मौनी अमावस्या पर बृज की रसोई द्वारा नि:शुल्क पौष्टिक भोजन वितरण कार्यक्रम संपन्न
भोजन नहीं, सम्मान परोसने की पहल बनी सामाजिक प्रेरणा: आशीष श्रीवास्तव
सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा का जीवंत उदाहरण बनी बृज की रसोई : पंकज रायचंदानी
Brij ki rasoi news: नीम करौली बाबा के आशीर्वाद से बृज की रसोई जरुरतमंदो का पेट भरने निकल पड़ा विपिन शर्मा के ‘बृज की रसोई’ का कारवां … का सहारा बनकर नि:स्वार्थ भाव से काम कर रही है। जरुरतमंदो का पेट भरने की पहल,पहले दिन से ही देखने को मिल रही है। सकारात्मक सोच को लेकर चलने वाले इस संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा जब गाड़ी पर खाने का सामान लेकर चलते हैं तो क्या मासूम नौनिहाल और क्या बड़े बुजुर्ग,सभी दौड़ पड़ते हैं,नीम करौली बाबा का प्रसाद ग्रहण करने के लिये। मौनी अमावस्या के अवसर पर आज इंडियन हेल्प लाइन सोसाइटी,पंजीकृत द्वारा संचालित सेवा प्रकल्प बृज की रसोई ने आशियाना के सेक्टर एम-1 में पंक्ति में बच्चों को बिठाने के बाद भरपेट चावल,छोले और गाजर का हलुवा खिलाया। सही कहा गया कि किसी गरीब या भूखे का पेट भरने से बड़ा पुण्य इस दुनिया में दूसरा कोई और नहीं है।

बाबा नीम करौली जी की असीम अनुकम्पा से मौनी अमावस्या पर्व के पावन अवसर पर 18 जनवरी को इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी,पंजीकृत द्वारा संचालित सेवा प्रकल्प बृज की रसोई के अंतर्गत आशियाना क्षेत्र, लखनऊ में अकिंचन, निराश्रित, असहाय बच्चों एवं जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए नि:शुल्क पौष्टिक भोजन वितरण कार्यक्रम का सफल एवं गरिमापूर्ण आयोजन किया गया।

संजय श्रीवास्तव बताते है कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय एवं मानवीय गरिमा के मूल्यों के अनुरूप समाज के वंचित वर्गों को सम्मानपूर्वक पोषण उपलब्ध कराना रहा। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में जरूरतमंद बच्चों एवं बुजुर्गों को अनुशासन, स्वच्छता एवं संवेदनशीलता के साथ भोजन परोसा गया, जिसमें स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक विपिन शर्मा ने कहा कि बृज की रसोई केवल भोजन वितरण का उपक्रम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने का एक सतत मानवीय प्रयास है। उन्होंने नागरिकों से संविधान प्रदत्त सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन हेतु ऐसे सेवा कार्यों में सहभागिता की अपील की।
एकता रायचंदानी ने बताया कार्यक्रम में पंकज रायचंदानी द्वारा अपने पिताजी की पुण्यतिथि एवं अपनी वैवाहिक वर्षगांठ को सेवा भाव से जोड़ते हुए बच्चों के साथ समय बिताकर एवं भोजन वितरण एवं उपहार भेंट कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया गया। वहीं शिवाकर शर्मा ने अपने जन्मोत्सव को सेवा और स्नेह के पर्व के रूप में मनाते हुए बच्चों के साथ केक काटकर व उपहार एवं वस्त्र वितरित कर सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश दिया।

संस्था की ओर से विशाल सक्सेना ने बताया कि मौनी अमावस्या के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 1500 अकिंचन, निराश्रित एवं जरूरतमंद बच्चों तथा बुजुर्गों को छोला- चावल एवं मिष्ठान स्वरूप गाजर का हलुआ नि:शुल्क एवं ससम्मान परोसा गया।

अनुराग दुबे ने जानकारी दी कि कार्यक्रम में संस्था के समर्पित पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों क्रमश: संजय श्रीवास्तव, विशाल सक्सेना, आशीष श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, नवल सिंह, दिनेश पाण्डेय, मुकेश कनौजिया, अखिलेश सिंह, शिवाकर शर्मा, धु्रव सक्सेना, माया रायचंदानी, मान्या शर्मा, वंशिका शर्मा सहित अनेक समाजसेवियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।