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	<title>अंतराष्ट्रीय Archives - The Sunday views</title>
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	<description>Daily Hindi News</description>
	<lastBuildDate>Tue, 07 Apr 2026 05:28:36 +0000</lastBuildDate>
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	<title>अंतराष्ट्रीय Archives - The Sunday views</title>
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	<item>
		<title>आधी सदी बाद चंद्रमा की ओर &#8216;मानव मिशन&#8217;, नासा का Artemis-II अंतरिक्ष अभियान तैयार</title>
		<link>https://thesundayviews.com/half-a-century-later-nasas-artemis-ii-space-mission-is-ready-for-a-human-mission-to-the-moon-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 05:28:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Apollo-17 (1972) के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की कक्षा तक जाएंगे, 4 सदस्यीय दल करेगा लगभग 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा लक्षित सिन्हा लखनऊ। मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Apollo-17 (1972) के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की कक्षा तक जाएंगे, 4 सदस्यीय दल करेगा लगभग 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/03/lakshit-sinha-288x300.jpg" alt="" class="wp-image-11837" style="aspect-ratio:0.9599479166666667;width:127px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"> <strong>लक्षित सिन्हा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ</strong>। मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अपने बहुप्रतीक्षित Artemis-II मिशन के माध्यम से लगभग आधी सदी बाद अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की ओर भेजने की तैयारी कर रही है। यह मिशन 1972 में हुए Apollo-17 मिशन के बाद पहला अवसर होगा जब मानव दल चंद्रमा की कक्षा के पास तक पहुंचेगा।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260407-WA0002-683x1024.jpg" alt="" class="wp-image-11927"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">नासा के Artemis कार्यक्रम के तहत यह दूसरा मिशन है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की कक्षा में मानवयुक्त उड़ान के माध्यम से नई अंतरिक्ष तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण करना है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान भविष्य में चंद्रमा की सतह पर मानव वापसी और मंगल ग्रह मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चार अंतरिक्ष यात्रियों का दल</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">Artemis-II मिशन के लिए नासा ने चार अंतरिक्ष यात्रियों के दल की घोषणा की है। इसमें रीड वाइसमैन (कमांडर),</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;विक्टर ग्लोवर (पायलट), क्रिस्टिना कोच (मिशन विशेषज्ञ), जेरेमी हैनसेन (कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी) शामिल हैं। विशेष बात यह है कि इस मिशन में पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा करेंगे, जो अंतरिक्ष इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शक्तिशाली रॉकेट से होगा प्रक्षेपण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मिशन का प्रक्षेपण नासा के अत्याधुनिक Space Launch System (S L S) रॉकेट के जरिए किया जाएगा, जिसे वर्तमान समय का सबसे शक्तिशाली लॉन्च वाहन माना जाता है।अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाने के लिए Orion spacecraft का उपयोग किया जाएगा। यह अंतरिक्ष यान चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा करने के बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेगा। मिशन की कुल अवधि लगभग 10 दिनों की होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Artemis कार्यक्रम का उद्देश्य</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">नासा का Artemis कार्यक्रम चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करने और वहां वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा है। इसके साथ ही यह कार्यक्रम भविष्य में मंगल ग्रह के मानव मिशनों की तैयारी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अंतरराष्ट्रीय सहयोग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (E SA) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (C SA) सहित कई अंतरराष्ट्रीय साझेदार भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि Artemis मिशन वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अनुसंधान के नए अवसर पैदा करेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तथ्य बॉक्स (FACT BOX)&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मिशन का नाम: Artemis-II</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंतरिक्ष एजेंसी: NASA</p>



<p class="wp-block-paragraph">लॉन्च वाहन: Space Launch System (S LS)</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंतरिक्ष यान: Orion Crew Capsule</p>



<p class="wp-block-paragraph">अनुमानित मिशन अवधि: लगभग 10 दिन</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्रू सदस्य:</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">• Reid W i s e man – Commander</p>



<p class="wp-block-paragraph">• Victor Glover – Pilot</p>



<p class="wp-block-paragraph">• Christina Koch – Mission Specialist</p>



<p class="wp-block-paragraph">• Jeremy Hansen – Canadian Space Agency</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>महत्वपूर्ण तथ्य:</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">• 1972 के Apollo-17 के बाद पहला मानव मिशन जो चंद्रमा की कक्षा के पास जाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">• मिशन में पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा करेंगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">• चंद्रमा की दूरी पृथ्वी से लगभग 3,84,400 किलोमीटर है</p>



<p class="wp-block-paragraph">• Artemis कार्यक्रम का लक्ष्य 2020 के दशक में चंद्रमा पर मानव की वापसी सुनिश्चित करना है</p>



<p class="wp-block-paragraph">• इसके बाद Artemis-III मिशन में चंद्रमा की सतह पर मानव उतारने की योजना है</p>
