5 फ्लोर तक प्रतिमाह 2 लाख रुपये की बिजली खर्च हुयी,पैसा बिजली विभाग में जमा नहीं किया गया
राजकीय निर्माण निगम के अफसर वर्मा जी ने 18 लाख रुपये मुख्यालय के अफसर की जेब में ठूंस दिया
राजकीय निर्माण निगम ने 9 माह तक मुख्यालय के बिजली से 5 फ्लोर का ढांचा खड़ा किया
क्या कार्यवाहक डीजी धर्मवीर जांच कराकर महाभ्रष्ट अफसर की जेब से बिजली के 18 लाख निकलवा पायेंगे !

संजय श्रीवास्तव
Corporation in homeguards department : मुुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सबसे खूबसूरत सोच ‘जीरो टॉलरेंस’ की होमगार्ड विभाग के एक अफसर ने अपनी ‘कमाऊ सोच’ से ‘बदसूरत’ कर दी है। कुुर्सी पर ओरिजनल डीजी लंबे समय से नहीं है इसलिये उक्त अधिकारी ने लूट मचा रखी है। अपने लच्छेदार और चाशनी से डूबी बतिया से मौजूदा समय डीजी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रखे धर्मवीर को भी गुमराह करने में कामयाब हो गये हैं। चौंकाने वाली बात तो ये है कि चार पियक्कड़ होमगार्डों से पैसा लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले दो अधिकारियों में से एक इन साहेब ने भरसक कोशिश की कि ट्रैफिक में ही चारों तैनात रहें। शुक्र है डीआईजी, आर. के. वर्मा की कि जिन्होंने ‘द संडे व्यूज़’ की खबर को पढऩे के बाद कमांडेंट अमरेश कुमार को चारो पियक्कड़ों को ट्रैफिक से हटाने का निर्देश जारी कर दिया। पैसा देने वाले चारो होमगार्ड अब बउवा गये हैं…ट्रैफिक ड्यूटी भी गयी और मोटा पैसा भी…। खैर, हम बात कर रहे हैं मुख्यालय पर राजकीय निर्माण निगम द्वारा बनाये जा रहे 12 मंजिला बिल्डिंग की…। निर्माण निगम ने बिल्डिंग बनाने का काम फरवरी-मार्च 2025 में शुरु किया था लेकिन बिजली का कनेक्शन नहीं लिया। 5 फ्लोर तक ढांचा खड़ा करने तक निर्माण निगम के अधिकारियों ने होमगार्ड विभाग के बिजली का उपभोग किया। उक्त 9 माह तक औसतन 2 लाख रुपये की बिजली खर्च की गयी,यानि लगभग 18 लाख रुपये की चपत होमगार्ड विभाग को लगी। मजे की बात है कि निर्माण निगम के अधिकारी वर्मा जी ने मुख्यालय के इसी बड़े अधिकारी को पटाकर, उनकी थैलियों को भरकर सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया। ‘द संडे व्यूज़’ का सवाल है कि अस्थाई डीजी महाभ्रष्ट अधिकारी की जेब में गये 18 लाख रुपये निकलवा पायेंगे ?

बता दें कि राजकीय निर्माण निगम ने फरवरी, मार्च 2025 में होमगार्ड मुख्यालय पर 12 मंजिला बिल्डिंग बनाना शुरू किया और बिजली का कनेक्शन जनवरी 2026 में लिया। जनवरी 2026 तक निर्माण निगम ने 5 फ्लोर का ढांचा खड़ा कर दिया था। 5 फ्लोर का ढांचा खड़ा होने तक उसने होमगार्ड मुख्यालय की बिजली का उपभोग किया। इस 9 माह में उसने प्रति माह औसतन 2 लाख की बिजली खर्च की। इस तरह लगभग 18 लाख रुपए होमगार्ड विभाग के सिर पर चढ़ गया। मजे की बात यह है कि निर्माण निगम के अधिकारी वर्मा साहब ने मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी को पटा कर, उनकी थैलियों को भरकर सरकारी धन का गबन करके बंदरबांट कर लिया।
द संडे व्यूज़ पूछता है कि क्या वर्तमान डी.जी. इस पर कोई एक्शन लेंगे ? क्या वे बंदरबांट करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कोई जांच करायेंगे ? क्या वे बंदरबांट करने वाले अधिकारी को निर्माण कार्य से हटाकर माहौल को स्वच्छ बनाना चाहेंगे या उसकी लच्छेदार बातों और पटाऊ शैली के मुरीद होकर कान में तेल डाल लेंगे ? राजकीय निर्माण निगम ने 9 माह तक मुख्यालय के बिजली से 5 फ्लोर का ढांचा खड़ा किया