UGC-लखनऊ से बहराइच तक बैक-टू-बैक इस्तीफे… 


लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर यूपी में आक्रोश बढ़ गया है। बरेली में सोमवार को इसे सवर्ण विरोधी व समाज के लिए विभाजनकारी बताकर सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। मंगलवार को उन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके बाद नारेबाजी-जुलूस के बीच वह कई समर्थकों के साथ चार घंटा डीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठे।

संवेदना जताने के बहाने उनके पास विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की फोन काल भी पहुंची। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उन्हें फोन कर संवेदना व्यक्त की, फिर कहा कि आपने सरकारी पद छोड़ा है, इसके बदले हम धार्मिक पद प्रस्तावित करते हैं। उधर, लखनऊ सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए। भाजपा के अंदर भी इसे लेकर जबर्दस्त गुस्सा है। लखनऊ, बहराइच, श्रावस्ती में कई पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है।

कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में प्रधानमंत्री की मन की बात कार्यक्रम का भी बहिष्कार किया। हापुड़ में भाजपा नेताओं के बहिष्कार के पोस्टर लगाए गए हैं। इंटरनेट पर प्रतिक्रिया की बाढ़ आई हुई है। राज्यपाल व डीएम को सोमवार को भेजे इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए विनियम (रेगुलेशन) के साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान एवं बटुकों की चोटी पकड़कर पिटाई से आहत होने की बात भी लिखी।

उनके इस्तीफे पर निर्णय आना शेष है, लेकिन शासन ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर शामली के डीएम कार्यालय से संबद्ध कर दिया। उनके विरुद्ध मंडलायुक्त भूपेंद्र एस चौधरी को जांच सौंपी गई है। 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि यूजीसी का नया नियम ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, भूमिहार आदि सामान्य विद्यार्थियों के विरुद्ध षड्यंत्रों को जन्म देने वाला होगा।

इसमें प्रविधान किया गया कि कालेजों में सामान्य वर्ग के छात्रों के विरुद्ध यदि किसी प्रकार की शिकायत आई तो उन्हें स्वघोषित अपराधी मान लिया जाएगा। वह बोले कि भाजपा के सामान्य वर्ग के सांसद, विधायकों में यदि जमीर बचा हो तो इसके विरुद्ध अपने इस्तीफे दें। उन्होंने केंद्र व प्रदेश की सरकार को ब्राह्मण विरोधी भी बताया। उनके समर्थन में ब्राह्मण सभा एवं सपा-कांग्रेस समेत कई दलों के कार्यकर्ता आवास पर पहुंचे थे।

शाम को डीएम अविनाश सिंह ने उन्हें वार्ता के लिए अपने आवास बुलाया। वहां से लौटे अलंकार ने आरोप लगाया कि ‘डीएम ने 45 मिनट बंधक बनाकर रखा। वह (डीएम) लखनऊ के एक अधिकारी से हैंड्सफ्री फोन पर बात कर रहे थे। उन अधिकारी ने जातिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पागल हो गया, इसे रातभर यहीं रखें।” धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री की की मांग थी कि उन पर जातिगत टिप्पणी करने वाले लखनऊ के अधिकारी का नाम सार्वजनिक किया जाए।

उन्होंने प्रदेश में संवैधानिक अधिकार समाप्त होने की बात कहते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग उठाई। बोले, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री एसआइटी गठित करें ताकि प्रदेश सरकार में ब्राह्मण विरोधी मानसिकता वाले अधिकारियों के नाम सामने आ सकें। यूजीसी के नए नियमों को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश है, वहीं बड़े नेता समझाने-बुझाने के प्रयास कर रहे हैं। सोमवार शाम को बरेली के महापौर डा. उमेश गौतम उन्हें समझाने पहुंचे थे।

महापौर ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों में कमियां हैं, जिन्हें सरकार से वार्ता कर दूर कराएंगे। अलंकार इससे संतुष्ट नहीं हुए। पिछले चार दिनों से हापुड़ के बक्सर गांव में 150 से अधिक परिवारों ने अपने घरों के बाहर भाजपा नेताओं के खिलाफ पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। इन पोस्टरों पर लिखा है कि भाजपा नेता वोट मांगने न आएं, यह सवर्ण समाज का घर है। “सवर्ण एगेंस्ट बीजेपी एंड यूजीसी”।

बक्सर गांव भाजपा का एक मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां के युवा और हिंदू परिवार भाजपा के कट्टर समर्थक रहे हैं। कुछ गांवों में यूजीसी के खिलाफ गोपनीय बैठकें कर अग्रिम रणनीति बनाने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। आगरा में भाजपा नेता और पूर्व पार्षद जगदीश पचौरी ने इसको लेकर खून से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजा है। उन्होंने लिखा है कि हम यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने को निवेदन करते हैं। क्योंकि ये नियम छात्रों के भविष्य में दुष्परिणाम देगा।

लखनऊ में बख्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र के कुम्हरावां मंडल के महामंत्री समेत 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा जिलाध्यक्ष को भेज दिया है। श्रावस्ती में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उदय प्रकाश त्रिपाठी ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट डालकर कहा कि हमें मन की बात का बायकाट करना चाहिए। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व भाजपा प्रदेश परिषद सदस्य रमन सिंह ने भी विरोध में मन की बात का बहिष्कार किया।

बहराइच में भाजयुमो नगर मंत्री व बूथ अध्यक्ष ने पद से इस्तीफा दे दिया। लखनऊ में कई विश्वविद्यालयों के गेट पर भाजपा समर्थक एबीवीपी और कांग्रेस के एनएसयूआइ के विद्यार्थियों ने धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन दिया। कहा, यह यूजीसी काला कानून है। जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेगी, हम लोग पीछे हटने वाले नहीं हैं।

विद्यार्थियों ने कहा कि यूजीसी विद्यार्थियों को आपस में लड़ाने के लिए यह विनियम लेकर आई है। इससे भेदभाव समाप्त नहीं होगा, बल्कि आपस में टकराव होगा। इससे सामाजिक विभाजन और गहरा सकता है। लखीमपुर, बहराइच, बाराबंकी, सुलतानपुर, गोंडा और श्रावस्ती में भी हिंदू संगठनों ने नारेबाजी की।


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