दबंग-3 : नाम- कमांडेंट बुलबुल पांडेय,अफसरों की साजिश का हुआ शिकार,कोर्ट ने दी हुडक़ी तो एलॉट हुआ नया चैम्बर…

‘मूंछों वाले अधिकारी ‘ ने कभी एक ‘महिला अधिकारी’ को आगे कर मनोज को कराया सस्पेंड, आज मूंछें ‘मउरा’ गयी…

सिंघम के स्टाइल में आज कमांडेंट मनोज कुमार ‘चौडिय़ाकर’  बैठे नये आवंटित चैम्बर में…षडय़ंत्रकारी अफसरों की ‘दगी’…

 

 

 

 

 

     संजय पुरबिया

लखनऊ। आपने दबंग-1 और दबंग -2 मूवी तो देखी होगी। आपको ये मूवी अच्छी-खासी पसंद भी आयी थी । अमूमन लोग फिल्म देखकर हीरो बनने की कोशिश करते हैं मगर कई बार अपने ही समाज के असल जिंदगी के हीरो की लाइफ पर मूवी बनती है। जी हां , आज कल ऐसे ही एक दबंग आफिसर की चर्चा बहुत जोरों पर है। और ये कोई दबंग का सलमान खान या सत्यमेव जयते का आमिर खान नही बल्कि होमगार्ड विभाग को वो दबंग अधिकारी है जो अकेले पूरे सिस्टम से लड़ गया। न सिर्फ लड़ा बल्कि अपने विलेन की मूछें उखाड़ कर उसको सरेआम मूछमुंडवा बना दिया। मजेदार बात तो ये है की इस मूवी में कोई ग्लैमरस हिरोइन नही थी बल्कि एक भाभी थी जी  जिसने, मूंछमैन के कहने पर खुद पर यौन शौषण का आरोप लगा कर बुलबुल पांडेय की वर्दी उतरवाने और बर्बाद करने की धमकी दी थी। इधर, बुलबुल पांडेय ने चैलेंज एक्सेप्ट किया और ताल ठोंककर उतर गया चैलेंजिंग ग्राउंड में और कहा ‘अगर तुम मर्द के बच्चे तो मुझे हिला कर दिखाओ, मैं वहीं सीना चौड़ा करके और बहाल होकर आऊंगा।’ मगर एक कहावत है कि दस हजार बईमान पर एक ईमानदार भारी…। ईमानदारी है तभी तो ये सिस्टम चल रहा है…।और ये कहावत एक दम सही चरितार्थ हुयी। बुलबुल पाण्डेय को कोर्ट ने न्याय दिया और दो दिन पूर्व होमगार्ड मुख्यालय ने एक पत्र जारी कर ‘कमांडेंट बुलबुल पाण्डेय को एक चैम्बर एलाट किया और कहा साहेब आइये और विराजें…।’

द संडे व्यूज़ की खबरों पर होमगार्ड विभाग के लाखों होमगार्ड,जो पूरे घटनाक्रम पर नजर गड़ाये बैठे हैं,वे लगतार रिक्वेस्ट कर रहे हैं की भईया, साहब त बहाल हो गइलन अउर मुख्यालय पे भी आ भी गइलन अब…द संडे व्यूज़ को आज वो ऑर्डर हाथ लगा है जिसका प्रदेश के लगभग सभी होमगार्ड इंतजार कर रहे थे। हमेशा बेचारे दबे- कुचले होमगार्डों को परेशान करने वाली खबरें सुनने को मिलती थी आज पहली बार कोई ऐसा बुलबुल पांडेय टाइप का अधिकारी आया जो ऐसे बदमीजाज लोगों को बिना आवाज का थप्पड़ भी मारा और रोज उनके छाती पर मूंग दलने के लिये मुख्यालय भी पहुंच गया। मामला ये है की अभी 6 जनवरी को स्टाफ ऑफिसर टू कमाण्डेंट जनरल ए.पी.सिंह ने पत्र जारी किया है।  जिसमे एक साल बाद मुख्यालय के लिये के अधिकारी को विशेष तौर पर मुख्यालय पर बैठने के लिये एक कमरा दिया गया। मजे की बात ये है कि कमरा भी वो जो एकदम मूंछमुड़वा के ऊपर वाला है । ये महज एक ऑर्डर नहीं था बल्कि लंबे समय से चले आ रहे मूंछ की लड़ाई का पटाक्षेप है।

