अयोध्या की दिवाली : ‘देसी’ जड़ों से ‘मॉडर्न’ अंदाज़ तक


     नवीन यादव

अयोध्या। अयोध्या के दीपोत्सव -2026 में 30 लाख दीपों के साथ 2,100 ड्रोन शो,डिजिटल रामायण,3 डी प्रोजेक्शन और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोडऩे की तैयारी है। परंपरा और टेक्नोलॉजी के इस मेल में जेन-ज़ी की भागीदारी पर खास जोर है। अयोध्या का दीपोत्सव इस बार सिर्फ दीपों की संख्या, रोशनी और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने की तैयारी नहीं है। दीपोत्सव- 2026 की रूपरेखा में पहली बार युवाओं और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी को आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की तैयारी बताती है कि इस बार अयोध्या में परंपरा और टेक्नोलॉजी के बीच ऐसा मेल तैयार करने की कोशिश होगी जो नई पीढ़ी, खासकर जेन-जी को उत्सव से जोड़ सके। इसके लिए सोशल मीडिया से लेकर ड्रोन शो, 3 डी प्रोजेक्शन, लेजर शो, डिजिटल रामायण, सेल्फी प्वाइंट और युवाओं के सुझावों तक को आयोजन की योजना में जगह दी जा रही है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को (माई जीओवी)यूपी के माध्यम से आम लोगों से दीपोत्सव के लिए सुझाव मांगने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद केवल जनता से राय लेना नहीं बल्कि आयोजन में ऐसे नए विचारों को शामिल करना है, जो बदलती पीढ़ी की पसंद और भागीदारी से जुड़े हों। अधिकारियों से युवाओं को दीपोत्सव की तैयारियों में सक्रिय रूप से जोडऩे को कहा गया है ताकि उन्हें सांस्कृतिक परंपराओं का केवल दर्शक नहीं, बल्कि वाहक और संवाहक बनाया जा सके। इस बार लगभग 30 लाख दीप जलाने की योजना है। लेकिन दीपोत्सव का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि दृश्य भव्यता के साथ अनुभव को भी केंद्र में रखा जा रहा है। अयोध्या की सड़कें और सरयू तट रामायण आधारित सजावट से सजेंगे। रामायण के अलग- अलग कांडों पर आधारित सड़क किनारे इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे और उनके साथ सरल भाषा में एक लाइन में कहानी बताने की योजना है। इसका सीधा संबंध नई पीढ़ी के उस डिजिटल व्यवहार से है जिसमें लंबे विवरण की जगह छोटे, दृश्य और आसानी से समझ आने वाले कंटेंट को ज्यादा जगह मिलती है। ड्रोन, लेजर और 3 डी की दुनिया को अयोध्या के दीपोत्सव से जोडऩे की सबसे बड़ी कोशिश तकनीक के मोर्चे पर दिखाई देती है। इस बार 2,100 ड्रोन का शो प्रस्तावित है। खास बात यह है कि इसे सिर्फ दीपोत्सव के दिन कराने के बजाय दो दिन बाद होने वाले जमघट में भी आयोजित करने का प्रस्ताव है। यानी जो लोग पहले दिन इसे नहीं देख पाएंगे, उन्हें दोबारा अवसर मिल सकेगा। ड्रोन शो के जरिए आसमान को एक तरह की डिजिटल स्क्रीन में बदलने की कोशिश होगी जहां रामायण और अयोध्या से जुड़े दृश्य आधुनिक तकनीक के जरिए सामने आ सकते हैं। इसके साथ लाइव प्रस्तुतियों के साथ 3डी प्रोजेक्शन, लेजर शो और म्यूजिकल ग्रीन फ ायर वक्र्स भी प्रस्तावित हैं। ये सभी ऐसे माध्यम हैं, जिनका आकर्षण दृश्य अनुभव और डिजिटल संस्कृति से जुड़ी पीढ़ी के लिए अलग तरह का हो सकता है।

दीपोत्सव में पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन अपनी जगह रहेंगे लेकिन उनके समानांतर हाई- टेक विजुअल अनुभव भी तैयार किया जा रहा है। अयोध्या की सड़कों पर बनने वाले रामायण द्वार और इंस्टॉलेशन भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। धर्मपथ पर रामायण आधारित 10 प्रवेश द्वार बनाने का प्रस्ताव है। अयोध्या आने वाले प्रमुख मार्गों पर तीन अन्य रामायण द्वार बनाने की योजना है, जिनमें सुल्तानपुर और रायबरेली मार्ग भी शामिल हैं। सरयू में पुष्पक विमान के स्थाई स्वरूप वाले इंस्टॉलेशन का प्रस्ताव भी रखा गया है। ऐसे स्थाई और बड़े आकार के इंस्टॉलेशन अयोध्या आने वाले युवाओं के लिए फ ोटो और वीडियो कंटेंट का हिस्सा बन सकते हैं। सेल्फ ी प्वाइंट भी इसी सोच के साथ विकसित किए जाएंगे। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सेल्फ ी प्वाइंट इस तरह बनाए जाएं कि पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो। यानी फ ोटो और वीडियो के लिए जगह तो हो, लेकिन सार्वजनिक आवागमन बाधित न हो। यहां एक और बदलाव महत्वपूर्ण है। रामायण के अलग-अलग प्रसंगों को सिर्फ सजावट के रूप में दिखाने के बजाय उन्हें सरल भाषा में समझाने की तैयारी है। खासकर छोटे बच्चों के लिए एक लाइन में कहानी बताने का निर्देश दिया गया है। इससे रामायण के दृश्य केवल देखने की चीज नहीं रहेंगे बल्कि उनके पीछे की कहानी समझने का अवसर भी मिलेगा।

