. बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर के कमांडेंट चलते हैं पैदल,मुख्यालय पर स्टेनों को मिली टाटा सूमो यूपी 32 बी जी 8370
. सवाल डीजी एम.के.बशाल से : असली राजपत्रित अधिकारियों के पास गाड़ी नहीं, नकली राजपत्रित अधिकारी गौतम को कैसे मिली सरकारी सूमो ?
. सवाल मुख्यालय के अफसरों से : क्या राज्यपाल,उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग का पत्र है,जिसमें स्टेनो के.सी.गौतम को राजपत्रित अधिकारी बना दिया गया ?
. शर्मनाक बात है कि जिलों के कमांडेंट बिना गाड़ी के, स्टेनो बैठा एसी चैम्बर, मिली सरकारी गाड़ी

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। होमगार्ड विभाग के डीजी एम.के.बशाल नियम के पक्के हैं लेकिन क्या पूर्व के डीजी द्वारा किये गये मौखिक आदेशों को बदलने का दम रखते हैं? पूर्व डीजी ने निर्देश दिया कि मेरे स्टेनो के.सी. गौतम को सरकारी गाड़ी,होमगार्ड दिया जाये…। ध्यान दीजियेगा आदेश मौखिक था। फिर क्या था,स्टेनो बन गया भौकाली अफसर…। चमकदार टाटा सूमो नंबर यूपी 32 बी जी 8370 बत्ती लगी मिल गयी। सीधी बात करें तो डीजी के स्टेनो फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनकर असली राजपत्रित अधिकारियों पर रौला तो झाड़ता ही था, उसे जब बत्ती लगी टाटा सूमो मिल गया तो डीजी के एक रैंक नीचे के अफसरों को कौड़ी का तीन समझने लगा। इतना ही नहीं, कई जिलों में कमांडेंट कार्यालय में कूलर लगा है और श्री गौतम ए.सी. लगे चैम्बर में राज कर रहे हैं। ‘द संडे व्यूज़’ का सवाल है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में तैनात जिला कमांडेंट यानि असली राजपत्रित अधिकारियों के पास सरकारी चार पहिया गाड़ी नहीं है और मुख्यालय पर एक फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनकर सरकार को आंखें तरेरने वाले स्टेनो को चार पहिया टाटा सूमो दे दिया गया ? क्यों ? सवाल ये भी है कि क्या डीजी श्री बशाल जी जाते-जाते होमगार्ड विभाग को अपने घर का विभाग समझने वाले अफसरों को सबक सिखा कर जायेंगे ? दोनों सवाल डीजी से इसलिये किया गया है कि उनसे विभाग के अफसरों को कुछ उम्मीदें हैं। होमगार्ड मंत्री से सवाल करना इसलिये बेमानी है क्योंकि जब से मुख्यमंत्री ने उनसे कारागार विभाग लिया,तबसे वे सदमे में हैं।आखिरी सवाल मुख्यालय पर बैैठे अफसरों से है कि क्या उन लोगों के पास राज्यपाल या उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग का पत्र है कि स्टेनो के.सी.गौतम को राजपत्रित अधिकारी बना दिया गया है? यदि है तो सार्वजनिक कर विभाग की हो रही फजीहत से मुक्ति पायें।

उत्तर प्रदेश में तैनात कई ऐसे जिले हैं जहां तैनात जिला कमांडेंट बिना चार पहिया गाडिय़ों से ड्यूटी कर रहे हैं,जिसकी वजह से उन्हें तमात तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। पहले से ही पुलिस विभाग के अफसर होमगार्ड विभाग के अफसरों को दोयम दर्जे का मान कर चलते चले आ रहे हैं। कल्पना कीजिये जब कमांडेंट किसी बैठक में निजी वाहनों से जाता होगा तब पुलिस के अफसरों का नजरिया और कमांडेंट के दिलो-दिमाग में क्या चलता होगा…।

बता दें कि मऊ, गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ में होमगार्ड विभाग के (असली हीरो ) जिला कमांडेंट बिना गाड़ी के अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं। वहीं, मुख्यालय पर तैनात फर्जी राजपत्रित अधिकारी स्टेनो के.सी.गौतम जिसे स्कूटर या अपने निजी वाहन से आना चाहिये,उसे सरकारी टाटा सूमो यूपी 32 बी जी 8370 (नीली-लाल बत्ती) मिली है। जवानों ने बताया कि उक्त गाड़ी साहेब को घर से भी लाती है और छोडऩे भी जाती है। सोचने की बात है कि आखिर इस विभाग के अफसरों को क्या हो गया है जो अदने से स्टेनो के खिलाफ कार्रवाई करने से डर रहे हैं। बताया जाता है कि 90 के दशक से अफसरों के बीच जो बिरादरी वाद को लेकर विवाद चला आ रहा वो आज भी बरकरार है। होमगार्ड विभाग में जांच अधिकारियों और कर्मचारियों की बिरादरी को देखकर तय होता है जो सरकार की मंशा के विपरित है।
अगले अंक में आखिर अदने से स्टेनों पर पूर्व के डीजी क्यों हुये मेहरबान कि सब कुछ सौंप दिये…
अगले अंक में होमगार्ड राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने मुुख्यमंत्री को ही…