बेटे के रूप में लौट आया स्‍वर्गवासी भाई…


बागपत: बागपत के एक रेहड़ी पटरी लगाने वाले ने बेटे के जन्‍म पर उसके वजन के बराबर दान सिक्‍के दान किए हैं। अब बेटे को सिक्कों में तोलकर दान करने वाले इस फलों की रेहड़ी लगाने वाले की चर्चा हो रही है। इस पूरे मामले में दिलचस्‍प बात यह है कि उसके घर 6 नवंबर 2025 को पैदा हुआ है। ठीक एक साल पहले उसका छोटे भाई का देहांत भी 6 नवंबर 2024 को हुआ था। उस समय इस फल वाले ने मन्‍नत मांगी थी कि उसका भाई वापस आया तो वह उसके वजन के बराबर पैसे दान करेगा।

मामला बागपत जिले के छपरौली कस्बे का है। छपरौली की धधान पट्टी के रहने वाले अक्षय उर्फ टिंकू और उसकी पत्नी सोनम ने पुत्र प्राप्ति पर मंदिर में मन्नत मांगी थी। संत रविदास मंदिर में मांगी गई उनकी यह मन्नत पूरी हो गई। इसके बाद उन्होंने पुत्र के वजन के बराबर मंदिर में दान किया है।

पुत्र प्राप्ति के चार महीने बाद घर पर खुशियां मनाई गई, दोस्तों रिश्तेदारों को बुलाकर दावत दी गई। इसके बाद मन्नत पूरी होने पर पति पत्नी ने मंदिर जाकर पुत्र के वजन के बराबर दान भी किया। अक्षय ने बताया कि रविवार को अपनी पत्नी और बेटे को लेकर शिरोमणि रविदास मंदिर पहुंचे थे। मंदिर में ही एक तराजू लाया गया, जो फूलों से सजा हुआ था तराजू के एक पलड़े में चार महीने का नन्‍हा बच्चा और दूसरी तरफ 10-10 के सिक्के रखे गए थे। पॉलिथीन में भर कर रखे गए यह सिक्के मंदिर में दान किए गए। रोहित ने बताया कि उसके बेटे का वजन 6 किलोग्राम मिला है जिसके बराबर की धनराशि ₹10000 उन्होंने मंदिर में दान कर दी है, उनके द्वारा दी गई धनराशि मंदिर के निर्माण में काम आएगी।

छोटे भाई की वापसी की मानी थी मन्नत

अक्षय उर्फ टिंकू का कहना है कि उसके छोटे भाई रोहित का स्वर्गवास एक साल पूर्व 6 नवंबर को हो गया था। तब उसने मंदिर में मन्नत मांगी थी की भाई की वापसी पर वह दान करेगा। 6 नवंबर को एक साल बाद उसको पुत्र प्राप्ति हुई है। उसका मानना है कि पुत्र के रूप में उसका छोटा भाई घर आया है, जिसकी खुशियां मनाई जा रही है।


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