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		<title>क्या तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 05:31:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लक्षित सिन्हा The beginning of the Third World War!:  अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई लडाई दुनिया के एक बड़े हिस्से में तीसरे विश्व युध्द की शुरुआत के रूप&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="982" height="1024" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/lakshit-sinha-1-982x1024.jpg" alt="" class="wp-image-24976" style="aspect-ratio:0.9589896359192993;width:120px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/lakshit-sinha-1-982x1024.jpg 982w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/lakshit-sinha-1-288x300.jpg 288w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/lakshit-sinha-1-768x801.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/lakshit-sinha-1.jpg 987w" sizes="(max-width: 982px) 100vw, 982px" /></figure>



<pre id="tw-target-text" class="wp-block-preformatted"><strong>लक्षित सिन्हा
</strong>
<strong>The beginning of the Third World War!: </strong> अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई लडाई दुनिया के एक बड़े हिस्से में तीसरे विश्व युध्द की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है और भारत सहित कई देशों में सोशल मीडिया में लोग यह मानकर पोस्टिंग कर रहे हैं जैसे  विश्व युध्द शुरु हो चुका है ।   </pre>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="683" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0001-1024x683.jpg" alt="" class="wp-image-24977" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0001-1024x683.jpg 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0001-300x200.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0001-768x512.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0001.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">हालत यह है कि ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देश की 30 फ़ीसदी से ज्यादा आबादी यह मानकर चल रही है किटी की तीसरा विश्व युद्ध या तो शुरू हो चुका है या कभी भी शुरू हो सकता है इस बीच रूस के राजनीतिक विश्लेषक एलेकडजेडर दुगिन ने यह घोषणा करके सनसनी फैला दी है की तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है और रूस की सरकार ने इस लड़ाई शुरू होने के बाद यह कहकर पूरी दुनिया को डराया है की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मनसूबो पर अगर अंकुश नहीं लगाया गया तो यही लड़ाई तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकती है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह भी सच है कि भले ही तीसरा विश्व युद्ध दुनिया में कोई नहीं चाहता हो पर इस वैश्विक युद्ध का डर लोगों के दिलों में 400 साल से घर किये हुए है क्योंकि फ्रांस के महान भविष्य वक्ता नास्त्रेदमस ने १६ वीं शताब्दी में ही  2026 में सात महीनों  डेढ़ साल तक असर रखने वाले एक  बड़े  वैश्विक संघर्ष की  भविष्यवाणी कर रखी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> यह वही त्रीकालदर्शी है  जिसकी भविष्यवाणी का इस्तेमाल पहले और दूसरे विश्व युध् में एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे दोनो पक्षो ने बाकायदा हवाई जहाज से पर्चे गिराकर  मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के लिए किया था और इनके अनुसार तीसरा विश्वयुध्द मुस्लिम देशों और यूरोप के बीच होना है जिसमे नया विश्व नेता उभरेगा और वो नीली पगड़ी पहनकर यूरोप में प्रवेश करेगा।  </p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी तरह १९९६ में  मरने से पहले बुल्गारिया की अंधी भविष्य वक्ता बाबा वेन्गा ने तो 2026 में तीसरे विश्वयुध्द जैसा वैश्विक संघर्ष होने की बात कह रखी है।  अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच चल रही मौजूदा लड़ाई को अब एक हफ्ता होने जा</p>
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		<title>राष्ट्रपति जरदारी ने जताया हमले का डर, बोले-जंग की तैयारी में हिंदुस्तान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 05:16:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत से बातचीत को बेकरार पाकिस्तान Pakistan is afraid of India : पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भारत के साथ बातचीत को बेकरार हैं। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान भारत&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत से बातचीत को बेकरार पाकिस्तान</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Pakistan is afraid of India</strong> <strong>:</strong> पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भारत के साथ बातचीत को बेकरार हैं। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत को तैयार है। उन्होंने पाकिस्तानी संसद में भाषण के दौरान कहा कि भारत के साथ बातचीत ही इलाके की सुरक्षा के लिए एकमात्र रास्ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत, पाकिस्तान के साथ एक और जंग की तैयारी कर रहा है। हालांकि, संसद में उनके संबोधन के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान जरदारी को वापस भेजने और इमरान खान की रिहाई के नारे लगे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="536" height="476" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/pak3.png" alt="" class="wp-image-24968" style="aspect-ratio:1.1260545579883794;width:728px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/pak3.png 536w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/03/pak3-300x266.png 300w" sizes="(max-width: 536px) 100vw, 536px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading">जरदारी ने भारत को लेकर क्या कहा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस दौरान जरदारी ने कहा, &#8220;मेरा उनके (इंडिया) लिए मैसेज है कि वे जंग के मैदान से हटकर मतलब वाली बातचीत की टेबल पर आएं, क्योंकि इलाके की सिक्योरिटी के लिए यही एकमात्र रास्ता है। इंडिया के लीडर्स का कहना है कि वे एक और जंग की तैयारी कर रहे हैं। इलाके की शांति के लाइफलॉन्ग सपोर्टर के तौर पर, मैं इसकी सलाह नहीं दूंगा।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://popup.taboola.com/hi/?template=colorbox&amp;utm_source=timesinternetlimited-navbharattimes&amp;utm_medium=referral&amp;utm_content=thumbnails-mid:Mid%20Article%20Thumbnails:" target="_blank" rel="noreferrer noopener">&nbsp;&nbsp;</a></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>युद्ध को बताया आखिरी रास्ता<br></strong>बतौर राष्ट्रपति जरदारी नौवीं बार नेशनल असेंबली के संयुक्त सत्र को संबोधित करने पहुंचे थे। शांति का राग अलापते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को युद्ध को आखिरी रास्ता बताते हुए भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। अपनी झूठी तारीफ करते हुए आगे कहा कि पाकिस्तान ने पहले ही भारत और अफगानिस्तान दोनों को अपनी काबिलियत का बस एक छोटा सा हिस्सा ही दिखाया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पाकिसतान के परमाणु शक्ति की गीदड़भभकी दी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसके साथ ही जरदारी ने पाकिस्तान के परमाणु शक्ति होने का एहसास कराते हुए गीदड़भभकी की। बोले, “पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और उस जिम्मेदारी का वजन समझता है। साथ ही, हम एक ऐसा देश हैं जो जरूरत पड़ने पर अपना बचाव करना भी जानता है।” संयुक्त बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी घरेलू या विदेशी ताकत को अपनी शांति भंग करने के लिए पड़ोसी इलाके का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकते।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">जरदारी के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">गौर करने वाली बात ये रही कि जरदारी अपनी भड़ास निकालते रहे और उधर विपक्ष उनके खिलाफ नारे लगाता रहा। &#8216;गो जरदारी गो&#8217; और &#8216;खान को रिहा करो&#8217; के नारे से संसद गूंजती रही। पीटीआई की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहा था। उनके बोर्ड ऑफ पीस में सहभागिता को लेकर सवाल उठाते रहे। नारे लग रहे थे &#8216;जाली पीस बोर्ड से बाहर निकलें।&#8217; दरअसल, पाकिस्तान की अवाम फिलिस्तीन को लेकर इजरायल के रवैए से नाराज रहती है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>ईरानी हमलों से मक्‍का-मदीना के देश को कौन बचा रहा ?</title>
		<link>https://thesundayviews.com/who-is-saving-the-country-of-mecca-medina-from-iranian-attacks-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 05:08:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रियाद:&#160;अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी देशों पर लगातार हमले कर रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला किया गया है।&#8230; </p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>रियाद:&nbsp;</strong>अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी देशों पर लगातार हमले कर रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला किया गया है। वहीं सऊदी अरब के तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ है। ईरान की मिसाइलें लगातार खाड़ी देशों के आसमान में हैं। हालांकि कुछ मिसाइलों का असर जरूर हुआ है लेकिन ज्यादातर मिसाइलों को रोक दिया गया है। जैसे संयुक्त अरब अमीरात पर अभी तक 160 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं जिनमें से 4-5 मिसाइलें ही गिरी हैं। इसी तरह सऊदी भी ईरानी मिसाइलों के सीधे निशाने पर है। हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर सऊदी अरब के आसमान की रक्षा कौन कर रहा है ?</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/03/arab2.png" alt="" class="wp-image-11823"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">सऊदी अरब का एयर डिफेंस ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए मल्टी-लेयर्ड डिफेंस नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। सऊदी अरब का डिफेंस बजट 78 अरब डॉलर का है और वो अमेरिकी TH A AD एयर डिफेंस सिस्टम और पैट्रियट इंटरसेप्टर, दक्षिण कोरिया का KM-SAM एयर डिफेंस सिस्टम और चीनी एंटी-ड्रोन लेजर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सऊदी अरब सेना में करता है भारी-भरकम खर्च</strong><br>सऊदी अरब अपनी सेना को आधुनिक बनाने में भारी भरकम निवेश करता है। 2025 में उसने अपनी सेना पर 80 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इसका एक बड़ा हिस्सा रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स को मुश्किल हवाई खतरों के खिलाफ एक मजबूत, मल्टी-लेयर्ड शील्ड बनाने के लिए दिया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;<strong>640 पैट्रियट PAC-3 इंटरसेप्टर- </strong>अमेरिका में बना पैट्रियट PAC-3 एयर डिफेंस सिस्टम छोटी और मीडियम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। सऊदी अरब के पास जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और तेल सुविधाओं की रक्षा के लिए सैकड़ों ऐसे हिट-टू-किल इंटरसेप्टर हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>TH AA D यूनिट एक्टिवेट- </strong>पिछले साल सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर अपनी पहली टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (TH AA D) यूनिट एक्टिवेट कर दी थी। यह एक एडवांस्ड अमेरिकन सिस्टम है और जरूरी अपर-टियर लेयर देता है। ये एयर डिफेंस सिस्टम पृथ्वी के एटमॉस्फियर के अंदर और बाहर दोनों जगह बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3.2 अरब डॉलर का KM-SAM ब्लॉक II-</strong>&nbsp;सऊदी अरब ने KM-SAM ब्लॉक II सिस्टम खरीदने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ 3.2 अरब डॉलर की डील की थी। चेओंगंग-II के नाम से जाना जाने वाला यह एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। ये लोअर-टियर टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों और एयरक्राफ्ट को इंटरसेप्ट करने में माहिर है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>35 mm स्काईगार्ड ट्विन कैनन-</strong> वहीं करीबी सुरक्षा के लिए सऊदी अरब ओर्लिकॉन स्काईगार्ड 35mm ट्विन कैनन जैसी पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट आर्टिलरी का इस्तेमाल करता है। ये सिस्टम आधुनिक रडार के साथ एक्टिवली इंटीग्रेटेड हैं ताकि कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को नष्ट किया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>30 kW चीनी लेजर हथियार- </strong>सऊदी अरब, चीन का साइलेंट हंटर जो 30-kilowatt का फाइबर-ऑप्टिक लेजर सिस्टम है, उसका भी इस्तेमाल करता है। ये सुसाइड ड्रोन के खिलाफ कारगार माना जाता है। लेकिन ये लेजर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब के रेगिस्तानी इलाकों में कारगार नहीं हो पाया है। रेगिस्तान में उठने वाली तेज धूल और तेज गर्मी में लेजर की ऑप्टिकल ट्रैकिंग बार बार बेअसर हो गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>360-डिग्री इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग- </strong>रेगिस्तानी इलाकों में चीनी लेजर एयर डिफेंस की नाकामी को देखते हुए सऊदी सेना इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग गाड़ियों पर बहुत ज्यादा फोकस किया है। सऊदी ने चीन से J N 1101 जैसे सिस्टम खरीदे हैं। ये सिस्टम हवा में कम्युनिकेशन और नेविगेशन सिग्नल को रोककर ड्रोन के झुंड को सफलतापूर्वक बेअसर कर देते हैं।</p>
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		<title>सिंगापुर में सीएम योगी के काम का जलवा : जब संत &#8216;सियासत&#8217; में आता है, तो सियासत &#8216;इबादत&#8217; बन जाती है…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 19:04:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सात समुंदर पार योगी के नाम की गूंज: योगी है तो यूपी है&#8230; cm yogi in singapur : उत्तर प्रदेश के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ का बेहतरीन काम सात समुंदर&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>सात समुंदर पार योगी के नाम की गूंज: योगी है तो यूपी है&#8230;</strong></p>



