अंत तक बदला नहीं। मनमानियां बहुत कीं उसने।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">2021 के अंत या 2022 के शुरू में उसका फोन आया था कि गले में कुछ अटकता सा है। अल्ट्रासाउण्ड कराना है। जांच का नतीजा अच्छा नहीं निकला। भोजन नली में कैंसर था। उसका बड़ा बेटा मुदित मुम्बई में ही अच्छा काम कर रहा है। टाटा कैंसर संस्थान में उसका इलाज शुरू हुआ। दो-ढाई साल से ठीक ही चल रहा था और वह काफी समय लखनऊ रहने लगा था। धीरे-धीरे कैंसर फेफड़े तक पहुंच गया। कई दौर इम्युनोथेरेपी के चले और ठीक ही था वह। कोई महीने भर पहले मैं उससे मिलने गया था। &#8216;अब मैं ओला करके तेरे घर आऊंगा&#8217;, उसने कहा था। मुझे पता नहीं चल पाया कि अचानक तबीयत बिगड़ने लगी तो वह मुम्बई दौड़ा। इस बार डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">05 नवम्बर की दोपहर मनोज प्यारे की कहानी भर रह गई। मोबाइल पर प्रमोद जी का संदेश मैं शाम को साढ़े चार बजे देख पाया। फौरन महानगर स्थित उसके घर भागा लेकिन उसने तो मुम्बई से कूच करना चुना था। आशंका तो थी ही, फिर भी उसके जाने की खबर ने सन्नाटा-सा पैदा कर दिया था। सो, यह ध्यान में ही नहीं आया कि एक छोटी-सी खबर का हकदार तो वह है ही। उसके पुराने और बहुत अच्छे दोस्त, पूर्व कांग्रेसी और अब भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने फोन करके याद दिलाया तो आज एक प्रेस नोट बनाकर भेजा। तभी यार के लिए यह विदाई टिप्पणी भी बन सकी।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">कभी-कभी कुछ भी लिख पाना बहुत कठिन हो जाता है।&nbsp; अलविदा दोस्त! अब तुम्हारा &#8216;हुर्र&#8217; कभी सुनाई नहीं देगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>EXCLUSIVE- कौन तय करता है सोने की कीमत ! RBI न केंद्र सरकार, फिर कैसे घटते-बढ़ते हैं दाम, जानिए सब कुछ </title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 15:10:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अक्सर लोग यही समझते हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सोने की कीमत को तय या कंट्रोल करता है, लेकिन ऐसा नहीं है. धनीष श्रीवास्तव लखनऊ। Sone ka bhav news :&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%a8-%e0%a4%a4%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%b9gold-news-today-the-sunday-viewslucknow-news-lucknow-gold-newslatest-hindi-ne/">EXCLUSIVE- कौन तय करता है सोने की कीमत ! RBI न केंद्र सरकार, फिर कैसे घटते-बढ़ते हैं दाम, जानिए सब कुछ </a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>अक्सर लोग यही समझते हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सोने की कीमत को तय या कंट्रोल करता है, लेकिन ऐसा नहीं है.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="932" height="1024" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/dhanish-srivastava-2-932x1024.jpg" alt="" class="wp-image-23748" style="width:123px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/dhanish-srivastava-2-932x1024.jpg 932w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/dhanish-srivastava-2-273x300.jpg 273w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/dhanish-srivastava-2-768x844.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/dhanish-srivastava-2.jpg 1093w" sizes="auto, (max-width: 932px) 100vw, 932px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>धनीष श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ</strong>। <strong>Sone ka bhav news</strong> : सोने की कीमत आसमान छू रही हैं। मिडिल क्लास सोने की खरीदारी से दूर होते जा रहे हैं। वो सोने के रेट कम होने का इंतजार कर रहा, इन सबके बीच ये सवाल भी उठता है कि आखिर सोने की कीमत तय कौन करता है और किन वजहों से उसमें उतार-चढ़ाव होता है। </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="754" height="1024" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/special-754x1024.jpg" alt="" class="wp-image-23749" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/special-754x1024.jpg 754w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/special-221x300.jpg 221w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/special-768x1043.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/special-1131x1536.jpg 1131w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/10/special.jpg 1155w" sizes="auto, (max-width: 754px) 100vw, 754px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत में सोने का कोई स्थिर भाव नहीं :</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बाजार में जिस भाव पर सोना खरीदा जाता है, उसे स्पॉट कीमत यानी हाजिर भाव करते हैं. स्पॉट रेट गोल्ड की उस दिन की मार्केट की कीमत होती है, जो तुरंत खरीद-बिक्री के लिए होती है. यह भाव 24×7 बदलता रहता है. भारत में फिलहाल हर सोने का एक रेट नहीं है, अलग-अलग शहरों और गुणवत्ता के हिसाब से सोने के भाव में अंतर होता है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या होता है MCX रेट और बुलियन:</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">एमसीएक्स यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज&nbsp; मुंबई में स्थित है. इस एक्सचेंज को साल 2003 में स्थापित किया गया था. इसपर सोने-चांदी के अलावा तेल और कृषि प्रोडक्ट्स की फ्यूचर्स ट्रेडिंग होती है. यहां सोने की फ्यूचर कीमत पर सोने की ट्रेडिंग होती है. एक किलो, 100 ग्राम, 8 ग्राम, 1 ग्राम में ट्रेडिंग होती है. इसी तरह से बुलियन मार्केट गोल्ड और सिल्वर जैसी कीमती चीजों का बाजार है. लेकिन बात सोने की कीमत की करें तो वो यहां से तय नहीं होती है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सोने की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर, गोल्ड स्मगलिंग (gold smuggling) में जबरदस्त इजाफा </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Gold Rate </strong>के आसमान पर पहुंचने और अवैध सोने की तस्करी के बढ़ते मामलों को लेकर विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जब तक डिमांड ऊंची रहेगी और आधिकारिक आपूर्ति सीमित रहेगी, अवैध सोने की तस्करी से गतिविधियां फलती-फूलती रहेंगी. आएदिन सीमावर्ती क्षेत्रों में सोना तस्करों की गिरफ्तारी और सोने के बिस्कुट आदि की बरामदगी इस बात की तस्दीक करते हैं. सोने की तस्करी में सीधे-सीधे अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों के शामिल होने की बातें सामने आती रही हैं. