‘अवाम’ की ‘आवाज’ बनकर मंत्री को ‘ललकारने’ वाला विधायक…


 संजय श्रीवास्तव

Brijbhushan rajput news : बुंदेलखण्ड की धरती वैसे भी क्रांतिकारियों की कहानियों से भरा-पटा है। कभी जमीनी राजनीति कर जनता के दिलों पर राज करने वाले गंगा चरण राजपूत राम मंदिर आंदोलन के नायक क ल्याण सिंह का भ्रम तोड़ा था। भाजपा ने उन्हें नहीं स्वीकारा लेकिन उन्होंने जनता दल और कांग्रेस से हमीरपुर में तीन बार चुनाव जीता और संसद पहुंचे। उन्हीं की राह पर उनका बेटा चरखारी विधानसभा के विधायक ब्रजभूषण राजपूत…। ब्रजभूषण के लिये सत्ता बाद में पहले वहां की जनता है…। जनता की समस्याओं का समाधान ना होने पर कल उनके सब्र का बांध टूटकर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को पानी-पानी कर दिया। विधायक और मंत्री के बीच खूब बहस हुयी जो मीडिया की सुर्खियों में देखने को मिला। हालांकि विधायक ब्रजभूषण राजपूत का आक्रामक तेवर भाजपा की नजरिये से देखा जाये तो अनुशासनहीनता माना जायेगा लेकिन बुदंलखण्ड की प्रसिद्ध चरखारी विधान सभा की जनता की निगाहों से देखा जाये तो कल का हीरो सिर्फ और सिर्फ उनका अपना विधायक ब्रजभूषण राजपूत ही रहें…।

ब्रजभूषण राजपूत बुंदेलखंड की प्रसिद्ध चरखारी विधानसभा से दूसरी बार विधायक हैं। चरखारी के जनप्रिय और लोकप्रिय नेता है। दमदारी तो इनके खून में है,तभी तो कहा जाता है कि ब्रजभूषण राजपूत को राजनीति विरासत में मिली है। ब्रजभूषण राजपूत के पिता गंगाचरण राजपूत बुंदेलखंड के चर्चित लोधी राजपूत नेता थे। बता दें कि गंगाचरण राजपूत ने अपनी जमीनी सियासत से राम मंदिर आंदोलन के नायक कल्याण सिंह का भ्रम तोड़ा था। कल्याण लोधी राजपूत समाज के एकछत्र नेता कहे जाते थे। इसीलिए गंगाचरण राजपूत को बीजेपी में कभी स्वीकार नही किया गया था। उन्होंने जनता दल और कांग्रेस से हमीरपुर लोकसभा में 3 बार चुनाव जीता और संसद पहुंचे। वर्ष 2010 में वह राज्यसभा के सदस्य भी बने और अपने समाज में खुद को स्थापित किया।
जनता के बीच रहने का स्वभाव जैसे गंगाचरण राजपूत को लोकप्रिय बनाता था, पिता की छत्रछाया में ब्रजभूषण ने वही डोर थामे रखी। वह बीजेपी में शामिल हुये और लगातार दो बार से चरखारी के विधायक हैं। उनकी व्यवहार कुशलता की चर्चा भी खूब होती है, मगर आज जब जनता की खातिर उनका सब्र टूटा तो सामने यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रादेव सिंह खड़े थे। खूब बहस हुई, अफ सरों और मंत्री जी के विभाग की खामियां विधायक ने उन्हें गिनाई लेकिन…।

हालांकि, बीजेपी जैसी पार्टी में इस तरीके से अपनी बात कहना अनुशासनहीनता कहा जाता है। मगर जब कोई आपकी बात ना सुने तो सामने वाले के सामने विकल्प क्या बचता है? ब्रजभूषण राजपूत का यह तरीका आज मीडिया की सुर्खियां बन गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी विधायक ने अपनी बात कहने के लिए जनता का जरिया लेकर मंत्री को हक्का-बक्का कर डाला। बताते हैं कि स्वतंत्र देव को भी इस बात का इल्म नहीं रहा होगा कि बुंदेलखण्ड की धरती पर विधायक और जनता इस तरह का वेलकम करेंगे…।


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