कर्मचारी बदलें सोच तो हम होंगे कामयाब : वरुण मिश्रा


राष्ट्रीयकृत बैंकों को टक्कर देगी कोआपरेटिव बैंक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब सहकारी बैंकों की सूरत बदली जा रही है। बदरंग बैंकों में आप जायेंगे तो टाइम पास करने वाले कर्मचारी नहीं मिलेंगे। यहां पर काम करने वाले अधिकारी व कर्मचारी पूरी तरह से मुश्तैद दिखेंगे और बैंकों की तरह ग्राहकों का खिंचाव हो इसके लिये अत्याधुनिक तरीके से बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने जो खाका बनाया है उसके मुताबिक ग्रामीण अंचल में रहने वाले किसानों व गरीब तबके को अब ना तो बिजली का बिल जमा करने के लिये दूर-दराज कस्बों तक दौड़ लगानी होगी और ना ही पैसा लेने के लिये बैंकों में लंबी लाइन में लगना होगा। गांव-कस्बों में अब लोग मोबाइल एटीएम से झट से पैसा निकाल रहे हैं। ये बदलाव सकारात्मक सोच की है और गांव में रहने वाले किसानों,गरीबों को सुविधायुक्त बनाने के लिये सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिये हैं। सरकार चली गांव की ओर…अफसर एसी कमरे में बैठकर काम कर रहे हैं या सरकारी योजनाओं का लाभ गांव-ज्वार के किसानों तक पहुंचा रहे हैंं, इन्हीं मुद्दों पर द संडे व्यूज़ के यूपी स्टेट हेड संजय पुरबिया ने उ.प्र. कोआपरेटिव बैंक लि. के प्रबंध निदेशक वरूण मिश्र से खास बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश-

 

सवाल : राष्ट्रीयकृत बैंक और सहकारी बैंकों में क्या अंतर है? एमडी की हैसियत से आप क्या सुधार कर रहे हैं ?

जवाब : उ.प्र. केेाआपरेटिव बैंक की 27 शाखायें गांव से लेकर जनपद स्तर पर बखूबी काम कर रही है। कोआपरेटिव बैंक जनपद व तहसील स्तर पर खुले हैं। इसके अलावा पैक्स जो है वो न्याय पंचायत स्तर पर है। इसका लाभ ग्रामीण अंचल में सभी वर्ग के लोग उठा रहे हैं। जहां तक अंतर की बात है तो स्वाभाविक है कि हमलोग थोड़ा पीछे चल रहे हैं लेकिन सरकार के सहयोग से हमलोगों ने सहकारी बैंकों में एक के बाद एक सुधार कर कोआपरेटिव बैंक को राष्टï्रीयकृत बैंकों की कतार में ला खड़ा किया है। सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में तहसील व ब्लॉक स्तर में रहने वाले किसानों,मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों को अधिकाधिक बैंकिंग सुविधा दिलाने का काम किया है। बैंकों का स्वरूप बदलने के साथ-साथ कर्मचारियों के आचरण में व्यापक सुधार लाने पर जोर देने का काम किया है। सीध्ी बात करें तो अब कस्टमर को सुविधा देने में आनाकानी करने व काम में लापरवाही करने वालों को नहीं बख्शा जायेगा।

सवाल: सहकारी बैंकों की इमेज की बात की जाये वो खराब बताया जाता है। आप इसमें कैसे सुधार करेंगे ?
जवाब : सुधारात्मक कदम उठाये गये हैं। कोआपरेटिव बैंकों में पारदर्शिता बरतने के लिये हमलोगों ने आरबीआई से इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा ले रखा है। इससे गांव के लोग आराम से किसी भी बैंक के एटीएम से पैसे का ट्रंाजेक्शन कर सकते हैं। बैंक ने एटीएम कार्ड भी जारी किया गया है। इमेज तो बैंक के अधिकारी व कर्मचारी ही बनाते हैं। इसीलिये सभी को अपने काम को सही तरीके से करने और लोगो को बेहतर सुविधा देने का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

सवाल: किसानों को गांव में ही रूपयों के लेन-देन करने के लिये सुदूर राष्टï्रीयकृत बैंकों में लंबी लाइन लगानी पड़ती है। लोगों को इससे छुटकारा मिले इसके लिये आप कुछ कर रहे हैं ?

जवाब : उत्तर प्रदेश के जनपदों में हमलोगों ने 58 मोबाइल एटीएम वैन चालू कराया है,जो गांव-कस्बों में जाकर लोगों को बैंकिंग सेवा प्रदान कर रही है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान प्रणाली से संबंधित विभिन्न सेवायें प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जब ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग घरों से नहीं निकलते थे,उस दरम्यान मोबाइल एटीएम वैन पहुंची और लोगों ने उसका लाभ उठाया।

सवाल: गांव वालों को कैसे मालूम चलता होगा कि मोबाइल एटीएम वैन का प्र्िरतदिन रूट चार्ट बनाया जाता था ?