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अवैध सोने की तस्करी के मामलों में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है. सर्राफा व्यापारी भी इस बात को कबूल कर रहे हैं कि सीमित आपूर्ति के चलते गोल्ड स्मगलिंग में इजाफा हो रहा है. </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऐसे प्रतिदिन तय होती है सोने की कीमत </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">रिजर्व बैंक सोने की कीमत को तय नहीं करती. न ही भारत सरकार इसका फैसला लेती है. वैश्विक मूल्य, रुपये और डॉलर की विनिमय दर और स्थानीय मांग-आपूर्ति के साथ, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अन्य कारकों के आधार पर इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) दैनिक रूप से सोने की दरें तय करता है. बाजार की मांग-सप्लाई, ग्लोबल फैक्टर और सरकारी नीतियों की मदद से सोने की कीमत तय की जाती है. सोने की शुद्धता, उसके कैरेट के हिसाब से उसकी कीमत में अंतर होता है. अधिकांश शहरों में सर्राफा कारोबारियों के एसोसिएशन की ओर से मार्केट खुलने पर सोने का रेट तय किया जाता है. वायदा बाजार में जो कीमत आती है, उसमें वैट, लेवी एंड लागत जोड़कर रेट लिस्ट जारी कर दी जाती है. यानी भारत में सोने की कीमत सर्राफा कारोबारियों का संगठन IBJA तय करता है.</p>
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		<title>कुदरत का कोहराम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 05:15:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अक्षत श्री. नई दिल्ली। मानसून की दस्तक के साथ ही हिमाचल व उत्तराखंड में दरकते पहाड़ व रौद्र रूप दिखाती नदियां चिंता बढ़ाने वाली हैं। कुदरत के कहर के सामने&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong> अक्षत श्री.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong> नई दिल्ली।</strong> मानसून की दस्तक के साथ ही हिमाचल व उत्तराखंड में दरकते पहाड़ व रौद्र रूप दिखाती नदियां चिंता बढ़ाने वाली हैं। कुदरत के कहर के सामने इंसान बौना ही नजर आता है। तमाम मुख्य नदियां उफ ान पर हैं। जगह- जगह भूस्खलन से सड़कें ठप पड़ी हैं। हिमाचल में मूसलाधार बारिश के बीच मलबा व पत्थर गिरने से सैकड़ों सड़कें बंद हो गई हैं। सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। पहले हम गर्मी से त्रस्त होकर बारिश की आस लगाये होते हैं, लेकिन जब बारिश आती है तो स्थितियां डराने वाली हो जाती हैं। नि: संदेह ग्लोबल वार्मिंग संकट के चलते बारिश के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। बारिश कम समय में ज्यादा मात्रा में बरसती है। जिससे न केवल पहाड़ों में कटाव बढ़ जाता है बल्कि पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा गिरकर रास्तों व पानी के प्राकृतिक मार्गों को अवरुद्ध कर देता है। यह संकट इसलिये भी बढ़ जाता है क्योंकि हमने पहाड़ों को विलसिता का केंद्र बना दिया है। </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="542" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/09/Untitledkudrat-1024x542.png" alt="" class="wp-image-23221" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/09/Untitledkudrat-1024x542.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/09/Untitledkudrat-300x159.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/09/Untitledkudrat-768x407.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/09/Untitledkudrat.png 1177w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">तीर्थाटन अब पर्यटन जैसा हो गया है। पर्यटकों के वाहनों से छोटी सड़कें और पुल दबाव में हैं। नीति नियंताओं ने पहाड़ों में सड़कों को फ ोर लेन, सिक्स लेन बनाने का जो उपक्रम किया है, उससे पहाड़ों का नैसर्गिक वातावरण खतरे में है। पहाड़ों के किनारे काटने से भूस्खलन की गति तेज हुई है। गाहे- बगाहे पहाड़ों का मलबा सड़कों पर गिरकर यातायात को अवरुद्ध कर देता है। यात्रियों के जीवन पर हर समय संकट बना रहता है। हिमाचल की ही तरह से कुदरत के कोहराम से उत्तराखंड भी बुरी तरह त्रस्त है। भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी व पिंडर आदि नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। चारधाम यात्रा मार्ग पर मलबा गिरने की घटनाएं बढऩे से यात्रा कुछ समय के लिये स्थगित की गई है। बार-बार भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया जा रहा है। जगह-जगह सड़कों के कटने से सैकड़ों यात्री फं से हुये हैं। कई गांवों को जोडऩे वाली सड़कें बह गई हैं। बादल फटने की आशंका भी लगातार बनी रहती है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री जाने वाले मार्ग जगह- जगह बाधित हैं। भारी बारिश की आशंका को देखते हुये स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टियां घोषित की गई हैं। सामान्य जन- जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई मोटरमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हुये हैं। कई छोटे पुल बह गये हैं। कई निचले स्थानों से लोगों को हटाया गया है। कुल मिलाकर लाखों लोगों को अतिवृष्टि ने बंधक बना दिया है। निश्चित रूप से तेज बारिश और उसके प्रभाव इंसानी नियंत्रण से बाहर होते हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ी इलाकों में विकास के मॉडल पर नये सिरे से विचार करने की जरूरत है। पहाड़ अध्यात्म के केंद्र भी रहे हैं, उन्हें पर्यटकों की विलसिता का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिये। हमें अपेक्षाकृत नये हिमालयी पहाड़ों और उसके परिस्थितिकीय तंत्र के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप से ग्लेशियर पिघल रहे हैं और नदियों का बढ़ा जल संकट का कारण भी बन रहा है।</p>
