होमगार्ड विभाग में सेरेमोनियल ड्रेस और गर्म वर्दी का घोटाला !
डीआईजी मुख्यालय और सीटीआई इंचार्ज ताकते रह गये…

संजय श्रीवास्तव
Homeguards scam: मंत्री जी, आपके दुलारे अफसर, होमगार्ड दिवस की तैयारी के साथ-साथ अफसरों ने सेरेमोनियल ड्रेस और गरम वर्दी में घोटाला कर गरमा गये हैं। जेम पोर्टल पर लॉगिन आईडी बनाने से पहले ही अपने चहेते फर्म यानि लल्लटाप ठेकेदार सोनू एण्ड संस और मनीष एण्ड संस को बुलाकर ठेका दिलवा दिया। सीटीआई से लगभग 7 लाख रुपये की वर्दी के सामान, होमगार्ड मुख्यालय से लगभग 8 लाख रुपये के सामान मसलन…डांगरी, जूता-मोजा, बेल्ट, सैश, बक्कल, कमरबंद, लटकन आदि लगभग 400 होमगार्डों का 10 लाख रुपये का अंगोला पैंट-शर्ट बना है। अब तो आप लोग बुझ ही गये होंगे ना…। चहेते फर्मों को बिना जेम पोर्टल पर काम निकाले ठेका देने पर अफसरों को क्या मिलता है। चलिये समझा ही देते हैं…। जितने का काम उसका 25 प्रतिशत अफसरों को कमिशन मिलता है…। यानि,कमिशनखोरी का रकम बना लगभग 6 लाख रुपये…। अरे दद्दा साहेब लोग तो पूरी तरह से गरमा गये होंगे…अउर मंत्री जी…। मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश है कि जेम पोर्टल पर कोई भी सरकारी ठेका निकाला जाये ताकि पारदर्शिता के साथ कम रेट वाले फर्मों को टेण्डर मिले लेकिन होमगार्ड विभाग में उल्टी गंगा बहायी जा रही है। सवाल ये है कि आखिर परेड पर्यवेक्षक, मंडलीय कमांडेंट सुनील कुमार, मंडलीय कमांडेंट शैलेन्द्र सिंह और कमांडेंट मनोज शुक्ला ने बिना जेम पोर्टल पर ठेका निकाले बगैर सोनू एण्ड संस और मनीष एण्ड संस को काम क्यों दिया ? यदि जेम पोर्टल पर पहले दिन से ही उक्तों सामानों का टेण्डर निकाला गया होता तो,हो सकता है कम दर पर विभाग का काम हो जाता। आखिर दोनों फर्मों से काम कराने के बाद आखिर में क्यों जेम पोर्टल पर उक्त कामों को रेट डाला गया? क्या इस बात की जानकारी डीजी और डीआईजी को है? यदि है तो इनलोगों ने एक्श न क्यों नहीं लिया ?

होमगार्ड मुख्यालय पर तैनात भरोसेमंद अफसरों ने बताया कि 15 सालों तक लखनऊ में ही विभिन्न पदों पर तैनात रहने वाले परेड पर्यवेक्षक के रूप में पुन: लखनऊ में काबिज हो चुके सुनील कुमार ने सेरेमोनियल ड्रेस के नाम पर लंबा छक्का मारा है। सुनील एंड कंपनी ने इन दोनों ठेकेदारों से 25 प्रतिशत की दर से आर्डर दिलाया है जो लगभग 6 लाख रुपये होता है। पूर्व एसएसओ और उसकी टीम में शामिल मंडलीय कमांडेंट शैलेन्द्र सिंह और जिला कमांडेंट मनोज शुक्ल ने मिलकर अपने पहले से परिचित ठेकेदार सोनू एंड संस और मनीष एंड संस को बुलाकर ठेका दिलवा दिया। मजे की बात तो यह रही कि इन दोनों का जेम पोर्टल पर कोई लॉगिन आईडी ही नहीं था, जिसके कारण कर्मचारियों ने बड़ी मशक्कत के बाद में आर्डर बनाया।
‘द संडे व्यूज़’ को भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि सीटीआई से लगभग 7 लाख रूपये के वर्दी के आइटम होमगार्ड मुख्यालय से लगभग 8 लाख रुपये के आइटम जैसे डांगरी, जूता, मोजा, बेल्ट, सैश, बक्कल, बेल्ट, कमरबंद, लटकन आदि और लगभग 400 होमगार्डों का लगभग 10 लाख रुपये का अंगोला पैंट- शर्ट बना है। डीआईजी, मुख्यालय, जिनका रिटायरमेंट एक ही महीना बाकी है, उनसे तो किसी सुधार की आशा नहीं की जा सकती। सीटीआई वाले जरूर फू फ ंा करेंगे और हिस्से के लिये लड़ाई छिड़ेगी ही…।