भाग 1- डीजी की आंखों में धूल झोंकर स्टेेनो के.सी. गौतम बना ‘फर्जी’ राजपत्रित अधिकारी


अधिवक्ता एस.सी.श्रीवास्तव के पत्र से शासन में मचा भूचाल

स्टेेनो के.सी.गौतम ‘स्वयंभू’ राजपत्रित अधिकारी बनकर बैठे हैंअधिवक्ता

के.सी.गौतम राजपत्रित अधिकारी का फर्जी वर्दी और स्टार लगाते हैं, इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो-

संजय श्रीवास्तव

UP-steno poses as’fake’ gazetted officer: ध्यान से देखिए इस शख्स के हंसते हुये चेहरे को… ये मुख्यमंत्री और शासन में बैठे ब्यूरोक्रेटस पर हंस रहा है… अपने मंत्री और डीजी पर भी हंस रहा है… क्योंकि जीरो टॉलरेंस की धज्जियां किस तरह से उड़ायी जाती है,ये डंके की चोट पर बता रहा है। ईमानदारी का डंका पीटने वाले विभागीय मंत्री धर्मवीर प्रजापति का असली चेहरा भी बेखौफ होकर दिखा रहा है। एक स्टेनो कैसे सभी की आंखों में धूल झोंकर कर राजपत्रित अधिकारी बनकर मुख्यालय पर बैठा है। जी हां, डीजी एम.के.बशाल के चैम्बर के बाहर शानदार कक्ष में बैैठने वाला स्टेनो के.सी.गौतम,जिसका पद स्टेनो का है लेकिन फर्जी राजपत्रित अधिकारी का वर्दी एवं स्टार लगाकर बैठता है। सोचने की बात है कि एक अदना सा स्टेनो फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनकर, वो भी डी.जी. के चैंबर के बाहर बैठा है, उस पर डी.जी. की निगाहें नहीं पड़ी ? क्या यही है जीरो टॉलरेंस की नीति…। इस मामले को अधिवक्ता एस.सी.श्रीवास्तव ने अपर मुख्य सचिव,गृह को पत्र लिखकर डीजी, होमगार्ड के स्टेनो के.सी. गौतम द्वारा फर्जी तौर पर राजपत्रित अधिकारी बनकर किये जा रहे फर्जीवाड़ा के खिलाफ मामला उठाया है।

31 जनवरी को अपर मुख्य सचिव,गृह, प्रमुख सचिव, होमगार्ड और डीजी को भेजे गये पत्र में श्री श्रीवास्तव ने मुद्दा उठाया है कि राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया शासन द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित है लेकिन डीजी एम.के.बशाल के स्टेनो के.सी.गौतम द्वारा फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनकर वर्षों से फ र्जीवाड़ा किया जा रहा है। श्री गौतम स्टेनो संवर्ग के अधिकारी हैं। उनकी राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रोन्नत के लिये कभी शासन स्तर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अधियाचन के लिये नहीं भेजा गया। उनकी राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रोन्नत हेतु कभी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा डीपीसी की बैठक भी नहीं हुयी। इसीलिये उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उनकी राजपत्रित अधिकारी के पद पर पदोन्नति का कोई आदेश जारी नहीं है।

पत्र में यह भी लिखा है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा समय-समय पर राजपत्रित अधिकारियों की नियमावली जारी की जाती है, जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित अधिकारियों के पदों का विवरण दिया जाता है। शासन द्वारा होमगार्ड विभाग के राजपत्रित अधिकारियों की नवीनतम नियमावली में भी एस.सी.गौतम के पद को राजपत्रित नहीं दिखाया गया है। यानि, डीजी के स्टेनो के.सी.गौतम स्वयंभू राजपत्रित अधिकारी बनकर बैठे हैं। इतना ही नहीं, स्टेनो के.सी. गौतम फ र्जी राजपत्रित अधिकारियों की वर्दी भी पहनते हैं, जबकि फर्जी वर्दी पहनना कानूनन गंभीर अपराध है। ये अपराध डीजी की नाक के नीचे, उनके ही कार्यालय में उनके ही स्टाफ द्वारा वर्षों से किया जा रहा है। पत्र में लिखा गया है कि स्टेनो के.सी.गौतम द्वारा फर्जी वर्दी पहन कर, फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनने का आपराधिक कृत्य वर्षों से किया जा रहा है इसलिये इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई बिठाते हुये कानूनी कार्रवाई की जाये।

