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	<title>महाराष्ट्र Archives - The Sunday views</title>
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	<description>Daily Hindi News</description>
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	<title>महाराष्ट्र Archives - The Sunday views</title>
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		<title>श्रद्धांजलि- 8 अक्टूबर 2026 नाना पाटेकर: अभिनय का वह विद्रोही स्वर जो कभी खामोश नहीं होगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 06:45:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;के.के.उपाध्याय लखनऊ। नाना पाटेकर का इस दुनिया से चले जाना अभिनय की दुनिया में एक ऐसी वीरानी छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। कुछ अभिनेता पर्दे पर&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/10/k-k-upadhya-251x300.jpg" alt="" class="wp-image-12870" style="aspect-ratio:0.8333333333333334;width:100px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;के.के.उपाध्याय</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ</strong>। नाना पाटेकर का इस दुनिया से चले जाना अभिनय की दुनिया में एक ऐसी वीरानी छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। कुछ अभिनेता पर्दे पर आते हैं। अभिनय करते हैं। तालियां बटोरते हैं। चले जाते हैं। कुछ कलाकार दर्शकों के भीतर उतर जाते हैं। उनके संवाद स्मृतियों का हिस्सा बन जाते हैं। उनका चेहरा एक विचार बन जाता है। उनकी आवाज़ व्यवस्था से सवाल पूछने लगती है। नाना पाटेकर ऐसे ही कलाकार थे। वे सिर्फ अभिनेता नहीं थे। एक शानदार इंसान भी थे। बेबाक। संवेदनशील। स्वाभिमानी। अपनी शर्तों पर जीने वाले। अभिनय में जितने प्रखर, निजी जीवन में उतने ही सादगी प्रिय।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1017" height="945" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/10/nana-p1-1.jpg" alt="" class="wp-image-26219" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/10/nana-p1-1.jpg 1017w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/10/nana-p1-1-300x279.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/10/nana-p1-1-768x714.jpg 768w" sizes="(max-width: 1017px) 100vw, 1017px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नाना को देखकर कभी लगा ही नहीं कि वे अभिनय कर रहे हैं। ऐसा लगता था जैसे पर्दे से सीधे दर्शकों के साथ संवाद कर रहे हों। उनकी आँखें बोलती थीं। चेहरे की एक- एक रेखा संवाद करती थी। आवाज़ में अद्भुत दम था। संवाद अदायगी में ऐसा प्रवाह कि शब्द सीधे हृदय में उतर जाते थे। वे संवाद बोलते नहीं थे। उन्हें जीते थे। मुझे आज भी याद है। मैंने नाना पाटेकर की पहली फि ल्म प्रतिघात देखी थी। वह 1987 का दौर था। उस फि ल्म में उनका किरदार मानसिक रूप से अस्थिर दिखाई देता था। लेकिन उसकी बातें देश की थीं। व्यवस्था की थीं। समाज की थीं। उसकी बेचैनी में एक सामान्य नागरिक का आक्रोश था। वह किरदार मेरे मन में कहीं ठहर गया। उस समय शायद कल्पना भी नहीं की थी कि यही अभिनेता आगे चलकर भारतीय सिनेमा में अभिनय की एक अलग परिभाषा लिखेगा। नाना की विशेषता थी कि उनके अभिनय में बनावट नहीं थी। वे पारंपरिक नायक की छवि में फिट नहीं बैठते थे। न चमकदार चेहरा। न बनावटी मुस्कान। न नायक बनने के लिए आवश्यक समझी जाने वाली अदाएं। लेकिन जब पर्दे पर आते थे तो दूसरे कलाकारों की उपस्थिति छोटी पड़ जाती थी। परिंदा में उनका भयावह व्यक्तित्व देखिए। प्रहार में अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण देखिए। क्रांतिवीर में व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह देखिए। यशवंत में एक ईमानदार पुलिस अधिकारी का आक्रोश देखिए। अब तक छप्पन में कठोरता देखिए। और फिर वेलकम में उनकी अद्भुत हास्य प्रतिभा देखिए। एक ही अभिनेता के इतने रूप ! यही नाना की विलक्षणता थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उनकी फिल्म क्रांतिवीर का वह दृश्य भला कौन भूल सकता है, जब वे फांसी के तख्ते पर खड़े होकर गरजते हैं&#8230; <strong>आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने !</strong> यह केवल एक फिल्मी संवाद नहीं था। यह उस व्यवस्था के विरुद्ध आक्रोश था। जिसमें अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला व्यक्ति ही अपराधी बना दिया जाता है। इसी फिल्म में उनका एक और संवाद समाज की सांप्रदायिक संकीर्णता पर सीधा प्रहार करता है &#8230; <strong>बता ये मुसलमान का खून है या ये हिंदू का खून है, बता !</strong> नाना के संवादों में मनोरंजन के साथ सामाजिक चेतना भी थी। वे दर्शकों को उत्तेजित ही नहीं करते थे। सोचने के लिए भी विवश करते थे। यशवंत का उनका प्रसिद्ध मच्छर वाला संवाद आज भी लोगों की ज़ुबान पर है। तिरंगा का वह अंदाज़ <strong>पहले लात, फिर बात&#8230;</strong> आज भी याद किया जाता है। और वेलकम में उदय शेट्टी बनकर उनका यह कहना कि <strong>&#8216;भगवान का दिया हुआ सब कुछ है&#8217;</strong> हास्य अभिनय की यादगार मिसाल बन गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोचिए! जिस अभिनेता की आवाज़ सुनकर दर्शकों की मुट्ठियां तन जाती थीं, वही अभिनेता कुछ वर्षों बाद अपनी अदाओं से उन्हें ठहाके लगाने पर मजबूर कर देता था। यह साधारण प्रतिभा नहीं थी। लेकिन नाना के व्यक्तित्व का एक दूसरा पक्ष भी था। जो संभवत: उनके अभिनय से कहीं अधिक बड़ा था। महाराष्ट्र में जब किसान सूखे और आत्महत्या की त्रासदी से जूझ रहे थे, तब नाना केवल संवेदना व्यक्त करके नहीं रह गए। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 2015 में नाम फाउंडेशन की शुरुआत की। किसानों के परिवारों की सहायता, जल संरक्षण और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया। यही अंतर है प्रसिद्धि और सार्थकता में। बहुत से लोग फिल्मों में किसानों का दर्द बेचते हैं। नाना किसानों का दर्द बांटने उनके बीच पहुंचते थे। उनके जीवन में देश के प्रति लगाव भी केवल संवादों तक सीमित नहीं था। प्रहार के लिए उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण लिया। भारतीय प्रादेशिक सेना से उनका जुड़ाव रहा। उनके भीतर सैनिक अनुशासन और देश के प्रति सम्मान का भाव स्पष्ट दिखाई देता था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान उनकी प्रतिभा की सार्वजनिक स्वीकृति थे। लेकिन नाना की असली उपलब्धि पुरस्कार नहीं थे। वह स्थान था, जो उन्होंने करोड़ों दर्शकों के हृदय में बनाया। नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे असहज करने वाले सवाल पूछने से नहीं डरते थे। उनके अभिनय में विद्रोह था। लेकिन वह निरर्थक विद्रोह नहीं था। उसमें समाज के प्रति चिंता थी। व्यवस्था के प्रति आक्रोश था। अन्याय के प्रति असहमति थी। आज सिनेमा में तकनीक बढ़ गई है। दृश्य भव्य हो गए हैं। प्रचार का शोर बढ़ गया है। लेकिन ऐसे कलाकार कम होते जा रहे हैं, जो केवल अपनी आवाज़, आंखों और चेहरे के भावों से पूरा दृश्य अपने नाम कर लें। नाना ऐसे ही कलाकार थे। आज उनके निधन का समाचार आया तो मन अचानक प्रतिघात के उस किरदार की ओर लौट गया, जिसे मैंने लगभग चार दशक पहले देखा था। तब वह किरदार देश और व्यवस्था से सवाल पूछ रहा था। बाद के दशकों में नाना ने अलग- अलग किरदारों के माध्यम से वही बेचैनी जीवित रखी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नाना चले गए, लेकिन उनकी आवाज़ नहीं जाएगी। उनका आक्रोश नहीं जाएगा। उनके संवाद नहीं जाएंगे। उनका वह विशिष्ट अंदाज़ नहीं जाएगा। जब भी भारतीय सिनेमा में स्वाभाविक अभिनय की चर्चा होगी, जब भी दमदार संवाद अदायगी का उल्लेख होगा, जब भी पर्दे पर व्यवस्था से टकराने वाले किसी विद्रोही चरित्र की बात होगी, नाना पाटेकर याद आएंगे। क्योंकि नाना पाटेकर केवल किरदार नहीं निभाते थे। वे किरदारों में अपना जीवन भर देते थे। और ऐसे कलाकार मरते नहीं। वे अपने अभिनय में जीवित रहते हैं। अलविदा नाना! आपके जाने से पर्दा सूना हुआ है। लेकिन आपकी आवाज़ भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में हमेशा गूंजती रहेगी। <strong>विनम्र श्रद्धांजलि।</strong></p>