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		<title> उत्तरकाशी धराली हादसे ने याद दिला दी तपोवन विष्णुगाड 2021 की त्रासदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Aug 2025 12:51:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>धराली गांव के लोगों को बहा ले गया खीर गंगा का पानी मलबे में काफी लोग लापता देहरादून, उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में आई दैवीय आपदा या बदल फटने की&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">धराली गांव के लोगों को बहा ले गया खीर गंगा का पानी</p>



<p class="wp-block-paragraph">मलबे में काफी लोग लापता</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देहरादून, उत्तरकाशी: </strong>उत्तराखंड के उत्तरकाशी में आई दैवीय आपदा या बदल फटने की घटना ने साल 2021 की तपोवन आपदा के जख्म ताजा कर दिए हैं। मंगलवार को उत्तरकाशी के धराली गांव में आफत के रूप में आया पानी, मलबा, बड़े-बड़े पत्थर सब कुछ अपने साथ बहा ले गया। यहां तक जान बचाने के लिए भाग रहे लोग भी इस बाढ़ के साथ बहते हुए दिख दिए। इससे हर कोई आहत हुआ है। ठीक इसी तरह फरवरी 2021 में तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना पर भी नजारा देखा जा चुका है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="657" height="653" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/08/tabahi.png" alt="" class="wp-image-22806" style="width:840px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/08/tabahi.png 657w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/08/tabahi-300x298.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/08/tabahi-150x150.png 150w" sizes="auto, (max-width: 657px) 100vw, 657px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br>7 फरवरी 2021 को उत्तराखंड के चमोली जनपद में तपोवन विष्णुगाड पर पानी और मलबा आफत बनकर आया था। इसमें 200 से ज्यादा लोग लापता हो गए थे और तपोवन विष्णुगाड पनबिजली परियोजना को भी भारी नुकसान पहुंचा था। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के एक पास एक ग्लेशियर टूट गया था, जिससे धौलीगंगा नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी।तपोवन विष्णुगाड पनबिजली परियोजना के एक हिस्से में निर्माणाधीन सुरंग भी थी, जिसमें उस समय काफी श्रमिक काम कर रहे थे और जिनका कुछ पता नहीं चल पाया। वहीं जानकारी के मुताबिक बाद में यहां करीब 80 से लोगों के शव बरामद किए गए थे।तपोवन 2021 हादसे के दौरान नदी में काम कर रहे श्रमिक जिस तरह से धौलीगंगा का रौद्र रूप देख कर जान बचाने के लिए इधर से उधर भागते दिखे थे, उसी तरह से मंगलवार यानी 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली गांव का दृश्य भी दिखाई दिया। धराली खीर गंगा का पानी जब अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर, मलबा लेकर तेजी से बहता हुआ आया। धराली तक पहुंचा तो लोग बचने के लिए भागते हुए नजर आए, लेकिन पानी का तेज बहाव सबको अपने साथ बहा ले गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">धराली गंगोत्री धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। जिस स्थान पर आपदा आई, वहां पर काफी संख्या में होम स्टे भी हैं। इस आपदा ने क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचाया है। डीएम उत्तरकाशी के अनुसार अब तक चार की मौत हुई है। वहीं 50 से अधिक लोगों के लापता होने की आशंका है। बताया जा रहा है कि जिस तरह से पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आया है, उसको देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि मलबे में कई लोग दबे होंगे।</p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%87/"> उत्तरकाशी धराली हादसे ने याद दिला दी तपोवन विष्णुगाड 2021 की त्रासदी</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<item>
		<title>डॉ. दीपम सेठ उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक बने</title>
		<link>https://thesundayviews.com/dr-deepam-seth-becomes-director-general-of-police-of-uttarakhand/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Nov 2024 06:20:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>राम महेश मिश्रा देहरादून। डॉ. दीपम सेठ उत्तराखण्ड प्रान्त के पुलिस महानिदेशक बने। हमारी हार्दिक बधाइयां और आत्मीय शुभकामनाएं। वह उत्तराखण्ड काडर में 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इसके&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<pre id="tw-target-text" class="wp-block-preformatted"></pre>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="665" height="641" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/ram-mahesh-mishra-g.jpg" alt="" class="wp-image-20412" style="width:121px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/ram-mahesh-mishra-g.jpg 665w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/ram-mahesh-mishra-g-300x289.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 665px) 100vw, 665px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राम महेश मिश्रा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देहरादून। </strong>डॉ. दीपम सेठ उत्तराखण्ड प्रान्त के पुलिस महानिदेशक बने। हमारी हार्दिक बधाइयां और आत्मीय शुभकामनाएं। वह उत्तराखण्ड काडर में 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इसके पूर्व वह आईटीबीपी यानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस और बाद में एसएसबी यानी सीमा सुरक्षा बल के अपर पुलिस महानिदेशक थे। श्री सेठ देवभूमि उत्तराखण्ड के 13वें पुलिस महानिदेशक हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="933" height="749" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/dgp-deepak-sheth.png" alt="" class="wp-image-20402" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/dgp-deepak-sheth.png 933w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/dgp-deepak-sheth-300x241.