क्या प्रमुख सचिव विभाग में हुये कई सौ करोड़ के घोटालेबाजों को जेल की सलाखों में भेज पायेंगे ?

बी.एल.मीणा ने संभाली सहकारिता विभाग की कुर्सी, भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे अफसरों की उड़ी नींद

प्रमुख सचिव-सहकारिता बी.एल.मीणा के सामने चुनौतियों का अंबार

क्या मिल मालिकों और क्रय एजेंसियों पर लगाम कसने के लिये ठोस रणनीति बनायेंगे ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। सहकारिता विभाग के नवनियुक्त प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा के सामने चुनौतियों का अंबार है। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे एमडी सहित जनपदों में तैनात अफसरों का हाजमा खराब हो गया। सभी को मालूम है कि श्री मीणा पर ना तो सत्ता का दबाव काम करता है और ना ही शासन का…। ये वही फैसला लेते हैं जो मुख्यमंत्री की नीतियों के अनुरुप हो। इनकी ईमानदारी का आलम है कि जिस विभाग में इन्हें जिम्मेदारी सौंपी गयी,वहां भ्रष्टाचार में शामिल अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुआ या फिर गंभीर कार्रवाई। समाज कल्याण में तो वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान डायरेक्टर से ऐसा सवाल दागा कि उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा। सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार के लिये विख्यात सहकारिता विभाग की सभी एजेंसियों में काम कम और भुगतान पूरा करने की परंपरा मानों वर्षों से चला आ रहा है। किसानों के नाम पर गेहूं-धान खरीद करने वाले बिचौलियों और अफसरों ने मिलकर सूबे में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला कर गये,भर्ती घोटाला कर बेरोजगारों के मुंह पर तमाचा जड़ गये लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुयी बल्कि कई घोटालेबाज को तो ऐसी कुर्सी सौंप दी गयी मानों माननीय ने कहा हो कि जाओ जाकर यहां से भी बड़ा घोटाला करो,मैं बैठा हूं,कुछ नहीं होगा…। अनगिनत घोटाले हैं,जिनकी पत्रावलियां प्रमुख सचिव के सामने आयेंगी,लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर सत्ता में पैठ रखने वाले और भ्रष्टïाचार के आकंठ में डूबे ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई कर पायेंगे? बड़ा सवाल है जो सहकारिता विभाग के कर्मचारियों सहित प्रदेश भर के छले गये किसानों के मन में गूंज रहा है।

बता दें कि बी.एन.मीणा तेज-तर्रार अफसरों में जाने जाते हैं। ये जिस विभाग में रहे अफसरों को नियम-कानून का सख्ती से पाठ पढ़ाने के लिये ही जाने जाते रहे हैं। यही वजह है कि जिस दिन श्री मीणा ने कार्यभार ग्रहण किया सहकारिता विभाग में तमाम आरोपों से घिरे अफसरों की नींद उड़ गयी है। सहकारिता विभाग की सभी एजेंसियों में तैनात एमडी इतने बेचैन हैं मानों कोई उनकी अकूत संपत्ति पर डाका डालने आ गया हो। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव बी.एल. मीणा के सामने भ्रष्टïाचार की कोठरी परोस दी है,सभी की निगाहें उनके फैसलों पर लगी कि कब उनके राडार पर कौन एमडी या जिलों में तैनात ए.आर. आयेगा ?

सहकारिता विभाग और विवादों का साया सभी सरकारों में गहराता रहा है। सपा सरकार में उनके अफसरों और ठेकेदारों के पौ- बारह थे तो भाजपा सरकार में इनकी पार्टी के अफसरों और ठेकेदारों की…। भ्रष्टïाचार मुक्त सरकार चलाने का दाव करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंसूबों को शासन में ही बैठे तथाकथित अफसर ध्वस्त कर रहे हैं लेकिन इन्हीं में कुछ ऐसे अफसर हैं जो सरकार की साख को संवारने का काम भी कर रहे हैं। इनमें से एक हैं सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा। श्री मीणा की तेज तर्रार कार्यशैली से सभी वाकिफ हैं लेकिन सहकारिता विभाग उस काजल की कोठरी की तरह है जिसमें हाथ डालते ही कालिख लगने का खतरा है। क्योंकि यहां ऐसे अफसर तैनात हैं जो सपा सरकार में भी किसानों के हकको लूटते रहें और भाजपा सरकार में भी सरकार द्वारा किसानों के लिये चलायी गयी योजनाओं में कई सौ करोड़ डकार गये। ऐसे अफसरों और ठेकेदारों पर विभाग के मंत्री का वरदहस्त होने की बात सामने आती रही है क्योंकि उनकी तरफ से भ्रष्टïाचाररोकने की पहल नहीं की गयी। यही वजह है कि प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा का चाबुक इनलोगों पर चलेगी या फिर…।

चुनौतियां
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1- चुनौतियों की बात करें तो सबसे पहले वर्ष २०१३ में समाजवादी पार्टी की सरकार में निकाली गयी भर्ती की जांच ईमानदारी

से करा पायेंगे ?

2- सीएम के निर्देश पर एसआईटी ने डेढ़ माह पूर्व एमडी सहित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर लिया लेकिन

अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुयी ?

3- क्या ३- ३- एफआईआर कराने के बाद जांच में दोषी पाये जाने वाले एमडी की

गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिये ?

4- पूर्व अपर प्रमुख सचिव एम.वी.एस. रेडडी ने सचिव की २३०१ पदों की हुयी भर्ती,५०२ सहयोगी चपरासी,३०३ सहयोगी

चौकीदारों की भर्ती के दस्तावेज एसआईटी को नहीं सौंपा? क्या आप उक्त पदों की जांच करायेंगे ?

5- उत्तर प्रदेश में वर्ष २०१२ से लेकर वर्ष २०२० तक की गयी धान खरीद,गेहूं खरीद में हुये हजारों करोड़ के घोटाले पर से पर्दा

उठ पायेगा ?

6- लखीमपुरखीरी वर्ष २०१९-२० में धान खरीद में हुये १०० करोड़ के घोटाले पर जांच में दोषी पाये एआर रत्नाकर सिंह के

खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी?

7- आखिर किसके इशारे पर लखीमपुरखीरी के आरोपी ए.आर. रत्नाकर सिंह पर कार्रवाई करने के बजाये उसे ईनाम में

मुजफ्फरनगर का ए.आर. बना दिया गया ?

8- वर्ष २०१२ से लेकर २०२० तक किसानों के धान-गेहूं बिचौलियों के माध्यम से खरीदने वाले मिल मालिकों पर होगी कार्रवाई ?

Post Author: thesundayviews

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