जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा द्वारा लिखी गई किताब ‘शिजर-ए-तैयबा’ काफी खतरनाक 


सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी बदलने के सिखाए जाते थे पैंतरा 

धनीष श्रीवास्तव,अशोक झा।   जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा… जिसकी कोशिश थी धर्मांतरण के जरिए उत्तर प्रदेश बिहार और बंगाल के सीमावर्ती  जिलों की डेमोग्राफी बदलना। हिंदू धर्म के खिलाफ नफरत फैलाकर एक इस्लामिक देश की बुनियाद रखना।जानकारी के मुताबिक, छांगुर पीर सिर्फ मौखिक प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ सामग्री प्रकाशित करने की योजना भी बना चुका था। इसका उद्देश्य था – हिंदूओं के बीच अपने धर्म के प्रति नफरत और भ्रम की भावना पैदा करना। छांगुर द्वारा लिखी गई किताब ‘शिजर-ए-तैयबा’ को इसी एजेंडे का हिस्सा माना जा रहा है। मतांतरण की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए छांगुर ने दो आलीशान कोठियों का निर्माण कराया था, जिनमें तहखाने जैसे संरचित कमरे मौजूद थे। इन्हीं कोठियों में विदेशी मौलानाओं को बुलवाकर ट्रेनिंग सेशन होते थे। यह सब बड़े स्तर पर सुनियोजित और संगठित रूप से चल रहा था। फिलहाल छांगुर पीर यूपी पुलिस की हिरासत में है। उसके साथ जुड़ी नीतू उर्फ नसरीन, उसका बेटा महबूब और अन्य करीबी भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एटीएस द्वारा इस पूरे नेटवर्क की लगातार निगरानी की जा रही है।

बलरामपुर स्थित छांगुर की कोठी पर प्रशासन ने बुलडोज़र कार्रवाई भी की, जहाँ अंदर मौजूद भारी सुरक्षा और आलीशान इंतज़ामों ने सबको चौंका दिया। अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। खाड़ी देशों से फंडिंग और पाकिस्तान कनेक्शन के भी संकेत मिले हैं, जिससे अन्य खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क छांगुर पीर तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो देशभर में मतांतरण, लव जिहाद और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। छांगुर का जाल महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था और इसे वह विदेशी पैसे के ज़रिए मज़बूत करता रहा। इसके तहत मुस्लिम युवाओं को खास तौर पर लव जिहाद के लिए तैयार किया गया था।

अवैध धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किए गए जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर गुर्गों की ट्रेनिंग के लिए दुबई से कट्टर मौलाना बुलाता था। नेपाल में सक्रिय दावत-ए-इस्लामी की टीम भी उनके साथ होती थी। गुर्गों के प्रशिक्षण के लिए ही छांगुर बाबा ने दो आलीशान कोठियां भी बनवायी थी। इन कोठियों में तहखाने की तरह कमरे बनाए गए थे। छांगुर बाबा ने हिंदू लड़कियों और गरीब परिवारों के धर्म परिवर्तन कराने का मजबूत जाल बुना था। मतांतरण के सरगना ने शिजर- ए- तयब्बा किताब भी इसी उद्देश्य से लिखी थी ताकि आसानी से इस्लाम को समझाया जा सके और लोग इस्लाम को दुनिया के सबसे बड़े धर्म के रूप में स्वीकार कर सकें। इसके साथ ही वह हिंदू देवी- देवताओं के प्रति घृणा की भावना भी लोगों में पैदा करता था।

अब तक की जांच में छांगुर बाबा के नेटवर्क से जुड़े जो बैंक खाते सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. नीतू और नवीन के नाम पर दुबई, यूएई और भारत में कुल 8 विदेशी बैंक खातों का पता चला है. इनमें एमिरेट्स एनबीडी, अल नाहदा, मशरक बैंक, फेडरल बैंक, अल अंसारी एक्सचेंज, आईसीआईसीआई वोस्ट्रो, एसबीआई एनआरओ आदि शामिल हैं. इन खातों में 66 करोड़ रुपये से अधिक की लेन-देन की पुष्टि हुई है। इस मामले में अब ईडी की भी एंट्री हो चुकी है, जो इन बैंक खातों और फंड ट्रांजेक्शनों की गहराई से जांच कर रही है. बलरामपुर की वही 12 करोड़ रुपये की आलीशान कोठी, जहां से बाबा धर्मांतरण का पूरा नेटवर्क चला रहा था, अब जमींदोज की जा चुकी है. प्रशासन ने सरकारी ज़मीन पर बनी इस कोठी को ध्वस्त करने के बाद अब बाबा की मंडली को 8 लाख 55 हजार रुपये का वसूली नोटिस भी थमा दिया है।इस रकम को 15 दिन में जमा करना होगा।


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