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	<title>स्पेशल स्रोरी Archives - The Sunday views</title>
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	<description>Daily Hindi News</description>
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	<title>स्पेशल स्रोरी Archives - The Sunday views</title>
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	<item>
		<title>रोड सेफ्टी प्रोजेक्टर के डिप्टी टीम लीडर अमित शुक्ला ने अपने ही चीफ इंजीनियर आर.आर. राजू पर लगाये गंभीर आरोप !</title>
		<link>https://thesundayviews.com/amit-shukla-deputy-team-leader-of-the-road-safety-project-has-leveled-serious-allegations-against-his-own-chief-engineer-r-r-raju-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 07:26:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
		<category><![CDATA[Amit Shukla]]></category>
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		<category><![CDATA[Deputy Team Leader of the road safety project]]></category>
		<category><![CDATA[has leveled serious allegations against his own Chief Engineer]]></category>
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		<category><![CDATA[R.R. Raju. indian railwey news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट के डिप्टी टीम लीडर अमित शुक्ला ने अपने चीफ इंजीनियर पर लगाया बिरादरीवाद का आरोप ! सच्चाई जानने पहुंची द संडे व्यूज़ की टीम नई दिल्ली,आखिर किन&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/amit-shukla-deputy-team-leader-of-the-road-safety-project-has-leveled-serious-allegations-against-his-own-chief-engineer-r-r-raju-the-sunday-views-hindi/">रोड सेफ्टी प्रोजेक्टर के डिप्टी टीम लीडर अमित शुक्ला ने अपने ही चीफ इंजीनियर आर.आर. राजू पर लगाये गंभीर आरोप !</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट के डिप्टी टीम लीडर अमित शुक्ला ने अपने चीफ इंजीनियर पर लगाया बिरादरीवाद का आरोप !</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong> सच्चाई जानने पहुंची द संडे व्यूज़ की टीम नई दिल्ली,आखिर किन कमियों की वजह से श्री राजू ने बाहर निकाला </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>द संडे व्यूज़ का सिलसिलेवार खुलासा पढ़ते रहिये&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong> रेलवे फाटक बंद करने का सपना अधूरा, करोड़ों का फंड नहीं हुआ काम ! </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="194" height="300" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/sanjay-main-1.jpg" alt="" class="wp-image-26179" style="width:103px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संजय पुरबिया </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ</strong>। <strong>रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट के डिप्टी टीम लीडर अमित कुमार शुक्ला को चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। इनके साथ-साथ कई अन्य कर्मचारियों को काम में लापरवाही बरतने पर निकाल बाहर किया गया लेकिन श्री शुक्ला ने अपने ही चीफ इंजीनियर पर अपनी बिरादरी के लोगों को भर्ती करने का गंभीर लगाया ह। &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; को भेजे गये पत्र में उन्होंने इस बात का खुलासा किया है लेकिन सच्चाई की तह तक जाने के लिये &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; की टीम अब दिल्ली पहुंच गयी है। क्या काम में लापरवााही बरतने पर श्री राजू ने श्री शुक्ला को निकाल बाहर किया या फिर इनके द्वारा अपने नाते-रिश्तेदार और अपनी बिरादरी की भर्ती के आरोपों की कलई &#8216;द संडे व्यूज&#8217; खोलेगा। सवाल ये है कि आखिर प्रधानमंत्री और चीफ इंजीनियर पर इतना गंदा आरोप लगाने वाले अमित कुमार शुक्ला पर रेल मंत्रालय कोई कार्रवाई करेगा या फिर&#8230;? बता दें कि &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; ने 20 सितंबर को खुलासा किया था कि प्रधानमंत्री के सपनों को ध्वस्त कर रहे हैं रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू ? खबर का सार इस तरह से रहा&#8230;</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="499" height="654" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/shukla66.jpg" alt="" class="wp-image-26180" style="width:712px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/shukla66.jpg 499w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/shukla66-229x300.jpg 229w" sizes="(max-width: 499px) 100vw, 499px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच है कि देश का हर नागरिक सुरक्षिात यात्रा करे,चाहें सड़क परिवहन हो या फिर रेलमार्ग से&#8230;। इसीलिये उन्होंने रेलवे में बने सभी रेलवे फाटक पर फ्लाई ओवर और अंडर पास बनाकर रेलवे फाटक को पूरी तरह से बंद करने के लिये एक नया विभाग (आर.एस.पी.) रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट बना डाला। प्रोजेक्ट पर काम तो तेल रफ्तार से शुरु किया गया लेकिन रेलवे के रोड सेफ्टी विभाग चीफ इंजीनियर प्रधानमंत्री की सोच को बेपटरी करने का काम कर रहे हैं। बता दूं कि रोड सेफ्टी विभाग के मैन पावर देने के लिये 2.28 करोड़ का काम गुडग़ांव की कंपनी एम-एस ब्लूम कंपनी को दिया गया है। इसी आउटसोर्सेज एजेंसी के माध्यम से डिप्टी टीम लीडर पद पर <strong>अमित कुमार शुक्ला </strong> का चयन किया गया लेकिन एक वर्ष बाद काम न आने का बहाना कंपनी ने इन्हें निकाल दिया। इसी तरह कई अन्य अधिकारियों को भी निकाल दिया गया।<strong> &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; </strong>को भेजे गये गोपनीय पत्र में <strong>अमित कुमार शुक्ला </strong> ने रोड सेफ्टी विभाग के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि वे सिर्फ अपने क्षेत्र (बिहार) और अपनी जाति के लोगों का ही बॅायोडाटा एप्रूव कर मैन पावर कंपनी एम.एम. ब्लूम को भेजते हैं। इसके अलावा चीफ इंजीनियर ने अपने एक रिश्तेदार को भी लखनऊ में तैनात करा रखा है और अपने खास गुर्गे को लखनऊ से दिल्ली अपने पास अटैच करा रखा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आखिर&nbsp; निकाले गये अधिकारी ने किस आधार पर चीफ इंजीनियर पर इतना गंभीर आरोप जड़ा है ? इसमें रत्ती भर संदेह नहीं कि मामला गंभीर है और इस पर रेलवे बोर्ड को गंभीर रुख अख्तियार करना होगा, क्योंकि ये सिर्फ एक या कई सवर्ण अधिकारियों को रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट से निकालने की बात नहीं है&#8230;बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों पर कुठाराघात करने जैसा है। देखना है कि रेलवे बोर्ड के अफसर इस मामले को दबाते हैं या फिर प्रधानमंत्री के सपनों को ध्वस्त करने वालों पर कार्रवाई करते हैं। <strong>वैसे भी &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस पर चलने और भ्रस्टाचार के आकंठ में डूबे अधिकारियों के खिलाफ हल्ला बोल जारी रखता चला आ रहा है</strong>।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/modi-raju-1-1024x690.jpg" alt="" class="wp-image-12797" style="aspect-ratio:1.4849187935034802;width:640px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;द संडे व्यूज़&#8217; के पास भेजे गये पत्र में रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट से निकाले गये डिप्टी टीम लीडर <strong>अमित कुमार शुक्ला </strong>ने आर.एस.पी के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू पर गंभीर आरोप जड़े हैं।</strong> <strong><strong>अमित कुमार शुक्ला</strong></strong> <strong>ने</strong> बताया कि वे सिविल इंजीनियर हैं और पिछले 20 वषों से सिविल इंजीनियरिंग पोस्ट पर काम करते चला आ रहा हूं। मैं डीएफसीसी,रेलवे और हाई वेज के अनगिनत प्रोजेक्ट पर कर चुका हूं और इस क्षेत्र में काफी अनुभव रखता हूं&#8230;। मेरे अनुभव के आधार पर ही मेरा चयन रेलवे का नया विभाग (आरएसपी) रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट में डिप्टी टीम लीडर के पद पर दिसंबर 2025 में हुआ। रेलवे का रोड सेफ्टी विभाग जिसका प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में है। रेलवे ने मैन पावर देने के लिये गुडग़ांव की कंपनी एम-एस ब्लूम कंपनी को 2.28 करोड़ का काम दे रखा है। इसी आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से रेलवे ने मेरा चयन डिप्टी टीम लीडर के पद पर किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर रेलवे में रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट नाम से नया विभाग इस सोच के साथ बनाया गया है कि सारे रेलवे फाटक को फ्लाई ओवर और अंडर पास बनाकर रेलवे फाटक को पूरी तरह से बंद कर दिया जाये ताकि यहां पर होने वाली दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लग सके। अब इसमें काम करने के लिये अधिकारियों की जरुरत थी इसलिये चीफ इंजीनियर आर.एस.पी आर.आर. राजू ने मैन पावर एजेंसी का ठेका जिस कंपनी को दिया है,उसका कार्यालय 7-10-ए, डालीबाग, लखनऊ में है। यहां पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का चयन श्री राजू की अनुमति से ही होता है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/ss3.jpg" alt="" class="wp-image-12793" style="aspect-ratio:2.2581818181818183;width:621px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आर.आर.राजू जो अपने क्षेत्र और अपनी जाति के लोगों का ही बॅायोडॉटा एप्रूव करते हैं और मैन पावर देने वाली एजेंसी को सिर्फ अपने आदमी को रखने का निर्देश देते हैं। मेरा काम बढिय़ा चल रहा था और मैन पावर देने वाली कंपनी को मेरे काम से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं रही। चूंकि मैं चीफ इंजीनियर श्री राजू के जाति और उनके प्रदेश का नहीं था इसलिये उन्होंने मुझे 2026 में झूठा आरोप लगाकर निकाल दिया और मेरी जगह पर अपनी बिरादरी के एल. बी. सिंह मौर्या को तैनात करा दिया है। <strong><strong>अमित कुमार शुक्ला </strong>ने</strong> बताया कि चीफ इंजीनियर श्री राजू ने अपने खास गुर्गा के.के.गुप्ता, एस.एस.ई,जो लखनऊ में तैैनात है,उसका अपने विभाग में स्थानांतरण करा लिया है। इसी तरह, उन्होंने अपने रिश्तेदार सुधांशु शेखर को डाटा इंट्री कम्प्यूटर के पद पर लखनऊ में करा रखा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र में  <strong><strong>अमित कुमार शुक्ला </strong>ने</strong> चीफ इंजीनियर पर यह भी आरोप लगाया कि ये भाई-भतीजावाद,जातिवाद और क्षेत्रवाद और भ्रष्टïाचाार की वजह से मुझे निकाला गया है। बिना नोटिस पीरियड के निकाले जाने की वजह से मैं और मेरा परिवार भुखमरी की कगार पर है। बहरहाल, उक्त अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट,नये विभाग रोड सेफ्टी में जिस तरह से चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाये हैं,उसमें क्या सच्चाई है,इसकी जांच रेल मंत्री को अवश्य करानी चाहिये। यदि इसमें सच्चाई है तो इस पर दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिये क्योंकि ये प्रधानमंत्री का ड्री प्रोजेक्ट है।</p>
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		<title>लोक गीत&#8230;</title>
		<link>https://thesundayviews.com/folk-song-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 16:21:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आस्था]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
