अनुशासन का पाठशाला बना के.के.सी.: गुरु-शिष्य की परंपराओं को जीवंत करने पर नैक ने दिया ‘ग्रेड ए’ का खिताब

के.के.सी. में बदलाव लाने के पीछे शिक्षकों की ‘तपस्या’,छात्रों की ‘मेहनत’ है: डॉ. मीता शाह

 

 राजेश श्रीवास्तव

लखनऊ। राजधानी में के.के.सी. श्री जय नारायण मिश्र महाविद्यालय की पहचान शिक्षा के क्षेत्र में सात समुंदर पार तक होने लगी है। यहां से पढक़र निकलने वाले छात्र-छात्राएं देश-विदेश की नामी-गिरामी कंपनियों में उच्च पदों पर आसीन हैं। फ्लैश बैक में चलें तो लगभग 10 वर्ष पूर्व के. के.सी. में कुशल शिक्षकों की तो भरमार थी लेकिन छात्र शिक्षा ग्रहण करने के बजाये छात्र राजनीति में उलझ कर शिक्षा से विमुख हो जाते थे। आर्थिक अभाव की वजह से कॉलेज की सूरत ‘बदरंग’ सी थी। लेकिन आज इसी के.के.सी. में अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिये ‘जुगाड़’ लगाते देखे जा रहे हैं। कॉलेज में जहां शिक्षक और छात्रों के बीच ‘आपसी सामंजस्य’‘अपनत्व’ के भाव दिख रहे हैं वहीं ‘अनुशासन’ की सख्त परंपरा भी दिखने लगी है।ऐसा नहीं की ये बदलाव एक दिन में हुआ बल्कि इसके पीछे शिक्षकों की तपस्या और प्राचार्य द्वारा पढ़ाये गये अनुशासन की पाठ ने के. के. सी. का नाम उस पाठशाला में दर्ज करा दिया है जिसमें गुरु और शिष्य की परंपराओं को जिवंत करने का काम किया है। के.के.सी. में ये बदलाव कैसे आया,किसकी अथक प्रयास से ये कॉलेज मिनी यूनिवर्सिटी की तरह दिखने लगा है, इन्हीं सब मुददों पर बात करते हैं,कॉलेज की प्राचार्या डॉ.मीता शाह से। पेश है द संडे व्यूज़ के संवाददाता राजेश श्रीवास्तव की खास बातचीत…

 

सवाल: के. के.सी. की सूरत और सिरत बदलने में लंबा वक्त लगा होगा। बदलाव कैसे हुआ और इसमें किनका योगदान रहा?

जवाब : के.के.सी. में मैंने1986 में लेक्चरर के रुप में कार्यभार संभाला था। हॅायर एजूकेशन कमीशन द्वारा मेरा चयन हुआ और सबसे पहले 2009 में मुझे फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड के रुप में चार्ज मिला था। उसके बाद 2016 में साइंस फैकेल्टी के इंचार्ज के रुप में जिम्मेदारी सौंपी गयी। वर्ष 2020 में प्रधानाचार्य प्रो. एस.डी. शर्मा रिटायर हो गये। कुछ वक्त तक नागेश्वर पाण्डेय ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रुप में काम किया लेकिन किसी कारणवश उन्होंने असमर्थता जाहिर कर दी। कॉलेज के अध्यक्ष ने गत 6 फरवरी 2021 को मुझे प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी। तब से मेरी कोशिश रही कि यहां पर गुरु और शिष्य क परंपराओं को जीवंत करते हुये नई मिसाल कायम की जाये। कुशल शिक्षकों एवं मेधावी छात्र-छात्राओं की मेहनत रंग ला रही है।

सवाल : कभी के.के.सी. की पहचान शिक्षा के मामले में कमतर आंका जाता था। छात्रसंघ चुनाव की वजह से छात्रों में भटकाव ज्यादा देखने को मिलता था। अचानक यहां अनुशासन,शिक्षा के प्रति छात्रों में जुनून कैसे बढऩे लगा?