 

   आखिर क्या है पूरा मामला

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1- कौन है ये कमांडेंट बुलबुल पांडेय, जिसके बारे में पढऩे के लिये इतने सारे होमगार्ड बेताब रहते हैं ? बता दें, उनका नाम मनोज कुमार है,जिन्होंने मुख्यालय पर तैनात जेएसओ सुनील कुमार के भ्रष्टïाचार का खुलासा किया जिसके बाद षडय़ंत्र के तहत उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।

2- आखिर ये विशाखा भाभी, कौन हैं जिसने द संडे व्यूज़ के खिलाफ प्रेस काउंसिल में शिकायत की ? बता दें मैडम बागपत की पूर्व कमांडेंट नीता भरतिया हैं जिन्होंने मनोज कुमार पर व्हाटसअप पर मनोज कुमार पर गंभीर आरोप जड़ा था। मनोज कुमार ने कोर्ट में चुनौती दी,नीता भरतिया के सारे आरोप फर्जी पाये गये हैं और मनोज कुमार को बहाल कर डीजी विजय कुमार ने आज मुख्यालय पर नया चैम्बर आवंटित कर दिया गया। द संडे व्यूज़ के हमले ने नीता भरतिया, सुनील कुमार को बेहाल कर दिया था और’ सुनील ने महिला अधिकारी नीता भरतिया को आगे कर ‘द संडे व्यूज़’ को बंद कराने का घटिया एवं घिनौना कुचक्र रचा लेकिन मुंह के बल गिरा। क्योंकि जो सच की राह पर चलते हैं उसके साथ खुदा होता है फिर ये लोग तो मामूली इंसान हैं…। ‘द संडे व्यूज़’ ईमानदारी के साथ कई कदम आगे बढ़ाते हुये  राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र ‘द संडे व्यूज़’,’द संडे व्यूज़डॉटकॉम’,’द संडे व्यूज़ वेब न्यूज़ चैनल’ एवं ‘इंडियाएक्सप्रेस न्यूज़डॉटकॉम’ निकाल रहा है।

3- आखिर ये मूंछ की लड़ाई वाले अफसर का क्या मामला है ? बता दें, सुनील कुमार ने भ्रष्टाचार का खुलासा होने पर प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया और येन-केन प्रकारेण मनोज कुमार को बर्खास्त करने की योजना बनाकर सबकुछ कर डाला लेकिन मनोज कुमार एक ईमानदार अधिकारी हैं और न्यायालय ने उनके साथ इंसाफ बरता। अभी कोर्ट की लड़ाई जारी है क्योंकि अभी तक शासन ने दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है।

जी हां दोस्तों,’ द संडे व्यूज़’ लगातार डंके की चोट पर वही खबर छापता है जो डॉक्यूमेंट में प्रूफ होती है। यही कारण है की कुछ लोगों को ‘द संडे व्यूज़’ की खबरे पढऩे के बाद ‘मिर्ची’ लग जाती है। वे ‘द संडे व्यूज़’ को ‘पम्पलेट’ और ‘गली-मोहल्ले’ में छपने वाला अखबार यहां तक कि ‘अनियमित न्यूज पेपर’ तक कह डालते हैं। यही वजह है की इस पूरी कहानी में ‘द संडे व्यूज़’ ने सच का साथ दिया और सत्य की जीत हुयी।

Post Author: thesundayviews

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