		<category><![CDATA[Big news today]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;सुर और ताल मे पिरोकर, अपनी संस्कृति, अपने संस्कार, अपने भाव, अपने मान । गाते &#8211; थिरकते लोकगीतों मे बसती, हर देश- प्रदेश- नगर- गाँव की अपनी पहचान ।। मीरा&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;सुर और ताल मे पिरोकर, अपनी संस्कृति, अपने संस्कार, अपने भाव, अपने मान ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गाते &#8211; थिरकते लोकगीतों मे बसती, हर देश- प्रदेश- नगर- गाँव की अपनी पहचान ।।</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/03/mira-sri-300x292.jpg" alt="" class="wp-image-6898" style="aspect-ratio:1.029126213592233;width:154px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मीरा श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अप्सरा आली इंद्रपुरीतून खाली,पसरली लाली रत्नप्रभा तनु ल्याली</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ती हसली गाली चांदणी रंगमहाली, अप्सरा आली पुनवचांदणं न्हाली&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Folk song:</strong> इस धमाकेदार गीत के बजते ही पूरे माहौल मे सर्दी की रात मे गर्मी दौडऩे लगी। साथ ही महिलाओं के नौ मीटर की नववारी सारी का फेटा कस कर पहनना, पाँवों मे लच्छेदार घुंघरू और तेज ढोलकी पर ऊर्जावान नृत्य करना हम यू. पी. वालों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहां हम लड़की वाले बन कर गए थे , हम यू. पी. की लड़की और महाराष्ट्र के नासिक का लड़का, भगवान ने क्या जोड़ी बनाई थी&#8230;। अपने देश के दो अलग- अलग संस्कृतियों का ऐसा मेल कराया, जिसमें हम दोनों परिवारों को प्रेम की अमर माला में गूँथ दिया&#8230;। नई संस्कृति में शादी के रस्मों को देखने के लिए हम सब बहुत उत्साहित थे । आज हल्दी, संगीत- नृत्य का दिन था, आरंभ लड़के वालों के लावणी गीत से ही हुआ। लावणी महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय लोकगीत और नृत्य है। यह अपनी तेज लय, ऊर्जावान संगीत और सुंदर भाव भंगिमाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लावणी शब्द लावण्य से बना है, जिसका अर्थ सौंदर्य (खूबसूरती) होता है। यह गीत ढोलकी की थाप पर बहुत तेज गति में गाया जाता है। इस कला को पेशवा राजाओं के समय मे बहुत बढ़ावा मिला था,सैनिकों का जोश बढ़ाने के लिए गाया जाता था।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="644" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1024x644.png" alt="" class="wp-image-26169" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1024x644.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-300x189.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-768x483.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1536x966.png 1536w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-2048x1288.png 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">लावणी आज भी महाराष्ट्र की संस्कृति का बहुत बड़ा हिस्सा है, इसमे ढोलकी की थाप पर पारिवारिक प्यार, राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक मुद्दों और प्रेम प्रसंगो को व्यक्त किया जाता है। अब इतने ऊर्जावान प्रस्तुति के बाद कौन रुक सकता था&#8230;। मंच के नीचे ही अपने- अपने स्थान पर अलग &#8211; अलग राज्यों से आए हुये हमारे मित्रों के, हमारे परिवार वालों के लोक गीत और नृत्य आपस मे गूथने लगे&#8230;। तब अलग- अलग प्रदेशों से आए हुये मेहमानों को आगे किया गया, आखिर हमलोग नवाबी (उत्तर प्रदेश) से थे, पहले आप &#8230; पहले आप &#8230; ये ही तो हमारी पहचान है। जबतक हमलोग समझ पाते कि पहले मंच पर किसको भेजें, किसको भेजे तब तक मंच पर रंग- बिरंगे घाघर- चुनर आभूषणों से सजी हुई हमारी बेटी की सखियाँ गोल- गोल थिरकते हुये दिखीं और उनके गीत बजते ही सब झूम उठे &#8230; अरे ये तो राजस्थानी लोकगीत है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हो, लुक-छिप ना जाओ जी,म्हाने दीद कराओ जी अरे, क्यों तरसावे हो ?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>म्हाने शकल दिखावो जी थारी शरारत सब जाणूं मैं,</strong> <strong>चौधरी,</strong> <strong>म्हारे से लेवो ना पंगा जी, मैं कहन लगे..।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>म्हारे हिवड़े में जागी धोंकनी, रे</strong> <strong>चंदा मैं थारी चाँदनी</strong> <strong>म्हाने दामन में बांधी खुशी, रे झूम, झूम, झूम, झूम बा झूम&#8230; झूम- झूम</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ने तो सबको घूमा के रख दिया। यह उल्लासपूर्ण गीत राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोक गीत और लोकनृत्य है यह विशेष रूप से महिलाओं- पुरुषों द्वारा उत्सवों, विवाह समारोहों और तीज- त्योहारों के अवसर पर गाया और नाचा जाता है। ये गीत राजस्थान की लोक संस्कृति और लोक भावनाओं को जीवंत बनाए रखते हैं। राजस्थानी गीत हमारे फिल्मों में ही नहीं, देश- विदेशों तक धूम मचा रखे हैं। अभी सब झूम ही रहे थे कि दृश्य बदल गया, लड़कियों के स्थान पर बेटी का मित्र जो उत्तरांचल क्षेत्र से आया था,धोती- कुर्ता- टोपी और शॉल पहने था, उसने हमारे बेटी और दामाद को मंच पर बुला, सबको आनंदित कर दिया&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तेरो लहंगा&#8230; लहंगा तेरो&#8230; लहंगा&#8230; तेरो लहंगा &#8230; लहंगा&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तेरो लहंगा&#8230; तेरो लहंगा&#8230; तेरो लहंगा॥ क्या भालो छजी रे ओ &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रंगीली पिछोड़ी&#8230; हाय &#8211; हाय &#8230; जरा आँखों मे &#8230; लगाले काजला &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नजर लागली&#8230; नजर लागली &#8230; नजर लागली&#8230; तेरो लहंगा &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">घूमते हुये लहंगे ने इतना घूमा दिया कि घरवालों को लगा कि अब अपनी नई नवेली दुल्हन और दूल्हे राजा को अपने पैतृक जन्म स्थान उत्तर प्रदेश से आशीर्वाद दिया जाए। फि र दुल्हन की बहनों की टोली चल पड़ी मंच की ओर, और जैसे ही दुल्हन की बड़ी बहन आयुषी भटनागर जो की म्यूसिक फ ॉर वेलनेस प्रोग्राम की प्रसारक है, ने सलोनी ठक्कर के गीत को शुरू किया, ऐसा लगा हम सब नासिक नहीं बल्कि मिथिला पहुंच गए&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तुम उठो सिया श्रृंगार करो अब धनुष राम ने तोड़ा है तोड़ा है भाई तोड़ा है</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सीता से नाता जोड़ा है माठ सिया</strong> <strong>के टीका सोहे कुंडल की छवि अति न्यारि है</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>न्यारि है भाई न्यारि है रघुवर को जानकी प्यारी है&#8230; तुम उठो सिया श्रृंगार करो.</strong>..</p>



<p class="wp-block-paragraph">गुजरात का सबसे प्रसिद्ध लोकप्रिय गरबा गीत, असम का लोकप्रिय बीहू, रात तक कार्यक्रम, बहुत सुंदर ढंग से चलता रहा। गीत &#8211; संगीत का कार्यक्रम इतना मनमोहक था कि किसी गीत पर लोग झूम उठते थे तो किसी पर आंखो मे आँसू भर जाते थे, ऐसा ही होता है, हमारा लोक संगीत, लोक जीवन की भावनाओं, परम्पराओं और संस्कृति का दर्पण होता हैं। भारत के विभिन्न राज्यों मे अलग-अलग प्रकार के लोकगीत प्रचलित हैं । विवाह , देवी पूजन, जन्म, फसल कटाई, त्योहारों, सुख- दुख और अन्य शुभ अवसरों पर लोक गीत गाए जाते हैं । गीत शब्द की बात करें तो सुनते ही मन में कुछ हलचल सी होने लगती है । हम सभी अपनी जिंदगी को हसीन खुशनुमा बनाने के लिए गाहे- बगाहे गीत &#8211; संगीत, कविता, गजल आदि से एक रिश्ता तो रखते ही हैं । लोकगीत जो एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक मौखिक रूप से चलती चली आ रही है वह लोक ग़ीत दो शब्दों से बना है &#8230;। लोकगीत अर्थात एक क्षेत्र विशेष , जिसकी एक संस्कृति, एक भाषा, एक परंपरा हो, उस क्षेत्र विशेष के हृदय के भावों को, उल्लास को गीत के रूप मे गाना ही लोक गीत है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="672" height="354" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-4.png" alt="" class="wp-image-26170" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-4.png 672w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-4-300x158.png 300w" sizes="auto, (max-width: 672px) 100vw, 672px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">लोक गीत की अगर उत्पत्ति की बात करें तो यह अंग्रेजी के फ ोल्क, विसा शब्द का पर्याय है। फ ोल्क शब्द की जड़ें भी बहुत गहरी हैं, फ ोल्क शब्द जर्मन के वोल्क, अवसा शब्द से बना है, इस शब्द का प्रयोग बहुत प्राचीनकाल से किया जाता रहा है, जिसका अर्थ है सामान्यजन,जनसाधारण&#8230;। जैसे अब्राहम लिंकन की परिभाषा &#8211; जनता का जनता के लिए जनता के द्वारा-जनतंत्र होता है, वैसे ही हमारे &#8216;हिन्दी साहित्य कोश&#8217; मे इसके तीन अर्थ बताए गए हैं- श्लोक में प्रचलित,लोक द्वारा निर्मित,लोक विषयक गीत -&#8216;लोकगीत&#8217; ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="644" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-1024x644.png" alt="" class="wp-image-26171" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-1024x644.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-300x189.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-768x483.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-1536x966.png 1536w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet1-1-2048x1288.png 2048w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">इनसाइक्लोपीडिया मे कहा गया है आदिम मानव का उल्लासमय गीत लोक गीत है। कितना सही कहा गया है&#8230; आदिवासियों का गीत &#8230; न कोई भाषा न कोई संगीत फि र भी जब वो उत्साहित होते थे या समूहिक रूप से किसी काम को करते थे तो उनके मुख से अनायास लय बद्ध बोल निकलने लगते थे, जो धीरे- धीरे आगे चल कर उनका लोकगीत बना , जिसे सुनो तो भाषा (शब्द) भले ही समझ न आए पर उनके गीतों में उनका भोलापन निश्छलता साफ दिखाई पड़ता है। हमारी संस्कृति में लोकगीत कितना पुराना है, इसे बताया नहीं जा सकता। सबसे प्राचीन वेदों की बात करें तो इनके पवित्र मंत्र भी लयबद्ध गाये जाते थे और एक दूसरे तक सुन कर ही आगे बढ़े थे। इसीलिए वेदों को श्रुति भी कहा जाता है। वेदों में सामवेद में गीत संगीत लय आदि का समग्र वर्णन पाया जाता है। इस प्रकार हमारे देश भारत मे हर भाषा के अपने- अपने लोकगीत हैं, जिसने देश और विदेशों में अपना धूम मचा रखा है। इसमें हमारे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोक गीत का अपना अलग ही स्थान है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="575" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-1024x575.png" alt="" class="wp-image-26174" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-1024x575.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-300x168.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1-768x431.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-3-1.png 1263w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश और बिहार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां के गीत संगीत अपनी मिट्टी, त्योहारों , ऋतुवों, उत्सव और लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। लोकगीत लोगों के सुख- दुख और रोज़मर्रा की जिंदगी को बताते हैं। इसे ज़्यादातर ढोल, मंजीरा और हारमोनियम के साथ गाते हैं । सबसे प्रसिद्ध लोकगीतों में कजरी, चैती, सोहर, बिरहा, सुमंगली ,कोहबर,महेश गीत, छठ गीत, रोपणी- कटनी,विदेसिया, जाट, जतिन आदि लोकगीत हैं । कजरी- सावन और विरह के गीत, कजरी लोकगीत का संबंध भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के साथ &#8211; साथ बिहार से भी है। पारंपरिक रूप से बनारस , मिर्जापुर, मथुरा, इलाहाबाद और बिहार के भोजपुर अंचल के आसपास के गांवों, कस्बों में सावन का अर्थ केवल वर्षा नहीं , बल्कि कजरी है। कजरी को समझने के लिए बारिश को महसूस करना पड़ता है। जब काले बादल मंडराते हैं, जब गंगा किनारे पुरवैया बहती है , जब आम और नीम की डालियों पर झूले पड़ते हैं और जब धरती वर्षा के पहले बूंदों से महक उठती है, तो कजरी जन्म लेती है। कजरी मे वर्षा का सौंदर्य है, लेकिन उससे भी अधिक इसमे मन का मौसम है। सावन के महीने में महिलाओं द्वारा झूला झूलते हुये दिन भर कजरी गाया जाता है। हंसी- ठिठोली चलता रहता है&#8230;।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे खेले जाइबु सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तू तो जात हो अकेली कौनों संग न सहेली गुंडा रोक लिहे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तोहरी डगरिया बदरिया घेरी आइल ननदी कैसे खेले जइबु &#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">चैती &#8230; अगर कजरी सावन की आत्मा है, चैती चैत्र मास की सांस है। चैत्र का मास हम सनातनियों का नूतन वर्ष है जिसका आरंभ दुर्गा नौरात्रि से किया जाता है। पूरे देश में चइतनौमी की पूजा, देवी गीत गुंजायमान है, लोक जीवन में भक्ति का उल्लास है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देवी गीत ढोलक बजाऊं सारी रात, मैयाजी तुमको सोने न दूंगी सोने न दंूगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मैया सोने न दूंगी भजन सुनाऊं सारी रात मैया जी तुमको सोने न दूंगी&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चैत में खेतों मे गेहूं, सरसों की कटाई का सामूहिक जोश है</strong>।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आम के बौर की सुगन्ध है,कोयल की कूक है , यह वो क्षण है जब सर्दी की स्मृतियां विदा ले रही होती हैं और प्रकृति एक नए चक्रके लिए स्वयं को तैयार कर रही होती है। यह केवल ऋ तु परिवर्तन का गीत नहीं, बल्कि आशा , नवजीवन और उत्सव का संगीत है। चैट में श्री राम का जन्म होने से राम नौमी के गीत भी गाए जाते हैं । साथ ही रामनौमी के चौथे दिन जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर का जन्मदिन होता है। कई रचयिताओं ने उनके जन्म को भी चैती में ढाला है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;छठ गीत</strong>&#8211; सूर्योपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों मे मनाया जाता है। दीपावली के छठे दिन से शुरू होने वाला छठ का पर्व चार दिनों तक चलता है। छठ का पर्व एक कठिन पर्व है, जिसमें षष्ठी भगवती की पूजा कर के पुत्र, पति एवं परिवार के कल्याण की कामना की जाती है। यह एक मात्र ऐसा पर्व है जो हमारे वैदिक काल से चला आ रहा है । यह पर्व ऋग्वेद में वर्णित सूर्य पूजन, उषा पूजन तथा आर्य परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। छठ के गीतों मे सबसे प्रचलित गीत है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कांच ही बांस के बहंगिया,बहंगी लचकत जाय होई न बलम जी कहरीय,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बहगी केकरा के जाए तू तो आंधर होवे रे बटोहिया, बहगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>छठी मैया के जाय ओहरे जे बारी छठी मैया, बहंगी उनका के जाए , कांच ही बांस के बहंगिया&#8230;।