पारंपरिक स्थानों के लिये खतरा है ‘शहरीकरण’ और ‘आधुनिकीकरण’- जे.साईं दीपक


राम मंदिर निर्माण ऐतिहासिक मोड़ है- विष्णु शंकर जैन

डीयू सेमिनार में सांस्कृतिक विरासत और राम मंदिर फैसले पर गहन मंथन

डीयू में भारत की सभ्यतागत विरासत और धर्म आधारित सामुदायिक शासन पर सेमिनार

दिव्यांश श्रीवास्तव

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में 5 वर्षीय एकीकृत विधि पाठयक्रम आईएलसी की साहित्यिक एवं वाद- विवाद समिति ने डीयू संस्कृति परिषद के सहयोग से ‘भारत की सभ्यतागत विरासत और धर्म’ आधारित सामुदायिक शासन शीर्षक से एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस रीगल लाज स्थित कन्वेंशन हाल में आयोजित इस सेमिनार में प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों और संवैधानिक विद्वानों ने कानूनी ढांचों के माध्यम से ‘भारत की स्थापत्य और धार्मिक विरासत के संरक्षण’ ,ऐतिहासिक ‘राम मंदिर’ निर्णय और समकालीन भारत में ‘धर्म’ आधारित सामुदायिक शासन मॅाडलों को लागू करने की अनिवार्यता पर विचार-विमर्श किया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय से वरिष्ठ अधिवक्ता जे.साईं दीपक सेमिनार के मुख्य अतिथि थे और भारत के सर्वोच्च न्यायालय से एडवोकेट ऑन रिकार्ड विष्णु शंकर जैन बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सेमिनार की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.योगेश सिंह ने की।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि,वरिष्ठ अधिवक्ता जे.साईं दीपक ने डीयू के विधि संकाय को धन्यवाद दिया और नव स्थापित केन्द्र के माध्यम से भारतीय दर्शन को व्यावहारिक कार्यान्वयन से जोडऩे का आग्रह किया। उन्होंने 1911-1947 के औपनिवेशक तुष्टिकरण काल के दौरान भारत के लचीलेपन पर चर्चा की और इतिहास, भाषा, धर्म शास्त्र, कानून और अर्थ शास्त्र को एकीकृत करते हुये सभ्यागत अध्ययन के लिये एक अंत:विषय दृष्टिकोण की वकालत की। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘शहरीकरण’ और ‘आधुनिकरण’ पारंपरिक स्थानों के लिये खतरा है और इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक आधार के बिना शासन त्रृटिपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सच्चा समुदाय आधारित शासन तभी कारगर होता है जब समुदाय कीमत चुकाता है और यूरोप के ग्रामीकरण के चलन को एक सबक के रुप में अद्भव किया। उन्होंने भावी शोधकर्ताओं को नि:स्वार्थ भाव से इस काम को अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया। श्री दीपक ने कहा कि भगवत गीता की प्रासंगिकता अपने समुदाय के भीतर कठिन संघर्षों से लडऩे में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुदाय को वही मिलेगा,जिसमें वह निवेश करेगा।


विशिष्ट अतिथि एडवोकेट ऑन रिकार्ड विष्णु शंकर जैन ने सेमिनार को संबोधित करते हुये खजुराहो के विष्णु मंदिर जैसे विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार के महत्व पर जोर दिया और एएसआई अधिनियम के बारे में भ्रांतियों को दूर करते हुये स्पष्ट किया कि धारा 16-1 स्मारकों की धार्मिक स्वरुप की रक्षा करती है और उचित पूजा-अर्चना की अनुमति देती है। उन्होंने राम मंदिर फैसले को एक ऐतिहासिक मोड़ बताया और ‘एक बार मंदिर, हमेशा मंदिर’ सिद्धांत और न्यायिक व्यक्तित्व की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने राम मंदिर विवाद के न्याय पालिका द्वारा प्रभावी समाधान की तुलना ‘यरुशलम विवाद’ से की और मंदिर मामलों में एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ज्ञानवापी जैसे मामलों में प्रक्रियात्मक इंकार की आलोचना की और कानूनी बिरादरी से कानूनों पर आधारित तर्क देने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर तर्क दिया कि मंदिर हमेशा से सामाजिक एवं शैक्षिक केन्द्र रहे हैं। श्री जैन ने वफ्फ जैसे कानूनों पर भी चर्चा करने का आग्रह किया। कार्यक्रम के संयोजन में इशिता जेटली एवं अक्षत श्रीवास्तव ने मुख्य भूमिका निभायी।


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