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/11/dgp-deepak-sheth-768x617.png 768w" sizes="auto, (max-width: 933px) 100vw, 933px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तराखण्ड में हमारी 12 वर्षीय लोकसेवा के दौरान डॉ.दीपम सेठ से अनेक बार मिलने तथा जनसामान्य की पीड़ा निवारण के कार्यों में मिले सहयोग की आज याद आई। स्मरण आया, एक बार परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय योग शिविर के दौरान पधारे उत्तराखण्ड के राज्यपाल कीर्तिशेष  बी.एल.जोशी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सन्तोष जोशी के रात्रिभोज कार्यक्रम में लेडी गवर्नर के तनिक संकेत पर विनम्र स्वभाव के धनी श्री सेठ जी ने अपना आसन छोड़कर हमें सहभोज में बिठाकर सम्मान दिया था। तब वह श्रीराज्यपाल के अपर सचिव थे। हम देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार से बतौर संयुक्त निदेशक 40 योग विद्यार्थियों को लेकर वहां पहुंचे थे। </p>



<p class="wp-block-paragraph">वे घटनाएं भी आज याद आईं, जब मुख्यमंत्री के अपर सचिव रहते उन्होंने, हमारे अनुरोध पर, आड़े समय में अनेक बार देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कार्यों में सहयोग दिया था, दिलाया था। मूलत: इंजीनियर और रुड़की आईआईटी  से पीएचडी डॉक्टर दीपम सेठ वास्तव में एक कार्यकुशल एवं व्यवहार  कुशल पुलिस प्रशासक हैं। शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) मूल के प्रिय सेठ साहब को हमारी ढेर सारी स्नेहिल भाग्योदय शुभकामना।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>सियासी फासलों का खेल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 06:01:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ। जहां फैसले नहीं होते, वहां सियासी होते हैं फासले। इन्हीं फैसलों के फासले गांधी जयंती के अवसर पर तब टकराए जब धर्मशाला में केंद्रीय सडक़ एवं परिवहन राज्यमंत्री हर्ष&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong> जहां फैसले नहीं होते, वहां सियासी होते हैं फासले। इन्हीं फैसलों के फासले गांधी जयंती के अवसर पर तब टकराए जब धर्मशाला में केंद्रीय सडक़ एवं परिवहन राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा और इसके बरअक्स हरियाणा चुनाव में हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक दूसरे की पोल खोली। अपनी बरवाला जनसभा में सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हिमाचल की आर्थिक स्थिति पर शुरू की गई चर्चा पर स्पष्ट किया कि केंद्र ने प्राकृतिक आपदा पर जिस राज्य को फूटी कौड़ी नहीं दी, वहां असल में फैसलों का नहीं, फासलों का खेल है। यह जाहिर है कि डबल इंजन सरकारों की वकालत जब से हिमाचल में ढह गई, दिल्ली की निगाह प्रदेश को नजर अंदाज कर रही है। दूसरी ओर गांधी जयंती के ही दिन धर्मशाला पधारे केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा के पिटारे से भी फासलों का जिक्र निकला।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="821" height="622" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/harsh.png" alt="" class="wp-image-20074" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/harsh.png 821w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/harsh-300x227.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/harsh-768x582.png 768w" sizes="auto, (max-width: 821px) 100vw, 821px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"> पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना में हो रही देरी पर कांगड़ा व मंडी के बीच दूरी कम नहीं हो रही, तो फासला मिटाने को निर्णायक कौन होगा ? इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्री ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय धर्मशाला के प्रस्तावित कैंपस से देहरा परिसर में चल रहे निर्माण की दूरी पर प्रश्न उठाए, तो सारा पाठ्यक्रम सामने आ गया। जदरांगल परिसर सियासी फासलों का ऐसा उदाहरण है जो केवल एक पक्ष या एक सरकार नहीं, बल्कि राजनीतिक चरित्र का अति निर्लज्ज चेहरा है। यह कहानी है, चेहरे और चरित्र के बीच बंटती सियासत की और विद्वेष की भावना में जीत और हार का चित्रण भी। अबकी केंद्रीय मंत्री मल्होत्रा पूछ रहे हैं क्योंकि पूछना आसान है, लेकिन यह दास्तान कई केंद्रीय मंत्रियों और हिमाचल के मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों की है जो जदरांगल परिसर को खारिज करने की परिपाटी में प्रेम कु मार धूमल से शुरू होकर सुक्खू तक पहुंच जाती है। ऐसा भी नहीं कि संस्थान को गैरों ने चोट पहुंचाई, बल्कि जब किशन कपूर मंत्री व स्थानीय विधायक थे तो उन्होंने ही सर्वप्रथम &#8216;दो इंच जमीन नहीं&#8217; का नारा देकर राजनीति को नचाया था। हैं कसूरवार इस प्रांगण में बहुत,तू तो बस इक मोहरा है। प्रश्न उठते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने देहरा को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की वजह से तरजीह दी या अब वर्तमान मुख्यमंत्री का &#8216;सब तेरा&#8217; का वादा देहरा के पक्ष में काम कर रहा है। यह इसलिए भी कि धर्मशाला उपचुनाव में मुख्यमंत्री ने आचार संहिता के बाद जरदांगल को मोहलत में गारंटी दी थी। मल्होत्रा पूछ रहे हैं, तो यह भी बता दें कि पूरे खेल में अनुराग ठाकुर, स्मृति इरानी व जयराम ठाकु र की भूमिका कैसी रही। ऐसे में फासले मापने या गिनाने से क्या फर्क पड़ेगा। कम से कम मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह को स्थिति स्पष्ट करके कह देना चाहिए कि वह दो साल की उपलब्धियों में जदरांगल परिसर की बजाय देहरा की जमीन पर झंडे गाडऩा चाहते हैं। बेहतर होगा यहां के हिस्से में आए ढाई सौ करोड़ भी देहरा परिसर को रवाना किए जाएं ताकि कम से कम संस्थान अपनी आवारगी