जीरो टॉलरेंस में ‘जीरो’ से मोहब्बत कर रिश्वतखोरी करने वाले आईएएस अभिषेक प्रकाश एक और मामले में फंसेंगे !


अभिषेक प्रकाश के इशारों पर सरोजनीनगर में असंक्रमणीय जमीन को संक्रमणीय कराकर भू-माफियाओं को बेचा गया!

तहसील के अधिकारियों ने रिश्तेदारों, नौकरों को जमीन दिलाकर मुआवजे की करोड़ों रुपये हड़पे

संजय श्रीवास्तव

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस से ‘टॉलरेंस’ भूल ‘जीरो’से मोहब्बत करने वालों के खिलाफ आक्रामक रुख अपना चुके हैं। सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने का संयंत्र लगाने के लिये रिश्वत मांगने के आरोप पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी कार्रवाई करते हुये इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीईओ अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया है। अभिषेक प्रकाश डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण घोटाले में भी फंस सकते हैं क्योंकि लखनऊ के डीएम रहते हुये इन्होंने भू-माफियाओं को सरोजनीनगर तहसील में भ्रटगांव ग्राम पंचायत में मन-मुताबिक दामों पर जमीन देकर करोड़ों का वारा-न्यारा किया है। सीधी बात करें तो उस दरम्यान डीएम साहेब भू-माफियाओं के आका बन, सभी काो अपने इशारों पर नचा रहे थें। जांच जारी है और डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण घोटाले में तत्कालीन डीएम सहित 18 अधिकारियेां को आरोपित बनाया गया है। राजस्व परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॅा. रजनीश दूबे ने इस प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, जिसके बाद कुछ अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है। शासन के भरोसेमंद आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अभिषेक प्रकाश अब बुरी तरह से फंस गये हैं और मुख्यमंत्री के कोप भाजन का शिकार बनने से इन्हें कोई रोक नहीं पायेगा।

बता दें कि राजधानी में डीएम रहते हुये अभिषेक प्रकाश ने डिफेंस कॉरिडोर के लिये लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील में भटगांव ग्राम पंचायत का चयन किया गया था। ब्रम्होस मिसाइल के अलावा रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियां अपने लिये जमीन तलाश रही थीं। इससे भटगांव में भूमि की दरें आसमान छूने लगीं थीं। भूमि की बढ़ती कीमतों को देखते हुये भू-माफि या सक्रिय हो गये और तहसील के अफ सरों की मिलीभगत से काॉरिडोर के लिये जिस जगह भूमि का अधिग्रहण होना था, वहां किसानों से सस्ती दर में भूमि खरीद लीं। अधिग्रहण की प्रक्रिया में फ र्जी तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर कर आवंटियों के नाम जोड़े गये। खरीद- फ रोख्त में नियमों की अनदेखी की गयी। पट्टे की असंक्रमणीय श्रेणी की भूमि को नियमानुसार बेचा नहीं जा सकता था, उसको पहले संक्रमणीय कराया गया और फि र बेचा गया। जिन लोगों का जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं था उनको मालिक दिखाकर मुआवजा दिलाया गया। मालिकाना हक की जांच के बिना ही अफ सरों ने मुआवजा बांट दिया दिया। सारा खेल डीएम अभिषेक प्रकाश के इशारों पर खेला गया था।

शासन के अफसरों ने बताया कि जांच रिपोर्ट के अनुसार भटगांव की करीब 35 हेक्टेयर जमीन के लिये 45.18 करोड़ रुपये स्वीकृत हुये थे। इसमें से करीब 20 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पायी गयी। जांच में यह भी सामने आया था कि तहसील में तैनात तत्कालीन अफ सरों ने अपने रिश्तेदारों और नौकरों तक को जमीन दिलाकर करोड़ों रुपये मुआवजा हड़प लिया था। इस मामले में तत्कालीन डीएम और एडीएम स्तर के अधिकारियों की भूमिका सामने आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष रजनीश दुबे से इसकी जांच करायी थी। जांच में तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश सहित एडीएमए एसडीएम व तहसीलदार सहित कई अफ सर दोषी पाये गये थे। इस जांच रिपोर्ट को लेकर कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों को चार्ज शीट किया गया है, जबकि बाकियों पर अभी कार्रवाई लंबित है लेकिन अब गाज अभिषेक प्रकाश पर गिरना तय है। शासन इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी कर सकती है।

अभिषेक प्रकाश के भ्रष्टाचार के कारनामों का खुलासा परत दर परत खुलता जा रहा है। 20 मार्च को सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने का संयंत्र लगाने के लिए रिश्वत मांगने के आरोप पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया है। जांच में उन्हें पहली नजर में दोषी पाया गया है। एसएईएल सोलर पी- 6 प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि विश्वजीत दत्ता ने इन्वेस्ट यूपी में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी, जिस पर एसटीएफ को भी सक्रिय किया गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह कठोर कार्रवाई की गयी है। साथ ही पुलिस ने गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर कमीशन मांगने वाले मेरठ निवासी 40 वर्षीय बिचौलिये निकान्त जैन को भी गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें कि अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएस अधिकारी हैं और मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1982 में हुआ था। उन्होंने रुड़की से 2000- 2004 के बीच इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, इसके बाद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक पॉलिसी में एमए किया। अपने प्रशासनिक करियर में वह लखीमपुर खीरी, लखनऊ, अलीगढ़ और हमीरपुर के जिलाधिकारी रह चुके हैं। ईमानदारी का चोला ओढ़कर आईएएस अभिषेक प्रकाश के पुराने मामलों की भी जांच शुरु कर दी गयी है। देखना है कि इनके खिलाफ और कितने भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा होता है।


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