सस्पेंस खत्म! भाजपा जिलाध्यक्षों की पहली लिस्ट की डेट फाइनल


ब्यूरो, लखनऊ। बहुप्रतीक्षित भाजपा जिलाध्यक्षों की पहली सूची 16 मार्च को घोषित होगी। पहले चरण में करीब 80 जिलाध्यक्ष घोषित होने की संभावना है। प्रत्येक जिले में पर्यवेक्षक, जिला चुनाव अधिकारी व पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी की मौजूदगी में जिलाध्यक्ष की घोषणा की जाएगी।

भाजपा ने संगठनात्मक दृष्टि से प्रदेश को 98 जिलों में बांटा हुआ है। इस समय जिलाध्यक्षों के चुनाव चल रहे हैं। आपसी खींचतान व सामाजिक समीकरण ठीक से न बैठने से कई जिलों में अध्यक्ष को लेकर आम सहमति नहीं बन पा रही है। केंद्र ने भी अधिक से अधिक जिलाध्यक्षों को घोषित करने के निर्देश दिए थे।

इसी के बाद नए सिरे से तय किए गए जिलाध्यक्षों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई थी। वहां से हरी झंडी मिल गई है। प्रदेश चुनाव अधिकारी डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने बताया कि 16 मार्च को संबंधित जिलों में ही जिलाध्यक्ष की घोषणा कर जश्न मनाया जाएगा। जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का भी चुनाव जल्द हो जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, माफिया अतीक अहमद का नाम लिये बिना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के शासन में लैंड माफिया ने प्रयागराज के पौराणिक स्थलों अक्षय वट, माता सरस्वती कूप, पातालपुरी, श्रृंगवेरपुर, द्वादश माधव और भगवान बेनी माधव पर अवैध कब्जे कर लिए थे, जिससे इनकी गरिमा को गहरी चोट पहुंची।

महाकुंभ के दौरान इन स्थलों को माफिया मुक्त कर उनके कायाकल्प का मार्ग प्रशस्त हुआ है। अक्षय वट को गुलामी के काल में कैद कर नष्ट करने की कोशिश की गई, जिससे 500 वर्षों तक श्रद्धालु दर्शन से वंचित रहे।

श्रद्धालु अब साल भर यहां दर्शन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को होटल ताज में पांचजन्य और आर्गेनाइजर के ‘मंथनः कुंभ एंड बियांड ’ विचार संगम कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गंगा आज स्वच्छ है। हमारे यहां तो ऐसी मान्यता है कि बहता पानी और रमता जोगी ये कभी अशुद्ध नहीं होता है। संभल का उल्लेख करते योगी ने कहा कि पांच हजार साल पुराने पुराणों में इसका वर्णन है, जहां श्रीहरि का दसवां अवतार होगा।

1526 में मीर बाकी ने वहां मंदिर तोड़ा, लेकिन अब तक 18 तीर्थों का उत्खनन हो चुका है। उन्होंने कहा कि जो इतिहास छिपाते हैं, उन्हें पुराण पढ़ना चाहिए। 54 हजार बिछड़े लोगों को महाकुंभ के डिजिटल खोया-पाया केंद्र के जरिए उनके परिजनों से मिलाया गया।


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