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		<title>लोक गीत&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 16:21:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आस्था]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;सुर और ताल मे पिरोकर, अपनी संस्कृति, अपने संस्कार, अपने भाव, अपने मान । गाते &#8211; थिरकते लोकगीतों मे बसती, हर देश- प्रदेश- नगर- गाँव की अपनी पहचान ।। मीरा&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;सुर और ताल मे पिरोकर, अपनी संस्कृति, अपने संस्कार, अपने भाव, अपने मान ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गाते &#8211; थिरकते लोकगीतों मे बसती, हर देश- प्रदेश- नगर- गाँव की अपनी पहचान ।।</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/03/mira-sri-300x292.jpg" alt="" class="wp-image-6898" style="aspect-ratio:1.029126213592233;width:154px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मीरा श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अप्सरा आली इंद्रपुरीतून खाली,पसरली लाली रत्नप्रभा तनु ल्याली</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ती हसली गाली चांदणी रंगमहाली, अप्सरा आली पुनवचांदणं न्हाली&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Folk song:</strong> इस धमाकेदार गीत के बजते ही पूरे माहौल मे सर्दी की रात मे गर्मी दौडऩे लगी। साथ ही महिलाओं के नौ मीटर की नववारी सारी का फेटा कस कर पहनना, पाँवों मे लच्छेदार घुंघरू और तेज ढोलकी पर ऊर्जावान नृत्य करना हम यू. पी. वालों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहां हम लड़की वाले बन कर गए थे , हम यू. पी. की लड़की और महाराष्ट्र के नासिक का लड़का, भगवान ने क्या जोड़ी बनाई थी&#8230;। अपने देश के दो अलग- अलग संस्कृतियों का ऐसा मेल कराया, जिसमें हम दोनों परिवारों को प्रेम की अमर माला में गूँथ दिया&#8230;। नई संस्कृति में शादी के रस्मों को देखने के लिए हम सब बहुत उत्साहित थे । आज हल्दी, संगीत- नृत्य का दिन था, आरंभ लड़के वालों के लावणी गीत से ही हुआ। लावणी महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय लोकगीत और नृत्य है। यह अपनी तेज लय, ऊर्जावान संगीत और सुंदर भाव भंगिमाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लावणी शब्द लावण्य से बना है, जिसका अर्थ सौंदर्य (खूबसूरती) होता है। यह गीत ढोलकी की थाप पर बहुत तेज गति में गाया जाता है। इस कला को पेशवा राजाओं के समय मे बहुत बढ़ावा मिला था,सैनिकों का जोश बढ़ाने के लिए गाया जाता था।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="644" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1024x644.png" alt="" class="wp-image-26169" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1024x644.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-300x189.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-768x483.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1536x966.png 1536w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-2048x1288.png 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">लावणी आज भी महाराष्ट्र की संस्कृति का बहुत बड़ा हिस्सा है, इसमे ढोलकी की थाप पर पारिवारिक प्यार, राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक मुद्दों और प्रेम प्रसंगो को व्यक्त किया जाता है। अब इतने ऊर्जावान प्रस्तुति के बाद कौन रुक सकता था&#8230;। मंच के नीचे ही अपने- अपने स्थान पर अलग &#8211; अलग राज्यों से आए हुये हमारे मित्रों के, हमारे परिवार वालों के लोक गीत और नृत्य आपस मे गूथने लगे&#8230;। तब अलग- अलग प्रदेशों से आए हुये मेहमानों को आगे किया गया, आखिर हमलोग नवाबी (उत्तर प्रदेश) से थे, पहले आप &#8230; पहले आप &#8230; ये ही तो हमारी पहचान है। जबतक हमलोग समझ पाते कि पहले मंच पर किसको भेजें, किसको भेजे तब तक मंच पर रंग- बिरंगे घाघर- चुनर आभूषणों से सजी हुई हमारी बेटी की सखियाँ गोल- गोल थिरकते हुये दिखीं और उनके गीत बजते ही सब झूम उठे &#8230; अरे ये तो राजस्थानी लोकगीत है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हो, लुक-छिप ना जाओ जी,म्हाने दीद कराओ जी अरे, क्यों तरसावे हो ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>म्हाने शकल दिखावो जी थारी शरारत सब जाणूं मैं,</strong> <strong>चौधरी,</strong> <strong>म्हारे से लेवो ना पंगा जी, मैं कहन लगे..।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>म्हारे हिवड़े में जागी धोंकनी, रे</strong> <strong>चंदा मैं थारी चाँदनी</strong> <strong>म्हाने दामन में बांधी खुशी, रे झूम, झूम, झूम, झूम बा झूम&#8230; झूम- झूम</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ने तो सबको घूमा के रख दिया। यह उल्लासपूर्ण गीत राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक गीत और लोकनृत्य है यह विशेष रूप से महिलाओं- पुरुषों द्वारा उत्सवों, विवाह समारोहों और तीज- त्योहारों के अवसर पर गाया और नाचा जाता है। ये गीत राजस्थान की लोक संस्कृति और लोक भावनाओं को जीवंत बनाए रखते हैं। राजस्थानी गीत हमारे फिल्मों में ही नहीं, देश- विदेशों तक धूम मचा रखे हैं। अभी सब झूम ही रहे थे कि दृश्य बदल गया, लड़कियों के स्थान पर बेटी का मित्र जो उत्तरांचल क्षेत्र से आया था,धोती- कुर्ता- टोपी और शॉल पहने था, उसने हमारे बेटी और दामाद को मंच पर बुला, सबको आनंदित कर दिया&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तेरो लहंगा&#8230; लहंगा तेरो&#8230; लहंगा&#8230; तेरो लहंगा &#8230; लहंगा&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तेरो लहंगा&#8230; तेरो लहंगा&#8230; तेरो लहंगा॥ क्या भालो छजी रे ओ &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रंगीली पिछोड़ी&#8230; हाय &#8211; हाय &#8230; जरा आँखों मे &#8230; लगाले काजला &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नजर लागली&#8230; नजर लागली &#8230; नजर लागली&#8230; तेरो लहंगा &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">घूमते हुये लहंगे ने इतना घूमा दिया कि घरवालों को लगा कि अब अपनी नई नवेली दुल्हन और दूल्हे राजा को अपने पैतृक जन्म स्थान उत्तर प्रदेश से आशीर्वाद दिया जाए। फि र दुल्हन की बहनों की टोली चल पड़ी मंच की ओर, और जैसे ही दुल्हन की बड़ी बहन आयुषी भटनागर जो की म्यूसिक फ ॉर वेलनेस प्रोग्राम की प्रसारक है, ने सलोनी ठक्कर के गीत को शुरू किया, ऐसा लगा हम सब नासिक नहीं बल्कि मिथिला पहुंच गए&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तुम उठो सिया श्रृंगार करो अब धनुष राम ने तोड़ा है तोड़ा है भाई तोड़ा है</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सीता से नाता जोड़ा है माठ सिया</strong> <strong>के टीका सोहे कुंडल की छवि अति न्यारि है</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>न्यारि है भाई न्यारि है रघुवर को जानकी प्यारी है&#8230; तुम उठो सिया श्रृंगार करो.</strong>..</p>



<p class="wp-block-paragraph">गुजरात का सबसे प्रसिद्ध लोकप्रिय गरबा गीत, असम का लोकप्रिय बीहू, रात तक कार्यक्रम, बहुत सुंदर ढंग से चलता रहा। गीत &#8211; संगीत का कार्यक्रम इतना मनमोहक था कि किसी गीत पर लोग झूम उठते थे तो किसी पर आंखो मे आँसू भर जाते थे, ऐसा ही होता है, हमारा लोक संगीत, लोक जीवन की भावनाओं, परम्पराओं और संस्कृति का दर्पण होता हैं। भारत के विभिन्न राज्यों मे अलग-अलग प्रकार के लोकगीत प्रचलित हैं । विवाह , देवी पूजन, जन्म, फसल कटाई, त्योहारों, सुख- दुख और अन्य शुभ अवसरों पर लोक गीत गाए जाते हैं । गीत शब्द की बात करें तो सुनते ही मन में कुछ हलचल सी होने लगती है । हम सभी अपनी जिंदगी को हसीन खुशनुमा बनाने के लिए गाहे- बगाहे गीत &#8211; संगीत, कविता, गजल आदि से एक रिश्ता तो रखते ही हैं । लोकगीत जो एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक मौखिक रूप से चलती चली आ रही है वह लोक ग़ीत दो शब्दों से बना है &#8230;। लोकगीत अर्थात एक क्षेत्र विशेष , जिसकी एक संस्कृति, एक भाषा, एक परंपरा हो, उस क्षेत्र विशेष के हृदय के भावों को, उल्लास को गीत के रूप मे गाना ही लोक गीत है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="672" height="354" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-4.png" alt="" class="wp-image-26170" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-4.png 672w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-4-300x158.png 300w" sizes="(max-width: 672px) 100vw, 672px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">लोक गीत की अगर उत्पत्ति की बात करें तो यह अंग्रेजी के फ ोल्क, विसा शब्द का पर्याय है। फ ोल्क शब्द की जड़ें भी बहुत गहरी हैं, फ ोल्क शब्द जर्मन के वोल्क, अवसा शब्द से बना है, इस शब्द का प्रयोग बहुत प्राचीनकाल से किया जाता रहा है, जिसका अर्थ है सामान्यजन,जनसाधारण&#8230;। जैसे अब्राहम लिंकन की परिभाषा &#8211; जनता का जनता के लिए जनता के द्वारा-जनतंत्र होता है, वैसे ही हमारे &#8216;हिन्दी साहित्य कोश&#8217; मे इसके तीन अर्थ बताए गए हैं- श्लोक में प्रचलित,लोक द्वारा निर्मित,लोक विषयक गीत -&#8216;लोकगीत&#8217; ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="644" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-1024x644.png" alt="" class="wp-image-26171" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-1024x644.