स्त्रियों की दशा सुधरने के बाद ही विश्व कल्याण की बातें सच साबित होंगी

भारतीय व्यवस्था माता को ही बच्चे का पहला गुरु मानती हैं। गुरु वह होता हैं जो शिक्षा देता हैं, इसलिए मां का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्या बाई होल्कर जैसे अनेक उदाहरण हैं जो बताते हैं समान्य से लेकर राजपरिवार तक की स्त्रियों को युद्ध कौशल की कड़ी शिक्षा दी जाती थी।इसी […]

छिपाइये मत, हटाइये गरीबी

दिव्या श्रीवास्तव अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की भारत- यात्रा के दौरान उन्हें गुजरात की राजधानी में ले जाने में कहीं कुछ ग़लत नहीं है। पहले भी भारत सरकार प्रमुख विदेशी मेहमानों को अहमदाबाद ले जाती रही है। ऐसी हर यात्रा में मेहमानों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में ले जाना भी उतना ही ज़रूरी […]

अलवर में मॉब लिंचिंग के सबक

संतोष कुमार लखनऊ। अलवर लिंचिंग मामले में और अधिक जघन्य विवरण सामने आ रहा है। इस घटना के पीडि़त रकबर खान को बचाया जा सकता था अगर पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती। वास्तव में पुलिस टीम चाय पीने के लिए रुकी तथा पीडि़त को अस्पताल पहुंचाने में उसने साढ़े तीन घंटे देरी कर […]

बापू जो ‘बलात्कारी’ है !

  कल तक जो ‘भगवान’ था, आज वह बलात्कारी है। जिसके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू सजते थे और वह खुद को ‘शिव का अवतार’ मानता था, आज बलात्कारी के तौर पर जेल में है। होली के पर्व पर आपने भी उस शख्स का ‘कमंडल डांस’ देखा होगा या भगवान कृष्ण की […]

फिल्मो से संसद तक वाया सरोज और रेणुका 

संसद भी अछूती नहीं : रेणुका चौधरी अभिनेत्री  श्रीरेड्डी ने खुल कर की बात    संजय तिवारी  इसे विडम्बना कहें या प्रगतिशीलता का विकृत स्वरुप। दुःख व्यक्त करें , गुनान करें। करें तो क्या करें।  लगता तो यह है कि पूरे कुएं में भांग पड़ चुकी है। भारत की स्वाधीनता के 70 वर्षो में हम […]

‘अभिशप्त रही इस चांदनी के जीवन की रात’

श्रीदेवी की मौत से सब इसलिए भी ज्यादा स्तब्ध हैं क्योंकि वे न तो बीमार थी और न ही खराब दौर से गुजर रही थीं। इन दिनों वे अपनी बेटी जहानवी के करियर को लेकर व्यस्त थीं। जहानवी की पहली फिल्म ‘धड़क’ जुलाई में रिलीज होने के लिए तैयार है। काम पूरा हो चुका है और […]

नये साल के पहले दिन

सबसे पहले सभी पाठकाें को नये वर्ष की मंगलकामनाएं! आज सुबह-सवेरे से नये वर्ष की शुभकामनाओं और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ का जो सिलसिला चल रहा है, वह शायद शाम और रात तक चलेगा. नये साल का पहला दिन अन्य दिनों से इस अर्थ में भिन्न है कि इस दिन से पूरा साल आरंभ होता है. […]

किसके हैं राम ? तुलसी के, कबीर के या फिर ठेठ राजनीतिक हैं…

अशोक पाठक ‘राम’ भारतीय परंपरा में एक प्यारा नाम है. वह ब्रह्मवादियों का ब्रह्म है. निर्गुणवादी संतों का आत्मराम है. ईश्वरवादियों का ईश्वर है. अवतारवादियों का अवतार है. वह वैदिक साहित्य में एक रूप में आया है, तो बौद्ध जातक कथाओं में किसी दूसरे रूप में. एक ही ऋषि वाल्मीकि के ‘रामायण’ नाम के ग्रंथ […]

Destruction in Montania

Nunc consectetur ipsum nisi, ut pellentesque felis tempus vitae. Integer eget lacinia nunc. Vestibulum consectetur convallis augue id egestas. Nullam rhoncus, arcu in tincidunt ultricies, velit diam imperdiet lacus, sed faucibus mi massa vel nunc. In ac viverra augue, a luctus nisl. Donec interdum enim tempus, aliquet metus maximus, euismod quam. Sed pretium finibus rhoncus. […]

Invention of Advance Technology

Pellentesque nec ipsum nec dolor pretium ultrices et eleifend nisl. Donec mattis at sem eu auctor. Aenean varius ligula lacinia condimentum maximus. Nam est lorem, suscipit sit amet sodales vitae, consectetur ac libero. In pharetra lectus in aliquam congue. Quisque posuere luctus ligula eu gravida. Aliquam sed dui purus. Morbi dignissim ut sapien sed blandit. […]