<figure class="wp-block-image alignnone is-resized wp-image-11077"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2025/11/sanjay-main.jpg" alt="" class="wp-image-11077" style="aspect-ratio:0.6466145833333333;width:99px;height:auto"/><figcaption class="wp-element-caption"><br><strong style="color: #000000; font-family: sans-serif; font-size: medium; font-style: normal;">संजय श्रीवास्तव</strong></figcaption></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>cm yogi in singapur :</strong> उत्तर प्रदेश के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ का बेहतरीन काम सात समुंदर पार सिंगापुर में बोल रहा है। यहां पर प्रवासी भारतीयों में योगी के &#8216;जीरो टॉलरेंस&#8217; और &#8216;माफियाओं&#8217; पर कहर बनकर टूट पडऩे वाला अंदाज इस कदर भाया कि भव्य कार्यक्रम में एक महिला ने योगी को &#8216;भैया&#8217; कही और मंच से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम की कसीदें पढऩे लगी। महिला ने कहा कि &#8216;जब संत सियासत में आता है तो सियासत इबादत बन जाती है&#8217;&#8230;। इतने पर ही नहीं रुकीं&#8230;कहा कि &#8216;योगी हैं तो यूपी है&#8217;&#8230;।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="457" height="304" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y.png" alt="" class="wp-image-24930" style="aspect-ratio:1.5033153430994604;width:733px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y.png 457w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y-300x200.png 300w" sizes="auto, (max-width: 457px) 100vw, 457px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने बीच पाकर प्रवासी भारतीयों की खुशी का ठिकाना ना रहा। यूपी की रहने वाले महिला स्वाति ने तो मुख्यमंत्री को भैया कहा और जमकर तारीफ की। स्वाति ने कहा कि मुख्यमंत्री जी, मैं भी यूपी से हूं&#8230;उत्तर प्रदेशक साढ़े ग्यारह करोड़ बहनों से मैं कहती हूं कि आपने हमें इतनी सुरक्षा प्रदान की है कि अब रात को हमलोग घर से निकलते हैं तो डरते नही हैं बल्कि अपराधी डरते हैं&#8230;।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="630" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y-2-1024x630.png" alt="" class="wp-image-24932" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y-2-1024x630.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y-2-300x185.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y-2-768x472.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/singapur-y-2.png 1091w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मैं गर्व से कह सकती हूं कि &#8216;जब संत सियासत में आता है तेा सियासत इबादत में बदल जाती है&#8217;&#8230;। येागी की नेतृत्व में प्रदेश सुरक्षित है और उसका कल्याण होगा,ये सुनिश्चित है&#8230;। आखिर में स्वाति ने कहा कि &#8216;योगी है तो यूपी है&#8217;&#8230;।</p>
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		<title>दुनिया भर में 40% भाषाओं पर खतरा !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 09:09:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। आज दुनिया भर में 7000 से ज्यादा भाषाएं बोली जाती हैं और उनमें से करीब 3,000 यानी 40 प्रतिशत भाषाएं खतरे में हैं। इंग्लिश सबसे ज्यादा बोली जाने वाली&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>नई दिल्ली।</strong> आज दुनिया भर में 7000 से ज्यादा भाषाएं बोली जाती हैं और उनमें से करीब 3,000 यानी 40 प्रतिशत भाषाएं खतरे में हैं। इंग्लिश सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जिसे 186 देशों के 1.5 बिलियन लोग बोलते हैं। एथनोलॉग, जो दुनिया की भाषाओं को लिस्ट करने वाला एक डेटाबेस है, इसके अनुसार, हर 10 में से दो इंग्लिश बोलने वाले मूल निवासी हैं, जबकि बाकी 80 प्रतिशत लोग इंग्लिश को अपनी दूसरी, तीसरी या उससे ऊपर की भाषा के तौर पर बोलते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="638" height="370" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/bhasha.png" alt="" class="wp-image-24909" style="aspect-ratio:1.7242820945945947;width:745px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/bhasha.png 638w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/02/bhasha-300x174.png 300w" sizes="auto, (max-width: 638px) 100vw, 638px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मंदारिन&nbsp;चाइनीज दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जिसे लगभग 1.2 बिलियन लोग बोलते हैं। हालांकि, मूल वक्ताओं को ध्यान में रखते हुए, यह चीनी की बड़ी आबादी के कारण दुनिया की सबसे बड़ी भाषा है। हिंदी 609 मिलियन बोलने वालों के साथ तीसरे स्थान पर है, इसके बाद स्पैनिश 558 मिलियन और स्टैंडर्ड अरबी 335 मिलियन हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दुनिया की सबसे पॉपुलर भाषाओं की स्क्रिप्ट</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ग्लोबल स्क्रिप्ट के बारे में एक रेफरेंस बुक, द वर्ल्ड्स राइटिंग सिस्टम्स के अनुसार, 293 जानी-मानी स्क्रिप्ट हैं – यानी किसी भाषा को लिखने के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्राफिक कैरेक्टर का सेट। आज भी 156 से ज्यादा स्क्रिप्ट इस्तेमाल में हैं, जबकि 137 से ज्यादा पुरानी स्क्रिप्ट, जिनमें इजिप्शियन हाइरोग्लिफ्स और एज़्टेक पिक्टोग्राम शामिल हैं, अब इस्तेमाल में नहीं हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लैटिन स्क्रिप्ट, जिसका इस्तेमाल इंग्लिश, फ्रेंच, स्पैनिश, जर्मन और दूसरी भाषाएं लिखने के लिए किया जाता है, दुनिया की 7,139 जानी-मानी इंसानी भाषाओं में से कम से कम 305 में इस्तेमाल होती है। दुनिया की 70 परसेंट से ज्यादा आबादी इसका इस्तेमाल करती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सबसे ज्यादा खतरे में कौन सी भाषाएं हैं?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दुनिया भर में बोली जाने वाली 7,159 भाषाओं में से, 3,193 (44 परसेंट) खतरे में हैं, 3,479 (49 परसेंट) स्टेबल हैं, और 487 (7 परसेंट) इंस्टीट्यूशनल हैं, यानी उनका इस्तेमाल सरकारें, स्कूल और मीडिया करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोई भाषा तब खतरे में पड़ जाती है जब उसके इस्तेमाल करने वाले लोग कम्युनिटी के बच्चों को कोई ज्यादा असरदार भाषा सिखाने लगते हैं। कई भाषाओं का इस्तेमाल दूसरी भाषा के तौर पर किया जाता है। एथनोलॉग के मुताबिक, करीब 337 भाषाएं ऐसी हैं जो अब बंद हैं, जबकि 454 खत्म हो चुकी हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बंद भाषाएं वे होती हैं जिन्हें अब अच्छे से बोलने वाले नहीं हैं, लेकिन भाषा का अभी भी सोशल इस्तेमाल होता है और वह भाषा किसी एथनिक कम्युनिटी की पहचान का हिस्सा होती है। खत्म हो चुकी भाषाएं वे होती हैं जिन्हें कोई नहीं बोलता और न ही कोई सोशल इस्तेमाल होता है या ऐसे ग्रुप होते हैं जो इसे अपनी विरासत या पहचान का हिस्सा मानते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एथनोलॉग के मुताबिक, 88.1 मिलियन लोग किसी खतरे में पड़ी भाषा को अपनी मातृभाषा के तौर पर बोलते हैं। ये हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>1,431 भाषाएं जिन्हें पहली भाषा बोलने वाले 1,000 से कम हैं</li>