जवाब :देखिये,बदलाव एक दिन में नहीं होता। इसमें हमारे शिक्षक,कर्मचारियों के साथ-साथ सिस्टम को ठीक करने के लिये एक सकारात्मक सोच की जरुरत थी। सभी ने मेहनत की जिसकी वजह से लंबे समय बाद बदलाव की बयार लोगों को दिखने लगी है। यहां पर पहले छात्रसंघ बहुत सक्रिय था। चुनाव बंद हाने के बाद अनुसाशन तोडऩे वाले लोग हट गये लेकिन बदलाव लाने में सबसे बड़ा योगदान हमारे पूर्व प्राचार्य डॉ.एस.डी. शर्मा को जाता है। उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने क्लास को रेेगूलर कराने सहित बच्चों में अनुशासन लाने के लिये बहुत मेहनत किया। इसके अलावा वर्ष 2015 में नैक द्वारा एक्रीएडेट ग्रेड -ए का खिताब के.के.सी. को मिला। इस खिताब को हासिल करने के लिये जो तैयारियां की गयी मसलन- बड़े पैमाने पर पेपर वर्क, शिक्षकों को जो वर्कलोड दिया गया जिसमें सभी ने खूब मेहनत की। खिताब मिलने के बाद शिक्षकों के अंदर जूनून आया कि हमलोगों को अपने कॉलेज के रिकार्डों को संवार कर रखना है। सबने जिम्मेदारी को उठाना सीख लिया और हम बन गये नंबर वन…।

 

सवाल: क्या शिक्षकों की कार्यशैली पर भी आपकी निगाहें रहती है। क्या आप जांचती है कि शिक्षक अपने क्लास में पढ़ा रहे हैं या नहीं?

जवाब: जी हां। सभी शिक्षकों का शेडयूल बनाया गया है। वे बताते हैं कि किस दिन कौन सा विषय पढ़ायेंगे। बच्चों तक पूरी शेडयूल की रिपोर्ट भेजी जाती है ताकि वे पूरी तैयारी के साथ पढुने आये। शिक्षकों से पूछते हैं कि किस दिन कौन सा सब्जेक्ट पढ़ायेंगे। यदि कोई शिक्षक अपना विषय कम पढ़ाता है तो उनसे उसकी वजह पूछी जाती है। सीधी बात करें तो पूरी पारदर्शिता के तहत शिक्षक अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। सभी की आदत बन गयी है कि जब वे लोग अनुशासन के तहत काम करेंगे तो छात्र खुद-ब-खुद अनुशासित होंगे। यूजीसी के मानक की बात करें तो ये लोग प्रति वर्ष हर एकेडमीक सीजन में जाकर छात्रों का फीडबैकलेते हैं। इसके लिये वे छात्रों को फार्म देते हैं, उस दौरान वहां पर शिक्षक नहींं होते बल्कि आइक्यूएसी यूनिट के सदस्य ही रहते हैं, जो छात्रों से फार्म भरवाते हैं। जिस शिक्षक का परफार्मेंस बेस्ट होता है, उन्हें सम्मानित किया जाता है। खराब पढ़ाने वाले शिक्षकों को बताया जाता है कि वे अपने रिकार्ड में सुैधार करें।

सवाल: सुना है कि के.के.सी. को नैक द्वारा ग्रेड-ए का दर्जा मिला है ?
जवाब: जी हां। ये हम सभी के लिये गौरव की बात है कि लखनऊ में सिर्फ दो कॉलेज को ही ग्रेड-ए का दर्जा मिला है जिसमें के.के.सी और नेशनल पी.जी. कालेज शामिल हैं।

सवाल: शिक्षक और छात्रों के लिये कोई संदेश ?
जवाब : शिक्षक जितना छात्रों से जुड़ेंगे तभी छात्र-छात्राओं का विश्वास उनकी तरफ बढ़ेगा। पहले की तरह गुरू-शिष्य की परंपरा तभी पूरा होगाी जब बच्चों के अंदर आत्मविश्वास बढ़ेगा। बच्चे बिना डरे अपने शिक्षकों के सामने अपनी बात रख सके और शिक्षक भी एक अभिभावक की तरह उनसे बर्ताव करे। कॅालेज में प्रोग्राम चल रहा है इसके पीछे हमलोगों का उद्देश्य है कि सभी बच्चे अपनी संस्कृति को पहचाने। सभी बच्चों में टैलेंट छिपा होता है,उसे उभारें तभी वे देश का नाम रौशन करेंगे।

Post Author: thesundayviews

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