लखनऊ। नवरात्र शक्ति की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। यह पर्व साल में चार बार मनाया जाता है, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। दो गुप्त नवरात्र होते है। चैत्र नवरात्र हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। इसी दिन नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा, आर्यसमाज स्थापना दिवस, गौतम जयंती, हेडगेवार और झूलेलाल जयंती मनाई जाएगी।

चैत्र नवरात्र 30 मार्च से छह अप्रैल तक मनाया जाएंगा। इस बार नवरात्र के दिनों में पांच विशेष योग बन रहे है और माता की सवारी हाथी पर होने के चलते सुख समृद्धि से पूर्ण होगी। सर्वार्थ सिद्ध, ऐंद्र, बुद्ध आदित्य, लक्ष्मी नारायण योग बनने से विशेष फलदायक होगी। नवरात्र 9 के स्थान पर 8 दिन के होंगे क्योंकि द्वितीया और तृतीया एक दिन पड़ रही हैं।
12:49 तक है प्रतिपदा
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 30 मार्च दोपहर 12:49 बजे तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 4:34 बजे से 1 अप्रैल 6: 13 बजे तक रहेगा। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा रविवार को अग्निवास पृथ्वी पर होता है इसलिए यज्ञ के लिए अतिशुभ है।
घट स्थापना का समय
ज्योतिषाचार्य डॉ.अरविंद मिश्र ने बताया कि प्रथम नवरात्र पर सुबह 3:58 से 5:31 बजे तक पहला शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 5:31 से 6:58 तक का समय शुभ है। घट स्थापना के लिए तीसरा उत्तम समय 8:35 से 10: 32 बजे तक रहेगा। इसके बाद चौथा और अंतिम शुभ मुहूर्त दिन में 10.32 से लेकर 12: 46 बजे तक रहेगा।