<li>463 भाषाएं जिन्हें बोलने वाले 100 से कम हैं</li>



<li>110 भाषाएं जिन्हें बोलने वाले 10 से कम हैं</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">सिर्फ 25 देशों में दुनिया की करीब 80 परसेंट खतरे में पड़ी भाषाएं हैं। ओशिनिया में सबसे ज्यादा खतरे में पड़ी भाषाएं हैं, उसके बाद एशिया, अफ्रीका और अमेरिका का नंबर आता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कुछ खतरे में पड़ी भाषाएं</h3>



<h3 class="wp-block-heading">ओशिनिया</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ऑस्ट्रेलिया में, युगाम्बेह, एक खतरे में पड़ी आदिवासी भाषा है, जिसे युगाम्बेह लोग बोलते हैं, खासकर पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में गोल्ड कोस्ट, सीनिक रिम और लोगान में। हाल के सालों में, कम्युनिटी के चलाए गए एक मजबूत रिवाइटलाइजेशन प्रोग्राम और लर्निंग ऐप्स के इस्तेमाल से यह भाषा नई पीढ़ी के लिए ज्यादा आसान हो गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एशिया</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जापान की ऐनू (ऐनू इटक) एक बहुत ज्यादा खतरे में पड़ी भाषा है। UNESCO के मुताबिक, इसे पक्के तौर पर किसी भी भाषा परिवार से नहीं जोड़ा जा सकता। ऐनू बोलने वालों की सही संख्या पता नहीं है, लेकिन 2006 के एक सर्वे से पता चला कि 23,782 ऐनू में से 304 को यह भाषा आती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अफ्रीका</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इथियोपिया में, ओंगोटा एक बहुत ज्यादा खतरे में पड़ी भाषा है। यह दक्षिण-पश्चिम इथियोपिया में वीटो नदी के पश्चिमी किनारे पर एक कम्युनिटी बोलती थी। कम्युनिटी के सिर्फ 400 मेंबर बचे हैं, और कुछ ही बुजुर्ग यह भाषा बोलते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका</h3>



<p class="wp-block-paragraph">नॉर्थ और सेंट्रल अमेरिका में, लगभग सभी इंडिजिनस भाषाएं खतरे में हैं। लुइसियाना क्रियोल, एक फ्रेंच-बेस्ड क्रियोल है जिसमें अफ्रीकी और इंडिजिनस असर है, यूनाइटेड स्टेट्स में एक बहुत ज्यादा खतरे में पड़ी भाषा है, जिसे ज्यादातर बुजुर्ग बोलते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेको बोलीविया में बोली जाने वाली एक खतरे में पड़ी इंडिजिनस भाषा है और इसे एक अलग भाषा माना जाता है, जिसका दूसरी भाषाओं से कोई जेनेटिक रिश्ता नहीं है। यह भाषा अब सिर्फ बुज़ुर्ग बोलते हैं और लेको एथनिक आबादी सिर्फ लगभग 13,500 है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यूरोप</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कॉर्निश (कर्नेवेक), जो साउथ-वेस्ट इंग्लैंड में बोली जाती है, को UNESCO ने एक खत्म हो चुकी भाषा के तौर पर मार्क किया था, जब तक कि इसे फिर से शुरू नहीं किया गया और 2010 में इसे एक खतरे में पड़ी भाषा में बदल दिया गया। 2021 इंग्लैंड और वेल्स सेंसस के मुताबिक, इसे 563 लोग अपनी पहली भाषा के तौर पर बोलते हैं।</p>
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		<title>यह ट्रेड डील नहीं बल्कि सरेंडर डील है</title>
		<link>https://thesundayviews.com/this-is-not-a-trade-deal-but-a-surrender-deal-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 10:05:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; &#160;रघु ठाकुर नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री ने 5 फ रवरी को संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण और विपक्ष के आरोपों का उत्तर देते हुये कहा कि हम देश&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2025/11/raghu-thakur-g-main-2-250x300.jpg" alt="" class="wp-image-11157"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp; &nbsp;रघु ठाकुर</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत के प्रधानमंत्री ने 5 फ रवरी को संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण और विपक्ष के आरोपों का उत्तर देते हुये कहा कि हम देश को बोफ ोर्स डील से ट्रेड डील तक लेकर आये हैं। इस कथन के माध्यम से जहां उन्होंने विपक्ष के ऊपर हमला बोला तथा बोफ ोर्स सौदे में हुये घोटाले की याद दिलाई। वहीं अपने हाल के व्यापारिक समझौते का बचाव भी किया। हमारे देश में अक्सर ऐसा होता है कि मीडिया के माध्यम से कारपोरेट वॉर के हथियार के रूप में आरोप उछाले जाते हैं, सरकारें बदल जाती हैं और आरोप जस के तस बने रहते हैं। 1989 में बोफोर्स तोपों की खरीदी में भ्रष्टाचार के नाम पर सरकार बदली और प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह बने, परंतु जो आरोप उन्होंने लगाये थे उनके दोषियों को दंड मिले इसके लिये उन्होंने कुछ नहीं किया। बाद में तो यहां तक हुआ कि जब स्व. अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और कारगिल में घुसपैठ हुई थी तो उन घुसपैठियों के मुकाबले के लिये बोफोर्स तोपों का इस्तेमाल किया गया और बोफोर्स तोपों की श्रेष्ठता सिद्ध हुयी। अब जो नया अमेरिका के साथ समझौता हुआ है उस पर चर्चा जारी है। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील की थी और उसे मीडिया ने मदर ऑफ डील्य की संज्ञा दी थी। यह स्वाभाविक है कि सरकारें कोई निर्णय करती हैं तो मीडिया का बड़ा हिस्सा उसका प्रचारक बन जाता है। क्योंकि मीडिया घरानों और सरकार के बीच प्रत्यक्ष तौर पर विज्ञापनों की डील होती है और अप्रत्यक्ष तौर पर कारखानों के लाइसेंस, बैंक की कर्ज माफ़ी,आर्थिक नीतियों के बदलाव आदि की डील होती है, जो मीडिया के प्रचार के मुख्य आधार होते हैं।