बता दें कि ये वही के.सी.गौतम हैं , जिसका प्रदेश के मंडलीय कमांडेंट और जिला कमांडेंटों पर रौला दिखता है। मजाल है जो कोई इसकी बात को काट दे। मुख्यालय पर तैनात सभी अफसर इसके आगे नत मस्तक रहते हैं, क्योंकि सभी जानते हैं कि यदि श्री गौतम के खिलाफ मुंह खोले तो वो इनलोगों का राजफाश कर देंगे। आगरा में हुये लाखों रुपये के मस्टर रोल घोटालेबाज को भी श्री गौतम ने ही पूर्व डीजी को गुमराह कर बचा लिया। जिलों में तैनात कमांडेंटों के खिलाफ शिकायतें आती है तो श्री गौतम की मेज पर ही दबा दी जाती है। डीजी के चैम्बर में वही फ़ाइल पहुंचती है जो उनकी बातों को…।

खैर, अधिवक्ता द्वारा लगाये गये गंभीर आरोपों की बाबत होमगार्ड राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पाण्डेय से कुछ सवाल किये गये। जिस तरह गौतम 3 स्टार लगाते हैं, वैसे ही मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भी 3 स्टार वाले हैं, लेकिन अकेले के.सी. गौतम ही राजपत्रित बनकर घूमते रहते हैं और अपने को कमांडेंट बताते हैं ? इस पर श्री पाण्डेय ने बताया कि उनका एसोसिएशन उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित अथवा पदोन्नत अधिकारियों का समूह है। उसमें स्टेनो संवर्ग का कोई कार्र्मिक शामिल हो ही नहीं सकता, जब तक कि हमलोग उसे आमंत्रित न करें। डी.जी. का स्टेनो होने के नाते कोई भी अधिकारी उन्हें कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता। पता चला है कि मुख्यालय के बाबुओं को श्री गौतम चपरासी जैसे ट्रीट करते हैं और राजपत्रित अधिकारियों के विभागीय पार्टी में भी शामिल होते हैं? श्री पाण्डेय ने बताया कि कमलेश चंद्र गौतम डीजी के स्टेनो हैं। हां, वे सपरिवार मेस नाइट आदि आयोजनो में शामिल होते हैं, उन्हें अवश्य ही मुख्यालय के अधिकारी आमंत्रित करते होंगे। क्या उन्हें शासन से राजपत्रित अधिकारियों का स्टार मिला है ? इस पर श्री पाण्डेय ने बताया कि श्री गौतम के स्टार और वर्दी की शासन से स्वीकृति का प्रकरण मुझे नहीं मालूम है। राजपत्रित अधिकारियों की वर्दी और स्टार तो उत्तर प्रदेश शासन से स्वीकृत है।

कुल मिलाकर मुख्यालय पर वो भी डी.जी. के चैम्बर के बाहर जब उनका ही स्टॅाफ राजपत्रित अधिकारियों का फर्जी वर्दी और स्टार लगाने का दुस्साहस कर रहा है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वो पूरे प्रदेश के अफसरों पर किस तरह से अपनी हुकूमत चला रहा होगा। बहरहाल अधिवक्ता के इस पत्र ने शासन में भूचाल ला दिया है। देखना है कि इस फ र्जीवाड़े पर विभागीय मंत्री धर्मवीर प्रजापति और डीजी एम.के. बशाल सख्त कार्रवाई करते हैं या फि र अन्य घोटालों की तरह स्टेनो कमलेश चंद्र गौतम प्रकरण पर भी भ्रष्टाचार का कंबल ओढ़ा दिया जाता है। 

अगले अंक में …


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