2 डीआईजी की शुक्रवारी लंपटबाजी,राजशाही दौड़ में सरकारी संपत्तियों का हो रहा दोहन
नये-नवेले डीआईजी आर.के.वर्मा की मुख्यालय पर लगने वाली शुक्रवारी दौड़ में लगती है सरकारी चपत
शुक्रवार की दौड़ में खास बातें –
1- सरकारी समान का दुरुपयोग
2- सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग
3- सरकारी सेवकों का भरपूर दोहन
आखिर मुख्यालय पर तैनात आईजी खामोश क्यों हैं ?

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। होमगार्ड के नाम से देश भर में विख्यात होमगार्ड विभाग आज इन्हीं जवानों के दोहन, मानसिक उत्पीडऩ और अपमान करने के लिये भी जाना जा रहा है। दूसरे विभाग में तो जवानों को ‘सम्मान’ मिलता है लेकिन होमगार्ड विभाग में यहीं तैनात अफसर उन्हें बद से बदत्तर आंकते हैं। जिसके मन में आया ‘अपशब्दों’ को इस्तेमाल कर बुलाते हैं, तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया और यदि उसमें मामूली चूक हुयी तो फिर मान लीजिये कि उस होमगार्ड या रनर को सरेआम बेइज्जती होना पड़ता है। एक कहावत है कि ‘नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है’…। इसे देखना है तो शुक्रवार की सुबह होमगार्ड मुख्यालय के परेड़ ग्राउंड पर आइये और ‘दौड़’ का ‘भौकाल’ देखिये। परिसर के अंदर आने की जरुरत नहीं है क्योंकि अंदर गये तो मंत्री जी ‘गुसिया’ जायेंगे और चाटुकार अफसर ‘गेट आऊट’ जैसे अंग्रेजी के रटे-रटाये शब्द बोलेंगे, इसलिये बाहर से ही नये-नवेले डीआईजी आर.के.वर्मा का ‘भौकाल’ देखिये। साथ में इनके दूसरे डीआईजी अजय पाण्डेय।

मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि आर.के.वर्मा को हड्डी में गंभीर बीमारी बी.पी. स्पांडलाइटिस है,जिसकी वजह से चिकित्सकों ने उन्हें प्रतिदिन 15 किलो मीटर चलने की सख्त हिदायत दी है। सुबह की ‘सैर’ और ‘दौड़’ सेहत के लिये बेहद जरुरी है लेकिन दोनों डीआईजी की ‘शुक्रवारी दौड़’ में ‘लंपटबाजी’ और ‘राजशाही’ ठाठ-बाट में सरकारी सामान, सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग, सरकारी सेवकों का भरपूर दोहन देखने को मिलता है। क्या नये-नवेले डीआईजी आर.के. वर्मा को सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग और होमगार्डों के दोहन करने का अधिकार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने दिया है? ये सही है या गलत इसका जवाब तो मुख्यालय पर बैठे अफसर ही दे सकते हैं ?
डीआईजी आर. के. वर्मा और ए. के. पांडेय हर शुक्रवार सुबह 5 बजे से होमगार्ड मुख्यालय के परेड ग्राउंड पर दौड़ का कार्यक्रम रखते हैं। दौडऩा तो आवश्यक है ही, लेकिन दौडऩे के नाम पर राजशाही व्यवस्था कराना चर्चा में है। एक दिन पहले से ही 20 सरकारी स्टाफ लगवाकर चूने की लाइन बनवायी जाती है। बड़े- बड़े बैनर लगवाये जाते हैं। ऐसा लगता है मानों प्रत्येक शुक्रवार को ‘होमगार्ड दिवस’ मनाया जाता है। इसी तरह, कर्मचारियों को सरकारी काम छोड़कर इस पर्सनल काम में लगाया जाता है,जिसकी वजह से सभी के अंदर भयंकर आक्रोश पनप रहा है।
होमगार्ड मुख्यालय और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के बैंड को बजाने के लिये बुलाया जाता है। इतना ही नहीं, फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफी भी झोंक कर करायी जाती है। मौके पर मौजूद चाटुकार फोटोग्राफर को 100 बार ऐंगल बताते हैं कि डीआईजी साहेब जब ऐंठिया कर चलें…ना होते हुये भी सीनवा तनिया कर चलें अऊर जब चवन्नी छाप मुस्कान मारें तो बाबू क्लीक कर देना…। अब जितने नए ट्रेनीज आये हैं उनसे बेकारी का काम कराते हैं। मजे की बात तो ये है कि अपने मनोरंजन के लिये महिलाओं को भी फर्जी परेड में शामिल करवाते हैं नये-नवेले डीआईजी साहेब…। दिखावे के लिये माइक और लाउडस्पीकर भी साहेब लगवाते हैं।
कुल मिलाकर दोनों डीआईजी सरकारी सामानों, सरकारी सम्पत्तियों, सरकारी सेवकों का भरपूर दोहन कर रहे हैं और दौड़ के नाम पर मस्ती कर रहे हैं। जो भी कर्मचारी सुबह नहीं आता है, उसे लगातार जलील करते हैं। शासन के अफसरों तक तो ये बात पहुंची ही नहीं होगी लेकिन मुख्यालय पर बैठे आईजी साहेब तो इसे देख और सुन रहे होंगे। खामोश क्यों हैं साहेबान…
2 डीआईजी की शुक्रवारी लंपटबाजी,राजशाही दौड़ में सरकारी संपत्तियों का हो रहा दोहन
शुक्रवार की दौड़ में खास बातें –
1- सरकारी समान का दुरुपयोग
2- सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग
3- सरकारी सेवकों का भरपूर दोहन
आखिर मुख्यालय पर तैनात आईजी खामोश क्यों हैं ?