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-300x189.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-768x483.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-1536x966.png 1536w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-2048x1288.png 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">इनसाइक्लोपीडिया मे कहा गया है आदिम मानव का उल्लासमय गीत लोक गीत है। कितना सही कहा गया है&#8230; आदिवासियों का गीत &#8230; न कोई भाषा न कोई संगीत फि र भी जब वो उत्साहित होते थे या समूहिक रूप से किसी काम को करते थे तो उनके मुख से अनायास लय बद्ध बोल निकलने लगते थे, जो धीरे- धीरे आगे चल कर उनका लोकगीत बना , जिसे सुनो तो भाषा (शब्द) भले ही समझ न आए पर उनके गीतों में उनका भोलापन निश्छलता साफ दिखाई पड़ता है। हमारी संस्कृति में लोकगीत कितना पुराना है, इसे बताया नहीं जा सकता। सबसे प्राचीन वेदों की बात करें तो इनके पवित्र मंत्र भी लयबद्ध गाये जाते थे और एक दूसरे तक सुन कर ही आगे बढ़े थे। इसीलिए वेदों को श्रुति भी कहा जाता है। वेदों में सामवेद में गीत संगीत लय आदि का समग्र वर्णन पाया जाता है। इस प्रकार हमारे देश भारत मे हर भाषा के अपने- अपने लोकगीत हैं, जिसने देश और विदेशों में अपना धूम मचा रखा है। इसमें हमारे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोक गीत का अपना अलग ही स्थान है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="575" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-1024x575.png" alt="" class="wp-image-26174" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-1024x575.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-300x168.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-768x431.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1.png 1263w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश और बिहार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां के गीत संगीत अपनी मिट्टी, त्योहारों , ऋतुवों, उत्सव और लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। लोकगीत लोगों के सुख- दुख और रोज़मर्रा की जिंदगी को बताते हैं। इसे ज़्यादातर ढोल, मंजीरा और हारमोनियम के साथ गाते हैं । सबसे प्रसिद्ध लोकगीतों में कजरी, चैती, सोहर, बिरहा, सुमंगली ,कोहबर,महेश गीत, छठ गीत, रोपणी- कटनी,विदेसिया, जाट, जतिन आदि लोकगीत हैं । कजरी- सावन और विरह के गीत, कजरी लोकगीत का संबंध भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के साथ &#8211; साथ बिहार से भी है। पारंपरिक रूप से बनारस , मिर्जापुर, मथुरा, इलाहाबाद और बिहार के भोजपुर अंचल के आसपास के गांवों, कस्बों में सावन का अर्थ केवल वर्षा नहीं , बल्कि कजरी है। कजरी को समझने के लिए बारिश को महसूस करना पड़ता है। जब काले बादल मंडराते हैं, जब गंगा किनारे पुरवैया बहती है , जब आम और नीम की डालियों पर झूले पड़ते हैं और जब धरती वर्षा के पहले बूंदों से महक उठती है, तो कजरी जन्म लेती है। कजरी मे वर्षा का सौंदर्य है, लेकिन उससे भी अधिक इसमे मन का मौसम है। सावन के महीने में महिलाओं द्वारा झूला झूलते हुये दिन भर कजरी गाया जाता है। हंसी- ठिठोली चलता रहता है&#8230;।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे खेले जाइबु सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तू तो जात हो अकेली कौनों संग न सहेली गुंडा रोक लिहे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तोहरी डगरिया बदरिया घेरी आइल ननदी कैसे खेले जइबु &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">चैती &#8230; अगर कजरी सावन की आत्मा है, चैती चैत्र मास की सांस है। चैत्र का मास हम सनातनियों का नूतन वर्ष है जिसका आरंभ दुर्गा नौरात्रि से किया जाता है। पूरे देश में चइतनौमी की पूजा, देवी गीत गुंजायमान है, लोक जीवन में भक्ति का उल्लास है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देवी गीत ढोलक बजाऊं सारी रात, मैयाजी तुमको सोने न दूंगी सोने न दंूगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मैया सोने न दूंगी भजन सुनाऊं सारी रात मैया जी तुमको सोने न दूंगी&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चैत में खेतों मे गेहूं, सरसों की कटाई का सामूहिक जोश है</strong>।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आम के बौर की सुगन्ध है,कोयल की कूक है , यह वो क्षण है जब सर्दी की स्मृतियां विदा ले रही होती हैं और प्रकृति एक नए चक्रके लिए स्वयं को तैयार कर रही होती है। यह केवल ऋ तु परिवर्तन का गीत नहीं, बल्कि आशा , नवजीवन और उत्सव का संगीत है। चैट में श्री राम का जन्म होने से राम नौमी के गीत भी गाए जाते हैं । साथ ही रामनौमी के चौथे दिन जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर का जन्मदिन होता है। कई रचयिताओं ने उनके जन्म को भी चैती में ढाला है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;छठ गीत</strong>&#8211; सूर्योपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों मे मनाया जाता है। दीपावली के छठे दिन से शुरू होने वाला छठ का पर्व चार दिनों तक चलता है। छठ का पर्व एक कठिन पर्व है, जिसमें षष्ठी भगवती की पूजा कर के पुत्र, पति एवं परिवार के कल्याण की कामना की जाती है। यह एक मात्र ऐसा पर्व है जो हमारे वैदिक काल से चला आ रहा है । यह पर्व ऋग्वेद में वर्णित सूर्य पूजन, उषा पूजन तथा आर्य परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। छठ के गीतों मे सबसे प्रचलित गीत है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कांच ही बांस के बहंगिया,बहंगी लचकत जाय होई न बलम जी कहरीय,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बहगी केकरा के जाए तू तो आंधर होवे रे बटोहिया, बहगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>छठी मैया के जाय ओहरे जे बारी छठी मैया, बहंगी उनका के जाए , कांच ही बांस के बहंगिया&#8230;।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="376" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-1024x376.png" alt="" class="wp-image-26173" style="width:773px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-1024x376.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-300x110.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-768x282.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12.png 1273w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">लोकगीतों का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि उन्होंने उन आवाजों को संरक्षित किया जिन्हें इतिहास की पुस्तकों मे स्थान नहीं मिला। ग्रामीण स्त्रियां, जो अक्सर अपने अनुभव लिख नहीं सकती थीं, उन्होंने अपने सुख- दुख, प्रेम , विरह, सपनों और सामाजिक अनुभवों को गीतों मे सुरक्षित रखा। इस दृष्टि से कजरी, चैती, सोहर, विवाह गीत केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां नही बल्कि भारतीय महिलाओं की मौखिक आत्म कथाएं भी हैं। लोकगीत में अभी भी कोई कमी नहीं आई है। अब तो ये मौखिक परंपरा के साथ साथ लिखित, ऑडिओ, वीडियो, डिजिटल और मंचीय रूपों में भी सुरक्षित एवं लोकप्रिय है। अब तो यह गांवो से निकल कर शहर, देश, विदेशों तक पहुंच गया है। देश- विदेशों तक लोक गीतों को लोकप्रिय बनाने में शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी, ईला अरुण, कल्पना पटवारी, गुलाबो सपेरा जैसे प्रसिद्ध गायक-गायिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। वैदिक काल से गीत- संगीत का उपयोग संगीत चिकित्सा के रूप में भी किया जाता रहा है,जो मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक माना जाता है। आज मानसिक चिकित्सक गायत्री मंत्र के ऊपर भी शोध कर रहे हैं, जिसके लय-ताल से अनेक बीमारियों को दूर करने का दावा किया जा रहा है। तात्पर्य यह है कि यदि हम मानसिक वेलनेस की बात करें तो ये हमारे वैदिक काल की देन है, जो मध्य काल में विलुप्त प्राय हो गया था। हम लोकगीत को इसके महत्व को न समझ कर मात्र मनोरंजन का साधन ही समझते रहे, जबकि लोकगीत में मानसिक संतुलन को बनाए रखने की अद्भुत क्षमता है, जिसे पुन: हमारे युवा वर्ग समझ गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सामूहिक रूप से लोकगीत गाने से आपसी जुड़ाव, आत्मविश्वास और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। गीत मन को प्रसन्न , शांत और संतुलित रखते हैं। वे तनाव कम करने, सकारात्मक भावनाएं बढ़ाने और मानसिक वेलनेस को सुदृढ़ बनाने में सहायक होते हैं जिसकी वर्तमान मे बहुत आवश्यकता है। आज की पीढ़ी जिस मानसिक तनाव, सामाजिक उलझनों, नकारात्मक सोच तथा आपसी प्रतिस्पर्धा से गुजर रही है इसे म्यूसिक फ ॉर वेलनेस से फिर से जुडऩा ही होगा। जिससे हम एक संवेदनशील , सकारात्मक, ऊर्जावान समाज की स्थापना कर सकें। अभी हम सब गीत नृत्य के रस मे डूबे ही थे कि ताजे रंग बिरंगे फूलों से सजे मंडप से मंगलाष्टकम के पवित्र मंत्र के सुर, शुभ वातावरण मे गूंजने लगे&#8230;मंगलाष्टक विवाह, संस्कार का पारंपरिक गीत- श्लोक है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>स्वस्ति श्री गणनायकम गजमुखम, मोरेश्वरम, सिद्धिधम ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बल्लालों मुरुदम विनायक महम चिंतामणि स्थेवरम ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेण्याद्री गिरीजातकम सुरवारदम ओझरम।