बैंक फ्रॉड केस में राहत दिलाने के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत
अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले में विभागीय कार्रवाई की गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से 5 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद ED के लखनऊ जोनल कार्यालय में तैनात प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रिश्वत की रकम लेने में शामिल होने के आरोप में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को ED से कार्यमुक्त कर मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। अदालत में पेशी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

CBI की जांच के मुताबिक, रिश्वतखोरी का मामला बैंक फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत दिलाने और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर 5 लाख रुपये मांगने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के पिता को ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की ओर से अगस्त और सितंबर में लगातार दो समन भेजे गए थे। आरोप है कि इसके बाद प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार के इशारे पर हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी ने शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया। आरोप के मुताबिक, कार्रवाई से बचाने और केस से नाम हटवाने के बदले 5 लाख रुपये मांगे गए थे।शिकायत मिलने के बाद CBI की दिल्ली एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया। टीम ने दिल्ली में नकदी लेते हुए हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद मनोज ने लखनऊ फोन कर रकम मिलने की सूचना दी। इसी दौरान लखनऊ CBI की टीम ने हजरतगंज स्थित ED के जोनल कार्यालय में केबिन से प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसके बाद ED ने दीपक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं, CRPF के हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को ED से कार्यमुक्त कर उसके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया।इस मामले में दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई है।
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद CBI की टीमों ने उनके ठिकानों और आवासों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जांच एजेंसी ने बैंक फ्रॉड केस और संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। बरामद दस्तावेजों का फॉरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके।
CBI सूत्रों के मुताबिक, रिश्वतखोरी के इस मामले की जांच केवल दोनों आरोपियों तक सीमित नहीं है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय में तैनात कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच एजेंसी की पड़ताल के दायरे में है। जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड और जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। इनके आधार पर मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल, CBI इस पूरे मामले की जांच कर रही है।