डिजिटल रामायण से श्रीराम की ‘वैश्विक यात्रा’ तक दीपोत्सव- 2026 में जेन-जी को जोडऩे की रणनीति केवल आयोजन स्थल तक सीमित नहीं है, संग्रहालय परिसर में डिजिटल रामायण, राम वन गमन मार्ग पर आधारित मूर्तियां, राम थीम वाला बाजार और पुस्तकों तथा चित्रों की प्रदर्शनी लगाने की योजना है। श्रीराम की वैश्विक यात्रा नाम से विशेष प्रस्तुति भी प्रस्तावित है। डिजिटल रामायण खास तौर पर नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण प्रयोग हो सकती है। जिस पीढ़ी की सांस्कृतिक समझ का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन, वीडियो और इंटरैक्टिव कंटेंट से बनता है, उसके सामने रामकथा को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत करने की कोशिश परंपरागत कथा और आधुनिक प्रस्तुति के बीच पुल बनाने की कोशिश है। दीपोत्सव में देश- विदेश की रामलीला मंडलियों को भी शामिल करने की तैयारी है। पारंपरिक लोकनृत्य और साकेत कॉलेज से रामकथा पार्क तक झांकियों की शोभायात्रा होगी। भरत मिलाप और भगवान राम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक को भी कार्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है। पिछले वर्ष 100 बच्चों की भागीदारी वाली वानर सेना को इस बार और विस्तारित करने की योजना है। यानी बच्चों और युवाओं को केवल दर्शक दीर्घा में रखने के बजाय उन्हें आयोजन की प्रस्तुति का हिस्सा बनाने पर भी जोर है। 2,100 से अधिक बटुकों द्वारा सामूहिक सरयू आरती, 240 से अधिक मंदिरों और मठों में दीप प्रज्ज्वलन तथा उद्योग एवं व्यापार संगठनों के सहयोग से 25 प्रमुख चौराहों की सजावट के जरिए आयोजन को पूरे शहर में फैलाने की योजना है। इससे दीपोत्सव का अनुभव केवल राम की पैड़ी या मुख्य आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप देने के लिए यूपी का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है।

अगर युवाओं के सुझावों को वास्तव में आयोजन की योजना में जगह मिलती है तो यह दीपोत्सव के लिए एक अलग तरह की भागीदारी का मॉडल बन सकता है। युवा अपनी पसंद के कार्यक्रम, डिजिटल अनुभव, इंस्टॉलेशन या सोशल मीडिया से जुड़े आइडिया सुझा सकते हैं। इस प्रक्रिया में अयोध्या का उत्सव केवल सरकार द्वारा तैयार कार्यक्रम न रहकर नागरिक भागीदारी वाले आयोजन का रूप लेने की कोशिश करेगा। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। विभिन्न देशों के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रियों या उनके प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की योजना है। 30 से अधिक देशों में भारतीय दूतावासों और राजदूतों के माध्यम से प्रवासी भारतीयों को दीपोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। श्रीराम की वैश्विक यात्रा जैसी प्रस्तुति के साथ इसका उद्देश्य अयोध्या की सांस्कृतिक कथा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का भी है। उत्सव से अनुभव तक दीपोत्सव की तैयारियों में आर्टिफि शियल इंटेलिजेंस एआई का इस्तेमाल भी प्रस्तावित है। दीप प्रज्ज्वलन की व्यवस्थाओं, स्वयंसेवकों के समन्वय और श्रद्धालुओं की संख्या गिनने के लिए एआई के इस्तेमाल पर चर्चा हुई है। यहां तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन से आगे बढ़कर आयोजन प्रबंधन में भी करने की कोशिश है। अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है। दिशा- सूचक बोर्डों के जरिए लोगों को शहर में आसानी से रास्ता बताने की योजना है।

दीपोत्सव के दिन सुबह चार बजे से भजन प्रसारण शुरू करने का निर्देश दिया गया है ताकि शहर में सुबह से ही उत्सव का माहौल बनाया जा सके। सुरक्षा, स्वच्छता, बिजली आपूर्ति, यातायात और सड़कों की मरम्मत जैसी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने पर भी जोर है। इस पूरे आयोजन की जमीन पर एक और महत्वपूर्ण परत है, वह है कला और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोडऩे की कोशिश। अयोध्या में 22 से 26 अक्टूबर 2026 तक राम, रामायण और अयोध्या राष्ट्रीय कार्यशाला एवं व्याख्यान श्रृंखला प्रस्तावित है। इसमें 25 कलाकार और10 विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके बाद लखनऊ में 18 से 22 नवंबर तक लोकधारा पारंपरिक एवं लोक चित्रकला कला शिविर प्रस्तावित है। यानी सांस्कृतिक भागीदारी को सिर्फ पांच दिन के दीपोत्सव तक सीमित रखने के बजाय कार्यशालाओं और कला शिविरों के जरिए आगे बढ़ाने की योजना है। अयोध्या में करीब 30 लाख दीपों की रोशनी के बीच इस बार सवाल केवल यह नहीं होगा कि कितने दीप जले, बल्कि यह भी होगा कि नई पीढ़ी इस पूरे अनुभव से कितनी गहराई से जुड़ती है।


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