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ग्रामो रंजण सन्स्थीतम गणपति कु र्या सदा मंगलम शुभ मंगलम सावधान ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज एक आंगन की चहकती कली दूसरे आंगन की खुशबू बनने जा रही है। अपनी लाड़ली का हाथ वर के हाथों मे सौंपते हुए हम सब उसे जीवन भर प्रेम, सम्मान और विश्वास का साथ देने का आशीर्वाद और दायित्व दे रहे हैं &#8230;। फिर भी बेटी तो मां के कलेजे का टुकड़ा ही होती है, उसे विदा करना आसान नहीं &#8230;। हृदय से ढेरों आशीष, आँखों में आँसू , मन मे हलचल लिए कुछ खुशी कुछ गम लिए , भारी मन से हम सब ने विदा किया&#8230;. हमारे कानों में उसके गुनगुनाए गीत गूंजने लगे, जिसे वो अपनी बुआ दादी के साथ अक्सर गाती रहती थी&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ताल किनारे महल मोरा सुंदर ता, बीच पुरइन के पात हो</strong> <strong>आवत देखूं मैं दुई गो सिपहिया ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एक सांवर एक गोर हो सांवर तो मोरे ननदी के भैया, गोर हैं बिरन हमार हो ताल किनारे &#8230;</strong></p>
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		<title>मुंबई लोकल: शहर की जीवनरेखा…</title>
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		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:00:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अतुल तिवारी Mumbai local train news: मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। यह शहर कभी नहीं रुकता और इसकी सबसे बड़ी वजह है मुंबई लोकल ट्रेन। हर&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/mumbai-atul-tiweri-300x258.jpg" alt="" class="wp-image-12005" style="width:102px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अतुल तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mumbai local train news</strong>: मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। यह शहर कभी नहीं रुकता और इसकी सबसे बड़ी वजह है मुंबई लोकल ट्रेन। हर दिन लाखों लोग अपने घरों से दफ्तर, कॉलेज, बाजार और अन्य जगहों तक पहुंचने के लिए लोकल ट्रेनों का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि मुंबई लोकल को शहर की &#8220;जीवनरेखा&#8221; कहा जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="817" height="851" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai45.jpg" alt="" class="wp-image-25466" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai45.jpg 817w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai45-288x300.jpg 288w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai45-768x800.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 817px) 100vw, 817px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई लोकल रेलवे का इतिहास 19वीं सदी से जुड़ा हुआ है। समय के साथ इसका नेटवर्क लगातार बढ़ता गया और आज यह शहर तथा उसके आसपास के इलाकों को जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण परिवहन साधन बन चुका है। पश्चिमी, मध्य और हार्बर लाइन पर चलने वाली लोकल ट्रेनें रोजाना लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं।मुंबई लोकल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति और पहुंच है। जहां सड़क मार्ग पर ट्रैफिक जाम लोगों का काफी समय बर्बाद कर सकता है, वहीं लोकल ट्रेनें अपेक्षाकृत कम समय में लंबी दूरी तय करने का अवसर देती हैं। यही वजह है कि नौकरीपेशा लोगों से लेकर छात्रों और छोटे व्यापारियों तक, सभी के लिए यह परिवहन का सबसे भरोसेमंद साधन है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/train-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-25467" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/train-1024x576.jpg 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/train-300x169.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/train-768x432.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/train.jpg 1183w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि, मुंबई लोकल कई चुनौतियों का भी सामना करती है। पीक ऑवर्स में ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ देखी जाती है। कई बार यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में भी कठिनाई होती है। मानसून के दौरान जलभराव और तकनीकी समस्याओं के कारण सेवाएं प्रभावित होने की घटनाएं भी सामने आती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन चुनौतियों के बावजूद मुंबई लोकल शहर की धड़कन बनी हुई है। रेलवे प्रशासन लगातार नई ट्रेनों, बेहतर सुविधाओं और आधुनिक तकनीक के माध्यम से यात्रियों को बेहतर सेवा देने का प्रयास कर रहा है। मुंबई मेट्रो और अन्य परिवहन परियोजनाओं के विस्तार के बावजूद लोकल ट्रेनों का महत्व कम नहीं हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> मुंबई लोकल केवल एक परिवहन व्यवस्था नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति देती है और मुंबई की तेज रफ्तार जीवनशैली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि मुंबई लोकल को आज भी शहर की सच्ची जीवनरेखा माना जाता है।</p>
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		<title>मुंबई में बढ़ती महंगाई का मध्यम वर्ग पर असर : सपनों का शहर या बढ़ता आर्थिक बोझ ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 16:20:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>   अतुल तिवारी मुंबई।&#160; मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है। देश के हर कोने से लोग बेहतर रोजगार, शिक्षा और जीवन की तलाश में यहां आते हैं। लेकिन&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/04/mumbai-atul-tiweri-300x258.jpg" alt="" class="wp-image-12005" style="width:102px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>   अतुल तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई</strong>।&nbsp; मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है। देश के हर कोने से लोग बेहतर रोजगार, शिक्षा और जीवन की तलाश में यहां आते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती महंगाई ने इस शहर में रहने वाले मध्यम वर्ग के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। घर का किराया, मकान की कीमतें, खाद्य पदार्थ, परिवहन और दैनिक जरूरतों का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि आम लोगों की आय उसी गति से नहीं बढ़ रही।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="752" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai3-1-1024x752.png" alt="" class="wp-image-25462" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai3-1-1024x752.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai3-1-300x220.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai3-1-768x564.