जवाब : गांव में कोआपरेटिव बैंक के प्रबंधकों को यह जिम्मेदारी दी जाती है कि वे साप्ताहिक रूट चार्ट बनाकर बैंक में चस्पा करा दें ताकि लोगों को पता चले कि फलां दिन मोबाइल एटीएम वैन कहां पर आयेगी। रूट चार्ट में दर्शाया जाता है कि ग्रामीण अंचल के स्कूल,हॉस्पिटल,साप्ताहिक बाजार के निकट मोबाइल एटीएम वैन पहुंचेगा। इससे गांव वालों को काफी सहूलियत मिलती है। खासकर किसानों व काश्तकारों को आराम मिल रहा है।

सवाल: कोआपरेटिव बैंक गांव वालों को बैंकों से लेन-देन के मामले में जागरूक करने के लिये क्या कोई योजना चला रही है ?

जवाब : जी हां,हमलोग नाबार्ड के सहयोग से वित्तीय साक्षरता का कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। कई जनपदों में यह कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। पैक्स और ब्रांच लेवल पर बैंक कौन-कौन सी सुविधायें दे रही है, एटीएम में लोग किस तरह से फ्राड कर रहे हैं,इस पर कैसे रोक लगा सकते हैं…। सभी मुद्दों पर पर साक्षरता अभियान में गांव वालों को समझाने का काम कर रहे हैं। इसका असर भी दिखने लगा है।

सवाल : यूपी में नये जनपद बनने के बाद वहां पर बैंकिंग सेवाओं का अभाव है? क्या नये जनपदों के ग्रामीण अंचल में कोआपरेटिव बैंकों की नयी शाखाएं खुलेंगी?

जवाब: आपने अच्छा सवाल किया है। आरबीआई ने कोआपरेटिव बैंक की 13 नयी शाखायें खोलने के लिये हरी झंड़ी दे दी है। नये जनपद फतेहपुर, मथुरा, गौतमबुद्धनगर, कानपुर देहात, कन्नौज, संभल, ज्योतिबा फूलेनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, अंबेडकरनगर, अमेठी, औरैया तथा हापुड़ में ब्रांच खोलने की योजना है। मेरी कोशिश है कि नये जनपदों में बैंक खुलने से जहां अच्छा बिजनेस मिलेगा वहीं लोग बैंकिंग सेवा का लाभ भी उठा सकेंगे।

सवाल: समिति के सदस्यों के लिये किस स्तर की सुविधायें मुहैया करायी जा रही है?

जवाब: समिति सदस्यों को बैंकिंग सुविधायें आसानी से मिले इसके लिये 7414 माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराये गये हैं। माइक्रो एटीएम के माध्यम से पैक्स सदस्यों, किसानों एवं ग्रामीण अंचल के ग्राहकों को समस्त बैंकिंग सेवा देने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान प्रणाली से संबंधित सेवा मसलन- बिजली बिल,गैस बिल,मोबाइल बिल को भी जमा करने की सुविधा दी जायेगी। इससे होने वाली आय से पैक्स आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर हो सकता है।

सवाल : आपने जब उ. प्र.कोआपरेटिव बैंक में एमडी का कार्यभार संभाला तो बैंक में क्या कमी दिखी। बैंक की इमेज ठीक करने के लिये क्या योजना है?

जवाब: हमारे यहां प्रोफशनल लोगों की कमी है। आपने पूछा कि राष्टï्रीयकृत बैंक और कोआपरेटिव बैंक में क्या अंतर है…तो सबसे पहले मेरी कोशिश रहेगी कि यहां पर राष्टï्रीयकृत बैंकों में काम कर चुके तजुर्बेकार लोगों की भर्ती हो, क्योंकि हमारे यहां इसकी कमी है। नाबार्ड के सहयोग से दो राष्टï्रीयकृत बैंकों से सेवानिवृत्त अधिकारियों का चयन करने पर बात चल रही है। शीघ्र ही इंटरव्यू कराने की प्रक्रिया शुरु की जायेगी। चयनित अधिकारियों का काम रहेगा कि वे कर्मचारियों का वर्क कल्चर ठीक करें और उनका बिजनेस टार्गेंट तय करे। यही लोग प्रतिदिन से लेकर हर माह कर्मचारियों को कितना बिजनेस देना है,लक्ष्य निर्धारित करेंगेे। जब बैंक लाभ अर्जित करेगा तभी इसकी सुधार पर काम किया जायेगा।

सवाल : बैंक द्वारा निर्धातर टार्गेट वाले कर्मचारियों को क्या मिलेगा?

जवाब:ईनाम। जी हां, जो कर्मचारी 80 प्रतिशत से अधिक का टार्गेट पूरा करेंगे,उसे हमलोग देंगे ईनाम और जो करेगा कामचोरी उसके खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई। अभी भी लोगों की धारणा है कि बैंक आम आदमी का नहीं बल्कि कोआपरेटिव का है,ये धारणा बदलने की जरूरत है।

Post Author: thesundayviews

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