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/02/trump-modi8.png" alt="" class="wp-image-11774"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">ईयू की डील के समय कहा गया कि अब भारत 20 लाख करोड़ डॉलर के मार्केट का हिस्सेदार बन गया है, हालांकि यह डील अभी अपरिपक्व अवस्था में है। नियम यह है कि यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों के साथ बातचीत में एक समझ बनी है, अब वे जाकर छह माह के भीतर ईयू के देशों के साथ संपर्क कर निर्णय करेंगे। अगर इस डील के समर्थन में निर्णय होता है तो उसके क्रियान्वयन की शुरुआत में भी औसतन 4-5 वर्ष लग जाते हैं, परंतु प्रधानमंत्री श्री मोदी को इनकी सरकार के लिये ऐसे काम करने का अभ्यास है। जब वे 2026 के बजट में 2047 की चर्चा कर सकते हैं तो 5 वर्ष का समय तो कम ही है। कम से कम मतदाताओं के लिये और देश के लिये झुनझुना तो 25 साल का उन्होंने पकड़ा दिया है। अभी तक यूरोपियन यूनियन के साथ डील के जो समाचार आये हैं अगर वे क्रियान्वित भी हो तब भी उनसे असली भारत की जनता को क्या लाभ होगा? ईयू चाहता है कि भारत के द्वारा कार खरीदी के मामले में उसे सहभागिता मिले, अगर यह फैसला हो भी जाये तो इससे भारत के संपन्न और श्रेष्ठीय वर्ग के अलावा आम लोगों को क्या मिलेगा? आम लोगों को तो केवल धुआं और दुर्घटनाओं की मौत तथा भ्रष्टाचार की बढ़ोत्तरी मिलेगी। भारत के पहले भी ईयू ने इंडोनेशिया, सिंगापुर, जापान और यूके आदि के साथ ट्रेड डील की है, यूरोपीयन यूनियन की भी यह सफलता है। प्रचार तो यहां तक किया गया कि इस तथाकथित मदर ऑफ डील्स्य से जियो पॉलिटिक्स बदलेगी और लोकतांत्रिक आर्थिक शक्तियों के बीच एक रणनीतिक विश्वास उभरेगा। यानि, ये डील अमेरिका और चीन के दो धु्रवों के बीच में एक तीसरा धु्रव बनेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि इतना अतिविश्वास यूरोपियन यूनियन को भी नहीं है। यूरोपियन यूनियन को यूक्रेन के बचाव के लिये रूस से लडऩा पड़ रहा है और वह अभी तक उसमें सफ ल नहीं रहा है। यूरोपियन यूनियन के बारे में रूस ने यह कहा कि कुछ दिनों बाद ये सब अमेरिका के सामने घुटने के बल बैठे नजर आयेंगे और अमेरिका ने भी ईयू और भारत के डील के लिये कोई विशेष तरजीह नहीं दी। अमेरिका यह जानता है कि यूनियन के देश उससे अलग होकर बहुत दिनों तक अपनी अर्थ व्यवस्था को नहीं बचा सकेंगे। अगर यह मदर ऑफ डील्य इतनी बड़ी उपलब्धि थी तो भारत को अमेरिका के साथ ट्रेड डील की क्या आवशकता थी? ईयू की डील ही पर्याप्त हो जाती। दरअसल ईयू की डील केवल प्रचारात्मक है क्योकि ईयू के देशों के पास भारत के समानों को बहुत अधिक खरीदने की ना तो जरूरत है और ना क्षमता है। अमेरिका का बाजार अभी तक भारत के लिए मुफ ीद था, क्योंकि भारत अभी तक अमेरिका से 9 लाख करोड़ का सामान निर्यात करता था और 4.5 लाख करोड़ का सामान आयात करता था। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत के होने वाले घाटे के एक हिस्से की पूर्ति इस तरीके से होती थी। दूसरे पिछले कुछ महीनों की घटनाओं से फि लहाल अमेरिका को एक विश्व शक्ति के रूप में देखना शुरू किया है और अपने सारे मनमानीपन, विदूषक तरीकों के बावजूद भी ट्रम्प अमेरिका की शक्ति का एहसास करा रहे हैं। वे एक साथ घर पर व बाहर दोनों मोर्चों पर बगैर अपने विचार को छिपाये खुलेआम लड़ रहे हैं, यह उनका अवगुण भी है और गुण भी है। अब भारत और अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील हुई है, इससे भारत का रोता हुआ बाजार निफ्टी और सेंसेक्स जो पिछले कुछ दिनों से दहाड़ मार कर रो रहे थे, अब कह कहा कर हंस रहें हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यानि, वे जानते हैं कि, बाजार और कारपोरेट शक्तियों का लाभ अंतत: अमेरिका के साथ समझौते में है। अमेरिका ने रूस के तेल खरीदी के नाम पर लगाये गए 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारत के निर्यात को जो पिछले माह से कमजोर अवस्था में था, अब फिर मौका मिला है। दरअसल एक पक्ष यह भी है कि अमेरिका जिन सामानों को भारत से खरीदता है वे कोई बुनियादी जरूरतों की चीजें नहीं हैं। जेवर, जेम्स, छोटो मोटी मशीन, दवा का रसायन आदि ऐसे ही सामान हैं जिनके बगैर अमेरिका का काम चल सकता है। अमेरिका इन सामानों को अन्य देशों से भी आयात कर सकता है। गुजरात के व्यापारियों का बड़ा हिस्सा और उनके परिवारिजन अमेरिका में रहते हैं और उनका भी श्री मोदी पर दबाब था कि जैसे भी हो अमेरिका के साथ रिश्ते बहाल किए जाये। इससे मोदी सरकार को फिलहाल अपनी सरकार बचाने में भी फ ायदा हुआ, और आगामी गुजरात चुनाव में भी इसका फ ायदा मिलेगा। हालांकि व्यापार के क्षेत्र में यह बहुत मुनाफेमंद साबित नहीं होगा। अमेरिका भारत से सी फू ड और विशेषत: झींगा खरीदेगा। दरअसल अमेरिका भारत से कुछ सामान इसलिये खरीदता है ताकि भारत को कुछ बाजार मिले और भारत उसका नीतिगत पिछलग्गू बना रहे। इसमें अमेरिका सफ ल भी हुआ है। पिछले कई माह से कहे- अनकहे डोनाल्ड ट्रम्प को चुनौती देने वाले प्रधानमंत्री ने इस डील के बाद विनम्रता का बयान दिया है कि देश की 140 करोड़ आबादी आपकी आभारी है। यह बयान ही अपने आप में भारत की स्थिति को बताने के लिए पर्याप्त है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यानि प्रधानमंत्री ने माना है कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता भारत की लगभग डेढ़ अरब आबादी के लिये हितकर है और इसलिये पूरा देश आभारी है। अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदना कम करे और यह कोई छिपा तथ्य नहीं है कि भारत वेनेजुअला के माध्यम से अमेरिकी प्रभाव का तेल खरीदेगा तथा कहे अनकहे रूस से खरीददारी कम होगी। दरअसल अमेरिका यूक्रेन को बचाने के लिये रूस की आर्थिक और सामरिक क्षमता कम करना चाहता है और इसमें वह सफल हुआ है। अमेरिका के कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस ने कहा है कि ट्रेड डील से अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात भारत के बाजार में बढ़ेगा जिससे 113 करोड़ डॉलर यानि लगभग 11000 करोड़ रुपये का भारत से व्यापार घाटा कम होगा और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कृषि और डेयरी सेक्टर हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। यह बयान द्विअर्थीय है, एक तो इस रूप में कि यह नहीं कहा गया कि कृषि उत्पाद को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, बल्कि इतना ही कहा गया है कि कृषि और डेयरी के हितों से कोई समझौता नहीं हुआ। इससे इतना तो अर्थ स्पष्ट है कि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के भारत में आने के लिये सहमति बनी है। अब उसकी सीमा क्या होगी, कितने में भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र के हित होंगे, यह श्री पीयूष गोयल ही समझ सकते हैं और अमेरिका अपने व्यापार घाटे को किस सीमा तक कम करेगा, यह खुलासा बकाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वाभाविक है कि कोई भी देश किसी दूसरे देश से समझौता करता है तो वह अपना भी हित सुरक्षित रखता है। दरअसल, पिछले आठ महीनों से जो भारत और दुनिया के पटल पर ट्रंप और मोदी का ड्रामा चल रहा था इसका एक ही अर्थ और एक ही लक्ष्य था। मैंने आज से लगभग 30 वर्ष पहले अपनी पुस्तक आर्थिक उदारीकरण और भारत्य में लिखा था कि डब्ल्यूटीओ का समझौता कोई साल दो साल का नहीं है, बल्कि एक ऐसी लंबी दूरी का है जो सदी तक भी पहुंच सकता है। इस समझौते में ही भारत के कृषि के क्षेत्र को खोले जाने की बात थी। वैसे भी, भारत अनेक दुग्ध उत्पादक सामग्रियों को अनेकों देशों से आयात करता रहा है। क्या हमने दूध पाउडर डेनमार्क से आयात नहीं किया था? इतना ही है कि बस पहले किसी छोटे देश से छोटे-मोटे आयात होते थे। अब अमेरिका से बड़े पैमाने पर कृषि आयात होगा जिसमें कपास, सोयाबीन तेल, बीन्स आदि आदि उत्पाद शामिल होंगे। फि र भारत की ओर से अपनी बढ़ती आबादी की जरूरतों की पूर्ति का हवाला दिया जायेगा और भारतीय कृषि इससे बुरी तरह प्रभावित होगी। विपुल अनुदान प्राप्त अमेरिका में पैदा किया गया गेहूँ भारत खायेगा और भारत में 85 करोड़ लोगों को 5 किलो मुफ्त अनाज मिलेगा।