से तो बच जाए। रही बात जदरांगल की जमीन को लेकर, तो बेहतर यह होगा कि वहां पूर्व प्रस्तावित आई. टी. पार्क बना दिया जाए। आश्चर्य यह है कि हिमाचल की सबसे कठोर परीक्षाएं देकर भी केंद्रीय विश्वविद्यालय का जदरांगल परिसर फेल किया जाता रहा और आज भी हो रहा है। मामला यहां तक विकराल है कि देहरा की सियासी गोद में आश्रय लेने वाले पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि ने इस संस्थान की पैरवी में धर्मशाला और इसकी संभावना को ही लांछित कर दिया। तब किशन कपूर के कारण या हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की वजह से जदरांगल अभिशप्त हुआ या अब कांग्रेस से छिटके और भाजपा में अटके विधायक सुधीर शर्मा के कारण यह परिसर लटक गया, शायद ही भोली, लेकिन आंदोलनरत जनता तथा राजनीतिक वादों पर विश्वास करने वाले लोग कभी समझ पाएंगे। सियासत के फासले चंद मीलों के नहीं, युगों-युगों को बर्बाद कर देते हैं, कांगड़ा तेरी यही कहानी है।</p>
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		<title>स्वतंत्रता दिवस और व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Aug 2024 03:48:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ। शिक्षा विभाग में शून्य पंजीकरण वाले 99 स्कूलों और दो से पांच संख्या विद्यार्थियों वाले 460 स्कूलों को बंद करके सरकार अपने राजस्व की बड़ी राशि की बचत करने&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong> शिक्षा विभाग में शून्य पंजीकरण वाले 99 स्कूलों और दो से पांच संख्या विद्यार्थियों वाले 460 स्कूलों को बंद करके सरकार अपने राजस्व की बड़ी राशि की बचत करने जा रही है। सरकार द्वारा कर्मचारियों के स्टडी लीव पर जाने पर वेतन का 40 फीसदी देने के फैसले से भी करोड़ों का खर्चा बचेगा। यह समय का तकाजा है कि राज्य की माली हालत को पटरी पर लाने के लिये सरकार कुछ ठोस करे। भारत आज अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस दिवस की धूम भारत के सभी राज्यों सहित विश्व भर में फैले भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों में भी रहेगी। इस बार हिमाचल प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय समारोह जिला कांगड़ा के देहरा में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। देहरा के नागरिकों के लिए यह उत्सव इसलिये भी खास है क्योंकि देहरा विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर का गृह विधानसभा क्षेत्र भी है और वह पिछले महीने ही देहरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गयी हैं।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/08/himachal-1024x704.png" alt="" class="wp-image-7974"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">यह सच है कि पिछला एक साल मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश के लिए भारी उथल पुथल के दौर वाला रहा है, लेकिन इस बार उन्हें हिमाचल की आर्थिक स्थिति के दृष्टिगत अपने व्यवस्था परिवर्तन वाले संकल्प को निभाना होगा और इसके लिए उन्हें कड़वे निर्णयों को लेना होगा। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश के नाम आज बड़ी-बड़ी उपलब्धियां दर्ज हैं, लेकिन कर्ज का बढ़ता बोझ भी एक लाख करोड़ के आंकड़े की दहलीज को छूने के लिये बेताब है। 15 अप्रैल, 1948 में जब हिमाचल प्रदेश अस्तित्व में आया था, तब प्रदेश में न तो अच्छी सडकें थी, न ही ज्यादा शिक्षण संस्थान थे और न ही उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं थीं। लेकिन बीतते वक्त के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश आगे बढ़ा और 288 किलोमीटर लंबी सड़कों की लंबाई बढ़कर आज लगभग 40 हजार किलोमीटर के आंकड़े को पार कर चुकी है। कांगड़ा हवाई पट्टी के विस्तारीकरण की दिशा में तीव्र गति से काम हो रहा है, तो हिमाचल प्रदेश अब जलविद्युत उत्पादन से हरित एवं सौर ऊर्जा राज्य बनने की दिशा की ओर अग्रसर है। हिमाचल प्रदेश को 2010 में भारत का पहला कार्बन-तटस्थ राज्य घोषित किया चुका है। हिमाचल प्रदेश में ई-विधानसभा, ई-कैबिनेट और ई-बजट की व्यवस्थाएं पूर्ण हो चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश पूरे देश का पहला धुंआमुक्त राज्य भी है और यहां हर घर में गैस का चूल्हा है। हिमाचल प्रदेश के हर घर तक नल की और बिजली की सुविधा पहुंच चुकी है। हिमाचल को 2016 में भारत का दूसरा खुले में शौचमुक्त राज्य घोषित किया गया था। हिमाचल में गरीबी दर 2013-14 में 10.14 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 3.88 प्रतिशत रह गई है। हिमाचल में अब कैंसर रोगियों का नि: शुल्क उपचार हो रहा है और राज्य सरकार ने कैंसर के उपचार के लिए 42 दवाएं नि: शुल्क देने का फैसला लिया है। इसमें ट्रैस्टुजुमाब का टीका भी शामिल है, जिसका मूल्य लगभग 40 हजार रुपए है। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा देकर पर्यटकों का आंकड़ा पांच करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। हिमाचल प्रदेश में तंबाकू के पदार्थों पर पूर्ण रूप से रोक है और प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। सरकार को चाहिये कि वह एपीएल कार्ड धारकों को सब्सिडी पर उपलब्ध राशन के लिये दिये जा रहे अनुदान की व्यावहारिकता पर सर्वेक्षण करवाए। हिमाचल के लगभग 9 लाख से ज्यादा बेरोजगार युवाओं के लिये रोजगार के साधन उपलब्ध करवाना भी एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए स्वरोजगार को बढ़ावा देना होगा। वर्ष 2023 के मध्य में आई भीषण प्राकृ तिक आपदा के मोर्चे पर भी लड़ाई लडऩी पड़ी थी तो इसी मोर्चे पर अभी भी राहत की खबर नहीं है। सरकार के सामने जहां निरंतर घटते राजस्व की चुनौती है तो दूसरी तरफ बढ़ते कर्ज और देनदारियों का दबाव भी है। बढ़ती महंगाई के आलम में सरकार के समक्ष अपने कर्मचारियों को पिछले वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप उनके देय वित्तीय लाभ और डीए देने की बाध्यताएं भी हैं। इन परिस्थितियों में आर्थिक हालात को दुरुस्त करने के दृष्टिगत अब सुक्खू सरकार ने कु छ कड़वे और जन अलोकप्रिय निर्णयों को लागू करने की ओर कदम बढ़ाये हैं। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि हिमाचल में पानी पर चार्ज लगेंगे और हिमाचल के सरकारी कर्मचारियों, करदाताओं और जो लोग गरीबी रेखा से ऊपर हैं, उनको पानी फ्री में नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें पानी के लिए 100 रुपए मासिक शुल्क देना होगा। इसी प्रकार से हिमाचल प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार में शुरू हुई 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने संपन्न वर्ग के लिए बंद कर दिया है। वहीं एचआरटीसी की बसों में सफर करने वाले पुलिस जवानों को केवल सरकारी कार्य के लिए मुफ्त सेवा मिलेगी। सरकार ने हिमकेयर योजना से निजी अस्पतालों, सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनरों को बाहर कर दिया है। हिमाचल सरकार ने खजाना भरने के लिए कुछ बड़े निर्णय लिये हैं। इनके लागू होने से सरकार को इस वित्तीय वर्ष में करीब दो हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व लाभ अर्जित होगा। सरकार राजस्व जुटाने के लिए अवैध खनन पर शिकंजा कसने के लिये नई नीति लेकर आई है। सरकार द्वारा इस वर्ष नई आबकारी नीति लागू करने से शराब के ठेकों की इस वर्ष नीलामी से सरकार को 600 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। शिक्षा विभाग में शून्य पंजीकरण वाले 99 स्कूलों और दो से पांच संख्या विद्यार्थियों वाले 460 स्कूलों को बंद करके सरकार अपने राजस्व की बड़ी राशि की बचत करने जा रही है। सरकार द्वारा कर्मचारियों के स्टडी लीव पर जाने पर वेतन का 40 फीसदी देने के फैसले से भी करोड़ों का खर्चा बचेगा। यह समय का तकाजा है कि राज्य की माली हालत को पटरी पर लाने और 2032 तक हिमाचल को भारत का विकसित राज्य बनाने का सपना देखने वाली सुखविंदर सरकार फिजूलखर्ची से बचते हुए लोकलुभावन घोषणाओं को करने से परहेज बरते और आर्थिक विशेषज्ञों की सलाह से जनहित में कड़वे फैसले ले। तभी प्रदेश सुखी और खुशहाल राज्य बनेगा।</p>
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		<item>
		<title>लोकसभा चुनाव : यूपी होमगार्ड विभाग के &#8216;भ्रष्ट&#8217; डीआईजी के हवाले उत्तराखण्ड का चुनाव ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Apr 2024 07:44:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लोकसभा चुनाव : यूपी होमगार्ड विभाग के भ्रष्ट डीआईजी के हवाले उत्तराखण्ड का चुनाव ? डीआईजी संजीव शुक्ला के कारनामे 1:&#160; इनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध है. 2:&#160; तीन वर्ष से अधिक&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0/">लोकसभा चुनाव : यूपी होमगार्ड विभाग के &#8216;भ्रष्ट&#8217; डीआईजी के हवाले उत्तराखण्ड का चुनाव ?</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लोकसभा चुनाव : यूपी होमगार्ड विभाग के भ्रष्ट डीआईजी के हवाले उत्तराखण्ड का चुनाव ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डीआईजी संजीव शुक्ला के कारनामे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1:&nbsp; इनकी </strong><strong>सत्यनिष्ठा </strong><strong>संदिग्ध है.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2:&nbsp; तीन वर्ष से अधिक समय से वार्षिक प्रवृष्टि खराब है.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3: कमांडेंट,कानपुर रहने के दौरान चुनाव में बाराबंकी भेजे गये जवानों से दो दिन का पैसा हड़पने का आरोप.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>4: पूर्व विभागीय मंत्री,वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ फर्जी शिकायती पत्र भेजने का आरोप.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>5: आपदा दल के कर्मचारी पर पिस्टल लेकर दौड़ाने का गंभीर आरोप.</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="492" height="509" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/chandr-shekhar.jpg" alt="" class="wp-image-18682" style="width:137px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/chandr-shekhar.jpg 492w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/chandr-shekhar-290x300.jpg 290w" sizes="auto, (max-width: 492px) 100vw, 492px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong> </strong>   <strong><strong>शेखर यादव</strong></strong></p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color has-link-color wp-elements-9f9a9d037105589043dfc60a1302bfcc wp-block-paragraph"><strong>।</strong> चुनाव <strong>आयोग की &#8216;सख्ती&#8217; के बावजूद शासन ने एक ऐसे डीआईजी को उत्तराखण्ड चुनाव में &#8216;स्टेट प्रभारी&#8217; बनाकर भेजा है जिसकी सत्यनिष्ठा हमेशा से संदिग्ध रही है</strong>&#8230;<strong>जिस पर कानपुर में कमांडेंट रहने के दौरान चुनावी ड्यूटी में भेजे जाने वाले होमगार्डों का पैसा हड़पने का गंभीर आरोप हो&#8230; जिस अधिकारी को 3 वर्ष से अधिक समय से वार्षिक प्रवृष्टि खराब मिल रही हो&#8230;। इतना ही नहीं, जो विभाग से &#8216;स्क्रीन आउट&#8217; किये जाने योग्य माना जाये, जिस पर पूर्व के विभागीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने का गंभीर आरोप हो,जो आपदा दल वालों पर पिस्टल लेकर दौड़ जाये,जिसकी वजह से अन्य अधिकारियों के भी सरकारी पिस्टल जमा करा लिया जाये&#8230;</strong>। <strong>क्या ऐसे अफसर को उत्तराखण्ड चुनाव का स्टेट हेड बनाकर भेजा जाना चाहिये ?</strong> <strong>वो अधिकारी कोई और नहीं, होमगार्ड विभाग में आगरा परिक्षेत्र के डीआईजी संजीव शुक्ला हैं। होमगार्ड विभाग के डीआईजी, आगरा परिक्षेत्र संजीव शुक्ला को उत्तराखण्ड का &#8216;स्टेट हेड&#8217; बनाकर भेजना विभाग के सभी अधिकारियों को रास नहीं आ रहा है। वजह साफ है क्योंकि ये चुनाव से जुड़ा मसला है, जो हमारे देश को &#8216;भावी प्रधानमंत्री&#8217; चुनकर देने जा रहा है। &#8216;सैल्यूट&#8217; करते हैं ऐसे अधिकारियों को जिन्हें कोई लेना-देना नहीं कि कौन अधिकारी वर्दी पहनकर लंबे समय से क्या गुल खिला रहा है लेेकिन जब देश की बात आयी तो सभी ने अपनी खामोशी तोड़ &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; तक अपनी बात पहुंचाने की हिम्मत जुटायी। देश को सशक्त प्रधानमंत्री दिलाने की मुहिम में &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; होमगार्ड विभाग के अधिकारियों के साथ है और हमारी टीम के साथी &#8216;कलम&#8217; से &#8216;सच&#8217; लिखने की ही कोशिश करते रहेंगे, भले ही शासन ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करे या &#8216;मौन धारण&#8217; करे&#8230;। </strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/04/shuklag1.jpg" alt="" class="wp-image-7126"/></figure>