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/06/mumbai3-1.png 1167w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सबसे बड़ा संकट: आवास</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई में घर खरीदना मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हालिया आवासीय रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई भारत का सबसे महंगा रियल एस्टेट बाजार बना हुआ है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि शहर में एक औसत घर खरीदना आज भी अधिकांश परिवारों की पहुंच से बाहर है। कुछ विश्लेषणों के अनुसार, ऊंची आय वाले परिवारों को भी एक सामान्य घर खरीदने के लिए दशकों तक बचत करनी पड़ सकती है। साल 2026 में मुंबई महानगर क्षेत्र में संपत्ति की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे घर खरीदना और अधिक कठिन हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किराए का बढ़ता बोझ</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">जो लोग घर नहीं खरीद सकते, वे किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। लेकिन किराए भी लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई के कई इलाकों में पिछले वर्षों में किरायों में तेज वृद्धि देखी गई। हालांकि हाल के महीनों में वृद्धि की रफ्तार कुछ कम हुई है, फिर भी कई परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा केवल किराए पर खर्च कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मध्यम वर्ग के लिए स्थिति यह है कि वेतन का 30 से 50 प्रतिशत हिस्सा केवल आवास पर खर्च हो जाता है। ऐसे में बचत करना और भविष्य की वित्तीय योजना बनाना कठिन हो जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भोजन और दैनिक खर्चों में वृद्धि</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">महंगाई का असर केवल मकान तक सीमित नहीं है। सब्जियां, दूध, खाद्य तेल, गैस सिलेंडर और बाहर खाने का खर्च भी बढ़ा है। कई परिवार अब अपने मासिक बजट में कटौती करने को मजबूर हैं। पहले जहां परिवार मनोरंजन, यात्रा या बचत के लिए पैसा निकाल लेते थे, वहीं अब अधिकांश आय आवश्यक खर्चों में ही समाप्त हो जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>परिवहन खर्च भी बढ़ा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई लोकल आज भी सबसे सस्ता परिवहन साधन है, लेकिन मेट्रो, ऑटो और कैब सेवाओं के बढ़ते उपयोग ने लोगों के मासिक खर्च में इजाफा किया है। शहर के दूरस्थ इलाकों में अपेक्षाकृत सस्ता घर मिलने के कारण कई लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे यात्रा पर होने वाला खर्च और समय दोनों बढ़ जाते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मध्यम वर्ग की बदलती जीवनशैली</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">महंगाई का असर लोगों की जीवनशैली पर भी दिखाई दे रहा है। कई परिवार बड़े घर खरीदने का सपना छोड़कर छोटे फ्लैट या उपनगरों की ओर रुख कर रहे हैं। कुछ युवा नौकरीपेशा लोग साझा आवास (शेयरिंग) में रहने लगे हैं ताकि किराए का बोझ कम हो सके। सोशल मीडिया और ऑनलाइन चर्चाओं में भी बड़ी संख्या में मुंबई निवासी बढ़ती आवास लागत और महंगे किरायों को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भविष्य की चुनौती</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई में किफायती आवास की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2026 में किफायती आवास योजनाओं के लिए उपलब्ध घरों की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन प्राप्त हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संपत्ति की कीमतें और किराए आय की तुलना में तेज गति से बढ़ते रहे, तो मध्यम वर्ग के लिए मुंबई में घर खरीदना और भी कठिन हो जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निष्कर्ष</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई अवसरों का शहर है, लेकिन बढ़ती महंगाई ने मध्यम वर्ग के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है, किराए लगातार बढ़ रहे हैं और दैनिक जीवन का खर्च परिवारों की बचत को कम कर रहा है। यदि सरकार और नीति निर्माता किफायती आवास, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और महंगाई नियंत्रण पर ध्यान नहीं देते, तो आने वाले वर्षों में मुंबई का मध्यम वर्ग आर्थिक दबाव के और बड़े संकट का सामना कर सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>&#8217;12th Fail&#8217; फिल्म के आईपीएस अधिकारी को मुंबई में मिली अहम पोस्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 May 2026 04:17:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>IPS Manoj Sharma news:&#160; महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को राज्य पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए 50 से अधिक आईपीएस अधिकारियों के एक साथ तबादले कर दिए। गृह विभाग&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>IPS Manoj Sharma news:&nbsp; </strong>महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को राज्य पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए 50 से अधिक आईपीएस अधिकारियों के एक साथ तबादले कर दिए। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में मुंबई पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस फेरबदल को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा IPS अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की नियुक्ति को लेकर हो रही है। 2005 बैच के अधिकारी शर्मा को मुंबई का नया जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (कानून-व्यवस्था) नियुक्त किया गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="536" height="460" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/manoj-sharma-2-1.png" alt="" class="wp-image-25339" style="width:698px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/manoj-sharma-2-1.png 536w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/05/manoj-sharma-2-1-300x257.png 300w" sizes="auto, (max-width: 536px) 100vw, 536px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br>मनोज शर्मा&nbsp;वही अधिकारी हैं जिनके संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित फिल्म &#8217;12वीं फेl&#8217; ने देशभर में काफी लोकप्रियता हासिल की थी। उन्होंने अपने करियर में मुंबई में DCP जोन-1 और एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (पश्चिमी क्षेत्र) के रूप में भी काम किया है। मनोज शर्मा एमपी के मुरैना जिले के गांव बिलगांव के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई लिखाई गांव में ही हुई थी। वो पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे। नौवीं और दसवीं में थर्ड क्लास से पास हुए मनोज शर्मा 12वीं में फेल कर गए थे। लेकिन उनका सपना आईपीएस बनने का था। इसके बाद उनके संघर्ष की शुरुआत हुई। उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए दिल्ली में बड़े लोगों का कुत्ता तक भी घुमाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन अधिकारियों के भी हुए तबादले</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>मुंबई पुलिस की जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) लक्ष्मी गौतम का तबादला कर उन्हें महाराष्ट्र राज्य का स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) नियुक्त किया गया है।</li>



<li>जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (कानून-व्यवस्था) सत्यनारायण चौधरी को ट्रैफिक विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।</li>



<li>दूसरी ओर, ट्रैफिक विभाग संभाल रहे अनिल कुंभारे को अब जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (कानून-व्यवस्था) बनाया गया है।</li>



<li>इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस निशित मिश्रा और जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (प्रशासन) जय कुमार को पदोन्नति देकर स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस बनाया गया है।</li>



<li>इसके अलावा स्पेशल IGP रैंक के सात अधिकारियों का भी तबादला किया गया है। इनमें दत्ता कराले, प्रवीण पडवाल, मनोज शर्मा और सुवेज हक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई पुलिस में भी कई अहम बदलाव&nbsp;किए गए हैं। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस महेश पाटिल और परमजीत सिंह दहिया का तबादला किया गया है। साथ ही तीन डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) दीक्षित गेदम, प्रवीण मुंडे और कृष्णकांत उपाध्याय को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वहीं, 2003 बैच के IPS अधिकारी राजेश प्रधान को मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग का प्रमुख बनाया गया है।</p>