&nbsp; भारत का सामान्य किसान बर्बाद होगा तथा 85 करोड़ मुफ्त अनाज पाने वाले सरकार की जय जयकार करेंगे। अमेरिका अपने आर्थिक हितों में सफल होगा और भारत की सरकार वोट की खेती में सफल होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी कपास को तो भारत सरकार ने कपास की फ सल आने के पहले ही आयात की अनुमति दे दी थी। यह हमारे देश के विपक्ष के बौद्धिक दिवालियापन का भी प्रतीक है कि जब घटनायें होती हैं, तब वे अज्ञानता या अपने अतीत के अपराधों के दबाव में चुप रहते हैं और जब वे बीज विराट-वृक्ष बन जाते हैं तब प्रतिपक्ष थोड़ा बहुत हल्ला मचाकर चुप हो जाता है। अगर प्रतिपक्ष भी ईमानदार है तो उसे ये घोषणा करनी चाहिये कि अगर प्रतिपक्ष की सरकार आयेगी तो डब्ल्यूटीओ के समझौते से बाहर निकलेंगे, जो कि बचाव का वास्तविक रास्ता है। अमेरिका के साथ हुई डील में यह भी तय हुआ कि जहां एक तरफ अमेरिका टैरिफ को कम कर रहा है वहीं भारत भी अमेरिका 100 करोड़ डॉलर का अमेरिका से प्रतिवर्ष आयात से टैरिफ हटाएगा तथा पांच वर्ष में पांच सौ करोड़ के व्यापार को टैक्स अमेरिकी डॉलर मुक्त करेगा। सच्चाई तो यह है कि ये ट्रेड डील नहीं है, बल्कि सरेंडर है। यह व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि भारत का समर्पण है। प्रधानमंत्री जी ये कह रहे हैं कि खाड़ी देश परिषद के छह देशों से मुक्त व्यापार की बात हो रही है। इस व्यापार से भारत कुछ राहत तो पायेगा, परंतु अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के सपने को दूर तक लेकर नहीं जा पायेगा।</p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/this-is-not-a-trade-deal-but-a-surrender-deal-the-sunday-views-hindi/">यह ट्रेड डील नहीं बल्कि सरेंडर डील है</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<title>आर्कटिक के &#8216;पनामा नहर&#8217; पर कब्‍जे के लिए महाशक्तियों में जंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 13:44:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Arastrpati trump news :अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं। उनका वश चले तो वो आज और इसी वक्त ग्रीनलैंड पर कब्जा करने अमेरिकी&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Arastrpati trump news</strong> :अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं। उनका वश चले तो वो आज और इसी वक्त ग्रीनलैंड पर कब्जा करने अमेरिकी सैनिकों को रवाना कर दें। लेकिन ये इतना आसान नहीं है। यूरोप भी ग्रीनलैंड को बचाने हाथ पैर मार रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर इतनी बेताबी क्यों है? ट्रंप के ग्रीनलैंड और आर्कटिक प्लान से आखिर चीन और रूस क्यों डरे हुए हैं ? ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की इतनी दिलचस्पी चीन और रूस जैसी महाशक्तियों को क्यों परेशान कर रही हैं, इससे जानना और समझना जरूरी हो जाता है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/01/tramp522-1024x682.png" alt="" class="wp-image-11557"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">दरअसल, आर्कटिक क्षेत्र में सदियों से जमी बर्फ अब तेजी से पिघल रही है और पिघलती बर्फ ने नये समुद्री रास्तों को खोलना शुरू कर दिया है। इससे ना सिर्फ समुद्री व्यापार, बल्कि नये सिरे से सैन्य संतुलन बनाने की भी जरूरत होने लगी है। इन्हीं में से एक अहम समुद्री रास्ता है नॉर्थवेस्ट पैसेज। ये एक ऐसा समुद्री मार्ग है, जो कनाडा के उत्तरी तटों से होते हुए यूरोप को एशिया से जोड़ता है। जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट इसे &#8216;भविष्य का पनामा नहर नॉर्थ&#8217; कह रहे हैं। अमेरिका, सालों से चीन के पनामा नहर के दोनों सिरों पर लगातार बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क रहा है और डोनाल्ड ट्रंप तो सार्वजनिक तौर पर इस बात को लेकर भी लड़ चुके हैं, ऐसे में उनकी नई रणनीति, आर्कटिक में भी किसी प्रतिद्वंद्वी ताकत को निर्णायक बढ़त लेने से रोकने की है। जाहिर तौर पर इसका सीधा असर चीन और रूस पर होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की इतनी जिद क्यों है ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की जिद बचकाना लगे, लेकिन ये एक जियो-पॉलिटिकल जंग है। इस पूरी भूमिका में दरअसल ग्रीनलैंड की भूमिका काफी अहम हो जाती है। नॉर्थवेस्ट पैसेज के पश्चिमी छोर पर अमेरिका का अलास्का पहले से मौजूद है, जबकि पूर्वी प्रवेश द्वार पर ग्रीनलैंड स्थित है। जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट जेफ महोन के मुताबिक, ग्रीनलैंड इस समुद्री मार्ग का &#8220;ईस्टर्न फ्लैंक&#8221; है। यूरोप से एशिया की तरफ जाने वाले जहाजों को नॉर्थवेस्ट पैसेज में दाखिल होने से पहले ग्रीनलैंड के आसपास के समुद्री क्षेत्र से गुजरना ही होगा।</p>
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		<title>डोनाल्ड ट्रंप का एक संदेश-भारत शानदार है, &#8216;मोदी&#8217; एक महान &#8216;दोस्त&#8217; हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 04:27:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई&#160;दिल्ली:&#160;भारत में अमेरिकी दूतावास ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/a-message-from-donald-trump-india-is-wonderful-modi-is-a-great-friend-the-sunday-views-hindi/">डोनाल्ड ट्रंप का एक संदेश-भारत शानदार है, &#8216;मोदी&#8217; एक महान &#8216;दोस्त&#8217; हैं</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>नई</strong>&nbsp;<strong>दिल्ली</strong><strong>:&nbsp;</strong>भारत में अमेरिकी दूतावास ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक का घर है। यह एक अद्भुत देश है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी के रूप में हमारे पास एक महान मित्र है। यह संदेश एक्स पर पोस्ट किया गया था।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="845" height="521" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/modi-trump.png" alt="" class="wp-image-24459" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/modi-trump.png 845w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/modi-trump-300x185.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/modi-trump-768x474.png 768w" sizes="auto, (max-width: 845px) 100vw, 845px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br>यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत में व्यापार, अहम तकनीकों, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया था। दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर भी बातचीत कर रहे हैं, हालांकि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भारत-इथियोपिया संबंध रणनीतिक साझेदारी में बदले</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत और इथियोपिया के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने की घोषणा की। अदीस अबाबा में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबीय अहमद अली के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा, नया उत्साह और नई गहराई लाएगा तथा सहयोग की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, &#8216;दोनों देश शांति और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध लोकतांत्रिक शक्तियां हैं और ग्लोबल साउथ के सहयात्री हैं।&#8217; इस दौरान पीएम मोदी को इथियोपिया के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से भी सम्मानित किया गया। रणनीतिक साझेदारी के अलावा दोनों देशों के बीच सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के प्रशिक्षण में सहयोग से जुड़ा कार्यान्वयन समझौता और जी-20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत इथियोपिया के कर्ज पुनर्गठन से संबंधित एक समझौता ज्ञापन (M o U) शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इथियोपिया से मजबूत हो रहे रिश्ते</p>