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। होमगार्ड के नाम से देश भर में विख्यात होमगार्ड विभाग आज इन्हीं जवानों के दोहन, मानसिक उत्पीडऩ और अपमान करने के लिये भी जाना जा रहा है। दूसरे विभाग में तो जवानों को ‘सम्मान’ मिलता है लेकिन होमगार्ड विभाग में यहीं तैनात अफसर उन्हें बद से बदत्तर आंकते हैं। जिसके मन में आया ‘अपशब्दों’ को इस्तेमाल कर बुलाते हैं, तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया और यदि उसमें मामूली चूक हुयी तो फिर मान लीजिये कि उस होमगार्ड या रनर को सरेआम बेइज्जती होना पड़ता है। एक कहावत है कि ‘नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है’…। इसे देखना है तो शुक्रवार की सुबह होमगार्ड मुख्यालय के परेड़ ग्राउंड पर आइये और ‘दौड़’ का ‘भौकाल’ देखिये। परिसर के अंदर आने की जरुरत नहीं है क्योंकि अंदर गये तो मंत्री जी ‘गुसिया’ जायेंगे और चाटुकार अफसर ‘गेट आऊट’ जैसे अंग्रेजी के रटे-रटाये शब्द बोलेंगे, इसलिये बाहर से ही नये-नवेले डीआईजी आर.के.वर्मा का ‘भौकाल’ देखिये। साथ में इनके दूसरे डीआईजी अजय पाण्डेय।

मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि आर.के.वर्मा को हड्डी में गंभीर बीमारी बी.पी. स्पांडलाइटिस है,जिसकी वजह से चिकित्सकों ने उन्हें प्रतिदिन 15 किलो मीटर चलने की सख्त हिदायत दी है। सुबह की ‘सैर’ और ‘दौड़’ सेहत के लिये बेहद जरुरी है लेकिन दोनों डीआईजी की ‘शुक्रवारी दौड़’ में ‘लंपटबाजी’ और ‘राजशाही’ ठाठ-बाट में सरकारी सामान, सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग, सरकारी सेवकों का भरपूर दोहन देखने को मिलता है। क्या नये-नवेले डीआईजी आर.के. वर्मा को सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग और होमगार्डों के दोहन करने का अधिकार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने दिया है? ये सही है या गलत इसका जवाब तो मुख्यालय पर बैठे अफसर ही दे सकते हैं ?
डीआईजी आर. के. वर्मा और ए. के. पांडेय हर शुक्रवार सुबह 5 बजे से होमगार्ड मुख्यालय के परेड ग्राउंड पर दौड़ का कार्यक्रम रखते हैं। दौडऩा तो आवश्यक है ही, लेकिन दौडऩे के नाम पर राजशाही व्यवस्था कराना चर्चा में है। एक दिन पहले से ही 20 सरकारी स्टाफ लगवाकर चूने की लाइन बनवायी जाती है। बड़े- बड़े बैनर लगवाये जाते हैं। ऐसा लगता है मानों प्रत्येक शुक्रवार को ‘होमगार्ड दिवस’ मनाया जाता है। इसी तरह, कर्मचारियों को सरकारी काम छोड़कर इस पर्सनल काम में लगाया जाता है,जिसकी वजह से सभी के अंदर भयंकर आक्रोश पनप रहा है।
होमगार्ड मुख्यालय और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के बैंड को बजाने के लिये बुलाया जाता है। इतना ही नहीं, फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफी भी झोंक कर करायी जाती है। मौके पर मौजूद चाटुकार फोटोग्राफर को 100 बार ऐंगल बताते हैं कि डीआईजी साहेब जब ऐंठिया कर चलें…ना होते हुये भी सीनवा तनिया कर चलें अऊर जब चवन्नी छाप मुस्कान मारें तो बाबू क्लीक कर देना…। अब जितने नए ट्रेनीज आये हैं उनसे बेकारी का काम कराते हैं। मजे की बात तो ये है कि अपने मनोरंजन के लिये महिलाओं को भी फर्जी परेड में शामिल करवाते हैं नये-नवेले डीआईजी साहेब…। दिखावे के लिये माइक और लाउडस्पीकर भी साहेब लगवाते हैं।
कुल मिलाकर दोनों डीआईजी सरकारी सामानों, सरकारी सम्पत्तियों, सरकारी सेवकों का भरपूर दोहन कर रहे हैं और दौड़ के नाम पर मस्ती कर रहे हैं। जो भी कर्मचारी सुबह नहीं आता है, उसे लगातार जलील करते हैं। शासन के अफसरों तक तो ये बात पहुंची ही नहीं होगी लेकिन मुख्यालय पर बैठे आईजी साहेब तो इसे देख और सुन रहे होंगे। खामोश क्यों हैं साहेबान…
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