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		<title>&#8216;कनपुरिया&#8217; गौरव खन्ना बने &#8216;बिग बॉस 19&#8217;के विजेता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 05:41:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bigg boss winner : &#8216;बिग बॉस 19&#8217; का सफर समाप्त हो गया है। इसी के साथ विनर का एलान भी हो चुका है। गौरव खन्ना इस सीजन के विजेता बने&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%af-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5-%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%97-%e0%a4%ac%e0%a4%b8-19%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a4%a4-k/">&#8216;कनपुरिया&#8217; गौरव खन्ना बने &#8216;बिग बॉस 19&#8217;के विजेता</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Bigg boss winner :</strong> &#8216;बिग बॉस 19&#8217; का सफर समाप्त हो गया है। इसी के साथ विनर का एलान भी हो चुका है। गौरव खन्ना इस सीजन के विजेता बने हैं। फरहाना भट्ट को मात देते हुए गौरव खन्ना ने शो की चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। सलमान खान ने फिनाले में विजेता के तौर पर गौरव खन्ना के नाम का एलान किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="577" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/bigg-boss-1024x577.png" alt="" class="wp-image-24282" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/bigg-boss-1024x577.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/bigg-boss-300x169.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/bigg-boss-768x433.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2025/12/bigg-boss.png 1183w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गौरव को मिली कितनी प्राइज मनी ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">गौरव खन्ना इस शो में शुरुआत से मजबूत दावेदर रहे हैं। उन्होंने टास्क जीतकर टिकट टू फिनाले जीता था। टॉप 5 में उनकी जगह पहले ही पक्की हो गई थी। फिर टॉप 2 में पहुंचे, जहां उनका मुकाबला फरहाना भट्ट से रहा। इसके बाद बतौर विनर उनके नाम का एलान हुआ है। गौरव को ट्रॉफी के अलावा 50 लाख रुपये धनराशि इनाम में मिली है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चर्चित एक्टर हैं गौरव खन्ना</strong><br>गौरव खन्ना का जन्म 11 दिसंबर 1981 को कानपुर में हुआ। गौरव हिंदी टीवी सीरियल्स में काम करते हैं। उन्हें &#8216;अनुपमा&#8217; में अनुज कपाड़िया की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। इसके लिए उन्हें मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का इंडियन टेली अवार्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा गौरव ने &#8216;सेलिब्रिटी मास्टरशेफ इंडिया सीजन 1&#8217; भी जीता।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-3"><strong>जिसने उड़ाया मजाक, उसी को फिनाले में छोड़ा पीछे</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">गौरव खन्ना का मुकाबला फिनाले में फरहाना के साथ रहा। टॉप 2 में दोनों प्रतिभागी पहुंचे। गौर करने वाली बात यह है कि शो में रहते हुए फरहाना ने छोटे पर्दे पर कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने गौरव खन्ना पर भी कटाक्ष किया था। तब सलमान खान ने गौरव का बचाव करते हुए फरहाना को फटकार लगाई थी। फाइनल में गौरव ने फरहाना को ही मात दी है। यह अपने आप में काफी दिलचस्प है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%af-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5-%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%97-%e0%a4%ac%e0%a4%b8-19%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a4%a4-k/">&#8216;कनपुरिया&#8217; गौरव खन्ना बने &#8216;बिग बॉस 19&#8217;के विजेता</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<title>देवेंद्र फडणवीस बनेंगे मुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे-अजित पवार बनेंगे उप मुख्यमंत्री</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 07:59:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देवेंद्र फडणवीस बोले- एक हैं तो सेफ हैं मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर जारी सस्पेंस पर आज विराम लग गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%a1%e0%a4%a3%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ae/">देवेंद्र फडणवीस बनेंगे मुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे-अजित पवार बनेंगे उप मुख्यमंत्री</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"> देवेंद्र फडणवीस बोले- एक हैं तो सेफ हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुंबई। </strong>महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर जारी सस्पेंस पर आज विराम लग गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक में देवेंद्र फडणवीस को नेता चुना गया। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को हुए थे।विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद फडणवीस ने कहा कि मैं एकनाथ शिंदे और अजित पवार करा शुक्रिया अदा करता हूं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाएंगे। हमें यह बात भी याद रखनी है कि एक हैं तो सेफ हैं। इससे पहले निर्मला सीतारमण ने कहा कि एकमत निर्णय आनंददायी होता है। आप सभी ने सही फैसला किया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="569" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/12/maharastr-1024x569.jpg" alt="" class="wp-image-20529" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/12/maharastr-1024x569.jpg 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/12/maharastr-300x167.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/12/maharastr-768x427.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/12/maharastr.jpg 1269w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फडणवीस को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया</strong><br>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के नाम का एलान कर दिया गया है। देवेंद्र फडणवीस को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चंद्रकांत पाटिल ने फडणवीस के नाम का प्रस्ताव रखा</strong><br>महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि हमें फडणवीस के नेतृत्व में जीत मिली है। वे राज्य के विकास के लिए लगातार काम करते रहे हैं। इसके बाद चंद्रकांत पाटिल और सुधीर मुगंटीवार ने फडणवीस के नाम का प्रस्ताव रखा। पंकजा मुंडे ने उनके नाम का अनुमोदन किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भाजपा विधायक दल की बैठक मुंबई में शुरू</strong><br>महाराष्ट्र भाजपा विधायक दल की बैठक मुंबई में शुरू हो गई है। राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी बैठक में मौजूद हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डिप्टी सीएम के नामों का भी एलान</strong><br>सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार और एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फडणवीस के नाम पर भाजपा कोर कमेटी में लगी मुहर</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री होंगे। देवेंद्र फडणवीस 5 दिसंबर को महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ लेंगे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक,&nbsp;भाजपा कोर कमेटी की बैठक में उनके नाम को अंतिम रूप दिया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर</strong><br>दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ करीब 2,000 अति महत्वपूर्ण व्यक्ति और 40,000 कार्यकर्ता शामिल होंगे। इस समारोह में कई केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के 19 मुख्यमंत्रियों तथा उपमुख्यमंत्रियों के भी शामिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%a1%e0%a4%a3%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ae/">देवेंद्र फडणवीस बनेंगे मुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे-अजित पवार बनेंगे उप मुख्यमंत्री</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<title>बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद बोले पप्पू यादव- &#8216;यह देश है या हिजड़ों की फौज&#8217; !