<p class="wp-block-paragraph">पीएम मोदी जॉर्डन से इथियोपिया पहुंचे थे, जहां हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री अबीय अहमद अली ने उनका स्वागत किया और स्वयं गाड़ी चलाकर उन्हें स्थानीय विज्ञान संग्रहालय तक ले गए। भारत सरकार ने इस विशेष स्वागत को दोनों देशों के मजबूत जन-जन संबंधों और ग्लोबल साउथ साझेदारी की अहमियत का प्रतीक बताया।बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, नवाचार, तकनीक, रक्षा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और बहुपक्षीय सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा की। उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारत में इथियोपियाई छात्रों के लिए छात्रवृत्तियों की संख्या दोगुनी की जाएगी। पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले पर संवेदना और आतंकवाद के खिलाफ समर्थन के लिए इथियोपिया का आभार भी जताया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जॉर्डन यात्रा को बताया बेहद सफल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी दो दिवसीय जॉर्डन यात्रा को “बेहद सफल” बताया। उन्होंने कहा कि किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ उनकी बातचीत से दोनों देशों के बीच साझेदारी को कई अहम क्षेत्रों में मजबूती मिली है। जॉर्डन यात्रा के दौरान भारत और जॉर्डन के बीच नवीकरणीय ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, डिजिटल समाधान और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पेट्रा और एलोरा के बीच ‘ट्विनिंग’ को लेकर पांच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ चर्चा से नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल परिवर्तन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विरासत संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भारत-जॉर्डन संबंध और मजबूत हुए हैं। उन्होंने जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल-हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय का भी धन्यवाद किया, जो उनके प्रस्थान के समय हवाई अड्डे तक विदा करने पहुंचे।</p>
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		<title>जयशंकर का लालकिले से संदेश-&#8216;अमूर्त विरासत&#8217; है मानवता की साझा पूंजी</title>
		<link>https://thesundayviews.com/jaishankars-message-from-the-red-fort-intangible-heritage-is-humanitys-common-wealth-hindi-the-sunday-views/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Dec 2025 16:28:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;शाश्वत तिवारी S. Jaishankar: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमूर्त विरासत को मानवता की साझा पूंजी बताते हुए कहा है कि परंपराएं, भाषाएं, संगीत, शिल्पकला और अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/jaishankars-message-from-the-red-fort-intangible-heritage-is-humanitys-common-wealth-hindi-the-sunday-views/">जयशंकर का लालकिले से संदेश-&#8216;अमूर्त विरासत&#8217; है मानवता की साझा पूंजी</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251108-WA0011-215x300.jpg" alt="" class="wp-image-11030" style="width:107px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;शाश्वत तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>S. Jaishankar: </strong>विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमूर्त विरासत को मानवता की साझा पूंजी बताते हुए कहा है कि परंपराएं, भाषाएं, संगीत, शिल्पकला और अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के अन्य स्वरूप मानव संस्कृति की सबसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है, जो सभी की साझा संपत्ति है तथा सभी के द्वारा संरक्षित की जाती है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2025/12/rajiv-baba-main-2.jpg" alt="" class="wp-image-11280"/></figure>
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<p class="wp-block-paragraph">डॉ. जयशंकर ने 7 दिसंबर को लाल किले में आयोजित अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर यूनेस्को की महत्वपूर्ण बैठक के उद्घाटन समारोह में यूनेस्को की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया और कहा कि विरासत को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी वैश्विक समुदाय की सामूहिक प्रतिबद्धता है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार मंत्री ने कहा एक संस्थापक सदस्य के रूप में भारत ने शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति में गहन सहयोग के माध्यम से वैश्विक शांति और समझ को बढ़ावा देने के यूनेस्को के उद्देश्यों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में, मानव जाति को अपने पूर्वजों की विरासत से लाभ हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जैसे-जैसे हम प्रगति और समृद्धि की साझा खोज में आगे बढ़ते हैं, यह आवश्यक है कि हम इस विरासत का पोषण करें और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। कई यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का घर होने के अलावा, भारत ने स्वयं दुनिया भर में कई संरक्षण और संवर्धन परियोजनाएं शुरू की हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि भारत पहली बार इस अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र की मेजबानी कर रहा है, जो 8 से 13 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में नामांकन पर विचार करेंगे, मौजूदा प्रविष्टियों की स्थिति की समीक्षा करेंगे तथा संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर अंतिम निर्णय लेंगे। भारत ने इस मौके पर विषयगत दीर्घाओं से लेकर पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं तक, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को लाल किला परिसर में भव्य रूप से प्रदर्शित किया है।</p>
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