</div>


<p class="has-black-color has-luminous-vivid-amber-background-color has-text-color has-background has-link-color wp-elements-b9d054af32a1b4ffb16adc0b4b906bae wp-block-paragraph"><strong>शासन की नियमावली की बात करें तो 50 वर्ष से अधिक उम्र होने पर अधिकारियों व कर्मचारियों की &#8216;स्क्रीनिंग&#8217; होती है, इस दौरान जिन अधिकारियों व कर्मचारियों को 5 वर्ष से खराब प्रवृष्टियां मिली हो तो उसे &#8216;बर्खास्त&#8217; यानि &#8216;स्क्रीनिंग&#8217; कर विभाग से बाहर कर दिया जाता है।</strong> <strong>शासन स्तर पर फाईलों में नियमावली तो बना दी गयी लेकिन हकीकत कुछ और बयां कर रही है, तभी तो ऐसे डीआईजी को खुद शासन ने ही उत्तराखण्ड चुनाव में &#8216;स्टेट हेड&#8217; बनाकर भेज दिया और साहेब वहां जाकर भी &#8216;गुलदस्ता-गुलदस्ता&#8217; खेल रहे हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग के पास कोई और डीआईजी या सीनियर ऑफिसर नहीं है,जिसे उत्तराखण्ड चुनाव का स्टेट हेड बनाकर भेजा जाये ?</strong> <strong>चौंकाने वाली बात यह है कि आगरा से बीओ सुरेश तिवारी को 1355 होमगार्ड लेकर शामली चुनाव कराने गया लेकिन आगरा में तैनात इंस्पेक्टर सुरेश कुमार चक और डीटीसी,आगरा में तैनात इंस्पेक्टर दिलीप कुमार फौजदार को चुनावी डयूटी में क्यों नहीं भेजा ? दो इंस्पेक्टर होने के बावजूद एक अदने से बीओ के हवाले 1355 जवानों को चुनाव में भेजना सही है ? बरेली, डीटीसी के इंस्पेक्टर धीरज राणा और ललित मोहन उपाध्याय को क्यों नहीं चुनावी डयूटी पर लगाया गया ? सीधी बात करें तो इस विभाग में जिसने दिखाया लक्ष्मी की माया,उसे हर हाल में बख्श दिया जाता है फिर चाहें वो अपराधियों को बहाल करे या फिर&#8230;।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="553" height="411" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/dehradun.jpg" alt="" class="wp-image-18680" style="width:840px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/dehradun.jpg 553w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/dehradun-300x223.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 553px) 100vw, 553px" /></figure>



<p class="has-vivid-cyan-blue-background-color has-background wp-block-paragraph"><strong>उत्तराखण्ड चुनाव में यूपी के तेज-तर्रार अधिकारी पहुंच गये हैं। बता दें कि हमेशा से विवादों में रहने वाले डीआईजी, आगरा परिक्षेत्र संजीव शुक्ला होमगार्ड के मूवमेंट के समय कहीं नहीं रहे, जबकि उन्होंने स्वयं सभी जिला कमांडेंट को निर्देशित किया था कि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाकर उनसे झंड़ी दिखाकर ही होमगार्ड को रवाना कराया जाये। मुख्यालय पर तैनात अधिकारियों,कर्मचारियों ने बताया कि 14 अप्रैल को शुक्ला जी लखनऊ में अपने आवास विक्रांत खंड गोमती नगर में रहे। 15 अप्रैल की सुबह 9 बजे लखनऊ से चले, शाहजहांपुर के कमांडेंट रमेश कुमार </strong><strong>से चाय- नाश्ता और&#8230;लेते हुये बरेली संतोष कुमार </strong><strong>के पास</strong>&nbsp;<strong>पहुंच कर लंच लिये। अधिकारियों ने बताया कि बरेली, बदायूं के कमांडेंट </strong><strong>आर. के. पाठक </strong><strong>से बड़ा &#8230; लिये।</strong></p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background wp-block-paragraph"><strong>अधिकारियों ने बताया कि डीटीसी, बरेली के निरीक्षक धीरज राणा और ललित मोहन उपाध्याय से निर्वाचन से छोडऩे के एवज में मोटी रकम लिये, फिर मुरादाबाद  पहुंचकर रात्रि विश्राम किये। मुरादाबाद अभिलेश नारायण सिंह  और संभल के कमांडेंट ज्ञान प्रकाश से लंबा हिसाब- किताब किया गया। खा-पीकर रात रात भर चौडिय़ा कर सोये। 16 अप्रैल की सुबह हरिद्वार में फोटो सेशन हुआ और सायंकाल देहरादून में फोटो बाजी हुयी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या होमगार्ड विभाग में कोई और अधिकारी नहीं है, जिसे चुनाव के दौरान प्रभारी बनाकर बाहर भेजा जाये? आखिर क्यों ऐसे भ्रष्ट, दागी अधिकारी को निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण समय में लगाया जाता है,जिस अधिकारी का स्थायी रुप से इंक्रीमेंट रूका हो, जिसकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का एक बार आदेश जारी किया गया हो, जिसकी सत्यनिष्ठा सदा से संदिग्ध रही हो, जो निर्वाचन में होमगार्डों का पैसा हड़पने का दोषी रहा हो,जब ये कानपुर के कमांडेंट थे तो चुनावी ड्यूटी में बाराबंकी जवानों को भेजा था। इन्होंने होमगार्डों का दो दिन का पैसा काट लिया था जिस पर जमकर बवाल हुआ था लेकिन मामला दबा दिया गया। तीन वर्ष से जिसकी वार्षिक प्रवृष्टि खराब मिन रही हो, जो विभाग से स्क्रीन आउट किए जाने योग्य हो,जो विभाग के बड़े अधिकारियों की शिकायत करने का आदी हो, जो राज्य आपदा दल वालों को पिस्टल से मारने के लिए दौड़े, जिसके पिस्टल बाजी के कारण अन्य अधिकारियों की भी पिस्टल जमा करा ली जाये&#8230;। आखिर ऐसे अधिकारी में ऐसे डीआईजी में कौन सा नगीना जड़ा है जिसे देख शासन के अफसरानों ने आंख मूंदकर उत्तराखण्ड का स्टेट हेड बनाकर भेज दिया ?</strong></p>



