‘योगी’ अगले महीने ही ‘मंत्रिमंडल विस्तार’ को दे सकते हैं अंजाम!


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच सरस्वती कुंज में करीब 40 मिनट  तक बंद कमरे में हुई बातचीत…

नए चेहरों को सरकार में जगह देकर उनका कद बढ़ाया जा सकता है

अगड़ी जातियों, गैर-यादव ओबीसी और अति-पिछड़ों को साधने की ज्यादा कोशिश की जाए

संजय श्रीवास्तव
Yogi aditynath news:यूपी में भले ही चुनाव एक साल दूर हों पर मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभी से अगले चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है जिसके तहत अगले महीने ही राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार भी सामने आ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जानते हैं कि इस बार विपक्ष भी पहले से ज्यादा आक्रामक और एकजुट हो सकता है, साथ ही उनके लगातार बढ़ते कद से पार्टी के भीतर का असंतोष और शीर्ष नेतृत्व की कुछ नाराजगियां भी उनके लिए परेशानी का सबक बन सकती है, इसलिए सबसे पहले उनकी कोशिश अपने घर को ही दुरुस्त करने की है।

पिछली जीत जैसा रिकॉर्ड एक बार फिर दोहराने के लिए सबसे पहले वो अपने नेताओं का मनोबल आसमान तक पहुंचाना चाहते हैं जिसके लिए मंत्रिमंडल विस्तार भी एक बड़ी रणनीति हो सकती है और चर्चा गरम है कि योगी अगले महीने ही मंत्रिमंडल विस्तार को अंजाम दे सकते हैं। फिलहाल योगी मंत्रिमंडल में छह मंत्री पद खाली हैं जिन्हें भरने के साथ कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन में भी भेजा जा सकता है तो क्षेत्र में प्रभावी नए चेहरों को सरकार में जगह देकर उनका कद बढ़ाया जा सकता है। 

हो सकता है इस कवायद में  अगड़ी जातियों, गैर-यादव ओबीसी और अति-पिछड़ों को साधने की ज्यादा कोशिश की जाए क्योंकि यही वो वोट बैंक जिसकी बदौलत भाजपा  सत्ता की सीढ़ियां चढ़ी है। इसके साथ ही पार्टी को पूरी तरह एकजुट करने के लिए मुख्यमंत्री सरकारी निगमों और बोर्डों में खाली पड़े सैकड़ो पद भी भर सकते हैं ताकि पूरे प्रदेश में आम जनता की लामबंदी आसानी से की जा सके। प्रदेश के 12 बड़े आयोगों, बोर्डों और निगमों में सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। यही नहीं इस बार योगी आदित्यनाथ संघ का भी पूरा समर्थन और सहयोग चाहते हैं इसलिए मार्च के आखिरी हफ्ते में न सिर्फ वह संघ के पदाधिकारी के लगातार संपर्क में आ चुके है बल्कि उनके साथ दो बार मीटिंग  भी कर चुके हैं।

लखनऊ में  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में मार्च के आखिरी दिनों में करीब 40 मिनट  तक बंद कमरे में बातचीत हुई जिसमें संघ ने उत्तर  प्रदेश चुनाव जीतने के लिए कोई कैर-कसर न छोड़ने और अपने ढाई लाख से  ज्यादा वरिष्ठ  स्वयं सेवकों को चुनाव में झोंक देने का  वादा योगी से किया गया है।  यही नहीं इन चुनावों में  तय किया गया है कि योगी और भाजपा के अन्य नेता रणनीति के तहत राज्य के 80 प्रतिशत आबादी को भाजपा समर्थक बताएंगे ताकि विपक्ष के खाते में मनोवैज्ञानिक रूप से 20 फीसदी वोटर ही माने जा सके और पूरा माहौल भाजपामय  हो जाए।


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