22 जिलों में कोरोना के बढ़ते मामलों ने फिर बढ़ाई सरकार की चिंता, 62 जिलों में 100 से ज्यादा संक्रमित

हल्के में नहीं ले सकते: लव अग्रवाल

बच्चों के टीकाकरण के लिए तैयारी तेज

नई दिल्ली। देश में कोरोना महामारी को लेकर सरकार अब भी चिंतित दिख रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को अहम जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है, इसलिए हमें सतर्क रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ताजा आंकड़े पेश करते हुए कहा कि देश के 22 जिले ऐसे हैं जहां चार हफ्तों में कोरोना मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। मंत्रालय ने कहा कि देश में अभी भी 62 जिले ऐसे हैं जहां रोजाना 100 से ज्यादा मामले सामनेआ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि केरल के सात, मणिपुर के पांच, मेघालय के तीन अरुणाचल प्रदेश के तीन, महाराष्ट्र के दो, असम और त्रिपुरा के एक-एक जिले शामिल है  जहां पिछले चार हफ्तों में मामलों में वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा इस तरह मामलों का बढ़ना चिंता का विषय है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के साप्ताहिक मामलों में लगातार औसत गिरावट  आई है, लेकिन अगर हम मामलों में गिरावट की दर की तुलना पहले से अब करें, तो यह चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में राज्यों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम इसे हल्के में नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि वैश्विक नजरिए से देखें तो महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। दुनिया भर में मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। हमें सख्ती के साथ वायरस के प्रसार को रोकने पर काम करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि भारत बायोटेक की कोवाक्सिन और जायडस कैडिला के टीके सहित हमारे कुछ अन्य टीकों के लिए क्लिनिकल परीक्षण चल रहे हैं। जैसे ही हमें इन परीक्षणों के संतोषजनक एवं मजबूत परिणाम मिलते हैं, हम विशेषज्ञों के विवेक के आधार पर बच्चों के टीकाकरण पर निर्णय लेंगे।

नीति आयोग के सदस्य(स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है। कुछ क्षेत्र चिंता का विषय बने हुए हैं। वैक्सीनेशन की भी पूरी गारंटी नहीं है कि यह पूरी तरह से संक्रमण कम करेगी। ऐसी कोई भी वैक्सीन नहीं  है जिससे कि 100 फीसदी संक्रमण कम हो ही जाएगा। इससे बस बीमारी की गंभीरता और मौत को रोका जा सकता है। डॉ. वीके पॉल ने कहा कि एएफएमसी में 15 लाख डॉक्टरों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं पर अध्ययन किया गया था, जिन्हें कोविशील्ड की वैक्सीन लगाई गई थी। इससे यह पता चला कि दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वेरिएंट से संक्रमण में 93 फीसदी की कमी आई थी और मृत्यु दर में भी   98 फीसदी की कमी देखी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि टीकाकरण प्रमाण पत्र केवल ऐसे टीकों के लिए जारी किए जाएंगे जो भारत में आपातकालीन उपयोग के लिए स्वीकृत हैं और केवल ऐसे स्वयंसेवकों को जारी किए जाएंगे जिन्होंने ऐसे टीकों के परीक्षण में भाग लिया।

देश में मॉडर्ना की वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि हमें एक प्रस्ताव मिला है और उस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोवाक्सिन का अध्ययन चल रहा है और जायडस कैडिला ने अपने टीके से जुड़े अध्ययन का डाटा दिया है। पॉल ने कहा कि हम बच्चों के लिए बायोलॉजिकल ई, नोवावैक्स जैसी वैक्सीन के अध्ययन को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

 

Post Author: thesundayviews

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