Kgmu news : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। केजीएमयू में शुक्रवार को हुए हंगामे के बीच उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने ट्रॉमा सेंटर में बिना रजिस्ट्रेशन ब्लड बैंक चलने का दावा किया। इससे पहले पिछले महीने ही विधायक डॉ. आरके वर्मा और विधायक कमाल अख्तर ने भी केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की थी। इस पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को जवाब देना है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। केजीएमयू में शुक्रवार को हुए हंगामे के बीच उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने ट्रॉमा सेंटर में बिना रजिस्ट्रेशन ब्लड बैंक चलने का दावा किया। इससे पहले पिछले महीने ही विधायक डॉ. आरके वर्मा और विधायक कमाल अख्तर ने भी केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की थी। इस पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को जवाब देना है।
: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। केजीएमयू में शुक्रवार को हुए हंगामे के बीच उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने ट्रॉमा सेंटर में बिना रजिस्ट्रेशन ब्लड बैंक चलने का दावा किया। इससे पहले पिछले महीने ही विधायक डॉ. आरके वर्मा और विधायक कमाल अख्तर ने भी केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की थी। इस पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को जवाब देना है।
22 दिसंबर 2025 को जारी पत्र के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग को एक महीने का समय दिया गया है। राज्यसभा सांसद बृजलाल भी स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को बाकायदा पत्र लिखकर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में भ्रष्टाचार और मनमाने तरीके से खरीद-फरोख्त के लिए एचओडी डॉ. तूलिका चंद्रा को दोषी बताते हुए कार्रवाई की सिफारिश कर चुके हैं। हालांकि, केजीएमयू प्रशासन विभाग के भ्रष्टाचार पर मौन है।
हर महीने होता था 50 लाख का खेल
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में होने वाली खरीद फरोख्त के लिए केजीएमयू प्रशासन की तरफ से पिछले साल फरवरी में कमेटी बनी। कमेटी ने दस्तावेज की जांच और कीमतों का तुलनात्मक अध्ययन किया तो पता चला कि कई उपकरण और सामान काफी महंगी दर से खरीदे जा रहे थे। फरवरी 2025 के बाद खरीद की कीमतों पर लगाम लगी तो हर महीने 50 से 55 लाख रुपये तक की बचत होने लगी।
वीसी को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले विभाग की एचओडी प्रो. तूलिका चंद्रा ही थीं और उनकी निगरानी में ही खरीद होती थी। पर्चेज कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज का ब्लड ग्रुप पता करने के लिए होने वाली जांच (एबीडी पैड ब्लड ग्रुपिंग) महज पांच रुपये में हो सकती है, लेकिन इसके 85 रुपये वसूले जा रहे थे। थैलेसीमिया और ल्यूकीमिया से पीड़ित मरीजों की एक्सटेंडेड फेनोटाइप ब्लड ग्रुपिंग 63 रुपये के बजाय 165 रुपये में करवाई गई। मुफ्त में मिल सकने वाले डिस्ट्रिल्ड वॉटर की खरीद पर साल में 9.60 लाख रुपये खर्च किए गए। इतना ही नहीं, स्टोर में ब्लड बैग किट समेत कई उपकरण होने के बावजूद लाखों के नए उपकरण खरीदे गए।