</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="376" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-1024x376.png" alt="" class="wp-image-26173" style="width:773px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-1024x376.png 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-300x110.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12-768x282.png 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/lokgeet12.png 1273w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">लोकगीतों का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि उन्होंने उन आवाजों को संरक्षित किया जिन्हें इतिहास की पुस्तकों मे स्थान नहीं मिला। ग्रामीण स्त्रियां, जो अक्सर अपने अनुभव लिख नहीं सकती थीं, उन्होंने अपने सुख- दुख, प्रेम , विरह, सपनों और सामाजिक अनुभवों को गीतों मे सुरक्षित रखा। इस दृष्टि से कजरी, चैती, सोहर, विवाह गीत केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां नही बल्कि भारतीय महिलाओं की मौखिक आत्म कथाएं भी हैं। लोकगीत में अभी भी कोई कमी नहीं आई है। अब तो ये मौखिक परंपरा के साथ साथ लिखित, ऑडिओ, वीडियो, डिजिटल और मंचीय रूपों में भी सुरक्षित एवं लोकप्रिय है। अब तो यह गांवो से निकल कर शहर, देश, विदेशों तक पहुंच गया है। देश- विदेशों तक लोक गीतों को लोकप्रिय बनाने में शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी, ईला अरुण, कल्पना पटवारी, गुलाबो सपेरा जैसे प्रसिद्ध गायक-गायिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। वैदिक काल से गीत- संगीत का उपयोग संगीत चिकित्सा के रूप में भी किया जाता रहा है,जो मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक माना जाता है। आज मानसिक चिकित्सक गायत्री मंत्र के ऊपर भी शोध कर रहे हैं, जिसके लय-ताल से अनेक बीमारियों को दूर करने का दावा किया जा रहा है। तात्पर्य यह है कि यदि हम मानसिक वेलनेस की बात करें तो ये हमारे वैदिक काल की देन है, जो मध्य काल में विलुप्त प्राय हो गया था। हम लोकगीत को इसके महत्व को न समझ कर मात्र मनोरंजन का साधन ही समझते रहे, जबकि लोकगीत में मानसिक संतुलन को बनाए रखने की अद्भुत क्षमता है, जिसे पुन: हमारे युवा वर्ग समझ गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सामूहिक रूप से लोकगीत गाने से आपसी जुड़ाव, आत्मविश्वास और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। गीत मन को प्रसन्न , शांत और संतुलित रखते हैं। वे तनाव कम करने, सकारात्मक भावनाएं बढ़ाने और मानसिक वेलनेस को सुदृढ़ बनाने में सहायक होते हैं जिसकी वर्तमान मे बहुत आवश्यकता है। आज की पीढ़ी जिस मानसिक तनाव, सामाजिक उलझनों, नकारात्मक सोच तथा आपसी प्रतिस्पर्धा से गुजर रही है इसे म्यूसिक फ ॉर वेलनेस से फिर से जुडऩा ही होगा। जिससे हम एक संवेदनशील , सकारात्मक, ऊर्जावान समाज की स्थापना कर सकें। अभी हम सब गीत नृत्य के रस मे डूबे ही थे कि ताजे रंग बिरंगे फूलों से सजे मंडप से मंगलाष्टकम के पवित्र मंत्र के सुर, शुभ वातावरण मे गूंजने लगे&#8230;मंगलाष्टक विवाह, संस्कार का पारंपरिक गीत- श्लोक है&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>स्वस्ति श्री गणनायकम गजमुखम, मोरेश्वरम, सिद्धिधम ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बल्लालों मुरुदम विनायक महम चिंतामणि स्थेवरम ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेण्याद्री गिरीजातकम सुरवारदम ओझरम।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ग्रामो रंजण सन्स्थीतम गणपति कु र्या सदा मंगलम शुभ मंगलम सावधान ।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज एक आंगन की चहकती कली दूसरे आंगन की खुशबू बनने जा रही है। अपनी लाड़ली का हाथ वर के हाथों मे सौंपते हुए हम सब उसे जीवन भर प्रेम, सम्मान और विश्वास का साथ देने का आशीर्वाद और दायित्व दे रहे हैं &#8230;। फिर भी बेटी तो मां के कलेजे का टुकड़ा ही होती है, उसे विदा करना आसान नहीं &#8230;। हृदय से ढेरों आशीष, आँखों में आँसू , मन मे हलचल लिए कुछ खुशी कुछ गम लिए , भारी मन से हम सब ने विदा किया&#8230;. हमारे कानों में उसके गुनगुनाए गीत गूंजने लगे, जिसे वो अपनी बुआ दादी के साथ अक्सर गाती रहती थी&#8230;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ताल किनारे महल मोरा सुंदर ता, बीच पुरइन के पात हो</strong> <strong>आवत देखूं मैं दुई गो सिपहिया ,</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एक सांवर एक गोर हो सांवर तो मोरे ननदी के भैया, गोर हैं बिरन हमार हो ताल किनारे &#8230;</strong></p>
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		<title>यूथ विंग के सहारे विपक्ष को लगायेंगे किनारे</title>
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		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 05:29:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;योगेश श्रीवास्तव लखनऊ। इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपने नौ साल की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने वाली है। वहीं उसकी तैयारियों में ज्यादा&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="403" height="585" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/yogesh-sri-main.png" alt="" class="wp-image-26165" style="width:96px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/yogesh-sri-main.png 403w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/yogesh-sri-main-207x300.png 207w" sizes="auto, (max-width: 403px) 100vw, 403px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;योगेश श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ</strong>। इस बार के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपने नौ साल की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने वाली है। वहीं उसकी तैयारियों में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को साथ लाने की रणनीति है। पार्टी की ओर से युवाओं को साथ लाने की गरज से इस बार की घोषित प्रदेश कार्यकारिणी में युवाओं को खासा प्रतिनिधित्व दिया गया है। युवाओं को पार्टी से जोडऩे की रणनीति के पीछे एक कारण यह भी है विपक्ष द्वारा जिस तरह &#8216;जेन जी&#8217; को हथियार बनाया जा रहा है उसी का माकूल जवाब देने के लिए ही &#8216;यूथ ब्रिगेड&#8217; को तैयार किया जा रहा है। पार्टी ने युवाओं को आगे लाने की दिशा में &#8216;फ़ायरब्रांड&#8217; लोगों को न सिर्फ संगठन से जोड़ा है बल्कि ऐसे लोगों को चुनाव में स्टारक प्रचार के तौर पर आगे करने की रणनीति है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/yyi53.jpg" alt="" class="wp-image-12833" style="aspect-ratio:1.4292929292929293;width:566px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही भाजपा ने जहां निचले स्तर तक पार्टी से युवाओं को जोडऩे की दिशा में बड़ा काम किया है, वहीं संगठन में कम उम्र वाले पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को खासी तवज्जो दी जा रही है। जिला इकाइयों के गठन में भी पदाधिकारी बनाने में 50 साल तक उम्र वालों को ही प्राथमिकता दी गयी है। माना जा रहा है पार्टी उत्साही और तेजतर्रार छवि के युवाओं को चिन्हित कर उन्हें चुनाव के मद्देनजऱ और दायित्व सौंपे जाने की योजना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नितिन नवीन के आने के बाद से पार्टी नेतृत्व का युवाओं पर खासा फ़ोकस है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा इस बार &#8216;हैट्रिक&#8217; लगाने की गरज से युवाशक्ति पर भरोसा करके उसे आगे किए हुए है। पार्टी ने इसी युवा शक्ति के भरोसे नए जोश के साथ चुनावी रण में उतरने का निर्णय लिया है। युवाओं को तरजीह दिए जाने की वजह यह भी है कि नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपना बॅास कहकर यह संकेत दिया था कि अब पार्टी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं की है। इसी थीम को ध्यान में रखकर युवाओं को अनुसांगिक मोर्चो में भी यथास्थान दिया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">युवा टीम में अकेले युवक ही नहीं बल्कि 50 से कम उम्र की महिलाओं और अन्य वर्गो के लोगों को भी शामिल किया जा रहा है। प्रदेश से लेकर जिला शहर और तहसील ब्लाक तक इकाइयों में युवाओं को स्थान दिया गया है।युवाओं को जोडऩे के पीछे की एक रणनीति यह भी है कि इसके जरिए पार्टी जहां अपने जनाधार में इजाफ़ा करेगी बल्कि इसी के जरिए वह जंतर- मंतर पर हुए जेन जी आंदोलन का माकूल जवाब भी दे पायेगी। समाजवादी पार्टी की लोहिया वाहिनी, यूथ ब्रिगेड और छात्र सभा सहित अन्य दलों के युवा संगठनों की तादात को देखते हुए भाजपा ने अपने युवा मोर्चे के साथ ही मुख्य संगठन में युवाओं को खासी तरजीह दी है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="375" height="491" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/harish-dwedi.png" alt="" class="wp-image-26160" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/harish-dwedi.png 375w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/harish-dwedi-229x300.png 229w" sizes="auto, (max-width: 375px) 100vw, 375px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">हाल ही में प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा घोषित प्रदेश कार्यकारिणी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में युवा चेहरों को खासी प्राथमिकता दी गयी है। <strong>राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पूर्व सांसद तथा युवा मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष रहे हरीश द्विवेदी को न सिर्फ राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा गया है, बल्कि उन्हें युवा मोर्चे का प्रभारी भी बनाया गया है।</strong> माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हरीश द्विवेदी की राजनीतिक मेधा का इस्तेमाल करके पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा अपना दबदबा बरकरार रखना चाहती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="471" height="412" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/abhijat-mishra.png" alt="" class="wp-image-26161" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/abhijat-mishra.png 471w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/abhijat-mishra-300x262.png 300w" sizes="auto, (max-width: 471px) 100vw, 471px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी तरह युवा मोर्चे मे रहे अभिजात मिश्र को भी प्रदेश संगठन में बड़ा दायित्व सौंपा गया है। उनकी राजनीतिक छवि &#8216;फ़ायरब्रांड&#8217; युवा नेता की है। वे पार्टी की गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं। उनकी छवि कट्टर हिन्दुवादी नेता की है। पार्टी ने उनकी सांगठनिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में जगह दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी ने मोर्चो के गठन में युवा मोर्चे का दायित्च डॅा. रोहित मिश्र को सौंपा है</strong>। उनके प्रथम आगमन के दौरान जिस तरह राजधानी की सड़कों पर युवाओं का हुजूम देखने को मिला उसके बाद से पार्टी को लगने लगा है कि आगामी विधानसभा चुनाव अन्य दलों की यूथ ब्रिगेड के आगे भाजपा के युवाओं की टीम के सहारे विपक्ष के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकेगा। जेन जी के आंदोलन के दौरान जिस तरह लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिल्ली की सड़कों पर छात्रों युवाओं के आंदोलन को समर्थन दिया गया उसके बाद से खासकर यूपी में भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करते हुए युवाओं को खासी तरजीह देने का निर्णय लिया है। इसी गरज से राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी दोनों में युवाओं को खासा महत्व दिया गया है।&nbsp;</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/dr-rohit-mishra-291x300.png" alt="" class="wp-image-12835" style="aspect-ratio:0.97;width:291px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विधानसभा क्षेत्रों में युवाओं का जोडऩे को होंगे सम्मेलन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए सम्मेलनों को आयोजित करने की रणनीति पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े अपने आगामी दौर के दौरान इस दिशा में पार्टी के युवा पदाधिकारियों से बैठक कर इस रणनीति को अंतिम रूप देंगे। पार्टी जानकारों की माने तो सभी 403 विधानसभा सीटों पर युवाओं का जोडऩे की गरज से युवा सम्मेलन और गोष्ठिया आयोजित की जा सकती है। सम्मेलनों का आयोजन भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेतृत्व में होगा। युवाओं के बीच भारतीय जनता पार्टी के चुनावी संदेश को पहुंचाने के साथ योगी सरकार की पिछले नौ सालों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ ही विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा युवा वोटरों के वोट पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा ने सम्मेलन करने की रणनीति अपनाई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पार्टी सूत्रों की माने तो इस दिशा में युवा मोर्चे की ओर से काम शुरू कर दिया गया है। बता दे कि 18 से 35 वर्ष आयु के वोटरों और खास तौर पर नए जुने वाले वोटरों पर भारतीय जनता पार्टी की निगाहें है। भाजपा उम्मीद कर रही है कि इन वोटरों के जरिए वह एक बार फिर से विधानसभा चुनाव 2027 में जीत दर्ज करेगी। युवा सम्मेलनों के जरिए बताएगी कि भाजपा की जीत का युवाओं को क्या फ़ायदा मिलेगा और अब तक कितना फ़ायदा हुआ है।</strong></p>
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		<title>पितृपक्ष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 05:08:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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		<category><![CDATA[pitrapaksh]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वसान्सि जीर्णानि यथाविहाय नवानि गृहणाति नरोअपराणि तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही मीरा श्रीवास्तव लखनऊ। आज हमारी माँ से बिछड़े लगभग एक साल हो गए&#8230; दुनिया इधर से&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>वसान्सि जीर्णानि यथाविहाय</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नवानि गृहणाति नरोअपराणि</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तथा शरीराणि विहाय</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2024/03/mira-sri-300x292.jpg" alt="" class="wp-image-6898" style="aspect-ratio:1.0229885057471264;width:89px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मीरा श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong> आज हमारी माँ से बिछड़े लगभग एक साल हो गए&#8230; दुनिया इधर से उधर हो जाए &#8230; सब कुछ सामान्य लगता था, पर माता- पिता भी कभी साथ छोड़ देंगे ये स्वीकार ही नहीं था। पिता जी का साथ और आशीर्वाद है, पर माँ का ही साथ छूट गया&#8230;। आज इतने दिन बीत गए ऊपर से सब कुछ सामान्य चल रहा है। पर&#8230; मन के अंदर ही नहीं बाहर में भी बहुत बड़ा कोना खाली हो गया है, अपने सुख- दुख को उनसे कह कर फि र उनकी राय सुन कर बड़ी संतुष्टि मिलती थी। उनकी भी बातें सुनना खुशियाँ बांटना, दुख हरना, सेवा करना, बहुत संतोष देता था, अभी भी हर बात के साथ उनकी यादें जुड़ीं हैं और क्यों न हो, जिस धरती माँ पर हम खड़े है उस पर खड़े रहने लायक भी माँ ने ही बनाया है । इसलिए हमारी धरती माँ से भी बढ़ कर हमारी माँ का ऋण हमारे ऊपर है। हमारे सनातन में हम मनुष्य तीन ऋण ले कर पैदा होते है। देव ऋण, ऋषि ऋण, (गुरु ऋण) और पितृ ऋण। जबसे हमने सुना 26 , 27 से 10 तक पितृपक्ष आ रहा है, हमारा मन श्रृद्धा से भर गया, क्योंकि श्राद्ध पक्ष हमारे पूर्वजों से मिलने का समय होता है, उन्हे संतुष्ट करने का प्रसन्न करने का समय होता है। इस पितृपक्ष को अनमोल पक्ष भी माना गया है, क्योंकि इस बार पुर्णिमा में चंद्र ग्रहण और अमावस्या में सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। 100 साल के बाद यह पुण्य तिथि पड़ी है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/pitar-2-1024x577.png" alt="" class="wp-image-12829" style="aspect-ratio:1.7728531855955678;width:640px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">हमारा धर्म इतना सुंदर है कि जब हमारे अपने हमें छोड़ कर चले जाते हैं तब भी उनके प्रति हमारा प्यार, हमारी भावना कम नहीं होती है । इसी भावना के साथ हम अपने पूर्वजों को श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान करते हैं । इसे आम भाषा मे सोलह श्राद्ध कहा जाता है। ये श्राद्ध तर्पण उनके प्रति कर्तव्य पालन का एक तरीका है। पितृपक्ष, भाद्रपद के पूर्णिमा से अमावस्या तक किया जाता है, इस अमावस को महालय भी कहते हैं । इस दिन तड़के महिशासुर मर्दिनी का पाठ सुनने की सदियों पुरानी परंपरा है। प्रात: दैनिक क्रिया से मुक्त हो कर श्रद्धा पूर्वक इस पाठ को सुनने से सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है , जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। हमारा सनातन धर्म तो पुनर्जन्म मे विश्वास रखता है और आत्मा को अजर- अमर माना जाता है। &nbsp;इसलिए मृत्यु के बाद जबतक आत्मा को नया शरीर नहीं मिलता, वह पितृलोक मे निवास करती है। पितृपक्ष के दौरान किए गए दान और तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को ऊर्जा और तृप्ति मिलती है, जिससे उनकी आगे की यात्रा सुगम होती है और उनकी संतुष्टि से प्राप्त आशीर्वाद हमारे जीवन को सुगम बनाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हिन्दू धर्मग्रंथो जैसे गरुनपुराण और ब्रह्मपुराण के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक के सोलह दिनों के लिए यमराज पितरों को मुक्त कर देते हैं। इस अवधि मे सभी पितर अपने वंशजों से मिलने अन्न- जल-सम्मान ग्रहण करने के लिए वायु रूप मे पृथ्वीलोक पर आते हैं। इन आत्माओं में सभी अच्छी नहीं होती हैं, कुछ हमारी सहायता करके प्रसन्न होते है तो कुछ हमे परेशान करके&#8230; जैसे हमारे कार्य में अवरोध डाल कर,बीमारी देकर, आकस्मिक चोट पहेुचा कर, इन दुष्ट आत्माओं से हमारे वंशज ही हमारी रक्षा करते हैं। इसलिए इस समय किया गया तर्पण और श्राद्ध सीधे हमारे पूर्वजों तक पहुंचता है और उन्हें ऊर्जा देता है,जिससे वे एक घेरा बना कर अपने परिवार की रक्षा करते हैं । हमारे पूर्वज जब धरती पर थे तब भी अपने परिवार की रक्षा करते थे और जाने के बाद भी हमारी रक्षा के लिए आते हैं। इसलिए ये समय भय का नहीं बल्कि उनके प्रति श्रद्धा, दान, मान- सम्मान और प्यार का है। इस समय भाद्रपद में श्राद्ध का खगोलीय कारण भी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस समय सूर्य उत्तर से दक्षिण गोलार्ध की ओर बढ़ता है, दक्षिणायन काल और सूर्य कन्या राशि मे प्रवेश करता है। सूर्य की इस स्थिति के दौरान पृथ्वी और पितृलोक की दूरी इस प्रकार एक सीध मे संरेखित होती है कि हमारे द्वारा दिया गया जल , तर्पण और भोजन, पिंड दान सीधे पीतर देवों तक आसानी से पहुंच जाता है। यदि हम श्राद्ध के इतिहास पर दृष्टि डाले तो यह बताना मुश्किल है कि इसे पहली बार किसने किया , कब किया और कहा किया? क्योंकि यह किसी एक युग काल की देन नहीं है बल्कि हर काल में किसी न किसी रूप मे तर्पण हुआ है। शिव ने पार्वती का तर्पण उनके भस्म को अपने अंगो पर मल कर किया जिससे उनकी आत्मा शिव के प्रेम से सदा के लिए तृप्त हो गई। महाभारत के अनुशासन पर्व में एक कथा के अनुसार युधिष्ठिर ने जब भीष्म पितामह से पूछा कि पहली बार श्राद्ध किसने किया तब भीष्म पितामह ने ऋ षि निमि कि कथा सुनाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऋषि निमि काएक श्रीमद पुत्र था, जिसकी मृत्यु ऋषि से पहले हो गई, इससे ऋषि दुख मे डूब गए,बड़े दुखी मन से चतुर्दशी को उन्होंने अलग -अलग कई प्रकार का भोजन इकट्ठा किया, अमावस्या को सात ब्राह्मणों को बुलाकर उन्हे भोजन कराया फिर अपने पुत्र के लिए पिंड बनाकर दान किया, किन्तु भावावेश में उन्होंने ये सब कर तो लिया पर बाद मे घबरा गए कि ये सब जो मैंने किया, ये न कही देखा न सुना गया, कहीं मुझसे कुछ गलत तो नहीं हो गया। जब उन्होंने ये बात ऋषि अत्री को बताई जो कि उनसे भी बड़े ऋषि थे, तो उन्होंने बताया कि तुमने कोई गलती नहीं कि है ,क्योंकि ब्रह्मा जी ने श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा को बताया है जिसे दूसरे ऋषि मुनि करते आ रहे है।पिंडदान की यह परंपरा ऋग्वेद के दसवें मण्डल मे भी बताई गई है, इसलिए तुमने जो किया है वह अनादिकाल से प्रचलित है, अत: उचित है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पितृगणाय विद्महे जगत</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>धारिणी धीमहि तन्नो</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पित्रों प्रचोदयात।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">राजा भगीरथ ने सगर के साठ हजार पुत्रों का तर्पण गंगा मैया को धरा पर ला कर किया । पौराणिक कथा के अनुसार राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ किया। यज्ञ का घोड़ा गायब हो गया,तो उनके साठ हजार पुत्र उस घोड़े को खोजने निकले , वो घोड़ा उन्हें कपिल मुनि के आश्रम मे बंधा मिला। वे कपिल मुनि को ही दोषी मान कर मुनि को अपशब्द कहने लगे, जबकि उस घोड़े को इन्द्र देव ने छल से कपिल मुनि के आश्रम मे बांधा था। क्योंकि इन्द्र को सगर के अश्वमेध यज्ञ से भय था कि कही सगर का यज्ञ सफल हुआ तो उनका सिंहासन न छिन जाए। सगर स्वर्ग लोक न पहुंच जाये इसलिए उन्होने ये षड्यंत्र रचा था, किन्तु सगर के पुत्र इस षडय़ंत्र से अनभिज्ञ थे। अत: उन्होने मुनि को ही घोड़ा चुराने वाला समझ बैठे और उनके प्रति अनुचित व्यवहार करने लगे। अत्यधिक उत्पात मचाने पर कपिल मुनि का ध्यान भंग होने से उनकी आंखे खुली उनके तेज के प्रभाव से सगर के साठ हजार पुत्र जल कर भष्म हो गए । उन पुत्रों की आत्मा इस आकस्मिक मृत्यु से अतृप्त हो कर भटकती रही।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजा सगर के वंशज भगीरथ को जब अपने वंश के इस अप्रत्याशित दुखद घटना का भान हुआ और ज्ञात हुआ कि गंगा के जल को स्पर्श करने मात्र से ही इनकी आत्मा को शांति मिलेगी, ये तृप्त होंगे तो भागीरथ अपने पूर्वजों को तारने के लिए गंगा को धरती पर लाने का प्रण करते हैं। शिव का घनघोर तप करते हैं ,उनके तप से प्रसन्न हो कर शिव जी ने गंगा को धरा पर आवाहन किया। उनके तीव्र वेग से धरा को बचाने के लिए उन्हे अपने जटा में सम्हाला। पुन: भगीरथ के साथ धरती पर भेजा, धरा पर आते ही गंगा की पवित्रता से भस्मभूत हुये भगीरथ के वंशज तृप्त हुये और स्वर्ग को प्राप्त किए। भगीरथ के द्वारा गंगा को धरा पर लाने के कारण गंगा भागीरथी के नाम से जानी जाती हैं। अगर हम त्रेता और द्वापर की बात करे तो इस युग में भी अपने पूर्वजों के तर्पण की कथा मिलती है। जब श्री राम चौदह वर्ष का वनवास काट रहे थे, उसी बीच पिता के निधन की खबर मिलने पर एक पुत्र होने के नाते अपने कर्तव्य का पालन करते हैं और बिहार के गया मे फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ का पिंडदान और श्राद्ध करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बौद्ध गया मे फल्गु नदी को पितरों के श्राद्ध और पिंड दान के लिए विशेष पवित्र माना जाता है। वैसे वाल्मीकि रामायण के अनुसार, वनवास के समय श्री राम ने राजा दशरथ के लिए चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी के तट पर जल और पिंड अर्पित किया था, इसलिए चित्रकूट का मन्दाकिनी का घाट भी श्राद्ध के लिए विशेष महत्व रखता है। अलग- अलग ग्रंथो में अलग -अलग स्थान पर तर्पण और श्राद्ध के महत्व का पता चलता है। महाभारत काल मे जब कर्ण को स्वर्ग की प्राप्ति होती है तो उन्हें भोजन मे स्वर्ण आभूषण ही मिलता है क्योंकि धरती पर उन्होंने रुपया, पैसा, स्वर्ण आदि ही दान किया था, अन्न और जल का दान नहीं किया था। कर्ण ने बताया कि उन्हें अपने पूर्वजों के बारे में ज्ञात नहीं था, न ही श्राद्ध के बारे में। तब कर्ण के बहुत प्रार्थना करने पर यमराज ने उन्हें पुन: धरा पर 16 दिनों के लिए भेजा। धरती पर आकर कर्ण ने सोने, चाँदी, रत्नों के अतिरिक्त अन्न- जल आदि से अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं और खूब दान करते हैं। जिससे पुन: स्वर्ग में उन्हें वो सब कुछ मिला जो उन्होंने दान किया था। तब से ही ये श्राद्ध काल सोलह दिन का माना जाने लगा। इस कथा से हमे क्या सीखने को मिलता है कि हम धरती पर जो कुछ भी करेंगे उसका प्रतिफल हमे ईश्वर उसी रूप मे देता ह, इसलिए अपने जीवन की कुशलता को ध्यान मे रखते हुये धर्म पथ पर चलना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वेद,पुराण, पवित्र ग्रंथ इनकी कथा ही हम सनातनी के श्रेष्ठ जीवन का आधार है। इसके अनुसार पितृपक्ष मे श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए पवित्र नदियों के तट को सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों के अनुसार पवित्र नदियों मे स्नान कर उनके तट पर पितृ कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष मिलता है। पितृपक्ष मे बिहार के गया जी को प्रधान तीर्थ माना जाता है यहा पर फल्गु नदी के तट पर किए गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति मिलती है। वाराणसी, प्रयाग, हरिद्वार में गंगा, संगम के तट पर किया गया श्राद्ध पितर को मोक्ष देता है। हमारे मन मे अपनों के प्रति , दूसरों के प्रति, पशु- पक्षियों के प्रति प्रकृति के प्रति प्रेम समर्पण, श्रद्धा, सेवा, दान, सहायता के भाव हो, यही हमारा कर्तव्य है। सनातन धर्म है और ये हि भाव जीवन के पश्चात अपनों के लिए श्राद्ध है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हे पितृदेव ! अस्मान अनुगृहन्तु । अस्माकम दोषान क्षमन्तु अस्मान सुखी कुर्वंतु ।।</strong></p>
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		<title>आसमान की कमान से अयोध्या की जिम्मेदारी तक : वर्दी, वीरता और राष्ट्र सेवा की एक प्रेरक गाथा</title>
		<link>https://thesundayviews.com/from-commanding-the-skies-to-shouldering-the-responsibility-of-ayodhya-an-inspiring-saga-of-uniform-valour-and-service-to-the-nation-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 04:51:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शाश्वत तिवारी लखनऊ। बड़ा बनने के लिए बड़ी जगह से शुरुआत जरूरी नहीं। जरूरी है बड़ा सपना, कठोर अनुशासन और देश के लिए कुछ करने की जिद। और देश के&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/from-commanding-the-skies-to-shouldering-the-responsibility-of-ayodhya-an-inspiring-saga-of-uniform-valour-and-service-to-the-nation-the-sunday-views-hindi/">आसमान की कमान से अयोध्या की जिम्मेदारी तक : वर्दी, वीरता और राष्ट्र सेवा की एक प्रेरक गाथा</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2025/09/shashwat-tiwari-211x300.jpg" alt="" class="wp-image-10604" style="aspect-ratio:0.7025316455696202;width:111px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शाश्वत तिवारी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong> बड़ा बनने के लिए बड़ी जगह से शुरुआत जरूरी नहीं। जरूरी है बड़ा सपना, कठोर अनुशासन और देश के लिए कुछ करने की जिद। और देश के लिए इससे बड़ा प्रेरक संदेश और क्या हो सकता है कि, जिस व्यक्ति ने जीवन का पहला अध्याय भारत के आसमान की सुरक्षा में लिखा, वह जीवन का अगला अध्याय अयोध्या में श्रीराम की नगरी की सेवा में लिखने जा रहा है। यह केवल एक अधिकारी की नई नियुक्ति नहीं है। यह उस विचार की जीत है कि राष्ट्र सेवा का कोई रिटायरमेंट नहीं होता। कुछ यात्राएं केवल व्यक्ति की नहीं होतीं, एक विचार की यात्रा होती हैं, एक संकल्प की यात्रा होती हैं। ऐसी यात्रा, जिसमें पद आते- जाते रहते हैं, वर्दी बदल जाती है, जिम्मेदारियां बदलती हैं, लेकिन एक चीज कभी नहीं बदलती, राष्ट्र के प्रति समर्पण। एयर मार्शल, सेवानिवृत्त जितेंद्र मिश्रा की जीवन&#8211;यात्रा इसी भावना की कहानी है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="510" height="370" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/air-marshal.png" alt="" class="wp-image-26153" style="width:777px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/air-marshal.png 510w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/air-marshal-300x218.png 300w" sizes="auto, (max-width: 510px) 100vw, 510px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय वायुसेना में लगभग चार दशक तक सेवा,  फ़ाइटर पायलट से लेकर उच्चतम कमान तक का सफर, युद्ध जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की कमान और उसके बाद सेवानिवृत्ति के कुछ ही महीनों में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सीईओ के रूप में नई जिम्मेदारी, यह यात्रा अपने आप में असाधारण है। 2 सितंबर 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन्हें अपना पहला, सीईओ नियुक्त किया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ट्रस्ट अपने प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को और अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और पेशेवर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह संयोग मात्र नहीं लगता कि जिस व्यक्ति ने जीवन के लगभग चार दशक भारत की सीमाओं और आकाश की सुरक्षा में लगाए, अब वही व्यक्ति अयोध्या में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा। एक ओर भारत की भौगोलिक सीमाओं की सुरक्षा थी, दूसरी ओर भारत की सांस्कृतिक चेतना का सबसे बड़ा प्रतीक। यही कारण है कि जितेंद्र मिश्रा की कहानी केवल एक पूर्व सैन्य अधिकारी की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जहां राष्ट्रसेवा के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र के प्रति भावना एक ही रहती है। जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उनका प्रारंभिक जीवन किसी राजसी या विशेषाधिकार प्राप्त वातावरण में नहीं बीता। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उनका परिवार सामान्य मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से जुड़ा था और उनके पिता शिक्षक थे। यही वह पृष्ठभूमि है जो उनकी कहानी को और प्रेरणादायक बनाती है। किसी छोटे शहर या सामान्य परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थाओं में स्थान बनाना अपने आप में उपलब्धि है। लेकिन मिश्रा की कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, पुणे से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद भारतीय वायुसेना की फ़ाइटर स्ट्रीम में उनका कमीशन हुआ। 6 दिसंबर 1986 को वे भारतीय वायुसेना में&nbsp;फ़ाइटर पायलट के रूप में शामिल हुए। उस दिन शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह युवा अधिकारी आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान का नेतृत्व करेगा और फिर युद्ध सेवा के लिए देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक से सम्मानित होगा। लेकिन इतिहास उन्हीं लोगों को याद रखता है जो अवसर मिलने पर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी आने पर अपने आपको साबित करते हैं। लड़ाकू विमान उड़ाना केवल तकनीकी दक्षता का काम नहीं है। आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर कुछ सेकंड का निर्णय जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकता है। वहां डर के लिए कोई जगह नहीं होती। वहां निर्णय लेना होता है, तेज, सटीक और जिम्मेदारी के साथ। जितेंद्र मिश्रा ने अपने सैन्य जीवन में 3,000 से अधिक घंटे की उड़ान भरी और 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान का अनुभव हासिल किया। वे फ़ाइटर कॉम्बेट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट होना अपने आप में अत्यंत चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे पायलटों को केवल विमान उड़ाना नहीं होता, बल्कि विमान और उसकी प्रणालियों को कठिन परिस्थितियों में परखना होता है। इस अनुभव ने उन्हें केवल एक बेहतर पायलट नहीं बनाया, बल्कि एक ऐसा अधिकारी बनाया जो तकनीक, रणनीति, जोखिम और निर्णय, चारों को एक साथ समझता था। उन्होंने फ़ाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफि सर के रूप में काम किया। अग्रिम वायुसेना अड्डों की कमान संभाली। एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ए.एस.टी.ई.)में चीफ टेस्ट पायलट और बाद में कमांडेंट की जिम्मेदारी भी निभाई। इसके बाद उनके अनुभव का दायरा और व्यापक हुआ। एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट सहित महत्वपूर्ण रणनीतिक जिम्मेदारियां, असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ , प्रोजेक्ट्स और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में वरिष्ठ दायित्वों ने उनके सैन्य नेतृत्व को और मजबूत किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। सैन्य नेतृत्व केवल युद्ध लडऩे की क्षमता का नाम नहीं है। यह योजना बनाने, संसाधनों का सही उपयोग करने, लोगों को साथ लेकर चलने, जोखिम का आकलन करने और सही समय पर सही निर्णय लेने की कला है। जितेंद्र मिश्रा के लंबे सैन्य जीवन में इन सभी गुणों का विकास हुआ। 1 जनवरी 2025 को जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना की अत्यंत महत्वपूर्ण वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ का पद संभाला। इसी भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान का महत्व केवल संगठनात्मक नहीं है। यह भारत के पश्चिमी क्षेत्र की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई रणनीतिक कमान है। ऐसे पद पर बैठे अधिकारी को केवल विमान और हथियारों की जानकारी नहीं होनी चाहिए। उसे बदलती हुई परिस्थितियों, दुश्मन की रणनीति, तकनीकी क्षमताओं, खुफि या सूचनाओं और अपने सैनिकों की क्षमता, सभी का आकलन करना होता है। और फिर आया वह समय जिसने उनके सैन्य जीवन को इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय से जोड़ दिया ऑपरेशन सिंदूर। मई 2025 में भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से निर्णायक सैन्य कार्रवाई की। उस समय पश्चिमी वायु कमान की कमान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के हाथों में थी। युद्ध या सैन्य अभियान में किसी कमांडर की भूमिका केवल सामने से दिखाई देने वाली कार्रवाई तक सीमित नहीं होती। उसके पीछे महीनों और वर्षों की तैयारी, रणनीतिक योजना, प्रशिक्षण, संसाधनों का प्रबंधन और विभिन्न इकाइयों के बीच ताल-मेल होता है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सैन्य क्षमता और आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी सामने रखा। ऐसे संवेदनशील समय में पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी थी। जितेंद्र मिश्रा को उनके योगदान के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक, सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक, एवीएसएम और विशिष्ट सेवा पदक , वीएसएम भी प्राप्त हुए हैं। इन सम्मानों को केवल पुरस्कार समझना भूल होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक सैनिक के सीने पर लगा पदक उसके व्यक्तिगत गौरव से कहीं अधिक होता है। वह उसके पीछे खड़े हजारों सैनिकों, परिवारों, प्रशिक्षकों और सहकर्मियों की मेहनत का भी प्रतीक होता है। पदक धातु का होता है, लेकिन उसके पीछे की कहानी खून, पसीने, अनुशासन और त्याग से लिखी जाती है। 30 अप्रैल 2026 को एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। सामान्य अर्थों में यह उनके सैन्य जीवन का अंत था। लेकिन क्या राष्ट्रसेवा की कोई सेवानिवृत्ति होती है? शायद नहीं, और जितेंद्र मिश्रा की अगली जिम्मेदारी ने इस बात को प्रमाणित कर दिया। सेवानिवृत्ति के कुछ ही महीनों बाद उन्हें एक ऐसी संस्था की जिम्मेदारी मिली जिसका संबंध भारत की आस्था, संस्कृतिए इतिहास और करोड़ों लोगों की भावनाओं से है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले यह बदलाव देखने में जितना बड़ा है, भीतर से उतना ही स्वाभाविक भी लगता है। वायुसेना में उनका काम था, देश की सुरक्षा, संगठन का संचालन, संसाधनों का प्रबंधन और कठिन परिस्थितियों में निर्णय। अब अयोध्या में जिम्मेदारी होगी, प्रशासन, व्यवस्था, संचालन, पारदर्शिता, संसाधन प्रबंधन और करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने की। क्षेत्र अलग है, परंतु प्रबंधन, अनुशासन और जवाबदेही के सिद्धांत वही हैं। यही कारण है कि ट्रस्ट ने इतने बड़े पद के लिए सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को चुना। रिपोर्टों के अनुसार सीईओ के चयन के लिए 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। कई चरणों की छंटनी और साक्षात्कार के बाद तीन नामों का पैनल बनाया गया और अंतत: जितेंद्र मिश्रा का चयन हुआ। यह तथ्य बताता है कि उनका चयन केवल औपचारिकता नहीं था। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि, नेतृत्व क्षमता और संस्थागत प्रबंधन का अनुभव इस चयन में महत्वपूर्ण माना गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भारतीय इतिहास की एक असाधारण घटना है। यह करोड़ों भारतीयों के लिए केवल धार्मिक स्थल नहीं है। यह आस्था, संस्कृति और सदियों पुरानी ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा विषय है। इसलिए मंदिर की व्यवस्था भी सामान्य संस्थान जैसी नहीं हो सकती। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में मंदिर प्रशासन को विश्व स्तरीय प्रबंधन, डिजिटल व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता, भीड़ नियंत्रण, वित्तीय पारदर्शिता, श्रद्धालु सुविधा और दीर्घकालीन योजनाएं, सभी मोर्चों पर काम करना होगा, और यहीं एक पूर्व सैन्य कमांडर का अनुभव उपयोगी हो सकता है। सेना में एक बड़ी व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए जिस प्रकार एसओपी, एसीसी अकाउंटेबिलिटी, कमांड स्ट्रक्चर और मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार बड़े धार्मिक- सांस्कृतिक संस्थान को भी व्यवस्थित प्रशासन की आवश्यकता होती है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन आस्था की सेवा के लिए व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट हाल के महीनों में दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी विवादित घटनाओं के कारण जांच और सार्वजनिक स्क्रूटिनी के दौर से गुजरा है। रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में गिरफ्तारियां हुईं और ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए। ऐसी स्थिति में सीईओ की भूमिका केवल कार्यालय चलाने तक सीमित नहीं होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सबसे बड़ी चुनौती होगी, विश्वास को और मजबूत करना। रामभक्तों द्वारा दिया गया प्रत्येक रुपया केवल धन नहीं है। उसके साथ उनकी आस्था जुड़ी है। किसी गरीब परिवार का छोटा सा योगदान हो या किसी उद्योगपति का बड़ा दान, दोनों में भावनात्मक मूल्य है। इसलिए मंदिर की आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता, ऑडिट, डिजिटल ट्रैकिंग, जवाबदेही और स्पष्ट प्रक्रियाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होंगी। यही वह क्षेत्र है जहां सैन्य अनुशासन की कार्य संस्कृति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सेना में जिम्मेदारी व्यक्तिगत होती है। आदेश की जवाबदेही तय होती है। प्रक्रिया का पालन होता है। रिकॉर्ड रखा जाता है और गलती की स्थिति में उत्तरदायित्व तय किया जाता है। यदि यही सोच मंदिर प्रशासन में प्रभावी रूप से लागू होती है तो इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो सकता है। जितेंद्र मिश्रा लगभग चार दशक तक ऐसी व्यवस्था का हिस्सा रहे जहां समय की कीमत होती है, आदेश की स्पष्टता होती है और गलती की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है। अब वही अनुभव अयोध्या में एक अलग रूप में सामने आएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय संस्कृति में श्रीराम केवल पूजा के पात्र नहीं हैं। वे मर्यादा, कर्तव्य, नेतृत्व, त्याग और न्याय के प्रतीक हैं। रामराज्य की कल्पना में सबसे महत्वपूर्ण बात केवल समृद्धि नहीं थी, बल्कि न्यायपूर्ण और उत्तरदायी शासन था। यही कारण है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का प्रशासन भी केवल धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सेवा और सुशासन का उदाहरण बनना चाहिए। यदि मंदिर आने वाला श्रद्धालु यह महसूस करे कि उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार हुआ, व्यवस्था पारदर्शी है, दान का सदुपयोग हो रहा है, स्वच्छता उत्कृष्ट है, सुरक्षा मजबूत है, दर्शन व्यवस्था सुचारु है, और प्रशासन जवाबदेह है, तो यही श्रीराम की मर्यादा के अनुरूप सबसे बड़ी सेवा होगी। जितेंद्र मिश्रा की कहानी का सबसे प्रेरक पक्ष यह है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह भारत के युवाओं को एक संदेश देती है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। एक फ ाइटर पायलट बनने के लिए प्रशिक्षण चाहिए। कमांडर बनने के लिए अनुभव चाहिए। युद्ध के समय नेतृत्व करने के लिए साहस चाहिए। सेवानिवृत्ति के बाद भी नई जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए सेवा की भावना चाहिए। लेकिन किसी भी सैनिक के लिए सबसे बड़ा सम्मान उसका पदक नहीं, बल्कि यह विश्वास होता है कि देश ने उसे जिम्मेदारी के योग्य समझा। और जितेंद्र मिश्रा को बार-बार बड़ी जिम्मेदारियां मिलना इस बात का संकेत है कि उन्होंने अपने लंबे करियर में नेतृत्व और सेवा का विश्वास अर्जित किया। अब वही विश्वास अयोध्या में उनके सामने सबसे बड़ी पूंजी होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को केवल इस दृष्टि से देखना कि एक पूर्व एयर मार्शल को राम मंदिर का सीईओ बनाया गया है, विषय को छोटा कर देना होगा। असल सवाल यह है कि क्या हम भारत के बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों को आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से चला सकते हैं? क्या आस्था और आधुनिक प्रबंधन साथ- साथ चल सकते हैं? क्या धार्मिक संस्थानों में भी सर्वोत्तम प्रशासनिक मानकों को लागू किया जा सकता है? क्या श्रद्धालुओं के विश्वास को संस्थागत पारदर्शिता में बदला जा सकता है? इन सवालों का उत्तर आने वाले समय में अयोध्या दे सकती है, और इस प्रयोग के केंद्र में होंगे, एयर मार्शल, सेवानिवृत्त जितेंद्र मिश्रा। भारतीय समाज में अक्सर सेवानिवृत्ति को जीवन के एक अध्याय का अंत माना जाता है। लेकिन सैनिक के लिए शायद ऐसा नहीं होता। उसकी वर्दी उतर सकती है। उसका पद समाप्त हो सकता है। उसका कार्यालय बदल सकता है। लेकिन उसके भीतर बैठा राष्ट्रसेवक कभी रिटायर नहीं होता। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा इसका जीवंत उदाहरण हैं।</p>
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		<title>उत्तराखंड में सियासी संग्राम तेज, ताजा सर्वे ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, धामी के कामों पर BJP का दांव !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 07:47:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रतीक पाठक देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव का रण अभी औपचारिक तौर पर शुरू नहीं हुआ है, लेकिन सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। बीजेपी जहां संगठन&#8230; </p>
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<pre class="wp-block-preformatted"><strong><img loading="lazy" decoding="async" width="105" height="112" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/08/prateek-pathak-dehradoon-281x300.png" alt=""><br><br>  प्रतीक पाठक</strong></pre>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देहरादून।</strong> उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव का रण अभी औपचारिक तौर पर शुरू नहीं हुआ है, लेकिन सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। बीजेपी जहां संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दों को धार देने और अपने संगठन को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में लगी है। बीजेपी ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे और सरकार के कामकाज को अपना बड़ा चुनावी हथियार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालिया राजनीतिक गतिविधियों में बीजेपी लगातार धामी के नेतृत्व में तीसरी बार सत्ता में आने का लक्ष्य दोहरा रही है। धामी सरकार के पास जनता के सामने रखने के लिए कई बड़े फैसले हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="905" height="527" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/dhami-cm.png" alt="" class="wp-image-26150" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/dhami-cm.png 905w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/dhami-cm-300x175.png 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/dhami-cm-768x447.png 768w" sizes="auto, (max-width: 905px) 100vw, 905px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। नकल विरोधी कानून को सख्त किया गया, धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हुआ और सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया। सरकार 34 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति देने का दावा भी कर रही है। इसके अलावा सरकार निवेश, पर्यटन और कनेक्टिविटी को भी अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्तावों में से एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने का दावा किया गया है। चारधाम यात्रा, पर्यटन ढांचे, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों के जरिए रोजगार और स्वरोजगार बढ़ाने की कोशिशों को भी बीजेपी चुनावी मुद्दा बना सकती है।&nbsp;दूसरी तरफ कांग्रेस के पास भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें वह चुनावी मैदान में जोर-शोर से उठा सकती है। रोजगार, महंगाई, पलायन, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, स्थानीय युवाओं के अवसर और जमीन से जुड़े सवाल कांग्रेस के प्रमुख हथियार बन सकते हैं। कांग्रेस ने भी 2027 के लिए अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं और राष्ट्रीय नेताओं के कार्यक्रमों की तैयारी शुरू कर दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इन सीटों पर दिख सकती है कांटे की टक्कर</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर 2027 के चुनाव में कुछ सीटों को शुरुआती दौर की हाई-वोल्टेज सीट माना जाए तो खटीमा सबसे महत्वपूर्ण नामों में शामिल है। यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2022 में कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी से चुनाव हार चुके हैं और मौजूदा विधायक भी कापड़ी ही हैं। इसलिए यह सीट 2027 में भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकती है। हरिद्वार ग्रामीण में भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। मौजूदा विधायक कांग्रेस की अनुपमा रावत हैं। वहीं मंगलौर में भी समीकरण बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां पिछले चुनाव और उपचुनाव दोनों ने मुकाबले की संवेदनशीलता दिखा दी है। हल्द्वानी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण सीट है, जहां सुमित हृदयेश मौजूदा विधायक हैं। इसके अलावा बाजपुर, किच्छा, जसपुर, ज्वालापुर, झबरेड़ा, द्वाराहाट और श्रीनगर जैसी सीटों पर भी स्थानीय समीकरण, उम्मीदवार और एंटी-इंकंबेंसी मुकाबले की दिशा बदल सकते हैं। खास बात यह है कि 2027 में मुकाबला सिर्फ पार्टी बनाम पार्टी नहीं होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कई सीटों पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय मुद्दे, जातीय-सामाजिक समीकरण और संगठन की ताकत निर्णायक भूमिका निभा सकती है। सर्वे ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता इसी बीच एक निजी चैनल के ताजा सर्वे ने कांग्रेस की चिंता जरूर बढ़ा दी है। सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव होते हैं तो 70 विधानसभा सीटों में बीजेपी को 56 सीटें , जबकि कांग्रेस को महज 14 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। हालांकि सर्वे को अंतिम चुनावी नतीजे का पैमाना नहीं माना जा सकता। चुनाव अभी बाकी है और उत्तराखंड में आखिरी समय तक समीकरण बदलते रहे हैं। लेकिन अगर इन आंकड़ों को मौजूदा राजनीतिक माहौल के संकेत के तौर पर देखें तो कांग्रेस के सामने चुनौती बड़ी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब असली सवाल यही है, क्या धामी सरकार के काम, बीजेपी का मजबूत संगठन और मोदी फैक्टर मिलकर २०२७ में बीजेपी को लगातार तीसरी जीत दिलाएंगे ? या कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, एंटी-इंकंबेंसी और अपने पुराने जनाधार के सहारे सत्ता में वापसी की कहानी लिख पाएगी ? उत्तराखंड की 70 सीटों का चुनावी रण अब धीरे-धीरे इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है।</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश में सनातन और विकास की गूंज&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 07:31:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अब श्री कृष्ण की जन्मभूमि की मुक्ति का समय आ गया है&#8230; संजय श्रीवास्तव लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सभी राजनैतिक दलों ने अपना&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/the-resonance-of-sanatan-and-development-in-uttar-pradesh-the-sunday-views-hindi/">उत्तर प्रदेश में सनातन और विकास की गूंज&#8230;</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब श्री कृष्ण की जन्मभूमि की मुक्ति का समय आ गया है&#8230; <br><br></strong></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="194" height="300" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/sanjay-main.jpg" alt="" class="wp-image-26141" style="width:97px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संजय श्रीवास्तव <br><br>लखनऊ</strong>। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सभी  राजनैतिक दलों ने अपना गुणा-भाग करके उसके  आधार पर पिच बनानी आरम्भ कर दी है। भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने अपना कार्यभर संभाल लिया है और अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए हैं। भाजपा ने 2027 के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा। कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए। अभी तक जो राजनैतिक अनुमान सामने आए हैं उसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की बढ़त  स्पष्ट रूप से  दिखाई पड़ रही है। उधर सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस के मध्य सीटों के तालमेल पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है जिसके कारण इंडी गठबंधन के कार्यकर्ताओं में भ्रम व असमंजस की स्थिति बनी हुई है। <br><br></p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="566" height="396" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/yyi53.jpg" alt="" class="wp-image-26142" style="width:729px;height:auto" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/yyi53.jpg 566w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/yyi53-300x210.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 566px) 100vw, 566px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br>चुनावी तैयारी करते हुए  सपा ने कार्यकर्ताओं की ड्रेस का रंग भी बदल डाला है।  भाजपा  के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने अपना कार्यभर संभाल लिया है और अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए हैं। भाजपा ने 2027 के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा। कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए। सभी जातियों को साधने का मंत्र दिया गया है। संख्या चाहे कम हो या ज्यादा लेकिन कोई जाति अछूती न रहे। हमें सबको जोडऩा होगा। भाजपा ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व व उनके चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पाती के माध्यम से, मंच से तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी जनता के साथ संवाद बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी का जनता दरबार तो नियमित है ही। वह अयोध्या, मथुरा, काशी की भूमि से सनातन का संदेश भी दे रहे हैं। योगी स्वयं बाढ़ प्रभारवित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और पीडि़तों से मिल रहे हैं।  <br><br> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा का दो दिवसीय दौरा कर स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर का निर्माण पूर्णता की ओर अग्रसर है और अब श्रीकृष्ण की जन्मभूमि की मुक्ति का समय आ गया है। मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ ने इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी के माध्यम से अवध से  लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक समस्त क्षेत्र को सनातन के रंग में रंग दिया और अपने मतदाता को बता दिया कि अब अगला चरण श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का ही है। मथुरा में मुख्यमंत्री योगी ने दो दिन बिताए।  परियोजनाओं  का लोकार्पण व शिलान्यास करते हुए सपा सरकार के काले कारनामों को उजागर किया और समा बांध दिया। अपने भाषण में योगी ने कहा कि प्रदेश में 2017 के पूर्व उत्सव नहीं उपद्रव होता था। पूर्व की सरकार दंगाइयों को सम्मान देती थी। अब दंगामुक्त प्रदेश में भारी संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु आ रहे हैं। <br><br><br>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सनातन की आभा निरंतर बढ़ रही है।आज काशी विश्वनाथ धाम भव्यता ओैर आधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जा रहा है। अयोध्या में बाबर ने 128 में श्रीराम जन्मभूमि  पर भव्य मंदिर को तोड़कर गुलामी का ढांचा बनवा दिया लेकिन इससे रामनवमी, पंचकोसी, 14 कोसी और 84 कोसी परिक्रमा सावन का झूला मेला नहीं रुका। सनातन की आभा निंरतर बढ़ती रही और संघर्षों का जज्बा पैदा करती रही। इसी का परिणाम है कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दिव्य व भव्य मंदिर बन गया है।   मुख्यमंत्री मथुरा में दो दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाने के बाद लखनऊ में रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रम में शामिल हुए और फिर उन्होंने गोरखपुर में भी जन्माष्टमी समारोह मे भाग लेकर हिंदू समाज को स्पष्ट संकेत दिया कि भाजपा की योजना इस बार मंडल  व कमंडल दोनों को अपने में समाहित कर लेने की है।<br><br> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जहां सनातन की आभा बढ़ रही है वहीँ विकास की गूंज भी लगातार सुनाई दे रही है। भाजपा सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से उन सभी वर्गो को खुश करने का प्रयास कर रही है जो उसके वोट प्रतिशत को बढ़ाने में सहायक है। प्रदेश के शिक्षकों के लिए सुविधाओं की घोषणा, 60 वर्ष की ऊपर की महिलाओं को नि:शुल्क बस यात्रा की सुविधा  तथा समाजिक पेंशन में वृद्धि के बाद अब आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों तथा सेविकाओं  का मानदेय भी बढ़ाने की घोषणा कर दी गई है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय 8 हजार से बढाकर 12 हजार कर दिया गया हैजबकि  सहायिका का मानदेय 6 हजार की जगह 8 हजार कर दिया गया है। इसके अलावा 5 लाख तक का कैशलेस इलाज, स्मार्टफेान तथा साडिय़ों की संख्या भी बढ़ा दी गई है।   अयोध्या में हुए कार्यक्रम  में मुख्यमंत्री योगी ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज से 9 वर्ष पूर्व आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हालात में थे और बच्चे खुद टाट पट्टी लेकर पढऩे के लिए आते थे, आंगनबाड़ी केंद्र अस्त व्यस्त रहते थे, समय से पोषाहार नहीं मिलता  था । इस  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं  तथा  सेविकाओं को सम्मानित भी किया। योगी ने यहां पर भी सनातन को जोड़ लिया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  और सेविकाओं की तुलना माता यशोदा से करी। उन्होंने कहाकि सपा व कांग्रेस इस बात से हैरान है कि रैन बसेरा निषादराज के नाम से कैसे बन गया? यहां के भोजनालय शबरी माता के नाम से कैसे बन गए? अयोध्या धाम में रामलला विराजमान होने को लेकर पूरी दुनिया में  उत्साह है किंतु सपा और कांग्रेसी खेमे में वीरानी छाई हुई है। वे भौंचक हैं कि अयोध्या धाम में रामलला का मंदिर कैसे बन गया। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि अयोध्या में रेलवे स्टेशन का विकास कैसे हो गया तथा सड़केन  कैसे चौड़ी हो गयीं। महर्षि वाल्मीकि के नाम पर इतना बड़ा इंटरनेशनल एसरपोर्ट कैसे बन गया?  आगामी विधनसभा चुनावों के लिए भाजपा ने कमर कस ली है और वह हर वर्ग व जाति को साधते हुए सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रही है इसके इतर समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन सीटों के तालमेल पर ही अटका है। </p>
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		<title>सहसपुर में 2027 की सियासी जंग: पुंडीर के सामने आर्येंद्र और अब हरक सिंह रावत की एंट्री से बढ़ा ट्विस्ट !</title>
		<link>https://thesundayviews.com/the-2027-political-battle-in-sahaspur-aryendra-faces-pundir-and-now-the-entry-of-harak-singh-rawat-adds-a-new-twist-the-sunday-views-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 07:16:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[Big news]]></category>
		<category><![CDATA[The 2027 political battle in Sahaspur: Aryendra faces Pundir]]></category>
		<category><![CDATA[Uttrakhand Congress Party]]></category>
		<category><![CDATA[Uttrakhand Government]]></category>
		<category><![CDATA[uttrakhand poliotix]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160;मैथिली आनंद देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में अगर इस वक्त किसी विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा हैं, तो उनमें देहरादून की सहसपुर विधानसभा सीट का नाम सबसे ऊपर दिखाई&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/maithli-nanand-main-186x300.jpg" alt="" class="wp-image-12812" style="aspect-ratio:0.6209150326797386;width:95px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;मैथिली आनंद</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>देहरादून।</strong> उत्तराखंड की सियासत में अगर इस वक्त किसी विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा हैं, तो उनमें देहरादून की सहसपुर विधानसभा सीट का नाम सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है। एक तरफ लगातार तीन चुनाव जीत चुके भाजपा विधायक सहदेव सिंह पुंडीर हैं, जो एक बार फि र चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ , कांग्रेस के आर्येंद्र शर्मा जो पहले से ही अपनी दावेदारी और चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रिय हैं। लेकिन अब कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट सामने आता दिखाई दे रहा है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत का नाम सहसपुर से जुडऩे लगा है। हरक सिंह रावत ने सहसपुर में चुनाव लडऩे को लेकर संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि पार्टी हाईकमान जिस सीट से चुनाव लडऩे के लिए कहेगा, वह वहां से चुनाव लडऩे को तैयार हैं।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/uttra-1024x583.jpg" alt="" class="wp-image-12813" style="aspect-ratio:1.7582417582417582;width:640px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">सहसपुर का नाम भी उनके विकल्पों में सामने आया है। हाल के दिनों में सहसपुर में उनके समर्थन में नारेबाजी की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि अभी कांग्रेस ने सहसपुर से किसी उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। यानी कांग्रेस के भीतर अभी से एक सवाल खड़ा हो गया है कि सहसपुर में चेहरा कौन होगा? आर्येंद्र शर्मा, जो 2022 में सहदेव पुंडीर के सामने कांग्रेस के उम्मीदवार थे और 55,653 वोट हासिल कर चुके हैं, या फि र उत्तराखंड की राजनीति के पुराने और चर्चित चेहरे हरक सिंह रावत? 2022 का चुनाव देखें तो सहदेव पुंडीर ने 64,008 वोट हासिल करके आर्येंद्र शर्मा को 8,355 वोटों से हराया था। यानी कांग्रेस ने इस सीट पर भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। अब 2027 से पहले समीकरण इसलिए भी दिलचस्प हैं क्योंकि भाजपा के सामने भी सिर्फ विपक्ष की चुनौती नहीं है। पार्टी के भीतर टिकट को लेकर कई नामों की चर्चा चल रही है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या भाजपा लगातार तीन बार जीत चुके सहदेव पुंडीर पर ही भरोसा जताएगी या सहसपुर में किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा। और कांग्रेस की तस्वीर इससे भी ज्यादा दिलचस्प है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक तरफ आर्येंद्र शर्मा अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, दूसरी तरफ हरक सिंह रावत जैसे अनुभवी नेता का नाम सहसपुर से जुड़ रहा है। हरक सिंह रावत का राजनीतिक सफर भी इस पूरे समीकरण को खास बनाता है। वे लंबे समय तक कोटद्वार की राजनीति से जुड़े रहे हैं। अब अगर कांग्रेस उन्हें सहसपुर से मैदान में उतारने का फैसला करती है, तो यह सिर्फ उम्मीदवार बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाएगा। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल भी है कि क्या सहसपुर में कांग्रेस अपने पुराने चेहरे पर भरोसा करेगी या अनुभवी हरक सिंह रावत के नाम के साथ नया प्रयोग करेगी? और दूसरी तरफ भाजपा के सामने भी सवाल होगा कि क्या सहदेव पुंडीर को चौथी बार मौका मिलेगा या पार्टी सहसपुर में नया चेहरा उतारकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश करेगी ? स</p>



<p class="wp-block-paragraph">हसपुर में पिछले चार विधानसभा चुनावों में भाजपा लगातार जीतती रही है। 2012, 2017 और 2022 में सहदेव पुंडीर ने लगातार जीत दर्ज की, जबकि 2007 में भाजपा के राजकुमार ने यह सीट जीती थी। यानी 2027 में कांग्रेस के सामने सिर्फ भाजपा को चुनौती देने का सवाल नहीं है, बल्कि सही उम्मीदवार चुनने का सवाल भी उतना ही बड़ा है। फि लहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। टिकट घोषित नहीं हुए हैं, उम्मीदवार तय नहीं हुए हैं और चुनाव में अभी वक्त बाकी है। लेकिन इतना जरूर है कि सहसपुर में सियासी बिसात बिछ चुकी है। एक तरफ सहदेव पुंडीर का अनुभव और लगातार जीत का रिकॉर्ड तो दूसरी तरफ आर्येंद्र शर्मा की दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी और अब तीसरी तरफ हरक सिंह रावत के नाम की गूंज।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे में 2027 का सहसपुर सिर्फ एक विधानसभा चुनाव नहीं, बल्कि टिकट से लेकर चेहरे तक और रणनीति से लेकर समीकरण तक कई सवालों का चुनाव बनता दिखाई दे रहा है। अब देखना यही होगा कि आने वाले महीनों में सहसपुर की इस सियासी शतरंज में कौन सा मोहरा कहां चलता है और किस चेहरे पर पार्टी अपना भरोसा जताती है।</p>
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		<title>रेलवे के &#8216;डिप्टी टीम लीडर&#8217; का लेटर बम : चीफ इंजीनियर मेहनतकश &#8216;सवर्ण&#8217; अफसरों को निकाल, &#8216;कास्ट&#8217; देख कर रहें भर्ती</title>
		<link>https://thesundayviews.com/railway-deputy-team-leader-amit-shuklas-letter-bomb-chief-engineer-removing-hardworking-upper-caste-officers-and-recruiting-based-on-caste-the-sunday-views-hindi/</link>