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 05:29:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पूर्णिया। महाराष्ट्र में राजनेता सह उद्योगपति बाबा सिद्दिकी की हत्या पर इस पोस्ट पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट कर फिलहाल खूब सूर्खियों में&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph" id="tw-target-text"><strong>पूर्णिया।</strong> महाराष्ट्र में राजनेता सह उद्योगपति बाबा सिद्दिकी की हत्या पर इस पोस्ट पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट कर फिलहाल खूब सूर्खियों में है। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कानून अनुमति दे तो 24 घंटे में इस लॉरेंस बिश्नोई जैसे दो टके के अपराधी के पूरे नेटवर्क को खत्म कर दूंगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph" id="tw-target-text"></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="937" height="529" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/pappu.png" alt="" class="wp-image-20049" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/pappu.png 937w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/pappu-300x169.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/pappu-768x434.png 768w" sizes="auto, (max-width: 937px) 100vw, 937px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph" id="tw-target-text">उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि यह देश है या हिजड़ों की फौज।    एक बार फिर गुजरात की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई चर्चा में है। इससे पूर्व सुरक्षा को लेकर उन्होंने सरकार पर भी करारा प्रहार किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि यह देश है या हिजड़ों की फौज।</p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/crime-in-india-after-the-murder-of-baba-siddiqui-pappu-yadav-said-is-this-a-country-or-an-army-of-eunuchs/">बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद बोले पप्पू यादव- &#8216;यह देश है या हिजड़ों की फौज&#8217; !</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<title>पटाखों की आवाज का हमलावरों ने उठाया फायदा; 9.9 मिमी पिस्तौल से बाबा सिद्दीकी पर दागी गोलियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Oct 2024 07:31:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;मुंबई । महाराष्ट्र में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (N C P) के नेता बाबा सिद्दीकी की शनिवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुंबई पुलिस&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8b/">पटाखों की आवाज का हमलावरों ने उठाया फायदा; 9.9 मिमी पिस्तौल से बाबा सिद्दीकी पर दागी गोलियां</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;मुंबई ।</strong> महाराष्ट्र में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (N C P) के नेता बाबा सिद्दीकी की शनिवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुंबई पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, इस हत्याकांड को लेकर नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स में दावा किया है कि हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी की हत्या के लिए पटाखों का फायदा उठाया। दरअसल, दशहरे के मौके पर जब बाबा सिद्दीकी अपने बेटे जीशान के ऑफिस के बाहर पटाखे फोड़ रहे थे तभी उनकी हत्या की गई।&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="637" height="337" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/siddhiki.png" alt="" class="wp-image-20046" style="width:840px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/siddhiki.png 637w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2024/10/siddhiki-300x159.png 300w" sizes="auto, (max-width: 637px) 100vw, 637px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पटाखों का उठाया फायदा</strong><br>रिपोट्स के मुताबिक, बाबा सिद्दीकी जब पटाखे फोड़ रहे थे उसी समय तीनों हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के एक के बाद एक एनसीपी नेता पर 9.9 मिमी पिस्तौल से तीन गोलियां चलाईं। इनमें से एक गोली उनके सीने में लगी और वे वहीं गिर गए। चूंकि उस दौरान वहां पटाखों का शोर ज्यादा ही हो रहा था ऐसे में गोलियों की आवाज उनमें दब गई। हमलावरों की चलाई गोलियों में से एक से बाबा सिद्दी की गाड़ी की विंडशील्ड टूट गई जिससे पता चला कि कई गोलियां चलाईं गई थीं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गिरफ्तार संदिग्ध गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के</strong><br>वहीं, गिरफ्तार संदिग्ध गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के हैं। सूत्रों का कहना है गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्धों ने खुद ये दावा किया है। हालांकि अभी तक इस हत्याकांड की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं शूटर</strong><br>मुंबई पुलिस के मुताबिक, बाबा सिद्दीकी पर हमला करने वाले तीन संदिग्धों में से दो को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से एक उत्तर प्रदेश का धर्मराज कश्यप और दूसरा हरियाणा का रहने वाला करनैल सिंह है। जबकि, आरोपियों का एक साथी अभी फरार है, जिसे पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछाना शुरू कर दिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस ने कई टीमें लगाई हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुंबई पुलिस अपराध शाखा द्वारा पूछताछ के दौरान, दोनों लोगों ने यह भी दावा किया कि वे लगभग एक महीने से उस इलाके की रेकी कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, तीनों आरोपी एक ऑटो-रिक्शा में सवार होकर बांद्रा पूर्व में घटनास्थल पर पहुंचे थे। वे वहां पहले से ही सिद्दीकी के आने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में पुलिस को संदेह है कि मामले में किसी अन्य व्यक्ति के शामिल होने का संदेह है जो आरोपियों को जानकारी मुहैया करा रहा था।<br><br><strong>इस एंगल से पुलिस कर रही जांच</strong><br>लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने के दावे के बाद अब पुलिस कई एंगल से मामले की जांच में लग गई है। पहला एंगल लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुडा है वहीं दूसरा झुग्गी पुनर्वास मामले से संबंधित है। बता दें कि बाबा सिद्दीकी बॉलीवुड अभिनेताओं के भी खासे नजदीक थे। सलमान खान और शाहरुख खान से उनकी निकटता किसी से छिपी नहीं थी। लॉरेंस बिश्नोई के करीबी रोहित गोदारा ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि सलमान खान का दोस्त हमारा दुश्मन है। ऐसे में अभिनेता सलमान खान से उनकी नजदीकी इस ओर इशारा कर रही है कि वे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर हो सकते हैं। हालांकि उन्हें कभी बिश्नोई गैंग से किसी प्रकार के खतरे की धमकी नहीं मिली थी। &nbsp;<br><br><strong>15 दिन पहले जान से मारने की धमकी मिली थी</strong><br>पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बांद्रा में झोपड़पट्टी पुनर्विकास परियोजना को लेकर विवाद चल रहा था। आशंका है कि इसी रंजिश में बाबा सिद्दीकी की हत्या की गई। सिद्दीकी को 15 दिन पहले जान से मारने की धमकी मिली थी। इसके बाद उन्हे वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी।<br><br><strong>गुजरात और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी मामले में कर रही जांच</strong><br>मुंबई पुलिस ने बताया कि बाबा सिद्धीकी हत्या मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गोलीबारी में 9.9 एमएम पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था। केंद्रीय एजेंसी मुंबई पुलिस के संपर्क में है और दोनों आरोपियों द्वारा किए गए दावों की पुष्टि करने पर काम कर रही है। गुजरात पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी मामले की जांच कर रही है।<br><br><strong>कार पर हमले का वीडियो भी आया सामने</strong><br>राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद उनकी काली कार का वीडियो सामने आया है, जिसके सामने वाले शीशे पर हमलावरों द्वारा दागी गई गोलियों के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, कार के साइड वाले शीशे से भी हमलावरों ने गोलियां दागी थीं। &nbsp;<br><br><strong>ऐसे की&nbsp;हत्या</strong><br>बाबा सिद्दीकी की हत्या तब की गई जब वह शनिवार शाम को अपने बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय से बाहर निकले थे। जब वह वहां से रवाना हुए तो हमलावरों ने निर्मल नगर में कोलगेट ग्राउंड के पास उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस दौरान बाबा सिद्दीकी के पेट में दो और सीने में एक गोली लगी, जिसके चलते उनकी मौत हो गई।