सिंचाई विभाग: ठेकेदार और अधिशासी अभियंता के ‘पार्टनरशीप’में लुट रही योगी सरकार


संजय श्रीवास्तव

लखनऊ। ये उत्तर प्रदेश है…जहां पर नदी की तलहटी से सिंचाई विभाग के अफसर मिट्टी नहीं कर्रे नोट निकाल रहे हैं। यूं कह सकते हैं कि करोड़ों रुपये कमाने के चक्कर में सिंचाई विभाग के अफसर टेण्डर की नियमावली को मिट्टी में दफन कर योगी सरकार को ही खुली चुनौती दे रहे हैं। गांव वालों ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार ने तो चिनहट के लौलाई क्षेत्र में गोमती स्केप का टेण्डर पाने वाली फर्म रान्या सिंह एण्ड कंपनी के साथ एक पार्टनर की तरह काम कर रहे हैं। हेमंत कुमार, ठेकेदार को निर्देश देते हैं कि नहर को नदी बना दो…किसी में इतनी जुर्रत नहीं है कि वो तुम्हारा बाल-बांका कर सके…। अफसर के बोल ने गांव वालों को नहीं बल्कि पूरी सरकार को चुनौती देकर साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ का रत्ती भर उसे खौफ नहीं है। तभी तो 11 सितंबर 2025 को रान्या सिंह एण्ड कंपनी को टेण्डर मिला और उसमें स्पष्ट है कि गोमती स्केप द्वारा निकाली गयी बालू-मिट्टी की बिक्री नहीं होगी। ऐसा करते पाये जाने पर ई-निविदाकार द्वारा जमा की गयी ई.एम.डी. की धनराशि राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करते हुये विभागीय कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। बावजूद इसके सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के साथ मिलकर ठेकेदार प्रतिदिन 100 से 150 डंपर गोमती स्केप से निकाली गयी बालू-मिट्टी निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में डंप कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि अधिशासी अभियंता,जिस पर ईमानदारी से काम कराने की जिम्मेदारी सौंपी गयी वही ठेकेदार के साथ मिलकर नोट छाप रहा है और सिंचाई मंत्री की साख पर सवालिया निशान लगा रहा है।  चिनहट में गोमती स्केप के काम में अफसर और ठेकदार द्वारा मचायी जा रही लूट के बारे में ‘द संडे व्यूज़’ ने सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर,शारदा सहायक प्रभाकर प्रसाद से बात की तो उनका कहना है कि न्यूज़ भेजिये, देखता हूं…।

सवाल ये है कि जब अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार मुख्यालय से अटैच हैं तो उन्हें चिनहट के लौलाई क्षेत्र में गोमती स्केप में बालू-मिट्टी के सफाई के काम को देखने के लिये अतिरिक्त कार्यभार किस अफसर ने दिया ? क्या गोमती स्केप से निकाले गये डंप को निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में डंप करने की बात हेमंत या संबंधित फर्म ने डीएम और खनन विभाग के अफसरों को बताया ? सवाल बहुतेरे हैं, इसका जवाब तो सिंचाई विभाग के एचओडी संदीप कुमार ही अपने मंत्री को दे सकते हैं…।

बता दें कि 11 सितंबर 2025 को सिंचाई विभाग ने चिनहट के लौलाई क्षेत्र में (गोमती स्केप)नदी,नहर की सफाई के लिये टेण्डर निकाला,जो रान्या सिंह एण्ड कंपनी, 303 गोल्फ सिटी,रोहतास गोल्फ लिंक अपार्टमेंट,कालीदास मार्ग फर्म को मिला। टेण्डर के मुताबिक गोमती स्केप के 3.480 कि.मी. से 5.271 के मध्य 21396.89 घन मीटर सील्ट,साधारण बालू के निकासी करनी थी। शर्त थी कि गोमती स्केप खारजा से उप खनिज के निकासी का काम संबंधित रीच के सहायक अभियंता,जूनियर इंजीनियर की देखरेख में निकाली गयी बालू का निकासी के बाद पुन: मापन किया जायेगा। जिलाधिकारी द्वारा बनायी गयी कमेटी अधिशासी अभियंता,सिंचाई खण्ड लखनऊ,संबंधित उप जिलाधिकारी एवं खनन अधिकारी द्वारा किया जायेगा। अधिशासी अभियंता द्वारा जारी पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि गोमती स्केप द्वारा निकाली गयी बालू,मिट्टी की बिक्री नहीं की जायेगी। ऐसा करते पाये जाने पर ई-निविदाकार द्वारा जमा की गयी ई.एम.डी. की धनराशि राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करते हुये विभागीय कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। साथ ही तलहटी से निकाली गयी गोमती स्केप पटरी पर इकट्ठा किया जायेगा। स्केप की पटरी पर स्थान उपलब्ध न होने पर चयनित ई-निविदादाकार को स्थल का चयन करते हुये संबंधित भू-स्वामी से सहमति प्राप्त कर उप खनिज को एकत्र करने से पूर्व डीएम, अधिशासी अभियंता,सिंचाई एवं खनन अधिकारी को सूचित करेगा।

अब देखिये, रान्या सिंह एण्ड कंपनी का ठेकेदार अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार के साथ मिलकर प्रतिदिन 100 से 150 डंपर मिट्टी,बालू शासन द्वारा निर्धारित स्थल पर ना डलवाकर निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में बेच दिये। बताया जाता है कि प्रति डंपर ठेेकेदार को पांच हजार रुपये मिले,जिसे दोनों ने बांट लिया। सवाल ये है कि सिंचाई विभाग ने जिस हेमंत कुमार को चोरी रोकने के लिये लगाया वही भ्रष्टाचार में शामिल हो गये। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हेमंत कुमार के खिलाफ कई शिकायतें मिली जिस पर उन्हें मुख्यालय से अटैच कर लिया गया है लेकिन अतिरिक्त चार्ज के रुप में ये काम देख रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच पर मुख्यालय से अटैच किया गया, उसे गोमती स्केप का काम देखने की जिम्मेदारी किसने दी ? सीधी बात करें तो अफसर ने डीएम को गुमराह कर पूरी मिट्टी गोकुल धाम को बेच दिया। सीधी बात करें तो गोमती एस्केप खारजा की सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग, लखनऊ के अफ सर निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में ले जाकर मिट्टी गिरवा रहे हैं। यानि, गोमती एस्केप से मिट्टी निकाली तो जा रही है, लेकिन उसे शासन द्वारा निर्धारित जगह पर ना भेजकर निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में डंप करके जेसीबी से बराबर करवाया जा रहा है।

चौंकाने वाली बात तो ये है कि एक दिन में कम से कम 100 से 150 डंपर मिट्टी भू-माफियाओं के ठिकाने पर पहुंच रही है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मिट्टी के अवैध खेल में सिंचाई विभाग के अफ सरों की जेब में कितनी रकम जा रही होगी। सोचने की बात ये है कि सिंचाई विभाग के अफसर कुर्सी पर बैठे- बैठे मिट्टी के नाम पर लाखों रुपये का अवैध व्यापार कर रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर कहां गयी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीतिघ् यहां पर तो अफसर टॉलरेंस भूल सिर्फ ‘जीरो’ पकड़ कर भू.माफियाओं के साथ मिलकर काला बाजारी कर रहे हैं…।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *