खबर का असर: डीआईजी प्रयागराज संतोष सुचारी ने कहा मामले की कराऊंगा जांच,दोषी बीओ पर होगी कार्रवाई

सवाल

1 -डीआईजी करायेंंगे मंडलीय कमांडेंट से जांच,घूसखोर बीओ है मंडलीय ए.के.पाण्डेय का खास गुर्गा

2 -द संडे व्यूज़ ने पेज 1 पर प्रकाशित किया घूसखोर बीओ का फोटो,डीआईजी को नहीं दिख रहा नोट कितने का है…

3 -जांच रिपोर्ट पर द संडे व्यूज़ की रहेगी पैनी नजर

    शेखर यादव

लखनऊद संडे व्यूज ने 14 नवंबर को ‘घूसखोरों का सम्मान अफसर का निलंबन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुयी थी। खबर छपने के बाद होमगार्ड विभाग में तहलका मच गया। इस खबर में एक महिला होमगार्ड गुडडी मिश्रा से बीओ सुरेन्द्र सिंह कुशवाहा से रिश्वत ले रहा है। द संडे व्यूज के हाथ बीओ द्वारा महिला होमगार्ड से कार्यालय में बैठकर घूस लेते एक्सक्लूसिव फोटो लग गया। फोटो सहित पेज 1 पर खबर प्रकाशित की गयी और अपर प्रमुख सचिव 2 अनिल कुमार से लेकर डीजी विजय कुमार,डीआईजी मुख्यालय रंजीत सिंह सहित उत्तर प्रदेश के लगभग सभी मंडलीय कमांडेंट,कमांडेंट के पास खबर पहुंचा दी गयी। पेज 1 पर घूसकांड़ का सबूत पेश करने की दमदारी का सभी ने सराहना की लेकिन अभी तक कार्रवाई शून्य है। खैर,इस बारे में जब जब जिम्मेदार डीआईजी, प्रयागराज संतोष सुचारी से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि अभी मैं कानपुर में हूं, इस मामले पर मैं जल्द से जल्द मंडलीय कमांडेंट से जांच कराऊंगा और जो भी दोषी होगा उस पर मैं सख्त कार्यवाही करुंगा।

 

जरा डीआईजी साहेब के जवाब पर गौर कीजिये… जांच मंडलीय कमांडेंट से कराऊंगा,यानि ए.के.पाण्डेय से…। ये वही ए.के.पाण्डेय हैं जिनसे निलंबित कमांडेंट हंसराज सरोज जब गाजीपुर में तैनात थे,छत्तीस का आंकड़ा चल रहा था। अभी भी वैचारिक युद्ध दोनों के बीच जारी है,किस बात को लेकर दोनों में विवाद है,विभाग में सभी को मालूम है। इसका खुलासा आगे करेंगे,फिलहाल मुद्दे पर आते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि डीआईजी साहेब जब जांच मंडलीय कमांडेंट पाण्डेय जी से करायेंगे तो इतना तय है कि घूसखोर बीओ सुरेद्र्र सिंह कुशवाहा सटाक से बाहर निकल जायेगा,क्योंकि बताया जाता है बीओ पाण्डेय जी का खास गुर्गा है। यानि आप समझ गये होंगे की निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है। हास्यास्पद तो यह है कि जब संवाददाता ने डीआईजी, प्रयागराज से सवाल किया कि जो रिश्वत में दिया जा रहा है वह कितने का नोट है? इस पर सुचारी जी का जवाब कुछ इस प्रकार रहा, फोटो में मुझे तो दिखाई नहीं दे रहा है कि नोट दो रुपये का है या पांच रुपये का…।

सुचारी साहेब,क्यों आप अपने विभाग के ईमानदार अफसरों और कर्मचारियों का स्तर गिरा रहे हैं…। डीआईजी के जवाब से साफ है कि विभाग जांच बिठाने के बाद फोरेंसिक जांच करायेगा कि नोट है या नहीं ? है तो कितने का ? नोट दे रही है या रंगीन कागज मुस्कराकर रख रही है…वगैरह-वगैरह। खैर,देखते हैं कानपुर से लौटने के बाद डीआईजी किसे जांच सौंपते हैं और जांच रिपोर्ट किस नतीजे पर पहुंचते हैं। द संडे व्यूज़ की पैनी नजर जांच रिपोर्ट पर लगी रहेगी और हम बतायेंगे कि सच क्या है क्योंकि जब हम लोग दम रखते हैं कि घूस लेते फोटो पेज 1 पर छापने का तो षडय़ंत्र के तहत प्रमोशन से पहले एक अधिकारी को निलंबित कराने वाले उन अफसरों की कलई भी खोलने का भी बूता रखते हैं।

Post Author: thesundayviews

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