Irrigation department news: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मिट्टी से नोटों की गड्डियां बनाने का कारोबार तेजी से चल रहा है। ये काम कोई गरीब इंसान नहीं सिंचाई विभाग के अफसर करा रहे हैं और माफियाओं के साथ मिलकर माफियागिरी भी कर रहे हैं। शासन का निर्देश है कि चिनहट के लौलाई क्षेत्र में सिंचाई विभाग की परिसंपत्ति,नदी,नहर की सफाई कर वहां से निकलने वाली मिट्टी निर्धारित जगह पर डंप किया जाये लेकिन अफसर ऐसा ना कर भू-माफियाओं को मिट्टी बेच रहे हैं। ये खेल लंबे समय से चल रहा है। सीधी बात करें तो गोमती एस्केप खारजा की सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग, लखनऊ के अफसर निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में ले जाकर मिट्टी गिरवा रहे हैं। यानि, गोमती एस्केप से मिट्टी निकाली तो जा रही है, लेकिन उसे शासन द्वारा निर्धारित जगह पर ना भेजकर निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में डंप करके जेसीबी से बराबर करवाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात तो ये है कि एक दिन में कम से कम 100 से 150 डंपर मिटटी भू-माफियाओं के ठिकाने पर पहुंच रही है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मिट्टी के अवैध खेल में सिंचाई विभाग के अफसरों की जेब में कितनी रकम जा रही होगी।
चौंकिये मत,ये सच है और सरकार द्वारा तय जगह पर मिट्टी ना गिराकर उसे भू-माफियाओं को बेचा जा रहा है। पूरा खेल चिनहट के लौलाई क्षेत्र में सिंचाई विभाग के अफसरों पर खेला जा रहा है। गोमती एस्केप,खारजा की सफाई से निकलने वाली मिट्टी की सप्लाई लंबेे समय से निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में की जा रही है। सोचने की बात ये है कि सिंचाई विभाग के अफसर कुर्सी पर बैठे-बैठे मिट्टी के नाम पर लाखों रुपये का अवैध व्यापार कर रहे हैं।

बता दें किलौलाई क्षेत्र में गोमती नदी के एस्केप की सफाई के लिए टेंडर का कार्य हुआ था, जिससे निकाली हुई मिट्टी को विभाग द्वारा चिन्हित स्थान पर करना था डंपिंग लेकिन अधिकारियों के मिलीभगत से खनन माफि या रोजाना अवैध खनन का क्रय- विक्रय कर रहे है।
सवाल ये है कि आखिर कहां गयी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति? यहां पर तो अफसर टॉलरेंस भूल