विश्व महिला दिवस -2026 के थीम ‘दान’ से ‘लाभ’ को समझें…


 मीरा श्रीवास्तव

सब जानते हैं, सब मानते हैं, नारी शक्ति का प्रतीक है।

नारी बिन पुरुष अधूरा है, शिव भी शक्ति से ही पूरा है।

World women’s day news : 1908 में न्यूयार्क में पहली बार महिलाओं ने अपने मौन को तोड़ा और अपने कार्यावधि तथा मताधिकार को पाने के लिए एक आन्दोलन छेड़ दिया. इस आन्दोलन का इतना असर पड़ा कि 1910..मे क्लारा हेनिन ने इसे नया आयाम दिया..फिर 1913 में सामाजिक अव्यवस्था. असमानता के विरोध में हज़ारो  महिलाओं  द्वारा सड़क आन्दोलन किया गया और 8 मार्च को  महिला दिवस के रूप में मनाए जाने के लिए रूपांतरित कर दिया गया….1917 में रसिया के सड़क पर 90 हज़ार कपड़ा उद्योग में कार्यरत महिलाओं ने भूख हड़ताल और आन्दोलन किया जिसमें  थीम ‘रोटी और शांति ‘ इतना प्रभावशाली रहा कि यह एक वैश्विक आंदोलन बन गया….तबसे ही पूरे विश्व की महिलाओं के उत्थान के लिए उनके महत्पूर्ण सहयोग के लिए जिसमें कई देशों की महिलाओं ने भाग लिया….1975 में इसे संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा  8 मार्च वैश्विक महिला दिवस के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है…

आज हर क्षेत्र में महिलाओं का महत्व पूर्ण योगदान है. हर क्षेत्र में सम्मान है…सरकार के द्वारा सारे अधिकार दिए गए सुविधाएं प्रदान की गई…किन्तु आज भी महिलाओं के अंदर कहीं न कहीं असुरक्षा का भय बना ही रहता है ….आज हम महिला दिवस पर इस वर्ष 2026 के थीम( दान से लाभ) को समझें…हम किसी और दान की बात न करके अपने बच्चों में बेटा बेटी दोनों में नैतिक संस्कार का दान करें…दोनों बच्चों में लैंगिक असमानता न करें..बेटों को घर में माँ बहन बेटी का सम्मान करना आदर करना सिखाये . परिवार में महिला-पुरुष कुम्हार के दोनो हाथ है .पुरुष गिली मिट्टी को बाहर से आकार देता है और स्त्री इसे अंदर से सम्हालती है .परिवार में सम्हला बच्चा समाज को सम्हालता है और सुधरे सम्हले समाज से देश स्वयं ही गौरवान्वित होता है हर देश से विश्व..तो कहीं न कहीं हमें परिवार परध्यान देना होगा जिसमें एक महिला की अतुल्य भूमिका होती है.

इसतरह हम देखते हैं कि प्रत्येक महिला समाज की वो धूरि है जिसके इर्द – गिर्द पूरी दुनिया घूमती है.. ये जो देती है समाज से भी वो ही पाती है  हर महान कार्य में भी इनकी भूमिका है और निकृष्ट  कार्य में भी कहीं न कहीं  इनका चूक है…इसलिए संस्कार इतना मजबूत हो कि आगे समाज में भी ये शिक्षा स्वयं ही प्रसारित हो..फैलता जाए…तभी मनुस्मृति में कहा गया ..

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता…सार्थक होगा …तभी हर महिला भय मुक्त हो कर समस्त समानता के अधिकारों का लाभ उठा सकती है…तभी सही मायने में विश्व महिला दिवस मनाया जा सकता है …


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