&nbsp;<br><br><strong>लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था</strong><br>कांग्रेस के पूर्व नेता सिद्दीकी (66) को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई। बाबा सिद्दीकी ने विधानसभा में तीन बार बांद्रा (पश्चिम) सीट का प्रतिनिधित्व किया था। मुंबई के एक प्रमुख मुस्लिम नेता सिद्दीकी को कई बॉलीवुड सितारों के करीबी के रूप में भी जाना जाता था।&nbsp;<br><br><strong>विपक्ष ने सरकार को घेरा</strong><br>विपक्ष ने चौंका देने वाली इस घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े गए। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने है। चुनाव आयोग जल्द ही इनकी तारीखों का एलान कर सकता है।महाराष्ट्र में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता बाबा सिद्दीकी की शनिवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुंबई पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, इस हत्याकांड को लेकर नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स में दावा किया है कि हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी की हत्या के लिए पटाखों का फायदा उठाया। दरअसल, दशहरे के मौके पर जब बाबा सिद्दीकी अपने बेटे जीशान के ऑफिस के बाहर पटाखे फोड़ रहे थे तभी उनकी हत्या की गई।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>कार पर हमले का वीडियो भी आया सामने</strong><br>राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद उनकी काली कार का वीडियो सामने आया है, जिसके सामने वाले शीशे पर हमलावरों द्वारा दागी गई गोलियों के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, कार के साइड वाले शीशे से भी हमलावरों ने गोलियां दागी थीं। &nbsp;<br><br><strong>ऐसे की&nbsp;हत्या</strong><br>बाबा सिद्दीकी की हत्या तब की गई जब वह शनिवार शाम को अपने बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय से बाहर निकले थे। जब वह वहां से रवाना हुए तो हमलावरों ने निर्मल नगर में कोलगेट ग्राउंड के पास उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस दौरान बाबा सिद्दीकी के पेट में दो और सीने में एक गोली लगी, जिसके चलते उनकी मौत हो गई।&nbsp;<br><br><strong>लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था</strong><br>कांग्रेस के पूर्व नेता सिद्दीकी (66) को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई। बाबा सिद्दीकी ने विधानसभा में तीन बार बांद्रा (पश्चिम) सीट का प्रतिनिधित्व किया था। मुंबई के एक प्रमुख मुस्लिम नेता सिद्दीकी को कई बॉलीवुड सितारों के करीबी के रूप में भी जाना जाता था।&nbsp;<br><br><strong>विपक्ष ने सरकार को घेरा</strong><br>विपक्ष ने चौंका देने वाली इस घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े गए। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने है। चुनाव आयोग जल्द ही इनकी तारीखों का एलान कर सकता है।महाराष्ट्र में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (N C P) के नेता बाबा सिद्दीकी की शनिवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुंबई पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, इस हत्याकांड को लेकर नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स में दावा किया है कि हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी की हत्या के लिए पटाखों का फायदा उठाया। दरअसल, दशहरे के मौके पर जब बाबा सिद्दीकी अपने बेटे जीशान के ऑफिस के बाहर पटाखे फोड़ रहे थे तभी उनकी हत्या की गई।</p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8b/">पटाखों की आवाज का हमलावरों ने उठाया फायदा; 9.9 मिमी पिस्तौल से बाबा सिद्दीकी पर दागी गोलियां</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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		<title>कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव, डग़े आज भोपाल का करेंगे दौरा, 14 को आएंगे थरूर &#124; BREAKING NEWS</title>
		<link>https://thesundayviews.com/congress-president-election-dage-will-visit-bhopal-today-tharoor-will-come-on-14th/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Special Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Oct 2022 10:29:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[Big news today]]></category>
		<category><![CDATA[Congress President election]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल (आरएनएस)। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खडग़े 17 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के तहत बुधवार को राज्य की राजधानी का दौरा&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">भोपाल (आरएनएस)। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खडग़े 17 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के तहत बुधवार को राज्य की राजधानी का दौरा करेंगे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, 500 से अधिक कांग्रेस प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की उम्मीद है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="650" height="400" src="https://sahetmahet.com/wp-content/uploads/2022/10/image-90.png" alt="" class="wp-image-17371" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2022/10/image-90.png 650w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2022/10/image-90-300x185.png 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">भोपाल पहुंचने पर राज्यसभा सांसद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मिलेंगे, जिसके बाद वह पार्टी मुख्यालय में प्रेस को संबोधित करेंगे। आगामी अध्यक्ष चुनाव में खडग़े और तिरुवनंतपुरम (केरल) से लोकसभा सांसद शशि थरूर के बीच कड़ा मुकाबला होगा। दिलचस्प बात यह है कि दोनों उम्मीदवार देश के दक्षिणी हिस्सों से ताल्लुक रखते हैं। विशेष रूप से, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही खडग़े को समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के अन्य प्रतिनिधि अपना नेता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।मध्य प्रदेश में थरूर के मुकाबले दिग्गज नेता खडग़े की बढ़त नजर आ रही है, क्योंकि उन्हें दोनों शीर्ष नेताओं कमलनाथ और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का समर्थन प्राप्त है।<br>बता दें, खडग़े ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन आखिरी समय में दाखिल किया था, जब दिग्विजय सिंह ने अपनी उम्मीदवारी की पूरी तैयारी की थी और यहां तक कि पार्टी के एक दर्जन विधायक भी 30 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचे थे। लेकिन आखिरी समय में, दिग्विजय पीछे हट गए और खडग़े को अपना समर्थन दिया।<br>कुछ दिन पहले अपने बिहार दौरे के दौरान, खडग़े ने आरोप लगाया था कि भाजपा रोती रहती है कि कांग्रेस में कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं है जो पूरी तरह से निराधार है। सभी निर्णय उचित परामर्श के बाद और एक उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद लिए जाते हैं। यह वे हैं जो इस तरह की बारीकियों की परवाह नहीं करते हैं। वे अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्यों में अपनी मर्जी से मुख्यमंत्री बदलते हैं। साथ ही, लोगों को नियुक्त किया जाता है, बिना किसी स्पष्टीकरण के एक्सटेंशन दिया जाता है।<br>देश भर में पार्टी के निर्वाचक मंडल में लगभग 9,000 से अधिक प्रतिनिधि मतदान के लिए पात्र हैं। पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया में ब्लॉक कांग्रेस समितियां शामिल हैं। ये प्रदेश कांग्रेस समितियों (पीसीसी) के प्रतिनिधियों का चुनाव करती हैं, जो बदले में एआईसीसी के प्रतिनिधियों का चुनाव करती हैं।<br>एआईसीसी के प्रतिनिधियों में पूर्व पीसीसी अध्यक्ष शामिल हैं, जिन्होंने कम से कम एक वर्ष तक पद संभाला है और पार्टी के सदस्य बने हुए हैं। पार्टी ने आखिरी बार नवंबर 2000 में इस पद के लिए चुनाव देखे थे। जितेंद्र प्रसाद 2000 में सोनिया गांधी से हार गए थे, और उससे पहले, सीताराम केसरी ने 1997 में शरद पवार और राजेश पायलट को हराया था।</p>
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