					<comments>https://thesundayviews.com/railway-deputy-team-leader-amit-shuklas-letter-bomb-chief-engineer-removing-hardworking-upper-caste-officers-and-recruiting-based-on-caste-the-sunday-views-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 07:46:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल स्रोरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री की सोच को &#8216;ध्वस्त&#8217; कर रहें रोड सेफ्टी प्रोजेक्टर के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर रोड एक्सीडेट रोकने के बना है रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट रेलवे&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://thesundayviews.com/railway-deputy-team-leader-amit-shuklas-letter-bomb-chief-engineer-removing-hardworking-upper-caste-officers-and-recruiting-based-on-caste-the-sunday-views-hindi/">रेलवे के &#8216;डिप्टी टीम लीडर&#8217; का लेटर बम : चीफ इंजीनियर मेहनतकश &#8216;सवर्ण&#8217; अफसरों को निकाल, &#8216;कास्ट&#8217; देख कर रहें भर्ती</a> appeared first on <a href="https://thesundayviews.com">The Sunday views</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रधानमंत्री की सोच को &#8216;ध्वस्त&#8217; कर रहें रोड सेफ्टी प्रोजेक्टर के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर रोड एक्सीडेट रोकने के बना है रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रेलवे में सभी रेलवे फाटक को बंद कर, उस पर फ्लाईओवर, अंडर बनाने का किया जा रहा काम</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/08/sanjay-main.jpg" alt="" style="aspect-ratio:0.6482758620689655;width:94px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संजय श्रीवास्तव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊ।</strong>&nbsp; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच है कि देश का हर नागरिक सुरक्षिात यात्रा करे,चाहें सड़क परिवहन हो या फिर रेलमार्ग से&#8230;। इसीलिये उन्होंने रेलवे में बने सभी रेलवे फाटक पर फ्लाई ओवर और अंडर पास बनाकर रेलवे फाटक को पूरी तरह से बंद करने के लिये एक नया विभाग (आर.एस.पी.) रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट बना डाला। प्रोजेक्ट पर काम तो तेल रफ्तार से शुरु किया गया लेकिन रेलवे के रोड सेफ्टी विभाग चीफ इंजीनियर प्रधानमंत्री की सोच को बेपटरी करने का काम कर रहे हैं। बता दूं कि रोड सेफ्टी विभाग के मैन पावर देने के लिये 2.28 करोड़ का काम गुडग़ांव की कंपनी एम-एस ब्लूम कंपनी को दिया गया है। इसी आउटसोर्सेज एजेंसी के माध्यम से डिप्टी टीम लीडर पद पर एक अधिकारी का चयन किया गया लेकिन एक वर्ष बाद काम न आने का बहाना कंपनी ने इन्हें निकाल दिया। इसी तरह कई अन्य अधिकारियों को भी निकाल दिया गया। &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; को भेजे गये गोपनीय पत्र में उक्त अधिकारी ने रोड सेफ्टी विभाग के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि वे सिर्फ अपने क्षेत्र (बिहार) और अपनी जाति के लोगों का ही बॅायोडाटा एप्रूव कर मैन पावर कंपनी एम.एम. ब्लूम को भेजते हैं। इसके अलावा चीफ इंजीनियर ने अपने एक रिश्तेदार को भी लखनऊ में तैनात करा रखा है और अपने खास गुर्गे को लखनऊ से दिल्ली अपने पास अटैच करा रखा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="690" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/modi-raju-1-1024x690.jpg" alt="" class="wp-image-26115" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/modi-raju-1-1024x690.jpg 1024w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/modi-raju-1-300x202.jpg 300w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/modi-raju-1-768x517.jpg 768w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/modi-raju-1.jpg 1507w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">आखिर&nbsp; निकाले गये अधिकारी ने किस आधार पर चीफ इंजीनियर पर इतना गंभीर आरोप जड़ा है ? इसमें रत्ती भर संदेह नहीं कि मामला गंभीर है और इस पर रेलवे बोर्ड को गंभीर रुख अख्तियार करना होगा, क्योंकि ये सिर्फ एक या कई सवर्ण अधिकारियों को रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट से निकालने की बात नहीं है&#8230;बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों पर कुठाराघात करने जैसा है। देखना है कि रेलवे बोर्ड के अफसर इस मामले को दबाते हैं या फिर प्रधानमंत्री के सपनों को ध्वस्त करने वालों पर कार्रवाई करते हैं। <strong>वैसे भी &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस पर चलने और भ्रस्टाचार के आकंठ में डूबे अधिकारियों के खिलाफ हल्ला बोल जारी रखता चला आ रहा है</strong>।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;द संडे व्यूज़&#8217; के पास भेजे गये पत्र में रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट से निकाले गये डिप्टी टीम लीडर ने आर.एस.पी के चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू पर गंभीर आरोप जड़े हैं।</strong> नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि वे सिविल इंजीनियर हैं और पिछले 20 वषों से सिविल इंजीनियरिंग पोस्ट पर काम करते चला आ रहा हूं। मैं डीएफसीसी,रेलवे और हाई वेज के अनगिनत प्रोजेक्ट पर कर चुका हूं और इस क्षेत्र में काफी अनुभव रखता हूं&#8230;। मेरे अनुभव के आधार पर ही मेरा चयन रेलवे का नया विभाग (आरएसपी) रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट में डिप्टी टीम लीडर के पद पर दिसंबर 2025 में हुआ। रेलवे का रोड सेफ्टी विभाग जिसका प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में है। रेलवे ने मैन पावर देने के लिये गुडग़ांव की कंपनी एम-एस ब्लूम कंपनी को 2.28 करोड़ का काम दे रखा है। इसी आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से रेलवे ने मेरा चयन डिप्टी टीम लीडर के पद पर किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर रेलवे में रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट नाम से नया विभाग इस सोच के साथ बनाया गया है कि सारे रेलवे फाटक को फ्लाई ओवर और अंडर पास बनाकर रेलवे फाटक को पूरी तरह से बंद कर दिया जाये ताकि यहां पर होने वाली दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लग सके। अब इसमें काम करने के लिये अधिकारियों की जरुरत थी इसलिये चीफ इंजीनियर आर.एस.पी आर.आर. राजू ने मैन पावर एजेंसी का ठेका जिस कंपनी को दिया है,उसका कार्यालय 7-10-ए, डालीबाग, लखनऊ में है। यहां पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का चयन श्री राजू की अनुमति से ही होता है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="627" height="299" src="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/fdfd.jpg" alt="" class="wp-image-26116" srcset="https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/fdfd.jpg 627w, https://thesundayviews.com/wp-content/uploads/2026/09/fdfd-300x143.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 627px) 100vw, 627px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आर.आर.राजू जो अपने क्षेत्र और अपनी जाति के लोगों का ही बॅायोडॉटा एप्रूव करते हैं और मैन पावर देने वाली एजेंसी को सिर्फ अपने आदमी को रखने का निर्देश देते हैं। मेरा काम बढिय़ा चल रहा था और मैन पावर देने वाली कंपनी को मेरे काम से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं रही। चूंकि मैं चीफ इंजीनियर श्री राजू के जाति और उनके प्रदेश का नहीं था इसलिये उन्होंने मुझे 2026 में झूठा आरोप लगाकर निकाल दिया और मेरी जगह पर अपनी बिरादरी के एल. बी. सिंह मौर्या को तैनात करा दिया है। अधिकारी ने बताया कि चीफ इंजीनियर श्री राजू ने अपने खास गुर्गा के.के.गुप्ता, एस.एस.ई,जो लखनऊ में तैैनात है,उसका अपने विभाग में स्थानांतरण करा लिया है। इसी तरह, उन्होंने अपने रिश्तेदार सुधांशु शेखर को डाटा इंट्री कम्प्यूटर के पद पर लखनऊ में करा रखा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि&nbsp; चीफ इंजीनियर पर यह भी आरोप लगाया कि ये भाई-भतीजावाद,जातिवाद और क्षेत्रवाद और भ्रष्टïाचाार की वजह से मुझे निकाला गया है। बिना नोटिस पीरियड के निकाले जाने की वजह से मैं और मेरा परिवार भुखमरी की कगार पर है। बहरहाल, उक्त अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट,नये विभाग रोड सेफ्टी में जिस तरह से चीफ इंजीनियर आर.आर.राजू की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाये हैं,उसमें क्या सच्चाई है,इसकी जांच रेल मंत्री को अवश्य करानी चाहिये। यदि इसमें सच्चाई है तो इस पर दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिये क्योंकि ये प्रधानमंत्री का ड्री प्रोजेक्ट है।</p>
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		<title>लिफ्ट खराब, 1 फ्लोर पर शौचालय बंद, कई दवाएं नदारद&#8230;काहें का लोकबंधु अस्पताल ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The Sunday Views]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 05:18:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[brijesh pathak health minister]]></category>
		<category><![CDATA[first-floor toilet closed]]></category>
		<category><![CDATA[lokbandhu hospitel]]></category>
		<category><![CDATA[mla sarojninager dr. rajeshwer singhLift out of order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना है तो साहेब चाय-पानी का खर्चा तो दे दो&#8230; &#160; &#160;नवीन यादव Lokbandhu Hospital news:राजधानी का लोकबंधु अस्पताल&#8230;। देश के नायक,स्वतंत्रता सेनानी&#8230; </p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना है तो साहेब चाय-पानी का खर्चा तो दे दो&#8230;</strong></p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/naveen-yadev-237x300.jpg" alt="" class="wp-image-12754" style="aspect-ratio:0.7876712328767124;width:115px;height:auto"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp; &nbsp;नवीन यादव</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Lokbandhu Hospital news:</strong>राजधानी का लोकबंधु अस्पताल&#8230;। देश के नायक,स्वतंत्रता सेनानी के नाम से बनाया गया अस्पताल डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से मरीजों के लिये परेशानियों का सबब बन चुका है। फस्ट फ्लोर पर शौचालय बंद है&#8230;। लिफ्ट खराब है&#8230;। कई दवाएं नदारद&#8230;मिलती है बाहरी मेडिकल स्टोर में&#8230;। मरीज को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराना हो तो देयो चाय-पानी खर्चा&#8230;। सीएमएस महोदय, काहें क्रान्तिकारी लोकबंधु राजनारायण जी का नाम बदनाम करा रहे हैं। <strong>आशियाना स्थित लोकबंधु अस्पताल में मरीजों को सही तरीके से दवाएं,इलाज मिल रहा है या नहीं,इसकी पड़ताल के लिये शनिवार को &#8216;द संडे व्यूज़&#8217; की टीम पहुंची</strong>। <strong>वहां मरीजों के परिजनों ने जो बताया उसे सुन-देख आप भी चौंक जायेंगे कि जिस अस्पताल को चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक और विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी सुविधाओं से लाभान्वित किया लेकिन उसके बाद भी अस्पताल में मरीजों को सही ढंग से इलाज नहीं मिल पा रहा है।</strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/99u-834x1024.jpg" alt="" class="wp-image-12760" style="aspect-ratio:0.8142493638676844;width:640px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">राजधानी के लोकबंधु अस्पताल में मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी होती है। वहीं, परिजनों के बैठने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था ना होने की शिकायत सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर चाय-पानी के नाम पर पैसे की मांग की जाती है । हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से उक्त शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जा रही है ,यह भी स्पष्ट नहीं है। मरीजों और परिजनों के बताया कि अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित शौचालय में ताला लगा रहता है,जिसकी वजह से हमलोगों को दूसरे फ्लोर पर जाना पड़ता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा अस्पताल की लिफ्ट भी खराब पड़ी है,जिसकी वजह से बुजुर्ग या गंभीर रुप से बीमारी कारण मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। इसी तरह, मरीजों को दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों ने बताया कि क्लोनाज़ेपम 0.5 एमजी, थायरोक्सिन और मिथाइलकोबालामिन जैसी कुछ दवाओं की मांग अधिक है, जबकि अस्पताल में इनकी उपलब्धता पर्याप्त नहीं होने की शिकायत है ।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="http://www.indiaexpressnews.com/wp-content/uploads/2026/09/994-1024x773.jpg" alt="" class="wp-image-12759" style="aspect-ratio:1.3250517598343685;width:640px;height:auto"/></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">अस्पताल में दवा ना मिलने की वजह बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के लिये आने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में अस्पताल की फ ार्मेसी में जरूरी दवाएं उपलब्ध न होने पर बाहर से दवाएं खरीदना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। मरीजों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था की जाए, बंद शौचालय को मरीजों के लिए खोला जा, खराब लिफ्ट को जल्द से जल्द चालू कराया जाए और जरूरत के अनुसार आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, यदि मरीजों को शिफ्ट करने के नाम पर किसी कर्मचारी द्वारा पैसे की मांग किए जाने की शिकायत सही पाई जाती है तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाये।</p>
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