<p class="has-vivid-green-cyan-background-color has-background wp-block-paragraph"><strong>इस बारे में जब डीआईजी संजीव शुक्ला से संपर्क करने की कोशिश की गयी तो कॉल नहीं मिला।</strong></p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0/">लोकसभा चुनाव : यूपी होमगार्ड विभाग के &#8216;भ्रष्ट&#8217; डीआईजी के हवाले उत्तराखण्ड का चुनाव ?</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<title>शर्मनाक : डीआईजी करे &#8216;मस्ती&#8217;,होमगार्ड की जान हुई &#8216;सस्ती&#8217;…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Apr 2024 16:05:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक जवान की मौत,दो गंभीर रुप से घायल,कोटद्वार हॅास्पिटल में जिंदगी की लड़ रहे जंग डीआईजी आज देहरादून में लेकिन नहीं पहुंचे हॉस्पिटल, अफसरों से कराते रहें फोटो सेशन &#160;&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>एक जवान की मौत,दो गंभीर रुप से घायल,कोटद्वार हॅास्पिटल में जिंदगी की लड़ रहे जंग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डीआईजी आज देहरादून में लेकिन नहीं पहुंचे हॉस्पिटल, अफसरों से कराते रहें फोटो सेशन</strong></p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/01/chandrshekhar-300x290.jpg" alt="" class="wp-image-6454"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp; शेखर यादव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इटावा।</strong> <strong>शर्मनाक,शर्मनाक और बेहद शर्मनाक&#8230;।</strong> <strong>लोकसभा चुनाव को मजाक बनाने वाले होमगार्ड विभाग के डीआईजी पर शासन की नजर क्यों नहीं पड़ रही ? वर्दी की शान के वास्ते डयूटी पर अपनी जान गंवाने वाले होमगार्ड को देखने के बजाये डीआईजी संजीव शुक्ला उत्तराखण्ड में &#8216;गुलदस्ता-गुलदस्ता&#8217; खेल रहे हैं। उनका एक होमगार्ड ओमकार चुनावी ड्यूटी पर जाते समय पौड़ी में अपनी जान गंवा दिया, दो जवान कृष्ण कुमार व रामकुमार कोटद्वार के दुगड्डा के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं और डीआईजी हरिद्वार और देहरादून में अफसरों के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं ? क्या &#8216;फोटो सेशन&#8217; चल रहा है क्या ? क्या पहाड़ पर डीआईजी को &#8216;मस्ती&#8217; करने के लिये भेजा गया है ? क्या संजीव शुक्ला की नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती कि दुर्घटना में होमगार्ड के मौत की खबर मिलने पर वे सीधे मौके पर पहुंचते ? यदि ऐसा होता तो उनके सभी जीवित जवानों का &#8216;सीना 36 इंच चौड़ा &#8216;हो जाता&#8230;। जवानों को लगता कि उन्हें &#8216;सुरक्षा&#8217; देने, उनकी &#8216;सेवा&#8217; के लिये परिवार का कोई &#8216;मुखिया&#8217; आ गया है। सोचिए, दुगड्ढ के अस्पताल में घायल जवानों पर क्या बीत रही होगी&#8230;। उनकी निगाहें हर पल अस्पताल के दरवाजे की तरफ लगी है शायद डीआईजी साहेब आ जाये और &#8230;। उन्हें क्या मालूम ये उनके डीआईजी का नाम संजीव शुक्ला है,जो उत्तरराखंड के स्टेट प्रभारी इसलिये बनाये गये हैं ताकि वे पहाड़ की हसीन वादियों में &#8216;सूरज हुआ अस्त और पहाड़ हुआ मस्त&#8217; कहावत को चरितार्थ करके जाये।</strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/04/guld1-1024x638.jpg" alt="" class="wp-image-7136"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>खैर,ये तो सोचना होगा शासन के उन अफसरों को जो लोकसभा चुनाव की गंभीरता को हल्के में तौलने वाले डीआईजी संजीव शुक्ला को उत्तराखण्ड क्यों भेजा? उत्तराखंड गये स्टेट प्रभारी संजीव शुक्ला पहाड़ में पहुंच कर लग गये <strong> फ़ोटो</strong> खिंचाने और दूसरी तरफ बेचारे होमगार्ड मर रहे हैं।  दामाद की तरह आव-भगत चाहते हुये संजीव शुक्ला यहां पर गुलदस्ता लेने, सेवा कराने में इतना मस्त हो गये हैं कि कोटद्वार जाकर घायल होमगार्डों को देखना जरूरी नहीं समझा। उत्तराखंड गये स्टेट प्रभारी संजीव शुक्ला पहाड़ में पहुंच कर लग गये फ़ोटो खिंचाने और दूसरी तरफ बेचारे होमगार्ड मर रहे हैं। &#8216;सूरज हुआ अस्त, पहाड़ हुआ मस्त&#8217; की कहावत को चरितार्थ करने, &#8216;दामाद&#8217; की तरह &#8216;आव-भगत&#8217; चाहते हुये संजीव शुक्ला यहां पर गुलदस्ता लेने, सेवा कराने में इतना मस्त हो गये हैं कि कोटद्वार जाकर घायल होमगार्डों को देखना जरूरी नहीं समझा।</strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240416-WA0010.jpg" alt="" class="wp-image-7137"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>बता दें कि कल पौढ़ी गढ़वाल में चुनावी ड्यूटी पर उत्तराखण्ड जा रहे शाहजहांपुर के 37 जवानों से भरी बस का ब्रेक फेल हो गया जिसकी वजह से शाहजहांपुर के होमगार्ड ओमकार की मृत्यु जिला अस्पताल पौड़ी में हो गयी। गंभीर रुपे से घायल होमगार्ड श्री कृष्ण कुमार और रामकुमार को चिकित्सकों ने यहां से रिफर कर कोटद्वार के सरकारी अस्पताल में करा दिया। किंतु साहब बहादुर हरिद्वार और देहरादून में &#8216;गुलदस्ता- गुलदस्ता&#8217; खेलते रहें। उन्हें देखने तक नहीं गये।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="257" height="250" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240416-WA0024.jpg" alt="" class="wp-image-18642" style="width:840px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अधिकारियों ने बताया कि सहारनपुर के गये तीनों स्टॅाफ लंच तैयार कराकर इंतजार करते रहें लेकिन राजा साहब हरिद्वार में मस्त रहें। बेचारे स्टॅाफ 24 घंटा सेवा में लगे हैं, लेकिन उनके कहीं रहने की व्यवस्था तक नहीं की गयी। वे बरामदे में सो रहे हैं और साहब की जी हुजूरी कर रहें कि कहीं काजू, नमकीन, सोडा कम न हो जाये और बड़े साहब नाराज होकर उन्हें सस्पेंड न कर दें&#8230;।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सवाल यह है कि विभाग स्टेट प्रभारी केवल मस्ती करने के लिये बनाया गया है? सहारनपुर के तीन कर्मचारियों को वहंा अपनी सेवा में बैठाये रखने के कारण, यदि सहारनपुर के निर्वाचन में कोई समस्या होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल, इन बातों को सुनने, समझने वाला कोई नहीं&#8230;। संजीव शुक्ला ने शासन में बड़े लोगों को पटाया हुआ है इसलिये उनसे कोई पूछने वाला नहीं। इस समय भी कोटद्वार के सरकारी अस्पताल में होमगार्ड जीवन- मृत्यु से लड़ रहे हैं और स्टेट प्रभारी गुल</strong>दस्ता-गुलदस्ता खेल रहे हैं।</p>
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